बच्चों के साथ हो रहा यौन शोषण:5 सालों में 61 से ज्यादा बच्चों के साथ स्कूलों में ही हुआ यौन शोषण

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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बीते पांच सालों में 61 जगह बच्चों के साथ शिक्षकों की ओर से छेड़छाड़, दुष्कर्म, कुकर्म जैसे मामले सामने आए हैं। विधानसभा में विधायक संदीश शर्मा की ओर से पूछे तारांकित प्रश्न संख्या 1353 के जवाब में शिक्षा विभाग ने ये तथ्य विधायक पेश किए। ये आंकड़े भी 2024 के अंत तक के हैं। 2025 के मामले अभी जोड़े ही नहीं गए जिसमें चित्तौड़गढ़ जैसे चर्चित मामले इसमें शामिल नहीं हैं। दरअसल विधायक संदीप शर्मा ने जब सवाल उठाया तो पूरे प्रदेश से सूची बननी शुरू हुई कि कब कहां कितने मामले सामने आए। सदन में 56 मामलों की सूची शिक्षक के नाम, उसके पदस्थापन और उस पर लिए गए एक्शन का विवरण दिया गया। सामने आया कि इसमें एक मामला बीकानेर का भी है जबकि जो जिले केस वार बताए गए उसमें बीकानेर में मामलों की संख्या शून्य बताई गई। इसमें चित्तौड़गढ़ जैसा चर्चित मामला शामिल नहीं है जिसमें एक ही शिक्षक पर करीब 23 बच्चों ने गंदी हरकत करने का आरोप लगाया था। सरकार की ओर से दी गई जानकारी में संबंधित शिक्षकों पर लिए गए एक्शन का भी विवरण है। जिसमें 8 मामलों में तो पूरा मामला ही ड्रॉप बताया गया। 36 मामले एक्शन की प्रक्रिया में पेंडिंग हैं। 9 के आसपास शिक्षकों को सजा दी गई है। गहन पड़ताल के बाद 9 लोगों को जांच के बाद बहाल भी किया जा चुका है। दो को राज्य सेवा पदच्युत कर दिया गया। विधानसभा में जो आंकड़े रखे गए वो जून 2024 तक के हैं और अब तक इन मामलों में काफी तब्दीली इसलिए भी आने की गुंजाइश है कि एक साल में नए मामले भी सामने आ गए और पुराने मामलों का भी निस्तारण हुआ। क्योंकि विधानसभा की वेबसाइट पर तीसरे सत्र के सवाल और जवाब शो नहीं कर रहे। अभी तक दूसरे सत्र के ही जवाब आम आदमी देख सकता है। महिला शिक्षकों के लिए तो इंतजार, बच्चों के लिए क्या सरकार में महिला कर्मचारियों से कोई दुर्व्यहार ना हो इसके लिए हर विभाग, जिला और प्रदेश स्तर कमेटियां होती हैं जिसमें ज्यादातर उसकी मुखिया महिलाएं ही होती हैं मगर स्कूलों में ऐसी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। हर सरकारी और निजी स्कूल में बाल सुरक्षा व्यवस्था जैसी कमेटियां होनी अनिवार्य हैं। हालांकि​ राजस्थान में इस व्यवस्था का नियम तो है जिसमें प्रिंसिपल अध्यक्ष, सीनियर टीचर, एक अभिभावक, एक काउंसर समेत अन्य सदस्य होते हैं मगर ज्यादातर स्कूलों में इसकी सालभर में कोई मीटिंग तक नहीं होती। इस कमेटी का काम है गुड टच-बैड टच के बारे में बच्चों को जानकारी देना। शिकायतकर्ता की पहचान छुपाना, उसे सुरक्षा देने जैसे नियम हैं मगर स्कूलों में इसकी पालना बहुत कम है। कायदे से हर स्कूल में एक गोपनीय पेटी होनी चाहिए जिसमें बच्चे अपने मन की बात स्कूल तक अपनी पहचान छुपाए बिना पहुंचा सके। हालांकि मामला सामने आने पर तो राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर के कानून अपने तरीके से कार्यवाही करते हैं। शिक्षा विभाग को नहीं पता कहां कमेटी नहीं बनी शिक्षा विभाग के पास अभी इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं कि कौन कौन से स्कूलों में कमेटियां नहीं बनी और जहां बनी उनकी नियमित बैठक का क्या प्रावधान है। बैठकें होती भी या नहीं। क्योंकि कुछ स्कूलों में तो प्रिंसिपल और टीचर्स का इतना खौफ होता है कि बच्चे चाहकर भी कुछ बोल नहीं पाते।

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संभाग स्तरीय कैंसर अस्पताल की बड़ी सौगात:राज्य बजट 11 को, उदयपुर को कैंसर अस्पताल, आयड़ पुलिस थाना, सेटेलाइट हॉस्पिटल की उम्मीद

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राजस्थान सरकार उदयपुर सहित प्रदेशवासियों को वार्षिक बजट-2026-27 की सौगात 11 फरवरी को देगी। बजट से उदयपुर को पहले संभाग स्तरीय कैंसर अस्पताल की बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद है। शहर विधायक ताराचंद जैन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पास संभाग स्तरीय कैंसर अस्पताल, पुलिस चौकी आयड़ को थाने में क्रमोन्नत कराने, मुखर्जी चौक और किशनपोल में पुलिस चौकी स्थापित कराने के प्रस्ताव भेजे हैं। दूसरी ओर, ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा ने दक्षिण विस्तार में सेटेलाइट हॉस्पिटल व गुलाबबाग की तर्ज पर नया बाग, राजकीय कन्या महाविद्यालय और माइनिंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खुलवाने के प्रस्ताव भेजे। इसके अलावा प्रताप नगर-बलीचा मार्ग पर तीन नए ओवरब्रिज बनाने, कन्वेंशन सेंटर स्थापित कराने, रानी रोड का री-डेवलपमेंट कराने जैसे विकास कार्यों के प्रस्ताव बजट में शामिल कराने के लिए भेजे गए हैं। कैंसर अस्पताल : संभाग में 1.28 लाख कैंसर मरीज, नहीं जाना पड़ेगा गुजरात व महाराष्ट्र
उदयपुर संभाग में पिछले 8 साल में कैंसर रोगियों की संख्या 1.28 लाख तक पहुंच चुकी है। पीड़ितों में महिलाओं की संख्या 8 प्रतिशत है। कैंसर मरीजों को अभी निशुल्क इलाज अकेले एमबी अस्पताल के कैंसर विभाग में ही मिलता है। नया कैंसर अस्पताल खुलने से मेवाड़-वागड़ के मरीजों को इलाज कराने के लिए गुजरात-महाराष्ट्र व जयपुर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आयड़ थाना : संवेदनशील क्षेत्र, मॉनिटरिंग बढ़ेगी
क्षेत्र क्राइम की दृष्टि से संवेदनशील है। यहां घनी आबादी है। सुरक्षा-व्यवस्था व आपसी सद्भाव के लिए पुलिस जवानों-अधिकारियों की मॉनिटरिंग जरूरी है। थाना स्थापित होने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। सेटेलाइट हॉस्पिटल: दक्षिण विस्तार में देगा राहत
यहां की 50 हजार से ज्यादा आबादी को इलाज कराने के लिए हिरणमगरी व एमबी अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा। चौकी : मुखर्जी चौक व किशनपोल में नियमित चौकसी हो सकेगी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी
प्रशासनिक दृष्टि से मुखर्जी चौक और किशनपोल क्षेत्र भी अतिसंवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं। यहां पुलिस की नियमित चौकसी बेहद जरूरी है। चौकी स्थापित होने से टेलर कन्हैयालाल साहू जैसी आतंकी हत्या जैसी व अन्य वारदातों को समय पर रोका जा सकेगा। गर्ल्स कॉलेज: बेटियां घर के पास पढ़ सकेंगी
यह उदयपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का पहला कन्या कॉलेज होगा। यह खुला तो उदयपुर ग्रामीण की बालिकाओं को उनके घरों के पास ही उच्च शिक्षा प्राप्त हो सकेगी। नया गार्डन – दक्षिण विस्तार में ऑक्सीजन पॉकेट बनने से 50 हजार की आबादी को शुद्ध हवा मिलेगी
दक्षिण विस्तार में 50 हजार आबादी के बीच ऑक्सीजन हब पैदा होने से शुद्ध वायु के लिए भविष्य की राह आसान होगी। क्षेत्र की सुंदरता में भी चार चांद लगेंगे। कन्वेंशन सेंटर इसके तहत आलीशान ऑडिटोरियम, मंच, कमरों का निर्माण कराया जाएगा। ताकि, कला, संस्कृति, सामाजिक कार्यों को नया मंच उपलब्ध हो सके। इससे उदयपुर माइस सेंटर के रूप में प्रदेश में नई पहचान बना सकेगा।

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Shahid Kapoor: Romance is Lifes Most Beautiful Thing

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4 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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वैलेंटाइन डे पर रिलीज हो रही शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की फिल्म ‘ओ रोमियो’ सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि गहराई, इमोशन और जटिल किरदारों की दुनिया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी ने विशाल भारद्वाज के साथ काम करने का अनुभव साझा किया।

तृप्ति ने बताया कि फिल्म में अफ्शा जैसे इंटर्नल किरदार को पर्दे पर उतारना कितना चुनौतीपूर्ण था। शाहिद ने अपने अभिनय के नजरिए, रोमांस की परिभाषा और ‘कबीर सिंह’ व ‘एनिमल पार्क’ को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी बेबाकी से बात की, वहीं तृप्ति ने को-एक्टर के तौर पर शाहिद से मिली सीख और अपने सफर की खूबसूरत झलक साझा की। पेश है बातचीत के कुछ और खास अंश..

सवाल:’ओ रोमियो’ की स्क्रिप्ट जब पहली बार सुनी, तो उस वक्त आपके मन में क्या चल रहा था और आपको इस फिल्म के बारे में किसने बताया?

जवाब/तृप्ति डिमरी: मुझे विशाल सर का कॉल आया था और मैं उनसे मिलने ऑफिस गई थी। मैं पहले से ही बहुत एक्साइटेड थी क्योंकि मैं हमेशा से उनके साथ काम करना चाहती थी। जब उन्होंने कहानी सुनाई, तो मुझे तुरंत लगा कि यह कुछ अलग है।

कहानी से भी जुड़ाव हुआ और मेरे किरदार अफ्शा से भी। उस दिन से लेकर आखिरी शूट तक पूरी जर्नी बहुत खूबसूरत रही। कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनमें काम करते हुए आप चाहते हैं कि यह सफर कभी खत्म ही न हो। ‘ओ रोमियो’ मेरे लिए वैसी ही फिल्म है।

सवाल: शाहिद जब आपने ने स्क्रिप्ट सुनी तब आपका पहला रिएक्शन क्या था?

जवाब/शाहिद कपूर: मेरे और विशाल भारद्वाज सर के बीच रिश्ता बहुत पुराना है, लेकिन करीब सात आठ साल बाद हम किसी फिल्म के लिए फिर साथ आए। इसके बावजूद मैं हर स्क्रिप्ट को बिल्कुल न्यूट्रल नजरिए से सुनता हूं। मेरे लिए सबसे जरूरी यह होता है कि कहानी और किरदार मुझसे जुड़ें। अगर वह कनेक्शन नहीं बनता, तो फिल्म करना मुझे ईमानदार नहीं लगता।

जब विशाल सर ने ‘ओ रोमियो’ की स्क्रिप्ट खत्म की, तो मुझे लगा कि इसमें वह गहराई और इमोशनल लेयर है, जो मुझे एक एक्टर के तौर पर एक्साइट करती है। इस बार उन्होंने मास और क्लास दोनों को ध्यान में रखते हुए कहानी कही है।

सवाल: तृप्ति, आपने कई बार कहा है कि शाहिद से आपने बहुत कुछ सीखा। एक को-एक्टर के तौर पर उनकी कौन सी बातें आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं?

जवाब/तृप्ति डिमरी: सिर्फ दो खूबियां गिनाना मुश्किल है। लेकिन सबसे पहले उनकी डिसिप्लिन। वह एक परफेक्शनिस्ट हैं। अगर उन्हें लगता है कि सीन और बेहतर हो सकता है, तो वह तब तक करते रहते हैं जब तक खुद पूरी तरह संतुष्ट न हों। दूसरी बात यह है कि वह हर टेक में कुछ नया लेकर आते हैं। कभी ऐसा नहीं लगता कि वही चीज दोहराई जा रही है।

इससे सामने वाले एक्टर की परफॉर्मेंस भी बेहतर हो जाती है। और सबसे अहम बात यह है कि वह अपने को एक्टर को बहुत सिक्योर और रिलैक्स महसूस कराते हैं। एक एक्टर और एक इंसान, दोनों रूपों में उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।

सवाल: अफ्शा का किरदार निभाते वक्त आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?

जवाब/तृप्ति डिमरी: अफ्शा एक बहुत इंटर्नल किरदार है। उसके भीतर दर्द, गुस्सा और उदासी है, लेकिन वह बाहर बहुत कम दिखाई देती है। उस बैलेंस को पकड़ना आसान नहीं था। मेरे एक्टिंग कोच अतुल मोंगिया और विशाल सर के साथ कई लंबे सेशन्स हुए। शुरुआत में मुझे उसे समझने में वक्त लगा, लेकिन जैसे जैसे शूट आगे बढ़ा, वैसे वैसे मैं किरदार के और करीब जाती गई।

मुझे लगता है कि अगर कोई किरदार आपको चैलेंज नहीं करता, तो उसमें मजा नहीं है। एक्टर के तौर पर ग्रोथ वहीं से शुरू होती है।

सवाल: आप दोनों की पहली मुलाकात और शुरुआती कामकाजी रिश्ता कैसा रहा?

जवाब/तृप्ति डिमरी: हम पहली बार रीडिंग के दौरान मिले थे। उस वक्त सबका फोकस सिर्फ स्क्रिप्ट और किरदार पर था। किसी को जज करने का सवाल ही नहीं था।

शाहिद कपूर: पहले ही दिन हमारा एक अहम सीन था और मैंने देखा कि तृप्ति पूरी तरह अपने किरदार में थीं। जब आप किसी एक्टर को इतने कमिटमेंट के साथ काम करते देखते हैं, तो एक अलग तरह की संतुष्टि मिलती है।

सवाल:फिल्म वैलेंटाइन डे पर रिलीज हो रही है। लोग जानना चाहते हैं कि एक हार्डकोर रोमांटिक इंसान की क्या-क्या खूबियां होती हैं। क्या आप खुद को रोमांटिक मानते हैं?

जवाब/शाहिद कपूर: मैं अपने बारे में खुद कमेंट नहीं कर सकता। इसके लिए आपको किसी और से पूछना पड़ेगा। मुझे नहीं पता मैं कितना रोमांटिक हूं। लेकिन हां, रोमांस एक बहुत खूबसूरत चीज है। मोहब्बत जिंदगी की सबसे खूबसूरत चीजों में से एक है, बिना किसी शक के। तो अगर पूछें, तो मैं कहूंगा कि हां, मैं रोमांटिक हूं।

तृप्ति डिमरी: मैं रोमांटिक भी हूं और थोड़ी रियलिस्ट भी। दोनों का बैलेंस जरूरी है।

सवाल: आप दोनों का एक कॉमन कनेक्शन संदीप रेड्डी वांगा भी हैं। फैंस लगातार कहते हैं कि अगर एनिमल पार्क बनी, तो उसमें कबीर सिंह की एंट्री होनी चाहिए। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

जवाब/शाहिद कपूर: पता नहीं यार, शायद मैं इस सवाल का जवाब देने के लिए सही इंसान नहीं हूं। लेकिन सच यह है कि जब एनिमल बन रही थी, तब संदीप मुझसे मिलने आए थे। उनकी इच्छा थी कि कबीर सिंह का एक सीन उस दुनिया में हो। कुछ वजहों से, डेट्स और बाकी चीजों की वजह से, वह हो नहीं पाया। लेकिन उनके दिमाग में यह ख्याल जरूर था।

आगे क्या होगा, यह पूरी तरह संदीप पर है। वह दुनिया उनकी है, किरदार उनके हैं। वह जो सही समझेंगे, वही करेंगे। फैंस चाहते हैं, यह बात अच्छी भी लगती है।

तृप्ति डिमरी: जब दर्शक किसी किरदार को इतने समय तक याद रखते हैं और दोबारा देखना चाहते हैं, तो यह दिखाता है कि वह किरदार उनके दिल में बस चुका है।

सवाल: हाल ही में अरिजीत सिंह ने इंडस्ट्री से ब्रेक लिया। इस पर आपकी क्या राय है?

जवाब/शाहिद कपूर: हर कलाकार की अपनी निजी यात्रा होती है। आर्ट बहुत पर्सनल चीज है। अगर कोई कलाकार अपने लिए थोड़ा सुकून चाहता है, तो वह उसका हक है। अरिजीत ने दुनिया को बहुत सुकून दिया है।

तृप्ति डिमरी: यह फैसले बहुत निजी होते हैं और हमें उन्हें समझदारी के साथ देखना चाहिए।

सवाल: कबीर सिंह आज भी आपके सबसे चर्चित किरदारों में से एक है। एनिमल पार्क में उसकी एंट्री को लेकर जो चर्चा है, उसे आप कैसे देखते हैं?

जवाब/शाहिद कपूर: यह सच है कि जब एनिमल बन रही थी, तब संदीप रेड्डी वांगा मुझसे मिलने आए थे। वह चाहते थे कि कबीर सिंह का एक सीन उस फिल्म की दुनिया में हो। लेकिन कई बार हालात ऐसे बनते हैं कि चीजें चाहकर भी नहीं हो पातीं। कुछ डेट्स का इशू था, कुछ दूसरी वजहें थीं।

यह पूरी तरह डायरेक्टर का फैसला होता है। वह उनकी दुनिया है, उनके किरदार हैं। अगर उन्हें लगेगा कि किसी किरदार की एंट्री कहानी को और मजबूत करती है, तो वह जरूर करेंगे। एक एक्टर के तौर पर यह जानकर अच्छा लगता है कि लोग आज भी उन किरदारों से इतना जुड़ाव महसूस करते हैं।

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राजस्थान में पारा 32 डिग्री के ऊपर पहुंचा:फतेहपुर, नागौर सबसे ठंडे; जानिए, अगले 5 दिन तक कैसा रहेगा मौसम

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राजस्थान में मौसम के बदलाव का दौर शुरू होने के साथ ही तापमान बढ़ने लगा है। शुक्रवार को प्रदेश के सभी शहरों में दिन में तेज धूप रही, जिससे अधिकतम तापमान में 1 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई। प्रदेश में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया। तेज धूप से दिन में लोगों को हल्की गर्मी महसूस हुई, जबकि सुबह-शाम तापमान में बड़ी गिरावट होने से तेज सर्दी रही। मौसम विशेषज्ञों ने राज्य में अगले 5 दिनों तक इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान जताया है। पिछले 24 घंटों में जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर, जयपुर, अजमेर, उदयपुर समेत तमाम शहरों में आसमान साफ रहा। शुक्रवार सुबह से प्रदेश में अच्छी धूप रही और दिन चढ़ने के साथ सूरज की तपिश बढ़ने लगी। बाड़मेर में अधिकतम तापमान (2.3 डिग्री बढ़कर) 32.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जालौर, पाली में अधिकतम तापमान 30-30 डिग्री सेल्सियस, जैसलमेर 29.6 डिग्री सेल्सियस, जोधपुर में 29.8 डिग्री सेल्सियस, डूंगरपुर, दौसा में 29.1 डिग्री सेल्सियस, चित्तौड़गढ़ में 29.8 डिग्री सेल्सियस, उदयपुर में 29 डिग्री सेल्सियस और बीकानेर में 28.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इन शहरों के अलावा जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, पिलानी, फलोदी, गंगानगर में भी कल दिन में हल्की गर्मी रही, जहां अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। फतेहपुर, नागौर सबसे ठंडे, पारा 5 डिग्री से नीचे दिन में तेज धूप और हल्की गर्मी से पहले शुक्रवार को सुबह प्रदेश में तेज सर्दी रही। दौसा, करौली, फतेहपुर, नागौर, सीकर में कल न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे दर्ज हुआ। सबसे ज्यादा ठंडे इलाके फतेहपुर और नागौर रहे, जहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

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