
बीकानेर खेजड़ी बचाओ, प्रकृति बचाओ आंदोलन के तहत सोमवार को पर्यावरण प्रेमियों और संतों ने ऐलान किया है कि खेजड़ी के संरक्षण के लिए कठोर कानून जब तक नहीं बनेगा, महापड़ाव जारी रहेगा। मां अमृता देवी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि एक पेड़ की कीमत सौ बेटों से भी बढ़कर होती है। जब हत्या की सजा मौत या उम्रकैद है तो खेजड़ी काटने की सजा मात्र एक हजार रुपए जुर्माना क्यों? खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत सोमवार को पॉलिटेक्निक कॉलेज में जनसभा के साथ ही महापड़ाव का आगाज हो गया। महापड़ाव में शामिल होने के लिए राजस्थान के विभिन्न जिलों सहित पंजाब और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में बसों और निजी वाहनों में सवार होकर हजारों लोग पहुंचे। मुकाम पीठाधीश्वर रामानंद महाराज के सानिध्य में हुई जनसभा में संतों ने कड़े लहजे में कहा कि यह सरकार खुद को सनातनी कहती है, लेकिन सनातन कहीं नजर नहीं आ रहा। सनातनी पेड़ों की रक्षा करते हैं ना कि उन्हें उजाड़ते हैं। एक पेड़ की कीमत एक हजार रुपए लगाई है, जबकि एक पेड़ की कीमत सौ बेटों से बढ़कर होती है। यही सनातनी संस्कृति है। पर्यावरण संरक्षण समिति के संयोजक रामगोपाल बिश्नोई ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यह तो टेलर है। पूरी फिल्म अभी बाकी है। संविधान के अनुरूप नहीं चले तो राजस्थान सरकार का नेपाल जैसा हश्र होगा। जनसभा सुबह 11 बजे शुरू हुई थी। शाम तक चली। आंदोलन के संयोजक परसराम बिश्नोई ने भीड़ ज्यादा होने के कारण कलेक्ट्रेट तक जुलूस के रूप में जाने का कार्यक्रम कैंसिल कर दिया। उनके आग्रह पर जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि और एसपी कावेंद्र सागर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन लेने पहुंचे। 10 साल में काटे दो लाख पेड़, 60 हजार बीघा से अधिक जमीन पर लग रहे सोलर प्लांट बीकानेर | जिले में सोलर प्लांट लगाने के नाम पर एक 10 साल में दो लाख पेड़ काटे जा चुके हैं। इनमें खेजड़ी, बाबुल, जाल, कुमटा, देशी बबूल, हिंगोटा, रोहिड़ा आदि प्रजातियां शामिल हैं। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर अनिल छंगाणी ने यह जानकारी दी। 4786 मेगावाट के प्लांट चल रहे हैं। आने वाले सालों में 9618 मेगावाट के सोलर प्लांटों से विद्युत उत्पादन शुरू हो जाएगा। ये सभी प्लांट 60 हजार बीघा से अधिक जमीन पर लग रहे हैं। इनमें एनटीपीसी, पावर ग्रिड कोर्पोरशन, कोल इंडिया, एनएलसी, भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी जैसी सरकारी कंपनियां हैं। इनमें से 20 हजार 672 बीघा जमीन पर प्राइवेट कंपनियां 5168 मेगावाट के प्लांट लगा रही हैं। 1400 मेगावाट के लिए सनब्रिज, एक हजार मेगावाट के लिए बिल्ड विजन जैसी बड़ी प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने निवेश किया है। पांच सौ मेगावाट तक बिजली उत्पादन करने वाली छोटी कंपनियां भी हैं। पूगल में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम 2 हजार मेगावाट, आरएसडीसीएल प्रथम चरण में एक हजार मेगावाट और दूसरे चरण में भी एक हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगी। इसी प्रकार 450 मेगावाट का प्लांट छत्तरगढ़ में आरएसडीसीएल लगा रही है। यह दोनों सरकारी कंपनियां कुल 4450 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगी। एक्सपर्ट के अनुसार एक मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने के लिए करीब चार बीघा जमीन की जरूरत पड़ती है, जबकि कंपनियों ने भविष्य में ज्यादा बिजली बनाने के उद्देश्य से अधिक जमीनें खरीदी हैं। विधायक रविंद्र सिंह ने मां अमृता देवी बिल की फाइल लहराते हुए कहा-यह कानून आया तो खेजड़ी नहीं काट सकेंगे जनसभा में शिव से विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने लाल बस्ते में बंद मां अमृता देवी बिल की फाइल लहराते हुए कहा, इसे बनाने में छह महीने लगे थे। बिल राज्य सरकार को सौंप दिया गया है। यदि यह बिल लाया जाता है तो कोई सपने में भी खेजड़ी और हरे पेड़ों को नहीं काट सकेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो खेजड़ी बचाने के लिए विधानसभा का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। बिश्नोई समाज के नेतृत्व में सभी समाज को आना होगा। रविंद्र सिंह को सुनने के लिए जनसभा में क्रेज देखा गया। बिहारी बोले- खेजड़ी बचाने के लिए इसी सत्र में कठोर कानून आएगा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई ने कहा कि खेजड़ी के संरक्षण के लिए इसी सत्र में कठोर कानून लाया जा रहा है। खेजड़ी बचाने के लिए 71 साल में कोई नया कानून नहीं आया। यह कानून संतों और पर्यावरण प्रेमियों की ताकत से बनेगा। भजनलाल सरकार जल्दी ही नए कानून की घोषणा करेगी, जिसमें जुर्माने के साथ सजा का दायरा भी बढ़ेगा। रामानंद महाराज की घोषणा, 363 लोग अनशन पर बैठेंगे पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में मुकाम पीठाधीश्वर रामानंद महाराज ने मंच से अनिश्चितकालीन महापड़ाव की घोषणा करते हुए कहा कि सभी संतों सहित 363 लोग अनशन पर बैठेंगे। खेजड़ी के लिए कानून नहीं बनने तक अनशन जारी रहेगा। महापड़ाव बिश्नोई धर्मशाला के सामने चलेगा। उनके बोलने के साथ ही अनशन पर बैठने के लिए हजारों हाथ खड़े हो गए। जनसमूह ने शाम का भोजन करने से मना कर दिया। तब रामानंद महाराज और संयोजक परसराम बिश्नोई मंच से समझाते हुए शांति की अपील की।
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