भारतीय सर्वेक्षण विभाग:जमीन की पैमाइश में अब इंच भर भी गलती की गुंजाइश नहीं रहेगी, प्रदेश के सभी 41 जिलों में लगेंगे 84 नए सैटेलाइट स्टेशन
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अब जमीन की पैमाइश में इंच भर की भी गलती की गुंजाइश नहीं बचेगी। राजस्थान में जमीन विवाद, सीमांकन और सरकारी परियोजनाओं के सर्वे का चेहरा बदलने जा रहा है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग पूरे प्रदेश में हाईटेक CORS नेटवर्क का बड़ा विस्तार कर रहा है, जिससे सेटेलाइट आधारित डिजिटल बाउंड्री सिस्टम लागू होगा। इसके जरिए जमीन की लोकेशन 3 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता से दर्ज की जा सकेगी। प्रदेश में पहले से सक्रिय 88 स्टेशनों के अलावा 84 नए स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। भरतपुर व अजमेर सहित कई जिलों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारतीय सर्वेक्षण विभाग की टीम अब जिलों में सरकारी भवनों और परिसरों में 5×5 मीटर भूमि का चयन करेगी, जहां ये स्थायी स्टेशन लगाए जाएंगे। सिस्टम एक्टिव होते ही जमीन की पैमाइश, नक्शा निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का सर्वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल जमीन विवाद घटेंगे बल्कि राजस्व रिकॉर्ड भी तकनीकी रूप से मजबूत होंगे। सर्वे ऑफ इंडिया ने प्रदेश के 41 प्रमुख क्षेत्रों को इस नेटवर्क विस्तार में शामिल किया है।सर्वे ऑफ इंडिया की तकनीकी टीम उन सरकारी परिसरों को प्राथमिकता देगी जो तकनीकी मापदंडों पर खरे उतरते हों। इनमें मुख्य रूप से सरकारी स्कूल परिसर, सुरक्षित शासकीय भवन या खाली पड़े सरकारी भूखंड शामिल होंगे । जमीन उपलब्ध होने के बाद यहाँ ‘जियोडेटिक एसेट्स’स्थापित किए जाएंगे, जिससे राज्य और राष्ट्र स्तर की परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके ।इससे जमीन की सही पैमाइश होगी। ‘स्वामित्व’ और ‘नक्शा’ जैसे प्रोजेक्ट्स के तहत ग्रामीण इलाकों में घरों और जमीनों का जो सर्वे होगा, वह पूरी तरह डिजिटल और अचूक होगा। पहले जिस सर्वे में हफ़्तों लगते थे, इस तकनीक से वह काम अब बहुत कम समय में पूरा हो सकेगा। जीपीएस आधारित सटीक लोकेशन होने से जमीन के सीमा विवादों में कमी आएगी। तकनीक का कमाल: 3 से 5 सेमी. तक की अचूक शुद्धता हाईटेक सीओआरएस सिस्टम के जरिए किसी भी जगह की भौगोलिक स्थिति अब 3 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता से तुरंत मापी जा सकेगी। आने वाले समय में जमीन सर्वे, सीमांकन और बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स की बुनियाद बनेगा। ‘स्वामित्व’, ‘नक्शा’, ‘अमृत’ और ‘रेवेन्यू लैंड मॉडर्नाइजेशन’ जैसे राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय अभियानों में यही डेटा आधार बनेगा, जिससे सर्वे और मैपिंग कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों में बड़ा सुधार होगा। सीओआरएस (कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन) एक स्थायी सेटेलाइट आधारित ढांचा है, जो रियल टाइम लोकेशन डेटा उपलब्ध कराता है। इसके सक्रिय होने से जमीन के नक्शों में त्रुटियां कम होंगी, राजस्व रिकॉर्ड अधिक सटीक होंगे।
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