मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नर्सिंग डिग्री पर फिर से विवाद:यूनिवर्सिटी के चेयरमैन सहित अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज, छुट्टी की हुई घोषणा
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मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नर्सिंग छात्रों की डिग्री का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गंगरार स्थित इस यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम कोर्स की मान्यता को लेकर छात्र पिछले कई दिनों से विरोध कर रहे हैं। मंगलवार को मैस बंद करने के बाद छात्रों के दो गुटों के बीच झगड़ा हो गया था, जो बुधवार को भी जारी रहा। स्थिति बिगड़ने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छुट्टी घोषित कर दी और छात्रों को अपने-अपने घर भेज दिया गया। पुलिस को भी मौके पर बुलाना पड़ा। इस पूरे मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि कुछ स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी के चेयरमैन सहित कई पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। छात्रों ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप भीलवाड़ा निवासी पायल पाटिल और जम्मू-कश्मीर निवासी अजहर सादिक सहित कई छात्रों ने यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष अशोक कुमार गदिया, मेवाड़ यूनिवर्सिटी के हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट महावीर वैरागी, प्रोफेसर महावीर स्वर्णकार, हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट शोएब खान, रजिस्ट्रार सीडी कुमावत, वाइस चांसलर आलोक मिश्रा और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गंगरार थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। छात्रों का आरोप है कि उनसे बीएससी नर्सिंग और जीएनएम कोर्स में एडमिशन दिलाने के नाम पर मोटी रकम ली गई, जबकि इन कोर्सों को राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से कोई मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि विज्ञापन में कोर्स को मान्यता प्राप्त बताया गया था और इसी भरोसे पर छात्रों ने एडमिशन लिया। विज्ञापन देखकर लिया था एडमिशन पायल पाटिल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022 में सीनियर सेकेंडरी पास करने के बाद यूनिवर्सिटी का विज्ञापन देखा, जिसमें बीएससी नर्सिंग कोर्स को RNC और INC से मान्यता प्राप्त बताया गया था। दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर पूरी मान्यता होने की बात कही गई। उस दौरान कौशल चन्द्रल से बात हुई थी, जिसे फर्जी डिग्री देने के नाम पर SOG की टीम ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 13 फरवरी 2022 को उन्होंने एक लाख रुपए एंट्री फीस और 50 हजार रुपए डोनेशन के रूप में जमा कर एडमिशन लिया। उनके साथ कई अन्य स्टूडेंट्स आशुतोष पारीक, रोहित मारू, रोशन रेगर, रोहित रेगर, विक्की कुमार, कृष्णा कुमारी ने भी इसी तरह पैसे जमा करवाए। तीन साल तक नियमित रूप से पढ़ाई करने के बाद जब मान्यता के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि कोर्स को किसी भी परिषद से स्वीकृति नहीं मिली है। मान्यता की जानकारी लेने जयपुर पहुंचे छात्र स्टूडेंट्स ने बताया कि हाल ही में वे जयपुर जाकर उपमुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, सचिवालय और RNC कार्यालय में जानकारी लेने पहुंचे। वहां से स्पष्ट जवाब मिला कि बीएससी नर्सिंग कोर्स को कोई मान्यता नहीं है और इस संबंध में यूनिवर्सिटी की ओर से कोई फाइल भी जमा नहीं करवाई गई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि जब पहले मान्यता नहीं थी, तो अब मिलने की संभावना भी बहुत कम है। यह जानकारी मिलने के बाद छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया। जम्मू-कश्मीर के छात्रों का भी आरोप जम्मू-कश्मीर से आए 44 स्टूडेंट्स अजहर सादिक, फैजान अकबर, सरफराज, नाजिया इकबाल, आदिल फारूक सहित अन्य ने जम्मू कश्मीर विशेष छात्रवृत्ति योजना के तहत इसी बीएससी नर्सिंग कोर्स में एडमिशन लिया था। इनको कोर्स के दौरान यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष अशोक कुमार गदिया, यूनिवर्सिटी फैकेल्टी मेंबर महावीर वैरागी, महावीर स्वर्णकार, शोएब खान ने उक्त बीएससी नर्सिंग कोर्स की RNC व INC से पूर्ण मान्यता होने के डॉक्यूमेंट बताए थे। उनका कहना है कि उन्हें डॉक्यूमेंट्स दिखाकर भरोसा दिलाया गया था कि कोर्स पूरी तरह मान्यता प्राप्त है। जब उन्होंने 19 अक्टूबर 2024 को प्रशासन से सवाल किया तो उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया। बाद में आश्वासन दिया गया कि दो महीने में मान्यता न मिलने पर उन्हें किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश दिलाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद 39 छात्रों को फिर से निलंबित कर दिया गया। जीएनएम कोर्स पर भी सवाल स्टूडेंट्स का आरोप है कि जीएनएम नर्सिंग कोर्स के साथ भी यही स्थिति है। शीतल शर्मा सहित 26 छात्रों को इस कोर्स में एडमिशन दिया गया, जबकि इसे भी RNC से मान्यता नहीं मिली थी। छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी का नाम RNC की वेबसाइट पर देखकर उन्होंने विश्वास किया, लेकिन बाद में पता चला कि वास्तविक मान्यता नहीं थी। जीएनएम कोर्स में पढ़ रहे करीब 22 छात्रों ने भी अब मान्यता को लेकर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शन और निलंबन से बिगड़ा माहौल डिग्री की मान्यता की मांग को लेकर छात्र लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे थे। इससे पहले भी 33 छात्रों को निलंबित किया गया था। छात्र जयपुर जाकर कई जनप्रतिनिधियों से मिले थे। उनके जयपुर से आने के बाद उन्हें पहले अंदर नहीं आने दिया जा रहा था। जिससे नाराज होकर स्टूडेंट्स ने मंगलवार को जब मैस बंद किया गया तो अन्य छात्रों ने नाराजगी जताई और तोड़फोड़ की घटना हुई। इसी दौरान छात्रों के बीच मारपीट हो गई। माहौल बिगड़ने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्टूडेंट्स के खिलाफ थाने में दो मामला दर्ज कराया। पुलिस पहुंची, हालात काबू में बुधवार को स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई थी, जिसके बाद एडिशनल एसपी सरिता सिंह सहित कई थानों का पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा। पुलिस ने हालात को काबू में किया। एडिशनल एसपी सरिता सिंह ने बताया कि फिलहाल स्थिति शांत है। एहतियात के तौर पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अवकाश घोषित कर दिया है और अधिकांश छात्र अपने घर लौट रहे हैं। जिन स्टूडेंट्स ने रिपोर्ट दी है, उसके आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है।
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