श्रीकृष्ण की जय बोलकर चीनियों पर टूट पड़े थे सैनिक:तीन महीने बाद भी फायरिंग की पोजीशन में मोर्चे पर मिले थे बहादुर जवानों के शव




भारतीय सैन्य इतिहास में रेजांगला की लड़ाई सबसे चर्चित लड़ाइयों में से एक है। इस लड़ाई में भारतीय सेना के 124 फौजियों ने 1300 से अधिक चीनी सैनिकों का आखिरी सांस तक मुकाबला किया। इस लड़ाई में चार्ली कंपनी को जोधपुर जिले के बानासर के रहने वाले मेजर शैतान सिंह लीड कर रहे थे। इसमें शामिल ज्यादातर सैनिक राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश (UP) के थे। इस लड़ाई में 123 सैनिक शहीद हुए थे। कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी को लद्दाख क्षेत्र की चुशुल एयर स्ट्रिप की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। करीब 2 किलोमीटर लंबी पहाड़ी पर इस कंपनी ने मोर्चा संभाला था। यह इलाका 5000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर है। यहां तापमान माइनस में रहता है। इतनी हाइट और ठंड पर कई अफसर और जवान बीमार हो गए थे। इसके बाद उनकी जगह मेजर शैतान सिंह को भेजा गया था। भास्कर की ‘आर्मी की कहानी’ सीरीज में आज पढ़िए द बैटल ऑफ रेजांगला… एक इशारे पर जान कुर्बान करने को तैयार थे​​ जवान​​​​​
कुमाऊं रेजिमेंट की जिस चार्ली कंपनी को मेजर शैतान सिंह कमांड कर रहे थे, इसमें ज्यादातर जवान अहीरवाल (यादव समाज) थे। सभी जवान मेजर शैतान सिंह से घुले-मिले हुए थे। मेजर ने इस मोर्चे पर जवानों के साथ पारिवारिक रिश्ता बना लिया था। वे अपने कमांडिंग ऑफिसर के एक इशारे पर देश के लिए जान कुर्बान करने को तैयार थे। हम भगवान कृष्ण के वंशज हैं, पीछे नहीं हटेंगे
रेजांगला पर चीनी आक्रमण की तैयारियों के बारे में कमांड हेडक्वार्टर को पहले से पता चल गया था। एडवांस पेट्रोल पार्टियों ने सीमा पर चीनी उकसावे और भारी जमावड़े को पहले ही भांप लिया था। कंपनी हेडक्वार्टर से चार्ली कंपनी को यह विकल्प दिया गया था कि वे चौकी छोड़ दें, क्योंकि तर्क दिया गया कि उस वक्त तक मुकाबले के लिए पर्याप्त संसाधन और फोर्स नहीं थी। मेजर शैतान सिंह ने जवानों में पहले से ही जोश भर रखा था। उन्होंने सभी तैयारियां कर रखी थीं। मोर्टार लगा रखे थे। जवानों ने मेजर से कहा- हम भगवान कृष्ण के वंशज हैं। कृष्ण भगवान हमारे साथ हैं। हम मोर्चा नहीं छोड़ेंगे और चीनियों को सबक सिखाएंगे। मेजर शैतान सिंह ने जवानों से कहा- मैं भी भगवान कृष्ण का वंशज हूं। इसके बाद सब मोर्चाबंदी, मोर्टार और गोला बारूद को संभालकर तैयारियों में जुट गए। आज भी सुनाए जाते हैं वीरता के किस्से
रेजांगला की लड़ाई में चार्ली कंपनी को कमांड करने वाले मेजर शैतान सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1924 को जोधपुर के बानासर में हुआ था। उनके पिता, लेफ्टिनेंट कर्नल हेम सिंह भी एक सम्मानित आर्मी अफसर थे। मेजर शैतान सिंह को 1 अगस्त 1949 को कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन मिला। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान, कुमाऊं रेजिमेंट चुशूल सेक्टर में तैनात थी। रेजांगला में मेजर शैतान सिंह की चार्ली कंपनी 5000 मीटर की ऊंचाई पर तैनात थी और उनके पास पांच प्लाटून थीं। 18 नवंबर को रेजांगला पर हमला किया
रक्षा मंत्रालय की तरफ से परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह के साइटेशन (किसी लेख, शोध या काम में इस्तेमाल की गई जानकारी) में लिखा है- 18 नवंबर को अलसुबह चीनी फौज ने रेजांगला पर हमला किया। हाड़ कंपा देने वाली ठंड और बर्फीली हवा चल रही थी। वहां पर 7 और 8 नंबर प्लाटून मोर्चे पर थी। सुबह 5:00 बजे अंधेरा छंटने लगा तो चीनी फौजी भारतीय सीमा में आगे बढ़ते दिखे। चार्ली कंपनी के जवानों ने राइफलों, लाइट मशीन गनों, ग्रेनेड और मोर्टार से हमला बोल दिया। इस कार्रवाई में पूरा नाला चीनी सैनिकों की लाशों से भर गया था। सुबह 5:40 फिर से चीनी सैनिकों ने हमला किया
थोड़ी देर बाद 350 के आसपास चीनी सैनिकों ने नाले की दूसरी तरफ से हमला बोला। यह लगभग सुबह 5:40 के आसपास का वक्त था। भारतीय जवान यहां चीनी सैनिकों के 90 मीटर की रेंज में आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही रेंज में चीनी सैनिक आए, चार्ली कंपनी के सैनिकों ने मोर्टार और मशीन गन से फायरिंग शुरू कर दी। इस बार फिर नाले पर चीनी सैनिकों की लाशें बिछा दीं। 2 बार हमला विफल होने के बाद चीनी पक्ष ने पैंतरा बदला। 400 चीनी सैनिकों ने कंपनी की पोजिशन के पीछे से अटैक किया। यानी 2 तरफ से हमला किया। इस बार उन्होंने प्लाटून नंबर 8 पर मीडियम मशीन गनों और भारी तोपखाने से हमला किया। प्लाटून नंबर 7 की पोजिशन पर भी पीछे से हमला किया। चीनी सैनिक काफी आगे तक पहुंच गए। भीषण लड़ाई चलती रही। बंकर से बाहर आकर कुछ चीनियों को हाथों से मारा
एक मौका ऐसा भी आया जब हमारे जवानों ने बंकर से बाहर आकर कुछ चीनियों को हाथों से मारा, गुत्थमगुत्था होता रहा, लेकिन सामने से गोलाबारी में शहीद हो गए। कंपनी कमांडर मेजर शैतान सिंह ने इस गोलाबारी के बीच भारी साहस का परिचय दिया। गोलाबारी के बीच वे एक प्लाटून से दूसरी प्लाटून जाकर जवानों का हौसला बढ़ाते रहे, रणनीति समझाते रहे। चीनी गोलाबारी में मेजर शैतान सिंह की आंतें बाहर आ गई थीं
गोलाबारी के बीच अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना, मेजर शैतान सिंह एक से दूसरी प्लाटून में जाकर जवानों को दिशा-निर्देश देते रहे। वे अपने सिपाहियों के साथ लगातार लड़े। जब मेजर शैतान सिंह एक प्लाटून से दूसरी की तरफ जा रहे थे, तो पहले उनकी बांह पर गोली लग गई। इसके बाद भी वे नहीं रुके। कुछ देर बाद मेजर के पेट में एक बड़ी गोली लगी और इस बार सेल इतना घातक था कि उनकी आंतें बाहर आ गईं। मेजर को लग गया था कि अब वे नहीं बचेंगे। उन्होंने अपने साथ के दो सैनिकों से कहा कि आप जाइए। जब उन्होंने कहा कि हम आपको इस हालत में छोड़कर नहीं जा सकते, तो मेजर ने कहा कि यह मेरा आदेश है। उस वक्त मेजर शैतान सिंह के साथ रहे सेना के रेडियो ऑपरेटर रामचंद्र ने विस्तार से इस घटना के बारे में कई बार जिक्र किया है। मेजर शैतान सिंह ने रामचंद्र से कहा- उनका बेल्ट खोल दें। रामचंद्र ने जब बेल्ट खोलने के लिए हाथ अंदर डाला तो देखा कि मेजर का पेट पूरा खुल गया था और उनकी आंतें बाहर आ गई थीं। रामचंद्र ने इस पर बेल्ट खोलने में असमर्थता जताई। मेजर ने कहा कि उन्हें चट्टान के सहारे लिटा दें और आप कंपनी हेडक्वार्टर जाकर पूरी सूचना दें कि हमारे जवान बहुत बहादुरी से लड़े हैं। कुछ देर बाद मेजर शैतान सिंह बेहोश हो गए। उन्होंने अंतिम सांस वहीं ली। अपने कमांडिंग ऑफिसर के आदेश के मुताबिक जवान वहां से चले गए। रेजांगला की लड़ाई में कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी के 123 सिपाही शहीद हुए। चीन की तरफ हमसे ज्यादा लोग मारे गए थे। जब युद्ध खत्म हुआ तो मेजर शैतान सिंह का पार्थिव शरीर वहीं पर मिला था। बॉडीगार्ड को चीनी सैनिकों ने युद्धबंदी बनाया
चार्ली कंपनी में रेजांगला की लड़ाई के वक्त हरियाणा के रहने वाले निहाल सिंह मेजर शैतान सिंह के बॉडीगार्ड थे। निहाल सिंह को चीनी सैनिकों ने पकड़ लिया था। निहाल सिंह से कमांडिंग अफसरों, सेना के पदनाम, अहम यूनिटों की तैनाती और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया। निहाल सिंह को युद्धबंदी बनाकर चीनी कैंप में रखा गया था। एक दिन निहाल सिंह को भागने का मौका मिल गया। निहाल सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए मीडिया को बताया- चीनी सैनिकों का ध्यान बातें करने पर था, मैं मौका मिलते ही भाग गया। जब तक चीनी सैनिकों को पता लगा तब तक लगभग 500 मीटर चल चुका था और काफी आगे निकल गया था। उस वक्त अंधेरा था। निहाल सिंह अंधेरे में छिपकर भागने का रास्ता तलाश रहे थे, उन्हें रास्ते की जानकारी नहीं थी। वे उधेड़बुन में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे, तभी उन्हें एक कमजोर सा कुत्ता दिखा। उसे आवाज देते ही वह तत्काल पहचान गया और पास आ गया। यह वही कुत्ता था जो सेना चौकी पर आया करता था। फौजी जवान उसे खाना दिया करते थे। निहाल सिंह कुत्ते के साथ-साथ चलने लगे। यह भारतीय सीमा की तरफ जा रहा था। उबड़-खाबड़ पगडंडियों पर चलने में दिक्कत हो रही थी। जरा भी गलती होती तो चीनी सैनिक पकड़ सकते थे। काफी देर चलने के बाद वे भारतीय सीमा में आर्मी कैंप तक पहुंचे। आर्मी कैंप में हर जवान को अलग से पासकोड दिया जाता था। उनके पास पासकोड नहीं था। इसके बिना रात में उन्हें गोली मारी जा सकती थी। इसलिए सुबह तक इंतजार किया। सुबह आर्मी कैंप पहुंचकर उन्होंने पूरा वृतांत बताया। उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल में रखा गया। कई महीनों तक वो भर्ती रहे थे। तीन महीने बाद लड़ाई वाली जगह पहुंचे थे अफसर
रेजांगला की लड़ाई के बाद एक बार यह मान लिया गया था कि चार्ली बटालियन को या तो चीनियों ने पकड़ लिया है या वे भाग गए हैं। जवान रामचंद्र की बातों पर अफसरों ने शुरू में यकीन ही नहीं किया था। बाद में जब युद्ध खत्म हुआ और आर्मी हेडक्वार्टर तक बात पहुंची तो वरिष्ठ अफसरों को रेजांगला भेजा गया। रेजांगला की लड़ाई के बारे में रिटायर्ड नेवी अफसर और लेखक कुलप्रीत यादव ने लिखा है। यादव ने लिखा है कि जब ब्रिगेडियर टीएन रैना और भारतीय खोज दल 10 फरवरी, 1963 को रेजांगला पहुंचा। उन्होंने युद्ध क्षेत्र को जमा हुआ पाया। सैनिक अभी भी फायरिंग पोजिशन में थे। उनके हाथों में राइफलें थीं। उनके शरीर पत्थरों और अस्थायी बंकरों के पीछे दुबके हुए थे। गुरप्रीत यादव लिखते हैं कि युद्ध के 3 महीने बाद इन 120 बहादुर सैनिकों और उनके कंपनी कमांडर के शव मिले। सब जवानों के सीने पर गोली लगी हुई थी। किसी के भी पीठ पर गोली नहीं थी। जवानों की इस बहादुरी को देख ब्रिगेडियर रैना भावुक हो गए थे। कुलप्रीत यादव की किताब ‘द बैटल ऑफ रेजांगला’ में मेजर जनरल विक्रम देव डोगरा लिखते हैं- ब्रिगेडियर टीएन रैना ने रेजांगला पर कहा था कि सैन्य इतिहास में ऐसे बहुत कम बहादुरी के उदाहरण देखने को मिलते हैं, जब सिपाही आखिरी बुलेट और आखिरी व्यक्ति और आखिरी सांस तक लड़ता हो। रेजांगला की लड़ाई भारतीय सैन्य इतिहास में एक चमकता उदाहरण है। जबकि इन सैनिकों के सामने पहाड़ सी चुनौतियां थीं। उनके पास संसाधन भी पूरे नहीं थे। थ्री नॉट थ्री राइफलें थीं, जो चीनी हथियारों के सामने कहीं नहीं टिकती थीं। जवानों के पास माइनस तापमान में पहनने योग्य गर्म कपड़े तक ढंग के नहीं होते थे। ——- आर्मी डे सीरीज की ये खबरें भी पढ़िए…
राजस्थान के लेफ्टिनेंट-जनरल, जो पंडित नेहरू से भिड़ गए थे:पूछा था- आपके पास प्रधानमंत्री पद का कितना अनुभव?; गांधी पर उठाए थे सवाल देश के बंटवारे के समय राजस्थान में जन्मे लेफ्टिनेंट जनरल नाथू सिंह सेना में थे। वे अपने बेबाक अंदाज और निडरता के कारण काफी चर्चित रहे थे। सेना के अफसरों के अनुभव पर सवाल उठाने पर उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू से ही पूछ लिया था- आपके पास प्रधानमंत्री पद पर रहने का कितना अनुभव है? पढ़ें पूरी खबर

राजस्थानी फौजी ने पाकिस्तान का भूगोल बदला:80 किलोमीटर अंदर जाकर कब्जा किया; बैंक का पैसा और सोना जब्त किया जयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और लेफ्टिनेंट कर्नल भवानी सिंह ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को दो मोर्चों पर हराकर उसका भूगोल बदल दिया था। (पढ़िए पूरी खबर)



Source link

मकर संक्रांति- गोरखपुर में CM योगी ने चढ़ाई खिचड़ी:काशी, प्रयागराज, हरिद्वार में डुबकी लगाने पहुंचे लाखों लोग; पंजाब में आज माघी पर्व




देशभर में आज मकर संक्रांति मनाई जा रही है। प्रमुख नदियों गंगा-यमुना और नर्मदा के तटों लाखों लोग डुबकी लगाने पहुंचे हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह खिचड़ी चढ़ाकर मकर संक्रांति की शुरुआत की। पंजाब में आज का दिन माघी पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। इस मौके पर अमृतसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सचखंड श्री दरबार साहिब में पवित्र स्नान किया। मकर संक्रांति से जुड़े अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…



Source link

पीएम मोदी ने कहा-विश्वनाथ से रामेश्वरम तक एक उत्सव:एक भारत, श्रेष्ठ भारत और विविधता में एकता का पर्व है काशी-तमिल संगमम




कुछ दिन पहले ही मुझे सोमनाथ की पवित्र भूमि पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लेने का सुअवसर मिला। इस क्षण का साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से लोग सोमनाथ पहुंचे। इस कार्यक्रम के दौरान मेरी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से भी हुई, जो इससे पहले सौराष्ट्र-तमिल संगमम के दौरान सोमनाथ आए थे और इससे पहले काशी-तमिल संगमम के समय काशी भी गए थे। ऐसे मंचों को लेकर उनकी सकारात्मक सोच ने मुझे बहुत प्रभावित किया। इसलिए मैंने तय किया कि क्यों ना इस विषय पर अपने कुछ विचार साझा करूं। ‘मन की बात’ के एक एपिसोड के दौरान मैंने कहा था कि अपने जीवन में तमिल भाषा न सीख पाने का मुझे बहुत दु:ख है। यह हमारा सौभाग्य है कि बीते कुछ वर्षों से हमारी सरकार तमिल संस्कृति को देश में और लोकप्रिय बनाने में निरंतर जुटी है। यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और सशक्त बनाने वाला है। हमारी संस्कृति में संगम का बहुत महत्त्व है। इस पहलू से भी काशी-तमिल संगमम एक अनूठा प्रयास है। इसमें जहां भारत की विविध परंपराओं के बीच अद्भुत सामंजस्य दिखता है, वहीं यह भी पता चलता है कि कैसे हम एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान करते हैं। काशी तमिल संगमम के आयोजन के लिए काशी सबसे उपयुक्त स्थान कहा जा सकता है। काशी का तमिल समाज और संस्कृति से अत्यंत गहरा नाता रहा है। काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी है, तो तमिलनाडु में रामेश्वरम् तीर्थ है। तमिलनाडु की तेनकासी को दक्षिण की काशी या दक्षिण काशी कहा जाता है। तमिलनाडु के महान सपूत महाकवि सुब्रमण्यम भारती जी को भी काशी में बौद्धिक विकास और आध्यात्मिक जागरण का अद्भुत अवसर दिखा। यहीं उनका राष्ट्रवाद और प्रबल हुआ, साथ ही उनकी कविताओं को नई धार मिली। यहीं पर स्वतंत्र और अखंड भारत की उनकी संकल्पना को स्पष्ट दिशा मिली। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो काशी और तमिलनाडु के बीच गहरे आत्मीय संबंध को दर्शाते हैं। वर्ष 2022 में वाराणसी की धरती पर काशी-तमिल संगमम की शुरुआत हुई थी। मुझे इसके उद्घाटन समारोह में शामिल होने का सौभाग्य मिला था। तब तमिलनाडु से आए लेखकों, विद्यार्थियों, कलाकारों, विद्वानों, किसानों और अतिथियों ने काशी के साथ-साथ प्रयागराज और अयोध्या के दर्शन भी किए थे। इसके बाद के आयोजनों में इस पहल को और विस्तार दिया गया। इसका उद्देश्य यह था कि संगमम में समय-समय पर नए विषय जोड़े जाएं, नए और रचनात्मक तरीके अपनाए जाएं और इसमें लोगों की भागीदारी ज्यादा से ज्यादा हो। प्रयास यह था कि ये आयोजन अपनी मूल भावना से जुड़े रहकर भी निरंतर आगे बढ़ता रहे। वर्ष 2023 के दूसरे आयोजन में टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया, ताकि यह सुनिश्चित हो कि भाषा इसमें बाधा ना बने। इसके तीसरे संस्करण में इंडियन नॉलेज सिस्टम पर विशेष फोकस रखा गया। इसके साथ ही शैक्षिक संवादों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रदर्शनियों और संवाद-सत्रों में लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। काशी-तमिल संगमम का चौथा संस्करण 2 दिसंबर, 2025 को आरंभ हुआ। इस बार की थीम बहुत रोचक थी- तमिल करकलम् यानी तमिल सीखें….। इससे काशी और दूसरी जगहों के लोगों को तमिल सीखने का अनूठा अवसर मिला। तमिलनाडु से आए शिक्षकों ने काशी के विद्यार्थियों के लिए इसे अविस्मरणीय बना दिया! इस बार कई और विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। प्राचीन तमिल साहित्य ग्रंथ तोलकाप्पियम का चार भारतीय और छह विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया गया। इस अभियान में सांस्कृतिक एकता के संदेश का प्रसार करने वाले पांड्य वंश के महान राजा आदि वीर पराक्रम पांडियन जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे आयोजन के दौरान नमो घाट पर प्रदर्शनियां लगाई गईं, बीएचयू में शैक्षणिक सत्र का आयोजन हुआ, साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। काशी-तमिल संगमम में इस बार जिस चीज ने मुझे सबसे अधिक प्रसन्नता दी, वो हमारे युवा साथियों का उत्साह है। इससे अपनी जड़ों से और अधिक जुड़े रहने के उनके पैशन का पता चलता है। उनके लिए ये एक ऐसा अद्भुत मंच है, जहां वे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं। संगमम के अलावा काशी की यात्रा भी यादगार बने, इसके लिए विशेष प्रयास किए गए। भारतीय रेल ने लोगों को तमिलनाडु से उत्तर प्रदेश ले जाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाईं। इस दौरान कई रेलवे स्टेशनों पर, विशेषकर तमिलनाडु में उनका उत्साह बढ़ाया गया। सुंदर गीतों और आपसी चर्चाओं से ये सफर और आनंददायक बन गया। यहां मैं काशी और उत्तर प्रदेश के अपने भाइयों और बहनों की सराहना करना चाहूंगा, जिन्होंने काशी-तमिल संगमम को विशेष बनाने में अद्भुत योगदान दिया है। उन्होंने अपने अतिथियों के स्वागत और सत्कार में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। कई लोगों ने तमिलनाडु से आए अतिथियों के लिए अपने घरों के दरवाजे तक खोल दिए। स्थानीय प्रशासन भी चौबीसों घंटे जुटा रहा, ताकि मेहमानों को दिक्कत ना हो। वाराणसी का सांसद होने के नाते मेरे लिए ये गर्व और संतोष दोनों का विषय है। इस बार काशी-तमिल संगमम का समापन समारोह रामेश्वरम में हुआ, जिसमें तमिलनाडु के सपूत उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन भी मौजूद रहे। उन्होंने कार्यक्रम को अपने विचारों से समृद्ध बनाया। भारत की आध्यात्मिक समृद्धि पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे इस तरह के मंच राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करते हैं। काशी-तमिल संगमम का गहरा प्रभाव देखने को मिला है। इसके जरिए जहां सांस्कृतिक चेतना को मजबूती मिली है, वहीं शैक्षिक विमर्श और जनसंवाद को भी काफी बढ़ावा मिला है। इससे हमारी संस्कृतियों के बीच संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं। वर्ष का यह समय हर देशवासी के लिए बहुत ही पावन माना जाता है। लोग बड़े उत्साह के साथ संक्रांति, उत्तरायण, पोंगल, माघ बिहू जैसे अनेक त्योहार मना रहे हैं। ये सभी उत्सव मुख्य रूप से सूर्यदेव, प्रकृति और कृषि को समर्पित हैं। ये त्योहार लोगों को आपस में जोड़ते हैं, जिससे समाज में सद्भाव और एकजुटता की भावना और प्रगाढ़ होती है। इस अवसर पर मैं आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं। इससे हमारी संस्कृतियों के बीच संबंध प्रगाढ़ हुए हैं… काशी-तमिल संगमम का गहरा प्रभाव देखने को मिला है। इसके जरिए जहां सांस्कृतिक चेतना को मजबूती मिली, वहीं शैक्षिक विमर्श और जनसंवाद को भी काफी बढ़ावा मिला। इससे हमारी संस्कृतियों के बीच संबंध प्रगाढ़ हुए हैं।



Source link

punjab cm bhagwant mann amritsar golden tample akal takht sahib visit live video update Giani Kuldeep Singh Gargaj


अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और सीएम भगवंत मान। – फाइल फोटो

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज (15 जनवरी) को अमृतसर में सिखों के सर्वोच्च तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे। अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने एक आपत्तिजनक वीडियो और गोलक समेत दूसरे सिख मुद्दों पर की बयानबाजी को लेकर तलब किया है

.

अकाल तख्त जत्थेदार ने CM भगवंत मान को पहले सुबह 10 बजे बुलाया था लेकिन कल (13 जनवरी) को सीएम के प्रोग्राम का हवाला देकर दोपहर बाद साढ़े 4 बजे आने को कहा। हालांकि इसके जवाब में CM मान ने कहा कि उनका कोई कार्यक्रम नहीं है। वह सुबह 10 बजे ही अकाल तख्त में पेश होने पहुंचेंगे। अगर तब तक अकाल तख्त जत्थेदार नहीं पहुंचे तो CM को इंतजार करना होगा।

अकाल तख्त में तलब होने वाले सीएम भगवंत मान चौथे मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले दिवंगत भीम सेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल को भी अकाल तख्त में तलब किया जा चुका है।

CM को तलब करते हुए अकाल तख्त जत्थेदार ने क्या कहा था…

  • उनके भीतर सत्ता का अहंकार : अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा था कि मुख्यमंत्री संवैधानिक उच्च पद पर आसीन हैं और उनके द्वारा किए गए सिख विरोधी बयान उनके भीतर मौजूद सत्ता के अहंकार को दर्शाते हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री पतित हैं और सिख परंपरा के अनुसार उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब की फसील के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें 15 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया गया है।
  • केसों के ट्रांसफर पर विरोध दर्ज नहीं कराया: जत्थेदार ने कहा कि फुलका साहिब से जुड़े बेअदबी के केसों के मामलों को पंजाब से बाहर स्थानांतरित किया जा रहा है, लेकिन पंजाब सरकार इस पर मजबूती से विरोध दर्ज नहीं करा रही। जब हाईकोर्ट द्वारा पंजाब के माहौल को खराब बताया जाता है, तो सरकार का कर्तव्य है कि वह इसका सशक्त रूप से विरोध करे, न कि चुप्पी साधे। ऐसा रवैया पंजाब की छवि को धूमिल करने वाला है।
  • वीडियो से सिख भावनाओं को ठेस पहुंची: जत्थेदार ने कहा- मुख्यमंत्री के सिख भावनाओं को आहत करने वाले आपत्तिजनक वीडियो से उनकी सिख-विरोधी मानसिकता स्पष्ट होती है। श्री अकाल तख्त साहिब इस वीडियो की फोरेंसिक जांच कराएगा और यदि रिपोर्ट में यह वीडियो सही साबित होती है तो मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ पंथक परंपराओं के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
  • बरगाड़ी बेअदबी-मौड़ बम धमाके में न्याय क्यों नहीं: जत्थेदार ने कहा कि 2015 में बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और 2017 में हुए मौड़ बम धमाके में सरकार ने अब तक सिखों और पीड़ितों को न्याय क्यों नहीं दिलाया। बरगाड़ी बेअदबी मामले में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी प्रदीप कलेर ने अदालत में अपने बयानों में स्पष्ट कहा है कि यह बेअदबी गुरमीत राम रहीम और उसकी अनुयायी हनीप्रीत के कहने पर की गई थी। इसके साथ ही मौड़ बम धमाके की कड़ी भी गुरमीत राम रहीम के डेरे से जुड़ती है।

तलब करने के बाद CM भगवंत मान की अहम बातें…

  • नंगे पैर पेश होने जाऊंगा: जत्थेदार के तलब करने के तुरंत बाद सीएम भगवंत मान ने कहा कि वह एक विनम्र सिख की तरह अकाल तख्त पर पेश होने जाएंगे। इस दौरान सीएम ने उसी दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यक्रम में शामिल न हो पाने की जानकारी भी दी थी। सीएम मान ने कहा था, “श्री अकाल तख्त साहिब से आया हुक्म सिर-मत्थे। दास मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर चलकर हाजिर हो जाऊंगा।”
  • लाइव टेलीकास्ट किया जाए: इसके बाद सीएम भगवंत मान ने उनकी पेशी की लाइव टेलीकास्ट करने की विनती की थी। मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था- “पूरी दुनिया से मुझे संदेश आ रहे हैं कि 15 जनवरी को जब संगत की तरफ से गोलक का हिसाब-किताब लेकर जाओगे, तो इसका लाइव टेलीकास्ट होना चाहिए। मैं भी दुनिया भर की संगत की भावना को समझते हुए जत्थेदार से विनती करता हूं कि मेरे स्पष्टीकरण का सीधा प्रसारण किया जाए, ताकि संगत पल-पल और पैसे के हिसाब-किताब से जुड़ी रहे। मिलते हैं जी 15 जनवरी को, सबूतों समेत।” वहीं, सीएम मान की इस मांग पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने नाराजगी जताई है।
  • मेरा कोई प्रोग्राम नहीं, न टाइम बदलने को कहा: जब अकाल तख्त जत्थेदार ने पेशी का टाइम बदला तो सीएम भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर लिखा- मैंने पहले ही कहा था कि मैं 15 जनवरी को नंगे पैर समय पर हाजिर हो जाउंगा। मैंने इसको लेकर माननीय राष्ट्रपति के कार्यालय को भी सूचित कर दिया था कि मेरी अकाल तख्त पर पेशी है। समय बदलने के बारे में मेरी या ऑफिस की तरफ से कोई ऑफिशियल लेटर या बयान जारी नहीं किया गया है। मैं 15 जनवरी को सुबह 10 बजे हाजिर होने के लिए तैयार हूं।

*************************** ये खबर भी पढ़ें…

CM मान बोले- पेशी का लाइव टेलीकास्ट कराएं जत्थेदार:अकाल तख्त पर गोलक का हिसाब-किताब लाऊंगा; SGPC बोली- शर्तें न लगाएं

पंजाब के CM भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज से अपील की कि 15 जनवरी को जब वह अकाल तख्त पर पेश हों तो सभी चैनलों पर उसका लाइव टेलीकास्ट किया जाए (पढ़ें पूरी खबर)



Source link

Maharashtra Nagar Nigam Election Voting Today


  • Hindi News
  • National
  • Maharashtra Nagar Nigam Election Voting Today | BMC Polls Raj Uddhav Thackeray United

मुंबई16 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में आज वोटिंग होगी। मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू होगा और शाम 5:30 बजे तक चलेगा। एक दिन बाद रिजल्ट आएगा। सबसे अहम बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) है जहां 227 सीटों पर चुनाव हो रहा है। बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा जरूरी है।

बीएमसी की 227 सीटों में से 32 सीटों पर BJP-शिवसेना गठबंधन और शिवसेना (UBT)-महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच सीधा मुकाबला होगा। यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि कांग्रेस-बहुजन वंचित अघाड़ी (VBA) गठबंधन ने इन सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। वहीं राज-उद्धव ठाकरे एक साथ आ गए।

BMC में सीटों का बंटवारा, बीजेपी-शिंदे साथ; कांग्रेस अलग लड़ रही

बीएमसी चुनाव में कुल 227 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। भाजपा- शिवसेना (शिंदे गुट) में गठबंधन हैं। बीजेपी 137 सीटों पर लड़ रही है वहीं शिंदे की शिवसेना ने 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।

उधर शिवसेना यूबीटी ने मनसे के साथ अलांयस किया है। यूबीटी जहां 163 सीटों पर लड़ेगी वहीं MNS को 52 सीट मिली हैं। कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) से गठबंधन किया है। कांग्रेस 143 सीटों पर लड़ रही है वहीं वीबीए को 46 सीट दी गईं हैं। एनसीपी ने किसी के साथ हाथ नहीं मिलाया। अजित गुट वाली ये पार्टी 94 सीटों पर लड़ेगी।

BMC चुनाव क्यों है साख का सवाल

  • BMC चुनाव सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता हासिल करने की लड़ाई है। इसलिए यह महायुति और महाविकास अघाड़ी के लिए साख का सवाल है।
  • 74,000 करोड़ रुपए के बजट वाली एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी BMC पर बिना बंटे शिवसेना ने (1997-2017) तक राज किया था। तब BJP उसकी सहयोगी थी।
  • मुंबई नगर निगम का बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के बजट से भी बड़ा है।
  • यही कारण है कि भाजपा, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, एकनाथ शिंदे की शिवसेना, कांग्रेस, शरद पवार और अजीत पवार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।

चुनावी वादे: बस किराए में 50% छूट तो 1500 महीना का वादा

भाजपा गठबंधन ने बीएमसी चुनाव में महिलाओं को BEST बसों में यात्रा करने पर किराए में 50% छूट देने का वादा किया है। वहीं उद्धव–राज ठाकरे अलांयस ने महिला घरेलू सहायकों को ₹1500 महीना और 700 वर्गफुट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स फ्री करने की बात कही है।

कांग्रेस ने मुंबई की प्रदूषण समस्या और BEST बस सेवा में सुधार का वादा किया है। साथ ही शहर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की बात कही है।

चार साल देरी हो रहे चुनाव, 2022 से टल रहा

नगर निगम चुनाव हर पांच साल में होते हैं। बीएमसी का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था। ऐसे में अगला चुनाव 2022 में होना था। उस दौरान निर्वाचन प्रक्रिया और वार्ड सीमाओं में बदलाव चल रहे थे।

नए वार्ड नक्शे और सीटों का पुनर्विन्यास किया जा रहा था। बीएमसी में वार्डों की संख्या बढ़ाकर 227 से 236 करने का प्रस्ताव था। इस बदलाव के चलते पुरानी सीटों पर चुनाव करना संभव नहीं था, इसलिए चुनाव टाल दिए गए। हालांकि ये प्रस्ताव पास नहीं हुआ।



Source link

Rajasthan Cold: IMD Weather Situation Update; UP Uttarakhand


  • Hindi News
  • National
  • Rajasthan Cold: IMD Weather Situation Update; UP Uttarakhand | Bihar MP Haryana Cold Wave Alert Photos

नई दिल्ली/भोपाल/लखनऊ10 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

पहाड़ों पर जारी बर्फबारी के कारण मैदानों में सर्दी हो रही है। राजस्थान में कोहरे के साथ सर्दी जारी है। बीकानेर जिले के लूणकरनसर में बुधवार को न्यूनतम पारा 1.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

सीकर के फतेहपुर में न्यूनतम 2.2°C, नागौर में 2.6°C, अलवर में 3.0°C, करौली में 3.2°C, गंगानगर में 3.5°C, झुंझुनूं में 3.9°C, पिलानी में 4.1°C और जैसलमेर में 4.7°C दर्ज किया गया।

कश्मीर घाटी में भी भीषण ठंड का असर बुधवार को और तेज हो गया। पूरे कश्मीर में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे चला गया है। श्रीनगर में न्यूनतन तापमान -5.2°C दर्ज किया गया, डल झील जम गई।

इधर, उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड जारी है। बुधवार सुबह मेरठ, संभल, बुलंदशहर समेत 25 जिलों में घना कोहरा छाया रहा। वहीं, हरियाणा और पंजाब के कई इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 10 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया।

उत्तराखंड के जोशीमठ में शनिवार को कड़ाके की सर्दी रही, इस दौरान पानी जम गया।

उत्तराखंड के जोशीमठ में शनिवार को कड़ाके की सर्दी रही, इस दौरान पानी जम गया।

अगले 2 दिन मौसम का हाल…

16 जनवरी: हिमाचल में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट

  • हिमाचल प्रदेश में 16 से 18 जनवरी के बीच कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है।

17 जनवरी: पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी

  • जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में बारिश का अलर्ट, पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी हो सकती है।
  • पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश में घने कोहरे का अलर्ट, कड़ाके की सर्दी हो सकती है।



Source link

Kolkata ED Accuses Mamata Banerjee I-PAC Raid Obstruction


  • Hindi News
  • National
  • Kolkata ED Accuses Mamata Banerjee I PAC Raid Obstruction | Supreme Court Hearing

नई दिल्ली3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
8 जनवरी को डॉक्युमेंट्स लेने के बाद ममता ने मीडिया को संबोधित किया था। - Dainik Bhaskar

8 जनवरी को डॉक्युमेंट्स लेने के बाद ममता ने मीडिया को संबोधित किया था।

कोलकाता में I-PAC रेड मामले में रुकावट डालने पर ममता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। ये याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगाई है। दरअसल 8 जनवरी को ED ने टीएमसी के आईटी हेड और पॉलिटिकल कंसल्टेंट फर्म (I-PAC) डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था।

इस दौरान ममता बनर्जी रेड के दौरान ऑफिस पहुंचीं और कुछ फाइलें अपने साथ ले गईं। जांच एजेंसी का आरोप है कि ममता ने रेड के दौरान रुकावट पैदा की। सबूतों से छेड़छाड़ की गई, अहम डॉक्यूमेंट छीने गए और ED अधिकारियों को धमकाया गया।

ED की मांग है कि अवैध और जबरन ले जाए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, स्टोरेज मीडिया और दस्तावेजों को जब्त कर सील किया जाए। वहीं एक दिन पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में टीएमसी की याचिका को खारिज कर दिया गया। टीएमसी ने ईडी पर दस्तावेज जब्त करने का आरोप लगाया था, हालांकि ईडी ने ऑन रिकॉर्ड मना कर दिया।

ममता 8 जनवरी को रेड के बीच में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंचीं थी।

ममता 8 जनवरी को रेड के बीच में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंचीं थी।

सुप्रीम कोर्ट में ED की याचिका, लूट-चोरी का आरोप

याचिका में ED ने मुख्यमंत्री और शीर्ष पुलिस अधिकारियों पर 17 अपराध करने का आरोप लगाया है। इनमें डकैती, लूट और चोरी जैसे आरोपों के साथ सरकारी काम में लगे अधिकारियों को रोकने, सबूत छिपाने या नष्ट करने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

ED की याचिका में 5 बड़ी बातें…

  • यह घटना संविधान और कानून के शासन का खुला अपमान है। जब्त किए गए सबूतों का किसी राजनीतिक दल की गतिविधियों से कोई संबंध नहीं था, बल्कि वे केवल अवैध कोयला खनन घोटाले से जुड़े थे।
  • सीएम और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ED अधिकारियों को धमकाया। प्रतीक जैन के आवास और I-PAC ऑफिस में चल रही तलाशी को आगे बढ़ने नहीं दिया।
  • तलाशी के बाद उसके अधिकारियों के खिलाफ कई FIR दर्ज कराई गईं, जिनका मकसद जांच को कमजोर करना और अधिकारियों को डराना था। इन सभी FIR की जांच CBI को सौंपी जानी चाहिए।
  • हमारी कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत पाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। कोर्ट में कथित हंगामे के कारण मामला टाल दिया गया। यह हंगामा सत्तारूढ़ दल के समर्थकों को वाट्सएप ग्रुप्स के जरिए बुलाकर कराया गया, ताकि कोर्ट में सुनवाई न हो सके।
  • सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करे, सबूतों को सुरक्षित रखे और यह संदेश दे कि किसी भी राजनीतिक पद पर बैठा व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

बंगाल सरकार ने कहा- हमारा पक्ष भी सुना जाए

बंगाल सरकार ने 10 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल की थी। सरकार की मांग है कि उसका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

अब पूरे मामले को समझिए

8 जनवरी: TMC के IT हेड के ठिकानों पर ED की रेड

8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं।

कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं।

ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई।

9 जनवरी: ममता बनर्जी ने कोकाता में मार्च निकाला

9 जनवरी को TMC के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली से कोलकाता तक विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी पर दो FIR भी दर्ज कराई है। उन्होंने कोलकाता में मार्च भी निकाला।

इस दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनके पास गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ पेन ड्राइव हैं। उन्होंने कहा- दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं तक कोयला घोटाले की रकम पहुंचती है। मेरे पास इसके सबूत हैं। जरूरत पड़ी तो मैं इन्हें जनता के सामने पेश कर सकती हूं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ सैकड़ों TMC कार्यकर्ता मार्च में शामिल हुए थे।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ सैकड़ों TMC कार्यकर्ता मार्च में शामिल हुए थे।

सीएम ने कहा था- कोयला घोटाले का पैसा शाह को भेजा गया

ममता ने 9 जनवरी को मार्च के दौरान आरोप लगाया है कि कोयला घोटाले का पैसा सुवेंदु अधिकारी ने इस्तेमाल किया और अमित शाह को भेजा। उन्होंने कहा था कि मैं आमतौर पर प्रतिक्रिया नहीं देतीं, लेकिन अगर कोई मुझे छेड़ता है तो मैं छोड़ती नहीं हूं।

इस पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने बनर्जी को मानहानि का नोटिस भेजा। नोटिस में उन्होंने 72 घंटे के भीतर कथित आरोपों से जुड़े सभी सबूत पेश करने की मांग की गई।

—————

ये खबर भी पढ़ें…

जहां चुनाव, वहां ED ने फाइलें खोलीं:बंगाल से पहले 3 राज्यों में यही पैटर्न; महाराष्ट्र-दिल्ली-झारखंड के बाद तमिलनाडु, असम, केरल, पुडुचेरी में छापेमारी

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ED का काम आर्थिक अपराधों की जांच करना, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाना है, लेकिन कई बार उसकी कार्रवाई की टाइमिंग सवालों के घेरे में आ जाती है। पूरी खबर पढ़ें…



Source link

Punjab CM Bhagwant Mann Appears at Akal Takht; Barnalas Strict Punishment


अकाल तख्त, भीमसेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला, प्रकाश सिंह बादल और भगवंत मान।

भगवंत मान पंजाब के चौथे मुख्यमंत्री हैं, जाे अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हो रहे हैं। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने गुरुओं के दसवंध के सिद्धांत-गुरू की गोलक, एक आपत्तिजनक वीडियो को लेकर उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए बुला

.

भगवंत मान से पहले 3 और मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल अकाल तख्त पर पेश हो चुके हैं। भीमसेन सच्चर अविभाजित पंजाब के दूसरे मुख्यमंत्री थे। अकाल तख्त पर पेश होने वाले मुख्यमंत्रियों में सबसे सख्त सजा सुरजीत सिंह बरनाला को दी गई थी। उन्हें पंथ से निष्कासित करने के साथ गले में तख्ती डालकर पेश होने को कहा गया था।

सबसे ज्यादा विवाद प्रकाश सिंह बादल को लेकर हुआ। इसकी वजह ये थी कि सजा पूरी करने के बाद उन्हें फक्र ए कौम अवार्ड से नवाजा गया। जिसका सिखों के भीतर ही विरोध हुआ।

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और CM भगवंत मान।

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और CM भगवंत मान।

पंजाब के मुख्यमंत्री अकाल तख्त पर कब पेश हुए, उन्हें क्यो तलब किया गया, क्या सजा मिली, पढ़िए पूरी रिपोर्ट….

1. भीम सेन सच्चर

  • 18 सितंबर 1955 को पेशी, माफी मांगी: भीम सेन सच्चर 18 सितंबर 1955 को अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए थे। वे दरबार साहिब के अंदर नंगे पैर गए थे। अकाल तख्त के सामने हाथ जोड़कर खड़े हुए। यहां उन्होंने जुलाई 1955 को पुलिस द्वारा दरबार साहिब परिसर में की गई कार्रवाई (आंसू गैस के गोले छोड़ना और मर्यादा का उल्लंघन) के लिए लिखित में माफीनामा पढ़ा।
  • बर्तन और जूते साफ करने की सजा: अकाल तख्त के जत्थेदार अचहर सिंह ने उनकी माफी स्वीकार की और उन्हें धार्मिक सेवा बर्तन और जोड़े (बर्तन साफ करने और जूते साफ करने) का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने पूरी मर्यादा के साथ पूरा किया।
  • तलब करने का कारण: 4 जुलाई 1955 को पंजाबी सूबा आंदोलन चल रहा था। भीम सेन सच्चर पर सीएम होने के नाते आंदोलन को दबाने का आरोप लगा। ये भी आरोप लगा कि उन्होंने दरबार साहिब में पुलिस फोर्स भी भेजी। पुलिस ने गुरुद्वारा परिसर में आंसू गैस के गोले छोड़े और कई गिरफ्तारियां कीं। इस घटना से सिखों में रोष पैदा हो गया। राजनीतिक असंतोष के चलते उन्होंने बाद में पद से इस्तीफा दे दिया।

2 . सुरजीत सिंह बरनाला

  • 5 दिसंबर 1988 को अकाल तख्त के सामने पेशी: सुरजीत सिंह बरनाला 1985 से 1987 तक पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उन पर दो आरोप लगे। पहला, ऑपरेशन ब्लैक थंडर में दरबार साहिब में पुलिस को जाने की इजाजत दी। अकाल तख्त ने इसे मर्यादा का उल्लंघन माना। दूसरा , अकाल तख्त के आदेश को न मानना। दरअसल फरवरी 1987 में अकाल तख्त के तत्कालीन जत्थेदार ने सभी सिख राजनीतिक दलों को भंग करके एक संयुक्त दल बनाने का आदेश दिया था। बरनाला ने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए इस धार्मिक आदेश को मानने से इनकार कर दिया।
  • 11 फरवरी 1987 को ‘तनखैया’ घोषित: अकाल तख्त के जत्थेदार प्रोफेसर दर्शन सिंह ने उन्हें 11 फरवरी 1987 को ‘तनखैया’ (धार्मिक अपराधी) घोषित कर दिया और बाद में पंथ से निष्कासित कर दिया गया। बरनाला लगभग डेढ़ साल पंथ से निष्कासित रहे। वे 5 दिसंबर 1988 को अकाल तख्त के सामने पेश हुए और माफी मांगी।
  • गले में तख्ती लटकाई, लिखा-मैं पापी हूं: अकाल तख्त जत्थेदार ने उन्हें सख्त सजा दी। गले में तख्ती डालकर दरबार साहिब के गेट पर बैठना पड़ा। तख्ती पर लिखा- मैं पापी हूं, जत्थेदार के आदेश की नाफरमानी की। इसके अलावा जूतों और बर्तन साफ करने की सजा मिली। उन्हें 501 रुपए देग और धार्मिक कोष में दान देने को कहा गया।

3 .प्रकाश सिंह बादल

  • 4 अक्टूबर 1979 को अकाल तख्त पर पेश: प्रकाश सिंह बादल 4 अक्टूबर 1979 को अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए थे। उस समय वे पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उन पर पंथक एकता को नुकसान पहुंचाने और अकाल तख्त के आदेशों की अनदेखी करने के आरोप थे। निरंकारी विवाद: 1978 के सिख-निरंकारी विवाद के बाद सिखों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी। बादल पर आरोप था कि वे निरंकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रहे हैं।
  • पार्टी में अंदरूनी कलह: उस समय अकाली दल दो धड़ों (जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी और प्रकाश सिंह बादल) में बंट गया था। अकाल तख्त ने दोनों गुटों को एकजुट होने का आदेश दिया था, लेकिन बादल गुट पर इस आदेश को पूरी तरह न मानने और सरकार बचाने के लिए समझौते करने के आरोप लगे।
  • जत्थेदार भौरा ने तलब किया: सीएम रहते हुए परकाश सिंह बादल को अकाल तख्त के तत्कालीन जत्थेदार जत्थेदार साधु सिंह भौरा ने तलब किया था। जत्थेदार भौरा ने अकाली दल के विवाद को सुलझाने के लिए बादल और अन्य नेताओं को अकाल तख्त पर स्पष्टीकरण के लिए बुलाया था।
  • सजा के तौर पर जूते साफ किए, जूठे बर्तन मांजे: प्रकाश सिंह बादल अकाल तख्त के सामने पेश हुए और अपनी गलतियों को स्वीकार किया। उन्हें सजा के तौर पर धार्मिक सेवा दी गई। उन्होंने अकाल तख्त साहिब के सामने खड़े होकर माफी मांगी और मर्यादा के अनुसार बर्तन मांजने और जूते साफ करने की सेवा की।

CM भगवंत मान को धार्मिक सजा नहीं होगी… सीएम भगंवत मान पर आरोप है कि उन्होंने सिखों की पवित्र परंपरा दसवंध और गुरुद्वारों की गोलक के मिसयूज को लेकर टिप्पणियां कीं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से लोगों से गोलक में पैसे न डालने की बात कही थी, जिसे सिख सिद्धांतों पर हमला माना गया। सीएम ने बार-बार ऐसे बयान दिए जो सिख रहत मर्यादा और अकाल तख्त की सर्वोच्चता को चुनौती देते हैं।

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मुख्यमंत्री के कैरेक्टर को लेकर सवाल उठे। अकाल तख्त ने इसे सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना। हालांकि सीएम मान को धार्मिक सजा नहीं मिलेगी क्योंकि अकाल तख्त उन्हें पूर्ण सिख नहीं मानता। उनसे सिर्फ स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

जानें श्री अकाल तख्त क्या है? SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसका काम सिख समुदाय के सांसारिक और धार्मिक मामलों पर कौम का मार्गदर्शन करना और निर्णय लेना है। अकाल तख्त की स्थापना 5वें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव के बेटे गुरु श्री हरगोबिंद पातशाह ने 1606 में की।

उन्होंने देखा कि दुनिया में बहुत बड़ा जुल्म हो रहा था। इस पर उन्होंने दो तलवारें अपनाने का सिद्धांत बनाया। एक मीरी और दूसरी पीरी। इसका मतलब ये था कि धर्म और सियासत पर फैसले एक मंच से लिए जाएंगे। श्री अकाल तख्त अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त स्थित है। अकाल तख्त का मतलब काल रहित परमात्मा का सिंहासन है।

यह सिखों के 5 तख्तों में सबसे सर्वोच्च और पुराना है। सिख धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विषय या विवाद पर यहां से हुक्मनामा जारी किया जाता है। यह हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मानना जरूरी होता है।

श्री अकाल तख्त साहिब का वो हिस्सा जहां से जत्थेदार सजा सुनाते हैं।

श्री अकाल तख्त साहिब का वो हिस्सा जहां से जत्थेदार सजा सुनाते हैं।

************************



Source link

खबर हटके- चुनावी वादे के लिए 500 कुत्तों की मौत:पालक पनीर के लिए अमेरिका में झगड़ा; बच्चों के लिए ₹1 में हवाई यात्रा शुरू




सड़क से कुत्ते हटाने का चुनावी वादा करने वाले एक नेता ने जीतते ही 500 कुत्तों को जहर देकर मरवा दिया। वहीं अमेरिका में पनीर को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। इधर बच्चों को 1 रुपए में हवाई यात्रा करने का मौका मिल रहा है। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… ************* रिसर्च सहयोग: किशन कुमार खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…



Source link

भास्कर अपडेट्स:NIA के चीफ बने IPS राकेश अग्रवाल, IPS शत्रुजीत कपूर ITBP चीफ और प्रवीण कुमार BSF प्रमुख बनाए गए




आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञ राकेश अग्रवाल को बुधवार को देश की आतंकवाद विरोधी एजेंसी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) का नया महानिदेशक नियुक्त किया गया। हिमाचल प्रदेश कैडर के 1994 बैच के अधिकारी अग्रवाल NIA के DG पद का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। इनके अलावा सीनियर IPS शत्रुजीत सिंह कपूर को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का महानिदेशक नियुक्त किया गया। सीनियर IPS प्रवीण कुमार को सीमा सुरक्षा बल (BSF) का नया प्रमुख बनाया गया है। आज की बाकी बड़ी खबरें… निपाह से संक्रमित दोनों नर्सें कोमा में, कोलकाता रेफर पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से संक्रमित दोनों नर्सों को कोलकाता के बेलियाघाटा आईडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों की हालत बेहद गंभीर है और वे आईसीसीयू में कोमा में हैं। इनके संपर्क में आए बारासात अस्पताल के एक रेजिडेंट डॉक्टर में लक्षण दिखे, हालांकि जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है।



Source link