शिव कथा के पोस्टर विमोचन आज

[ad_1]

बाड़मेर | शिव शक्ति धाम पंपलेट तालाब बाड़मेर में आगामी महाशिवरात्रि पर्व पर 8 से 14 फरवरी तक शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। कार्यक्रम मीडिया प्रभारी हरिसिंह राठौड़ ने बताया कि महाशिवरात्रि कार्यक्रम निमित रविवार दोपहर 1 बजे महंत प्रतापपुरी महाराज, महंत खुशालगिरी, महंत नारायणपुरी आदि संतों के सानिध्य में जनप्रतिनिधि, शिव शक्ति धाम ट्रस्ट कमेटी सदस्यों की ओर से महाशिवरात्रि कार्यक्रम का पोस्टर, आमंत्रण पत्र, पंपलेट का विमोचन किया जाएगा। महाशिवपुराण कथा का आयोजन कथा वाचक साध्वी सत्य सिद्धा गिरी की ओर से दोपहर 1 से 5 बजे तक आयोजन होगा।

[ad_2]

Source link

प्रेम नगर में आवारा श्वान से लोग हो रहे परेशान

[ad_1]

श्रीगंगानगर। प्रेम नगर एरिया में आवारा श्वानों से लोग परेशान हैं। मेन रोड पर ये श्वान आने जाने-वाले वाहनों के पीछे दौड़ने लगते हैं, िजससे दुर्घटना की आशंका रहती है। वहीं, पैदल आने-जाने वाले राहगीरों पर हमले का प्रयास करते हैं। नगरपरिषद को आवारा श्वान पकड़ने का अभियान चलाना चाहिए। – सुभाष

[ad_2]

Source link

राजस्थान में बारिश के साथ ओले गिरे,13 जिलों में अलर्ट:अजमेर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में छाए बादल; जानिए- फरवरी के पहले हफ्ते में कैसा रहेगा मौसम

[ad_1]


राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के सक्रिय होने से शनिवार से मौसम में बदलाव हुआ। जयपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग के क्षेत्रों में बादल छाए। अजमेर में बारिश के साथ कई स्थानों पर ओले गिरे। मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर ने रविवार को 13 जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। मौसम विज्ञान केन्द्र के अनुसार, फरवरी में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना जताई गई है, यानी फरवरी में सामान्य से कम सर्दी रहने की संभावना है। ऐसे में संभावना है कि 14-15 फरवरी यानी दूसरे सप्ताह के बाद से प्रदेश में हल्की गर्मी का दौर शुरू हो सकता है।
अजमेर और जयपुर में में बारिश
पिछले 24 घंटे के दौरान उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, बारां समेत कई जिलों में हल्के बादल छाए रहे। अजमेर और जयपुर में बारिश भी हुई। जयपुर के ग्रामीण एरिया में भी कुछ स्थानों पर देर रात हल्की बूंदाबादी हुई। मौसम के इस बदलाव से पहले शनिवार को जयपुर में हल्की धूप रही और दिन का अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। अजमेर में अधिकतम तापमान 24.9, बाड़मेर में 28.4, बीकानेर में 25.2, चूरू में 25.1, जैसलमेर में 24.4, कोटा में 24.7 और उदयपुर में 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। बादल छाए, न्यूनतम तापमान चढ़ा
वेस्टर्न डिर्स्टबेंस के असर से बादल छाने के बाद राज्य में न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हुई। उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, जयपुर में शनिवार को न्यूनतम तापमान 2 से 5 डिग्री चढ़कर डबल डिजिट (10 डिग्री से ऊपर) में दर्ज हुआ। सर्द हवाएं भी कमजोर होने से जयपुर समेत शेखावाटी के एरिया में गलनभरी सर्दी से ​मामूली राहत रही।

[ad_2]

Source link

मरीज हो रहे परेशान:जिला अस्पताल की 3 में से 2 लिफ्ट तीन साल से बंद एक कार्मिक नहीं होने से शुरू ही नहीं

[ad_1]


जिला अस्पताल की तीन में से दो लिफ्ट लंबे समय से खराब है तो एक कार्मिक नहीं होने से लगभग बंद ही रखी जाती है। जिला अस्पताल की न्यू टीचिंग बिल्डिंग के थर्ड फ्लोर पर 5.39 करोड़ रुपए की लागत से बने प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड में सर्जरी के 30-30 बेड के दो वार्ड दो साल पहले तथा 30 बेड का मेल मेडिसिन वार्ड एक साल पहले शुरू किया था, ग्राउंड फ्लोर से वार्ड तक पहुंचने के लिए लिफ्ट लगाई थी लेकिन आज तक उसका संचालन नहीं हुआ। वहीं एमसीएच विंग में लगी दो में से एक लिफ्ट ठीक लेकिन दूसरी खराब है। प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड में सर्जरी के दो व मेडिसिन का एक वार्ड संचालित अस्पताल प्रशासन की ओर से प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड में दो साल पहले सर्जरी विभाग के 30-30 बेड के मेल व फीमेल वार्ड शुरू किए थे। एक साल पहले मेल मेडिसिन वार्ड डी को भी शुरू किया गया। 90 बेड मरीजों से ओवरलोड रहने के बाद भी तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए मरीजों को रेम्प से जाना पड़ रहा है। ऑपरेशन से ऑपरेशन के लिए स्ट्रेचर पर पुरानी बिल्डिंग के मॉड्यूलर ओटी तक पहुंचाना पड़ता है। ऑपरेशन के बाद वार्ड में शिफ्ट करने में परिजनों को दिक्कतें हो रही हैं। अपरमेया इंजीनियरिंग लिमिटेड को प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड और लिफ्ट लगाने का वर्क ऑर्डर दिया गया था। अधूरे वार्ड को अस्पताल प्रशासन ने हैंडओवर कर लिया, लेकिन घटिया क्वालिटी के कारण लिफ्ट अब तक नहीं ली गई। गंभीर शिशु रोगियों को भी सीढ़ियों से वार्ड तक पहुंचाना पड़ रहा है। फर्म ने लगाई घटिया क्वालिटी की लिफ्ट जो अब तक शुरू ही नहीं हुई प्री-फेब्रिकेटेड वार्ड बनाने के साथ संबंधित अपरमेया इंजीनियरिंग लिमिटेड फर्म को लिफ्ट की व्यवस्था भी करनी थी। अस्पताल प्रशासन ने कई कमियों व लिफ्ट के तैयार नहीं होने से पहले ही वार्ड हैंडओवर कर लिया था लेकिन लिफ्ट को हैंडओवर नहीं किया। संबंधित फर्म की ओर से लिफ्ट तो लगाई गई लेकिन घटिया क्वालिटी की होने से शुरू ही नहीं हुई। गंभीर मरीजों को वार्ड तक ले जाना मुश्किल हो रहा है। “एमसीएच विंग की एक लिफ्ट चालू है। दूसरी जल्द शुरू करवाई जाएगी। न्यू टीचिंग बिल्डिंग की लिफ्ट की क्वालिटी सही नहीं होने से हैंडओवर नहीं की गई।” -डॉ. हनुमानराम चौधरी, अधीक्षक जिला अस्पताल

[ad_2]

Source link

कुनाल बोले- मस्ट विन मैच था, इसलिए लंबा खेला:रणजी में 7 घंटे तक क्रीज पर डटे रहे उत्तराखंड के कप्तान, दोहरा शतक जड़ा

[ad_1]


रणजी ट्रॉफी के निर्णायक मुकाबले में उत्तराखंड के कप्तान कुनाल चंदेला ने 207 रन की मैराथन पारी खेली। देहरादून के अभिमन्यु क्रिकेट अकादमी मैदान पर असम के खिलाफ खेली गई यह पारी न सिर्फ टीम को संकट से बाहर निकालने वाली रही, बल्कि यह उनके फर्स्ट क्लास करियर का पहला दोहरा शतक भी बना। उन्होंने कहा- मस्ट विन मैच था, इसलिए एक-एक सत्र खेलता गया। उत्तराखंड प्रीमियर लीग (यूपीएल) सीजन-2 में टॉप स्कोरर रहने के बाद रणजी ट्रॉफी में लाल गेंद से भी उसी निरंतरता को दोहराना आसान नहीं होता, लेकिन कप्तानी का दबाव और घरेलू मैदान की अपेक्षाओं के बीच उनकी पारी बताती है कि यह सिर्फ फॉर्म नहीं, बल्कि टेक्निक और टेम्परामेंट का नतीजा है।
दैनिक भास्कर ने कुनाल चंदेला से उनकी इस पारी, कप्तानी के दबाव और दिल्ली से उत्तराखंड तक के सफर पर विस्तार से बातचीत की। अब कुनाल का पूरा इंटरव्यू पढ़िए… सवाल: असम के खिलाफ आपने 207 रनों की मैराथन पारी खेली। जब आप बल्लेबाजी के लिए उतरे, तो माइंडसेट क्या था? जवाब: यह हमारे लिए एक ‘मस्ट विन’ (करो या मरो) गेम था। क्वालिफिकेशन के चांसेस बने रहने के लिए हमें 6 पॉइंट चाहिए थे। मेरा माइंडसेट बस यही था कि लंबा खेलना है। टीम को स्टेबिलिटी देनी है और एक बड़ा टोटल खड़ा करना है। मुझे पता था कि मैं जितना लंबा क्रीज पर खड़ा रहूंगा, स्कोर उतना बड़ा बनेगा। सवाल: यह आपके करियर का पहला दोहरा शतक है। क्या आपने इस मैच के लिए अपनी रणनीति या तकनीक में कोई विशेष बदलाव किया था? जवाब: नहीं, तकनीक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया। सच कहूं तो जब जिम्मेदारी बढ़ती है, तो बल्लेबाजी अपने आप बेहतर हो जाती है। शॉट सिलेक्शन में थोड़ा और ठहराव लाना पड़ा। मैंने बस विकेट पर टिकने और पारी को लंबा खींचने का सोचा था। सवाल: देहरादून के मौसम और पिच का मिजाज कैसा था? क्या होम ग्राउंड होने का कोई अतिरिक्त दबाव या फायदा मिला? जवाब: विकेट बहुत अच्छा था। यह दोनों के लिए सपोर्टिव था- चाहे वो स्पिनर्स हों, फास्ट बॉलर्स हों या बल्लेबाज। शुरुआत में तेज गेंदबाजों को मदद मिली, लेकिन सेट होने के बाद यह बल्लेबाजी के लिए बेहतरीन हो गया। मेरा फोकस बस यही था कि नई गेंद का समय निकालना है, उसके बाद खेल बल्लेबाज के पक्ष में आता है। सवाल: आप यूपीएल सीजन-2 के टॉप स्कोरर रहे और अब रेड बॉल क्रिकेट में भी वही फॉर्म जारी है। फॉर्मेट बदलने पर तालमेल कैसे बिठाया? जवाब: जब सीजन की शुरुआत अच्छी होती है, तो आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होता है। चाहे रेड बॉल हो या व्हाइट बॉल, अगर रन बन रहे हैं तो वो कॉन्फिडेंस अगले मैच में कैरी होता है। तकनीक में ज्यादा बदलाव नहीं होता, सारा खेल ‘टेम्परामेंट’ (मानसिकता) का है। टी-20 में आक्रामकता चाहिए होती है और रणजी में धैर्य। मैंने बस अपने धैर्य पर काम किया। सवाल: एक बल्लेबाज के तौर पर दोहरा शतक लगाना और कप्तान के तौर पर टीम को लीड करना- इन दोनों भूमिकाओं में संतुलन कैसे बनाते हैं? जवाब: यह एक चुनौती भी है और अवसर भी। मैं हमेशा मानता हूं कि कप्तान को ‘फ्रंट से लीड’ करना चाहिए। मैंने खुद से कहा कि अगर मैं आगे बढ़कर जिम्मेदारी लूंगा और रन बनाऊंगा, तो बाकी खिलाड़ी भी प्रेरित होंगे। कप्तान का काम सिर्फ निर्देश देना नहीं, बल्कि साथ लेकर चलना होता है। जब कप्तान रन बनाता है, तो टीम का माहौल अपने आप सकारात्मक हो जाता है। सवाल: पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड की टीम तेजी से उभरी है। आप राज्य में क्रिकेट का भविष्य कैसे देखते हैं? जवाब: भविष्य बहुत उज्ज्वल है। हमारे पास अंडर-19 और अंडर-23 से बहुत टैलेंटेड युवा आ रहे हैं। वे अच्छी तकनीक और सही ‘फ्रेम ऑफ माइंड’ के साथ सीनियर टीम में आ रहे हैं। जिस तरह से हम खेल रहे हैं, मुझे यकीन है कि उत्तराखंड जल्द ही घरेलू क्रिकेट का पावरहाउस बनेगा। सवाल: आपने करियर की शुरुआत दिल्ली से की और अब उत्तराखंड का नेतृत्व कर रहे हैं। एक पेशेवर क्रिकेटर के तौर पर इस बदलाव को कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए, क्रिकेट तो दोनों जगह एक ही है। फर्क सिर्फ जिम्मेदारी का है। दिल्ली में कई अनुभवी खिलाड़ी थे, तो वहां एक आउट हो जाता था तो दूसरा संभाल लेता था। यहां उत्तराखंड में हम एक नई टीम बना रहे हैं, इसलिए यहां मेरे ऊपर जिम्मेदारी ज्यादा है। मुझे यहां अपने अनुभव का इस्तेमाल करके युवाओं को गाइड करना होता है। टैलेंट में कोई कमी नहीं है, बस अनुभव का अंतर है। सवाल: आईपीएल या इंडिया-ए के लिए क्या लक्ष्य हैं? क्या हम जल्द ही आपको बड़े मंच पर देखेंगे? जवाब: मेरा काम सिर्फ मेहनत करना और रन बनाना है। मैं सिलेक्शन के बारे में ज्यादा नहीं सोचता। हम पूरे साल ट्रेनिंग करते हैं ताकि मैच के दिन अपना बेस्ट दे सकें। अगर मैं लगातार परफॉर्म करता रहा और अपनी टीम को जिताता रहा, तो बाकी चीजें अपने आप हो जाएंगी। सवाल: उत्तराखंड के युवा क्रिकेटर्स के लिए आपका क्या संदेश है? जवाब: सिर्फ एक ही मंत्र है- ईमानदारी और फिटनेस। आप खेल के प्रति जितने ईमानदार रहेंगे, खेल आपको उतना ही वापस देगा। फिटनेस पर काम करें, गेम को समय दें और शॉर्टकट न खोजें। अगर आप प्रक्रिया सही रखेंगे, तो परिणाम जरूर मिलेंगे। अब 5 प्वाइंट्स में जानिए कुनाल की लीडरशिप क्यों है खास… 1. बदलता घरेलू क्रिकेट, उत्तराखंड की नई पहचान भारतीय घरेलू क्रिकेट अब सिर्फ मुंबई, दिल्ली या कर्नाटक तक सीमित नहीं रहा। उत्तराखंड जैसे नए राज्य अब पुरानी ताकतों को चुनौती दे रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में हैं रणजी ट्रॉफी कप्तान कुनाल चंदेला, जिन्होंने दिल्ली के क्रिकेट सर्किट से निकलकर उत्तराखंड की कमान संभाली और टीम को नई पहचान दी। 2. टर्निंग पॉइंट: रणजी सत्र 2025-26 और कप्तानी की मुहर 31 वर्षीय कुणाल चंदेला के लिए मौजूदा रणजी सत्र करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। टीम प्रबंधन ने उन्हें पूर्णकालिक कप्तानी सौंपी और उन्होंने असम के खिलाफ 207 रन की पारी खेलकर भरोसे को सही ठहराया। यह पारी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि एक लीडरशिप नॉक थी। 3. कप्तानी की सोच: जीत के लिए जोखिम का फैसला 460/7 के स्कोर पर पारी घोषित करना कुणाल की आक्रामक और मैच-विनिंग सोच को दर्शाता है। वे जानते थे कि मैच जीतने के लिए गेंदबाजों को पर्याप्त समय देना जरूरी है। यह फैसला बताता है कि वे सिर्फ रन बनाने वाले कप्तान नहीं, बल्कि रणनीतिक लीडर भी हैं। 4. दिल्ली से देहरादून: चुनौती से समाधान तक का सफर दिल्ली की कड़ी प्रतिस्पर्धा में पले-बढ़े कुणाल ने 2017-18 में दिल्ली को रणजी फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। चोट और चयन की राजनीति के चलते मौके कम हुए, तो 2021 में उन्होंने उत्तराखंड का रुख किया। यहां सीम और स्विंग वाली पिचों पर उनकी तकनीक और निखर गई, वहीं अनुभवी मेंटर्स ने उनके मानसिक खेल को मजबूत किया। 5. तकनीक और फिटनेस: संकटमोचक बनने की असली वजह क्रिकेट समीक्षकों के मुताबिक, कुणाल ने अपनी स्कोरिंग जोन का विस्तार किया है। पहले वे ऑफ स्टंप के बाहर संघर्ष करते थे, अब गेंद छोड़ने की समझ और नियंत्रित पुल-हुक शॉट उनकी ताकत बन चुके हैं। सात घंटे तक बल्लेबाजी और फिर मैदान पर कप्तानी सुधरी फिटनेस इस बात का सबूत है कि वे क्यों उत्तराखंड क्रिकेट के ‘संकटमोचक’ कहलाते हैं। कप्तानी का ‘चंदेला मॉडल’ कुनाल ‘बोलने’ वाले कप्तान से ज्यादा ‘करके दिखाने’ वाले कप्तान हैं। त्रिपुरा के खिलाफ दूसरी पारी में 83* रन बनाकर मैच बचाना हो या राजस्थान के खिलाफ हाई-स्कोरिंग मैच में टीम का मनोबल बनाए रखना, उन्होंने हर मोर्चे पर उदाहरण पेश किया है। उन्होंने आकाश मधवाल जैसे गेंदबाजों को आक्रमण की छूट दी और अवनीश सुधा जैसे युवाओं को खुलकर खेलने का मौका दिया। आगे की राह: आईपीएल की दस्तक टी-20 स्ट्राइक रेट 134.84 बताता है कि कुनाल एंकर के साथ-साथ गियर बदलने की क्षमता रखते हैं। घरेलू क्रिकेट में ऐसे भारतीय बल्लेबाजों की हमेशा मांग रहती है। असम के खिलाफ दोहरा शतक इस बात का संकेत है कि क्लास और धैर्य अब भी क्रिकेट की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जिस निरंतरता से कुनाल चंदेला रन बना रहे हैं, उससे साफ है- उत्तराखंड क्रिकेट फिलहाल सुरक्षित हाथों में है। ——————— ये खबर भी पढ़ें : मेडल तो जीते, लेकिन उत्तराखंड में नौकरी का वादा अधूरा: नेशनल गेम्स के हीरो अब भी नियुक्ति से दूर, 11 महीने से ‘फाइलों’ में कैद 243 मेडलिस्ट्स का भविष्य उत्तराखंड के 38वें राष्ट्रीय खेलों में सिल्वर मेडल जीतने वाली फुटबॉल टीम के खिलाड़ी आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। मंच से तालियों के बीच किए गए वादों को करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन खिलाड़ियों के हिस्से अब तक सिर्फ आश्वासन आए हैं। (पढ़ें पूरी खबर)

[ad_2]

Source link

रामसर थाना इलाके का मामला:गाड़ी पलटी, एक ही परिवार के 28 लोग घायल, देवी दर्शन कर लौट रहे थे

[ad_1]


जिले के रामसर थाना इलाके में शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसा हो गया। श्रद्धालुओं से भरी एक बोलेरो कैंपर अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई और पलटी खा गई। हादसे के वक्त गाड़ी में कुल 29 लोग सवार थे, जिनमें से 28 घायल हो गए हैं। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सभी घायल एक ही परिवार के हैं, जो देवी दर्शन कर अपने गांव लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार भलीसर गांव का एक परिवार जैसलमेर के फतेहगढ़ जाजरा गांव में स्थित धार्मिक स्थल पर दर्शन के लिए गया था। शनिवार शाम करीब सवा 6 बजे जब वे वापस लौट रहे थे, तभी बालेवा रोड स्थित जानकी गांव के पास गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई। चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीण, 3 एम्बुलेंस व निजी वाहनों से घायलों को पहुंचाया अस्पताल हादसा इतना भीषण था कि कई सवारियां गाड़ी में ही फंस गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला। सूचना मिलते ही रामसर थाना इंचार्ज पदमाराम टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एम्बुलेंस की मदद से सभी घायलों को तुरंत रामसर हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया। इसके बाद सभी 28 घायलों को बाड़मेर रेफर किया। रामसर से तीन एम्बुलेंस और तीन प्राइवेट गाड़ियों में घायलों को लेकर आए। हॉस्पिटल में एएसपी नीतेश आर्य, डीएसपी रमेश कुमार शर्मा, कोतवाल मनोज कुमार, महिला थानाधिकारी देवीचंद ढाका समेत पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे। बाड़मेर जिला अस्पताल पहुंचे सभी घायलों का उपचार किया जा रहा है। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल धूड़ी पत्नी सालाराम को जोधपुर रेफर किया। वहीं पदमाराम, पुष्पा, कुंभाराम, लालराम, मोरू, गीता, ठाकराराम, प्रवीण, मोहन, संजय, कैलाश, पवन, पारु, कांता, वर्षा, मालाराम, गुड़ी, पप्पूराम, सगताराम, संजय, ताराराम, देवाराम, दिनेश, भंवरी, बसंती, रोहित, विष्णु, रमेश घायल हो गए। जिनका बाड़मेर जिला अस्पताल में उपचार किया गया। इनसाइट – 5-7 लोगों के बैठने की क्षमता, बिठाए 29 लोग महज 5-7 लोगों की क्षमता वाली बोलेरो कैंपर में बच्चों और महिलाओं समेत 29 लोग भरे हुए थे। हादसे की भीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गाड़ी में सवार 29 में से 28 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। “घटना की सूचना मिलते ही हम मौके पर पहुंचे। कैंपर में करीब 29 लोग सवार थे, जिनमें से 28 को चोटें आई हैं। घायलों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल है। फिलहाल घायलों का उपचार कराया जा रहा है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।”
– पदमाराम, थानाधिकारी, रामसर

[ad_2]

Source link

पूर्णिमा आज:माघ पूर्णिमा पर रवि पुष्य व प्रीति योग, दान-पूजन का खास अवसर

[ad_1]


माघ पूर्णिमा पर रविवार को रवि-पुष्य और प्रीति योग का विशेष संयोग बन रहा है। रवि पुष्य योग सुबह 7.10 बजे से बनेगा और यह रात 11:58 बजे तक रहेगा। माघ नक्षत्र के प्रभाव के कारण ही इसे माघी पूर्णिमा कहा जाता है। शास्त्रों में इस तिथि को स्नान, दान और पुण्य कर्मों के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। वेद प्रचारक, मंत्र अन्वेषक अजय कुमार श्यामानंदी के अनुसार इस दिन कंबल, सूती कपड़े दान, पगड़ी, जूते दान, गोशाला में गाय माता की सेवा, बच्चों को तिल के लड्डू और गर्म कपड़ों का अपने वैभव के अनुसार दान विशेष पुण्य देता है। मत्स्य पुराण के अनुसार इस दिन जो व्यक्ति ब्रह्मवैवर्त पुराण’ का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। इस दिन पूर्णमासी का व्रत रखकर भगवान विष्णु- सत्यनारायण भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस शुभ तिथि पर भगवान शालीग्राम को दूध, दही, घी, शहद और आटे के चूरे से स्नान करा तुलसीजी अर्पित करना शुभ माना गया है। कथा श्रवण का समय सुबह या संध्याकाल उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस दिन प्रारंभ किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल होता है। माघ पूर्णिमा पर सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा पर सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में रहने से यह दिन पुण्यकारी बन जाता है। गुरु दीक्षा ले चुके श्रद्धालुओं को गुरु पूजन, वस्त्र-पादुका दान और पांच माला जप करना शुभ माना है। माघ की प्रत्येक तिथि पुण्यपर्व है, उनमें भी माघी पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर भगवत्पूजन, श्राद्ध, दान करने का विशेष फल है। इस दिन भगवान शिव-हनुमानजी की पूजा करना भी शुभ माना है। प्रदोषकाल में करते हैं माता लक्ष्मी की पूजा
माघ पूर्णिमा माघ मास का अंतिम दिन होता है, इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन लोग व्रत-उपवास रखकर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनते हैं। माता लक्ष्मी की पूजा प्रदोषकाल में करने की परंपरा रही है। प्रदोषकाल सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। माघ पूर्णिमा पर सूर्यास्त का समय शाम 6 बजे है। इसके बाद आप लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं, वहीं निशिता पूजा मुहूर्त देररात 12.08 से लेकर मध्य रात्रि 1.01 तक है।

[ad_2]

Source link

Dr. Navjot Kaur Sidhu left Punjab Congress party; Amarinder Singh Raja Warring

[ad_1]

नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ नवजोत कौर सिद्धू और पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग।

PM नरेंद्र मोदी के पंजाब आने से पहले पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने शनिवार (31 जनवरी) को कहा कि उस कांग्रेस को अलविदा कह दिया है, जहां मेहनती और काबि

.

उन्होंने पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर निशाना साधा। 8 दिसंबर 2025 को राजा वड़िंग ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड किया था। दरअसल, नवजोत कौर कुछ दिनों से पंजाब कांग्रेस के बड़े नेताओं को लेकर डायरेक्ट बयानबाजी कर रही थीं, जिसका पार्टी के अंदर भी विरोध हो रहा था।

नवजोत सिंह सिद्धू के साथ डॉ. नवजोत कौर सिद्धू की फोटो।

नवजोत सिंह सिद्धू के साथ डॉ. नवजोत कौर सिद्धू की फोटो।

कांग्रेस छोड़ने के बाद नवजोत कौर की अहम बातें…

  • राजा वड़िंग सबसे भ्रष्ट अध्यक्ष: नवजोत कौर ने सोशल मीडिया (X) पर लिखा- राजा वड़िंग अब तक के सबसे भयानक और भ्रष्ट अध्यक्ष। आपने कांग्रेस को तबाह करने के लिए मुख्यमंत्री के साथ हाथ मिलाकर खुद को जेल जाने से बचाया है। आपने अपने फायदों के लिए आम आदमी पार्टी के साथ साठगांठ करके पार्टी को बेच दिया है।
  • 12 कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं: आपने मेरे लिए सस्पेंशन लेटर तैयार रखा था। लेकिन उन करीब 12 वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का क्या, जो नवजोत को नुकसान पहुंचाने के लिए मजीठिया के साथ मिलकर काम कर रहे थे और आपने नवजोत को हराने के बदले उन सभी को बड़े पदों से नवाजा।
  • आपको बर्बाद करने के लिए पर्याप्त सबूत: मेरे पास आपको बर्बाद करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। लेकिन मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि मैंने खुद उस कांग्रेस को छोड़ दिया है जहां किसी होनहार नेता की बात नहीं सुनी जाती।
  • मुझे हराने के इरादे से लोग बिठाए: आपने मेरी सीट पर मुझे हराने के इरादे से लोग बिठाए। आशु, चन्नी, भट्टल, डॉ. गांधी और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपकी कार्रवाई कहां है, जिन्होंने आपको और आपकी पार्टी को खुलेआम चुनौती दी है।
  • लोग आपकी रील्स का आनंद ले रहे: आप बस एक मजाक बनकर रह गए हैं और लोग आपकी रील्स का आनंद ले रहे हैं। नवजोत से प्यार करने वाले कांग्रेस नेताओं का अपमान करना बंद करें।
  • पार्टी को खत्म करने में व्यस्त, शर्म करिए:आप पार्टी को जिताने के बजाय उसे खत्म करने में ज्यादा व्यस्त हैं। अपनी ही पार्टी, जो आपकी मातृ संस्था है, के प्रति ईमानदार न होने पर आपको शर्म आनी चाहिए। आप पहले ही काफी नुकसान कर चुके हैं।
  • कभी किसी पार्टी से नहीं मिली: मैं शायद उन गिने-चुने लोगों में से हूं, जिनका किसी भी राजनीतिक कारण से न तो बीजेपी, न आम आदमी पार्टी और न ही किसी अन्य पार्टी के किसी नेता से कभी मिलना हुआ है और न ही किसी पार्टी ने कभी मुझसे संपर्क किया है। मैं यह बात पूरी तरह अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण और अपनी अंतरात्मा की आवाज से कह रही हूं, क्योंकि मैं केवल वाहेगुरु जी के प्रति जवाबदेह हूं, किसी और के प्रति नहीं।
  • प्रेमानंद महाराज का आशीर्वाद लिया: हाल ही में मुझे भगवद गीता के उपदेशों के साथ तीन दिन का आनंदमय और शांतिमय समय बिताने का अवसर मिला। साथ ही प्रेमानंद महाराज जी जैसे आत्मज्ञानी और प्रबुद्ध संतों का आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ।
  • मोदी की तारीफ, पंजाब CM पर तंज कसा: मुख्यमंत्री पंजाब, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब वे तीन बार स्पष्ट बहुमत से जीते, क्योंकि उन्होंने गुजरात के हर नागरिक के प्रति खुद को जवाबदेह बनाया। उन्होंने सभी विभागों के ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ (उपयोगिता प्रमाण पत्र) जमा किए, क्योंकि तभी आप केंद्र से जितना चाहें उतना पैसा ले सकते हैं। आप पंजाब के लोगों के पैसे का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों के बजाय अपने फायदे के लिए लोगों को मुफ्त सुविधाएं देने में नहीं कर सकते।

नवजोत कौर के वह 4 बयान, जिसने कांग्रेस में हड़कंप मचाया…

  • पहला बयान- CM वही बनता है, जो 500 करोड़ रुपए की अटैची दे: नवजोत कौर सिद्धू ने कुछ दिन पहले चंडीगढ़ में पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की थी। इस दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि आपने पैसे देने की बात कही है, क्या आपसे किसी पार्टी ने पैसे की मांग की है? तो उन्होंने कहा- ‘नहीं, हमसे किसी ने नहीं की। मगर CM वही बनता है जो 500 करोड़ की अटैची देता है।‘
  • दूसरा बयान- कांग्रेस में तो पहले ही 5-5 CM बने हुए हैं : गवर्नर से मुलाकात के बाद राजभवन से बाहर निकली नवजोत कौर ने मीडिया से बातचीत में अपने पति से जुड़े सवाल पर कहा- ‘कांग्रेस पंजाब में अगर सिद्धू को CM फेस बनाएगी तो ही वह एक्टिव होंगे। सिद्धू कांग्रेस से अटैच हैं। प्रियंका के साथ अटैच हैं। फिर भी मुझे लग नहीं रहा कि सिद्धू को प्रमोट होने दिया जाएगा, क्योंकि यहां (कांग्रेस में) तो पांच-पांच CM पहले से बने हुए हैं और वह कांग्रेस को हराने में लगे हैं। हां, ऊपर वालों (पार्टी हाईकमान) को शायद समझ आ जाए तो बात दूसरी है।‘
  • तीसरा बयान- 5 करोड़ में टिकटें बेचीं, कांग्रेस को बर्बाद कर रहे 4 नेता : मीडिया चैनल से बातचीत में नवजोत कौर ने कहा- ‘पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 5 करोड़ रुपए में कौंसलर की टिकट बेची। राजा वड़िंग, चरणजीत चन्नी, सुखजिंदर रंधावा और प्रताप बाजवा पंजाब का CM बनना चाहते हैं। इसके लिए ये चारों कांग्रेस को खत्म करने में लगे हुए हैं।‘
  • चौथा बयान- अमृतसर ईस्ट से चुनाव लड़ूंगी, पार्टी चाहे सर्वे कराए : नवजोत कौर ने कुछ महीने पहले कहा था कि वह 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है और अमृतसर ईस्ट सीट से लड़ेंगी। चुनाव लड़ने के लिए टिकट देना या न देना पार्टी हाईकमान का अधिकार है, लेकिन मैंने खुद की तैयारियां शुरू कर दी हैं। लोग मुझे पसंद करते हैं और पार्टी चाहे तो सर्वे करवा सकती है। गौरतलब है कि अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट से खुद नवजोत सिद्धू चुनाव लड़ते रहे हैं। 2022 के चुनाव में वह आम आदमी पार्टी (AAP) की कैंडिडेट जीवनजोत कौर से हार गए थे।

[ad_2]

Source link