पहली बार 196 निकायों में सरकारी प्रशासक लगे:ओबीसी आयोग के आंकड़े नहीं आने से रुके चुनाव, 15 अप्रैल तक चुनाव होना मुश्किल

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राजस्थान के पुराने सभी शहरी निकायों पर प्रशासनिक नियंत्रण हो चुका है। ऐसी स्थिति पहली बार बनी है कि चुने हुए मेयर, सभापति की जगह पुराने 196 में सरकारी प्रशासक लगे हैं। पुराने निकायों में मेयर, सभापति हटाए जा चुके। चुनावी प्रक्रिया ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के इंतजार में रुकी है। सुप्रीम कोर्ट की बंदिश है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आए बिना राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव नहीं कराए जा सकते। इसी उलझन में सरकार फंस गई है। ओबीसी आयोग बार बार समय समय मांग रहा है। सरकार समय बढ़ाती जा रही। तीसरी बार समय बढ़ा दिया। अब 31 मार्च 2026 तक का समय दे दिया। जानकारों का कहना है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट 309 निकायों के चुनाव में बाधा बन सकती है। आयोग की रिपोर्ट के बाद सभी निकायों की आरक्षण लाटरी भी निकाली जानी है। उसमें ओबीसी की सीटें तय होनी है। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर है कि 15 अप्रैल तक हर हाल में निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराए जाए। वहीं प्रदेश के पुराने सभी 196 नगरीय का कार्यकाल समाप्त हो गया है। अंतिम पायदान में चूरू के शेष बचे निकायों में भी शुक्रवार रात से प्रशासक लगाए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि हमारे पास ऐसा कोई काम बाकी नहीं है, जिससे चुनाव टाले जाए। आयोग की रिपोर्ट बाकी है। वास्तविक आंकड़े बिना चुनाव नहीं
प्रदेश में 309 नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव कराए जाने हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार जब तक स्टेट ओबीसी कमिशन सर्वे और परीक्षण के माध्यम से ओबीसी की वास्तविक स्थिति और आंकड़े उपलब्ध नहीं कराता, तब तक राजनीतिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता। इस कारण नगरीय निकाय चुनाव अब पूरी तरह ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर है। मंत्री ने कहा- ओबीसी आयोग रिपोर्ट दे तो 3 दिन में लाटरी निकाल देंगे
नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबरसिंह खर्रा का कहना है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने के 3 दिन के अंदर आरक्षण की लाटरी निकाल लेंगे। इसके बाद पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के पास होगी। आयोग ही चुनाव की नई तिथि तय करेगा।

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