आचार्य रामेश व राजेश मुनि का अनुशासन सेवा देखने लायक: श्रुत प्रभ

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ब्यावर |आचार्य रामेश के शिष्य शासन दीपक श्रुत प्रभजी म.सा. ने भजन के माध्यम से कहा कि गुरु के मिले चरण मेरे रोम-रोम खिल गए…, पुलकित हुआ यह मन मेरे रोम खिल गए…। हमारा सौभाग्य है कि हमें आचार्य रामागुरु मिले। रामागुरु जैसा धैर्य उन जैसा साधक पाना हुआ जो हमारी व संत-सतियों की चिंता करते रहते हैं। उन्हें ज्ञान-ध्यान सिखाते रहे, नए-नए आयाम देकर आगे बढ़ाते हुए ज्ञानवान बनें ताकि अगले भव हमारे काम आए, वह संकल्प के साथ काम करते उनका ज्ञान के प्रति गहरा रुझान होने से संत-सतियों को सिखाते रहे। म.सा. ने कहा कि साधुमार्गी संघ विश्व में मात्र ऐसा संघ हो जो वृद्ध संत-सतियों की सेवा करना जो देवलोक में नहीं होती है। आचार्य होते हुए भी वे नहीं चाहते कि मेरे होते हुए संतों को तकलीफ हो। एक बार विहार के समय साथ रहे दोनों संतों को तकलीफ हो गई। दूर-दूर तक डॉक्टर नहीं था, उन्होंने स्वयं हाथ ठेला लेकर दोनों संत को 18 किमी लेकर डॉक्टर के पास गए, यह उनकी सेवा है। म.सा. ने बताया कि आचार्य होते हुए भी अपने संतों की चिंता रहती हे। उनका एक ही कहना वात्सल्य देवो, सब काम सफल होता है। उनका अनुशासन भी बड़ा सख्त है बिना पूछे कोई भी संत-सतिया काम कर लेते हैं तो स्वयं प्रायश्चित ले लेते फिर मालूम पड़ता तो अपनी गलती समझ जाते पर उनको कुछ नहीं कहते।

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