किसानों ने गुजरात से सीखी तकनीक:अब फ्रेंच फ्राइज और चिप्स बनाने के लिए उगा रहे सैंटाना आलू, कंपनी से एमओयू
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आदिवासी अंचल उदयपुर जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए नकदी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और नई सोच के साथ ये किसान गेहूं, सरसों और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों के स्थान पर अधिक लाभ देने वाली फसलों की खेती अपना रहे हैं। इसी क्रम में फलासिया तहसील के अंबासा गांव के किसानों ने सैंटाना किस्म के आलू की खेती शुरू कर एक नई मिसाल कायम की है, जिससे फ्रेंच फ्राइज और वेफर्स (चिप्स) बनाना आसान होता है। अंबासा गांव के 18 किसानों ने गुजरात और आसपास के राज्यों में सैंटाना आलू की सफल खेती देखी। इसके तरीके और फायदे समझने के बाद उन्होंने इसे अपनाने का निर्णय लिया। किसानों ने एक से दो वर्ष तक इस फसल की तकनीक को समझा और फिर 23 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बुवाई की। गुजरात बॉर्डर पर स्थित गांव होने का लाभ उठाते हुए किसानों ने वहां की एक कंपनी से अनुबंध (एमओयू) किया, जिससे उत्पादन के लिए सीधा और सुनिश्चित बाजार मिल सका। ड्रिप इरिगेशन अपनाई, 90 दिन में फसल, आमदनी भी बेहतर किसानों ने पारंपरिक तरीकों को छोड़कर ड्रिप इरिगेशन और मेड़ बनाकर खेती की। इससे मिट्टी सख्त नहीं होती और आलू का आकार भी बेहतर बनता है। कम पानी में बेहतर उत्पादन मिला। उद्यान विभाग के उपनिदेशक कैलाश चंद्र शर्मा के अनुसार आलू की खेती में यह तकनीक सबसे कारगर है। सरकार की ओर से 2 हेक्टेयर तक 75% और उससे अधिक पर 70% तक अनुदान भी दिया जा रहा है। यह फसल करीब 90 दिन में तैयार हो जाती है। किसान आलू गुजरात भेज रहे हैं। जहां 20 किलो का एक बॉक्स 316 रुपए में बेचा जा रहा है। सभी खर्च निकालने के बाद किसानों को प्रति बीघा 50 से 60 हजार रुपए तक आय हो रही है। होटल-रेस्त्रां में फ्रेंच फ्राइज-वेफर्स का उठाव, इसलिए खासी डिमांड
सैंटाना आलू का उपयोग फ्रेंच फ्राइज और चिप्स बनाने के लिए होता है। इसमें शुष्क पदार्थ होते हैं। इससे यह कम तेल सोखता है। इसके कंद एक समान, लंबे और अंडाकार होते हैं। यह तलने के बाद सुनहरा और कुरकुरा फ्राइज देता है। क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही सैंटाना की खेती
अंबासा के किसान अल्पेश कुमार पटेल बताते हैं कि नई तकनीक और सही बाजार से खेती में लाभ कमाया जा सकता है। सैंटाना आलू की खेती अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी आर्थिक बदलाव की राह खोल रही है।
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