पदमप्रभु का मोक्ष कल्याणक मनाया

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कासं|सवाईमाधोपुर आर्यिका सप्तमती माताजी ससंघ के सान्निध्य में सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से गुरुवार को जैन धर्म के छठें तीर्थंकर भगवान पदमप्रभु का मोक्ष कल्याणक उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर नगरपरिषद क्षेत्र के जिनालयों में श्रावक जिनाभिषेक, शांतिधारा व पूजन. भक्ति के लिए एकत्रित हुए। इस मौके पर चमत्कार जी में ससंघ विराजित आर्यिका सप्तमती माताजी ने भगवान पदमप्रभु के मोक्ष प्राप्ति प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए धर्म, संस्कार और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतार कर मनुष्य पर्याय को सार्थक करने पर जोर दिया। प्रवीण जैन ने बताया कि महोत्सव की शुरुआत भक्ति व आस्था के रंग में डूबे अहिंसा सर्कल आलनपुर स्थित दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चमत्कारजी में आशीष जैन शास्त्री के मंत्रोचार के बीच जिनेंद्र भक्तों ने अशुभ कर्मों की निर्जरा, शुभ कर्मों के आस्रव एवं परिणामों में निर्मलता की भावना प्रकट करते हुए जिनेंद्र देव के किए गए अभिषेक व जगत कल्याण की मंगल कामनार्थ की गई शांतिधारा से हुई। इसके बाद अष्टद्रव्यों से भगवान पदमप्रभु की भक्तिपूर्वक पूजन की गई। निर्वाण कांड का उच्चारण कर जन्म मरण के चक्र से निकलने की भावना प्रकट करते हुए आर्यिका माताजी के मंत्रोचार के बीच मोक्ष के प्रतीक स्वरूप निर्वाण लड्डू (मोदक) अर्पण किया। लड्डू अर्पण करते ही जिनालय भगवान भगवान पदमप्रभु के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। साथ ही संयम, करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

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समस्याओं को लेकर निर्माण मजदूर यूनियन ने श्रम आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

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सवाईमाधोपुर| जिले में पंजीकृत निर्माण मजदूरों को श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने से मजदूरों में रोष व्याप्त है। इसको लेकर निर्माण मजदूर यूनियन (एटक से सम्बद्ध) सवाई माधोपुर की ओर से सहायक श्रम आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर मजदूरों की लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की गई। यूनियन के प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन में बताया गया कि मजदूरों की मृत्यु क्लेम की एफडी तथा प्रसूति सहायता राशि एकमुश्त प्रदान नहीं की जा रही। वहीं शुभ शक्ति योजना के लंबित आवेदनों का निस्तारण कर योजना को पुनः चालू करने,श्रम विभाग में संचालित एनपीएस योजना को दोबारा लागू करने की मांग भी उठाई गई। ज्ञापन में पंजीकृत श्रमिकों को सेफ्टी उपकरण जूता, हेलमेट, सुरक्षा टूल किट के लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि देने, सरकारी व गैर सरकारी गैस सिलेंडर पर सब्सिडी प्रदान करने तथा निरस्त आवेदनों की अपील का 30 दिन में निस्तारण करने, डीबीटी के कारण जिन मजदूरों की राशि अटकी हुई है, उनका तुरंत निस्तारण करने, संगठित व असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को ठेकेदारों व मकान मालिकों द्वारा मजदूरी नहीं दिए जाने पर त्वरित कार्रवाई करने, बिना सुरक्षा उपकरण के बिल्डिंगों में कार्य कराने पर ठेकेदारों व मकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने, श्रम विभाग की सभी योजनाओं के आवेदन प्रपत्र श्रम कार्यालय में चस्पा करने तथा यूनियन के प्रमाण पत्र के आधार पर पंजीकृत मजदूरों को योजनाओं का लाभ दिए जाने की मांग की। इस दौरान मजदूर यूनियन प्रतिनिधि मंडल सवाई माधोपुर के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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फिर से चलने लगा दिलराज मीणा

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सवाईमाधोपुर | बिशनपुर निवासी 19 वर्षीय दिलराज मीणा को रीड की हड्डी में चोट लगने की वजह से स्पाइनल कॉर्ड का ऑपरेशन करवाना पड़ा। जयपुर के एक न्यूरो सर्जन ने ऑपरेशन किया और किसी न्यूरो फिजियोथैरेपी के विशेषज्ञ फिजियो थैरेपिस्ट डॉक्टर से मिलने की सलाह दी। इस पर रोगी रणथंभौर रोड स्थित श्री सांई फिजियोथैरेपी होम्योपैथी क्लिनिक के डॉक्टर अमित जैमिनी से मिला। जांच के बाद उन्होंने एडवांस फिजियोथैरेपी ट्रीटमेंट शुरू किया और मात्र 40 दिन में ही दिलराज व्हीलचेयर छोड़कर अपने दोनों पैरों पर चलने में सक्षम हो गया।

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रीजनल स्कूल के विद्यार्थियों को थाने में कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी

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सवाईमाधोपुर| जिला मुख्यालय के बाल मंदिर कॉलोनी स्थित रीजनल इंग्लिश सीनियर सेकंडरी स्कूल के विद्यार्थियों ने थाना मानटाउन का भ्रमण कर पुलिस की कार्य प्रणाली और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी ली। भ्रमण मिशन निडर के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पुलिस व्यवस्था से परिचित कराना और उन्हें कानूनी रूप से जागरूक बनाना था। थाना अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता, एएसआई बलबीर सिंह तथा एचएम मोहनलाल ने विद्यार्थियों को पुलिस की कार्य प्रणाली, अपराध नियंत्रण, रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया, आत्मरक्षा के उपाय, साइबर क्राइम,यातायात नियमों तथा महिला हेल्पलाइन की विस्तार से जानकारी दी। विद्यार्थियों को गुड टच और बेड टच के बारे में भी बताया गया।

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खबर हटके- अमेरिका में जैन धर्म अपनाने लगे छात्र!:माफिया को पकड़ने के लिए ₹1 का इनाम; ‘तवायफ’ नाम गांव के लिए बना मुसीबत

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कई छात्र खाना खाने से बचने के लिए खुद को जैन बताने लगे हैं। वहीं, पुलिस ने एक शराब माफिया पर सिर्फ 1 रुपए का इनाम घोषित किया। उधर,एक गांव का नाम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… ************* रिसर्च सहयोग: किशन कुमार खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

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Shahid Kapoor Struggle Success Story; Background Dancer

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7 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी/वीरेंद्र मिश्र

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शाहिद कपूर का मानना है कि अच्छा काम सफलता की गारंटी नहीं होती है। - Dainik Bhaskar

शाहिद कपूर का मानना है कि अच्छा काम सफलता की गारंटी नहीं होती है।

बॉलीवुड में सफलता की चमक अक्सर संघर्ष की लंबी छाया को छुपा देती है। लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो न सिर्फ प्रेरित करती हैं बल्कि यह भी सिखाती हैं कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल मिल ही जाती है। अभिनेता शाहिद कपूर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ऐसा सफर जिसमें बचपन का अकेलापन, करियर की अनिश्चितता और लगातार रिजेक्शन मिले।

शाहिद कपूर ने फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम। ऑडिशन की लाइन में घंटों खड़े रहते थे। उन्हे यह कहकर रिजेक्ट कर दिया जाता था कि उनका लुक हीरो मटेरियल नहीं। यहां तक शाहिद के पास स्ट्रगल के दिनों में अच्छे कपड़े खरीदने के पैसे तक नहीं थे, लेकिन शाहिद ने अपनी मेहनत और टैलेंट के बल पर इंडस्ट्री में न सिर्फ अपनी अलग जगह बनाई, बल्कि आज अपनी शर्तों पर काम करते हैं।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानेंगे शाहिद कपूर के करियर और निजी जीवन से जुड़ी ऐसी ही कुछ और खास बातें..

शाहिद 3 साल के थे, तभी उनके पेरेंट्स के बीच तलाक हो गया था।

शाहिद 3 साल के थे, तभी उनके पेरेंट्स के बीच तलाक हो गया था।

फिल्मी परिवार, लेकिन आसान नहीं बचपन

शाहिद कपूर का जन्म 25 फरवरी 1981 को नई दिल्ली में हुआ। उनके पिता पंकज कपूर हिंदी सिनेमा और थिएटर का जाना-माना नाम हैं, जबकि मां नीलिमा अजीम एक संवेदनशील अभिनेत्री और प्रशिक्षित नृत्यांगना रही हैं। लेकिन शाहिद का बचपन किसी फिल्मी कहानी की तरह आसान नहीं था।

तीन साल की उम्र में टूटा परिवार, वक्त से पहले आई परिपक्वता

जब वह महज तीन साल के थे, तभी उनके माता-पिता का तलाक हो गया। इस टूटन ने उनके जीवन को शुरुआती दौर में ही गंभीर बना दिया। वह अपनी मां के साथ किराये के घर में रहने लगे। सीमित साधन, भावनात्मक अकेलापन और एक अस्थिर माहौल ने शाहिद को वक्त से पहले परिपक्व कर दिया।

बाद में नीलिमा आजमी ने अभिनेता राजेश खट्टर से शादी की, लेकिन शाहिद का बचपन ज्यादातर संघर्ष में ही बीता।

पढ़ाई-लिखाई और कला की ओर झुकाव

शाहिद कपूर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजहंस विद्यालय, मुंबई से की। इसके बाद उन्होंने मुंबई के मिठीबाई कॉलेज में दाखिला लिया। हालांकि पढ़ाई के साथ-साथ उनका मन हमेशा मंच और कैमरे की ओर भागता रहा। अभिनय और नृत्य उनके लिए शौक नहीं, बल्कि खुद को व्यक्त करने का माध्यम बन चुके थे। इसी दौरान उन्होंने देश के मशहूर कोरियोग्राफर श्यामक डावर के डांस इंस्टीट्यूट से डांस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली। यही फैसला आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।

बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम किया

शाहिद कपूर फिल्म ‘दिल तो पागल है’ और ‘ताल’ में बैकग्राउंड डांसर थे। बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम करते हुए वे एड फिल्मों और म्यूजिक वीडियोज में नजर आए, लेकिन उससे मिलने वाली फीस बहुत कम थी। उसी पैसे से घर का खर्च चलाना और ऑडिशन के लिए मुंबई में टिके रहना सबसे बड़ी चुनौती थी।

दोस्तों से कपड़े उधार लेते थे

शाहिद जब ऑडिशन के दौर से गुजर रहे थे, तब ब्रांडेड या ढंग के कपड़े खरीदना उनके लिए मुमकिन नहीं था। कई बार वह दोस्तों से कपड़े उधार लेकर ऑडिशन देने जाते थे। कुछ ऑडिशन में उन्हें सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिया गया, क्योंकि उनका लुक हीरो के जैसा नहीं लग रहा था।

ऑडिशन की लाइन में घंटों खड़े रहते थे

कई बार शाहिद को ऑडिशन के लिए घंटों प्रोडक्शन ऑफिस के बाहर इंतजार करना पड़ता था। कई जगह तो उन्हें अंदर तक नहीं बुलाया जाता था। वह बताते हैं कि कई बार दिन भर घूमने के बाद भी एक भी ऑडिशन नहीं मिल पाता था।

पिता पंकज कपूर का नाम भी काम नहीं आया

लोगों को लगता है कि स्टार किड होने से शाहिद को आसानी हुई होगी, लेकिन हकीकत इसके उलट थी। शाहिद कहते हैं कि उन्होंने कभी अपने पिता पंकज कपूर का सहारा नहीं लिया। इंडस्ट्री में उन्हें अपनी पहचान खुद बनानी थी, इसलिए वह जानबूझकर अलग रास्ता चुनते रहे।

असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया

शाहिद कपूर ने साल 1998 में जीटीवी टीवी के सीरियल ‘Mohandas B.A.L.L.B.’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था। इस शो को उनके पिता पंकज कपूर ने खुद ही प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया था। शो में पंकज कपूर लीड रोल में भी थी। शाहिद के करियर का यह वो दौर था जब वे एक्टिंग में आने से पहले कैमरे के पीछे काम करके इंडस्ट्री को समझ रहे थे।

आत्मविश्वास टूटने की कगार पर थे

शाहिद ने जब एक्टिंग के लिए कोशिश करनी शुरू की तो लगातार रिजेक्शन के चलते कई बार उनका आत्मविश्वास भी डगमगा गया। वह मानते हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने सोचा कि शायद वह फिल्मों के लिए बने ही नहीं हैं, लेकिन डांस और एक्टिंग के प्रति जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया।

म्यूजिक वीडियो और विज्ञापनों में दिखे

पेप्सी के एड में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी और काजोल के साथ शाहिद कपूर नजर आए थे। इसके अलावा कुछ और छोटे-मोटे ब्रांड ऐड्स और फैशन शूट्स कर चुके थे। इन ऐड्स में वो ज्यादा बोलते नहीं थे, लेकिन उनका फेस और एनर्जी नोटिस होने लगी थी।

म्यूजिक वीडियो ‘आंखों में तेरा ही चेहरा’ से शाहिद कपूर को पहली बार बड़ी पहचान मिली थी। इसमें उनके साथ हृषिता भट्ट थीं। हालांकि इसके बाद भी शाहिद ने कुछ और म्यूजिक वीडियो में काम किया।

‘इश्क विश्क’ से बदली किस्मत

कई सालों के संघर्ष के बाद जब उन्हें ‘इश्क विश्क’ मिली, तब भी यह रोल आसानी से नहीं मिला। लंबा ऑडिशन प्रोसेस, लुक टेस्ट और स्क्रीन टेस्ट के बाद जाकर उन्हें यह फिल्म मिली, जिसने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।

डायरेक्टर केन घोष ने शाहिद को ऐड्स और म्यूजिक वीडियो के जरिए नोटिस किया और फ्रेश, चॉकलेटी-बॉय इमेज देखकर ‘इश्क विश्क’ के लिए चुन लिया। इस फिल्म को टिप्स के रमेश तौरानी ने प्रोड्यूस किया और यह शाहिद के लिए ड्रीम लॉन्च साबित हुई। हालांकि इस फिल्म में ब्रेक मिलना शाहिद के लिए आसान नहीं था।

शाहिद कपूर कहते हैं- ‘कुछ लोग बीएमडब्ल्यू में संघर्ष करते हैं, वे देश के टॉप दो-तीन डायरेक्टर्स के साथ काम करके अपना करियर शुरू करते हैं। मैं 250 ऑडिशन देने के बाद आया था।’

कई राउंड के ऑडिशन के बाद मिला रोल

इंडस्ट्री में शाहिद को पहले एक डांसर के तौर पर ही देखा जाता था। इस इमेज से उनके लिए बाहर निकलना बहुत मुश्किल था। कई लोग मानते थे कि शाहिद में हीरो मटेरियल नहीं है। क्योंकि उस दौर में लंबे-चौड़े स्टार्स का ट्रेंड था। ‘इश्क विश्क’ के लिए शाहिद को कई राउंड के ऑडिशन देने पड़े।

उन्हें बार-बार सीन परफॉर्म करने पड़े। शाहिद का सॉफ्ट, बॉय-नेक्स्ट-डोर लुक कुछ प्रोड्यूसर्स को ज्यादा भोला लगता था। डर था कि कॉलेज रोमांस में वे असरदार लगेंगे या नहीं। उस समय उनकी बतौर लीड एक भी रिलीज फिल्म नहीं थी, इसलिए मेकर्स को कमर्शियल रिस्क लग रहा था।

'इश्क विश्क' 9 मई 2003 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म में शाहिद के आपोजित अमृता राव थीं।

‘इश्क विश्क’ 9 मई 2003 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म में शाहिद के आपोजित अमृता राव थीं।

लुक और बॉडी पर काफी मेहनत करनी पड़ी

फिल्म ‘इश्क विश्क’ में शाहिद कपूर ने एक कॉलेज स्टूडेंट राजीव का किरदार निभाया था। रोल मिलने से पहले उन्हें फिटनेस, बॉडी और लुक पर काफी मेहनत करनी पड़ी ताकि वे फ्रेश, लेकिन कॉन्फिडेंट लीड लगें।आखिरकार केन घोष को शाहिद की मेहनत, डांस, एक्सप्रेशन और ईमानदारी पसंद आई और वही फैसला सही साबित हुआ।

हिट फिल्म के बाद भी स्ट्रगल खत्म नहीं हुआ

‘इश्क विश्क’ शाहिद के लिए सिर्फ डेब्यू नहीं थी, बल्कि खुद को साबित करने का अवसर था। फिल्म युवाओं के बीच सुपरहिट साबित हुई। शाहिद को फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड मिला। इस जीत ने उन्हें उम्मीद दी, लेकिन संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ था।

लगातार 6 फिल्में फ्लॉप हुईं

‘इश्क विश्क’ की सफलता के बाद उम्मीद की जा रही थी कि शाहिद स्टार बन जाएंगे, लेकिन हकीकत इससे अलग थी। इस फिल्म के बाद के बाद ’फिदा’, ‘दिल मांगे मोर’, ‘दीवाने हुए पागल’, ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’, ‘शिखर’ और ‘36 चाइना टाउन’ जैसी लगातार 6 फिल्में फ्लॉप हुई।

एक्टिंग छोड़ने का मन बनाया

‘इश्क विश्क’ की सक्सेस के बाद जब शाहिद कपूर की 6 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाईं। लोग उन्हें वन-फिल्म वंडर” मानने लगे। इस टैग से शाहिद का आत्मविश्वास बुरी तरह टूट चुका था। उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था।

तभी मिला राजश्री फिल्म्स का सहारा

2006 में सूरज बड़जात्या ने शाहिद कपूर को ‘विवाह’ के लिए कास्ट किया। यह फैसला खुद शाहिद के लिए भी चौंकाने वाला था, क्योंकि तब उनका करियर लगभग डूब चुका था। ‘विवाह’ में प्रेम का किरदार शाहिद कपूर के लिए लाइफलाइन साबित हुआ। सादगी भरा किरदार, पारिवारिक फिल्म और मजबूत कहानी ने दर्शकों से सीधा कनेक्शन बना लिया।

‘विवाह’ शाहिद के करियर के लिए टर्निंग पॉइंट बनी तो वहीं, ‘जब वी मेट’ से स्टारडम मिला

‘विवाह’ शाहिद के करियर के लिए टर्निंग पॉइंट बनी तो वहीं, ‘जब वी मेट’ से स्टारडम मिला

‘विवाह’ बनी टर्निंग पॉइंट

‘इश्क विश्क’, ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’ और ‘शिखर’ के बाद शाहिद कपूर और अमृता राव की जोड़ी चौथी बार फिल्म ‘विवाह’ में नजर आई। दोनों को फिल्म में खूब पसंद किया गया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और शाहिद कपूर की छवि एक भरोसेमंद, पारिवारिक हीरो की बन गई। इसी फिल्म के बाद उन्हें इंडस्ट्री में दोबारा गंभीरता से लिया जाने लगा।

‘जब वी मेट’ ने स्टारडम की नई ऊंचाई दी

इसके बाद ‘जब वी मेट जैसी फिल्मों ने उन्हें स्टारडम की नई ऊंचाई दी। ‘जब वी मेट’ में आदित्य कश्यप का किरदार उनके करियर का माइलस्टोन साबित हुआ। एक इंट्रोवर्ट, टूटे हुए, लेकिन बेहद रियल कैरेक्टर को जिस गहराई से उन्होंने निभाया, उसने साबित कर दिया कि शाहिद सिर्फ चॉकलेट बॉय नहीं, बल्कि एक गंभीर और टैलेंटेड अभिनेता हैं।

सेफ इमेज से बाहर निकलकर रिस्क लेना शुरू किया

‘विवाह’ और ‘जब वी मेट’ के बाद शाहिद ने सेफ इमेज से बाहर निकलकर रिस्क लेना शुरू किया। ‘कमीने’ में डार्क और रफ किरदार निभाकर उन्होंने क्रिटिक्स को चौंका दिया। ‘हैदर’ में उनका इंटेंस परफॉर्मेंस करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है और उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी दिलाया।

‘उड़ता पंजाब’, ‘पद्मावत’ और ‘कबीर सिंह’ जैसी फिल्मों ने साबित किया कि शाहिद हर तरह के किरदार में खुद को ढाल सकते हैं। जल्द ही शाहिद कपूर फिल्म ‘ओ रोमियो’ में एक अलग अवतार में नजर आने वाले हैं।

ओ रोमियो से पहले विशाल भारद्वाज के साथ शाहिद कपूर कमीने, हैदर और रंगून फिल्म में काम कर चुके हैं।

ओ रोमियो से पहले विशाल भारद्वाज के साथ शाहिद कपूर कमीने, हैदर और रंगून फिल्म में काम कर चुके हैं।

शाहिद कपूर कहते हैं- विशाल भारद्वाज सर के साथ यह मेरी चौथी फिल्म है और इस बार हमारी कोशिश यही थी कि इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए। इस फिल्म पर करीब एक साल मेहनत की है।

मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं। बाईस तेईस साल हो गए हैं। कुछ फिल्में चलीं, कुछ नहीं चलीं, लेकिन लोगों का प्यार बना रहा। इसके लिए दिल से आभार महसूस करता हूं। जब भी मौका मिलता है, कोशिश करता हूं कि उस प्यार का सम्मान कर सकूं।

क्वालिटी और सक्सेस का सीधा संबंध नहीं

मुझे हमेशा लगता है कि क्वालिटी और सक्सेस हमेशा एक-दूसरे से सीधे तौर पर जुड़ी हुई नहीं होतीं। आप क्वालिटी काम करके भी अनसक्सेसफुल हो सकते हैं और कई बार बिना क्वालिटी के काम से भी सक्सेस मिल जाती है। इसलिए इन दोनों के बीच डायरेक्ट पैरेलल ढूंढने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

अच्छा काम अपने लिए किया जाता है

बचपन से हमें यही सिखाया जाता है कि अगर हम अच्छा काम करेंगे तो हमें बहुत सफलता मिलेगी, लेकिन यह जरूरी नहीं है। अच्छा काम आप अपने लिए करते हैं, अपने मानदंड खुद तय करते हैं, किसी और के लिए नहीं। अगर आपने ईमानदारी से अच्छा काम किया है, तो उसका सुकून आपको महसूस होना चाहिए।

असफलता और सफलता दोनों में सीख मिलती है

हमें अक्सर लगता है कि हम सफलता हासिल करते हैं, जबकि सच यह है कि सफलता हमें दी जाती है। कई लोगों को यह आसानी से मिल जाती है और कई को मेहनत के बाद। असफलता जीवन सिखाती है और सफलता एक नेमत होती है, जिसके लिए आभार व्यक्त करना चाहिए।

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पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए…

एक्टर विशाल जेठवा की मां ने सैनेटरी पैड बेचे:घरों में बर्तन धोए; मर्दानी–2 का खूंखार विलेन होमबाउंड का हीरो बना, फिल्म ऑस्कर पहुंची

एक्टर विशाल जेठवा की नीरज घायवान के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘होमबाउंड’ भले ही ऑस्कर की रेस से बाहर हो गई हो। लेकिन इस फिल्म ने विशाल को इंटरनेशनल स्टार बना दिया। कान्स फिल्म फेस्टिवल सहित इस फिल्म की कई प्रमुख इंटरनेशनल फेस्टिवल में स्क्रीनिंग हुई। जहां पर फिल्म को खूब सराहा गया।पूरी खबर पढ़ें..

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लैंडमार्क सिटी कुन्हाड़ी में एक माह से नाला जाम, दुर्गंध और मच्छरों से लोग हो रहे परेशान

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सिटी रिपोर्टर|कोटा लैण्डमार्क सिटी कुन्हाड़ी गेट नंबर 7 स्थित शिवलोक पार्क के सामने का नाला बीते एक माह से जाम है। नाले में लगातार पानी पहुंच रहा है, लेकिन निकासी नहीं होने से गंदा पानी जमा है। सड़क पर जगह-जगह कचरा फैला रहता है, जिसे नगर निगम के सफाई कर्मी नियमित रूप से नहीं हटा रहे। इससे आसपास रहने वाले लोग दुर्गंध से परेशान हैं और मच्छरों के कारण बीमारियों का खतरा बना हुआ है। यह इलाका कोचिंग हब से जुड़ा है। रोजाना बड़ी संख्या में कोचिंग स्टूडेंट्स का आवागमन रहता है, जिन्हें गंदगी और बदबू के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। क्षेत्र के निवासी दिनेश गुर्जर, हनुमान पांचाल, चिंटू गुर्जर, किशन सरदाना, अंशू गुर्जर और बृजराज मीणा ने बताया कि घनी आबादी के बावजूद यहां नियमित सफाई नहीं होती। सफाई कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। लोगों ने नगर निगम के अधिकारियों और सेक्टर इंचार्ज से मौके पर पहुंचकर समस्या निराकरण की मांग की है।

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Vaibhav Suryavanshi; IND Vs ENG U19 World Cup 2026 Final LIVE Score Update

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स्पोर्ट्स डेस्क4 मिनट पहले

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अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में आज 5 बार की चैंपियन भारत के सामने इंग्लैंड की चुनौती होगी। खिताबी मुकाबला हरारे स्पोर्ट्स क्लब में दोपहर 1 बजे से शुरू होगा, जबकि टॉस 12:30 बजे किया जाएगा।

भारतीय टीम रिकॉर्ड 10वीं बार फाइनल में पहुंची है। दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम तीसरी बार फाइनल खेलेगी, टीम ने 1998 में इकलौता टाइटल जीता था। इससे पहले 2022 के फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को ही हराकर पांचवीं बार ट्रॉफी जीती थी।

हेड टु हेड में भारत आगे

भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक खेले गए 56 यूथ वनडे में भारतीय टीम का दबदबा रहा। 41 में टीम इंडिया और महज 13 में इंग्लैंड को जीत मिली। एक मैच टाई और एक मुकाबला बेनतीजा भी रहा।

वैभव भारत के टॉप स्कोरर

इस अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के लिए वैभव सूर्यवंशी ने सबसे ज्यादा 6 मैचों में 264 रन बनाए हैं। उनका बेस्ट स्कोर 82 रन रहा है। इस दौरान उन्होंने 3 हाफ सेंचुरी लगाई। गेंदबाजी में हेनिल पटेल ने कमाल का प्रदर्शन किया है। उन्होंने 6 मैचों में 11 विकेट झटके हैं। उनका बेस्ट प्रदर्शन 5 विकेट देकर 16 रन रहा है।

मैनी लुम्सडेन टूर्नामेंट के टॉप विकेट टेकर

इस वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के कुछ खिलाड़ी शानदार फॉर्म में नजर आए हैं। बल्लेबाजी में बेन मेयस ने दमदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने 6 मैचों में 399 रन बनाए हैं, जिनमें उनका बेस्ट स्कोर 191 रन रहा। वहीं गेंदबाजी में मैनी लुम्सडेन ने इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा 15 विकेट झटके हैं। लुम्सडेन टूर्नामेंट के भी टॉप विकेट टेकर हैं।

हरारे में पिछले मैच में 600+ रन बने

हरारे की पिच बल्लेबाजों को सपोर्ट करती है और गेंदबाजों को भी हल्का सा सपोर्ट मिलता है। यहां बाउंस और स्पीड अच्छी रहती है, जिससे शॉट्स खेलना आसान हो जाता है। यहां की स्क्वेयर और स्ट्रैट बाउंड्रीज थोड़ी छोटी हैं, जिससे चौके और छक्के लगाने में ज्यादा परेशानी नहीं होतीं। इसका अंदाजा दूसरे सेमीफाइनल में खेले गए भारत-अफगानिस्तान मुकाबले से लगाया जा सकता है, जहां दोनों टीमों के बीच कुल मिलाकर 621 रन बने।

58% बारिश की आशंका

मौसम में दिनभर धूप और बादलों का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। दोपहर के समय गरज के साथ बारिश होने की संभावना है, जिससे मौसम में हल्की ठंडक आ सकती है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। तापमान 16 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। मैच के दौरान बारिश की 58% आशंका जताई गई है।

दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-11

भारत: आयुष म्हात्रे (कप्तान), आरोन जॉर्ज, वैभव सूर्यवंशी, विहान मल्होत्रा, अभिज्ञान कुंडू (विकेटकीपर), वेदांत त्रिवेदी, आरएस अंब्रिश, कनिष्क चौहान, खिलन पटेल, हेनिल पटेल और दीपेश देवेन्द्रन।

इंग्लैंड टीम: थॉमस रेव (कप्तान), बेन डॉकिन्स, जोसेफ मूर्स, बेन मेयस, कालेब फॉकनर, राल्फी अल्बर्ट, फरहान अहमद, सेबेस्टियन मॉर्गन, जेम्स मीटो, मैनी लुम्सडेन और एलेक्स फ्रेंच।

मैच कहां देखें?

भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाले इस मुकाबले का लाइव ब्रॉडकास्ट स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। वहीं, जियोहॉटस्टार पर मैच की लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा, दैनिक भास्कर एप पर भी मैच से जुड़े लाइव अपडेट्स देख सकते हैं।

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कॉलेज प्रशासन की चेतावनी,सात कमरे कंडम, पूरा भवन जर्जर, कोई भी प्रवेश न करे, परीक्षा अब यहीं करवा रहे

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सिटी रिपोर्टर|कोटा राजकीय संस्कृत महाविद्यालय भवन पर कॉलेज प्रशासन ने चेतावनी लिखी है कि भवन जीर्ण शीर्ण है, कोई भी प्रवेश न करे। अब इसी भवन के कमरों में कॉलेज परीक्षाएं करवा रहा है। कॉलेज में सभी 7 कमरे कंडम घोषित हैं। कॉलेज प्रशासन ने इसकी सूचना 20 जुलाई 2025 को दे दी थी लेकिन आज तक इन कमरों की मरम्मत नहीं हुई। अब हालात ये है कि इन कमरों का प्लास्टर गिर रहा हैं। लोहे के तार निकले हुए हैं। बारिश में तो स्टूडेंट्स पढ़ाई नहीं कर पाते थे। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बरामदे की जगह सही है। यहां पर ही परीक्षाएं करवा रहे हैं। ^ महाविद्यालय में दो कमरे और एक बरामदा थोड़ा सा सही है। यहीं पर परीक्षाएं करवा रहे है। साथ ही 8 करोड़ का प्रस्ताव भेज दिया है। जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। – डॉ हंसराज गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय संस्कृत कॉलेज, कोटा पिछले दिनों पिपलोदी हादसे के बाद कॉलेज प्रशासन ने यहां के सारे कमरे बंद करवा दिए थे। कमरों के बाहर असुरक्षित होने की चेतावनी भी चस्पा कर दी थी। कॉलेज प्रशासन ने मरम्मत के लिए प्रस्ताव भी सरकार को भेज दिया, लेकिन यह राशि आज तक नहीं मिली। अभी तीन सेमेस्टर की परीक्षाएं : पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष पंकज दाधीच का कहना है कि अभी शास्त्री प्रथम, तृतीय और पंचम सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित की जा रही है। परीक्षाएं 2 फरवरी से शुरू हुई थी। उनका कहना है कि शिक्षामंत्री मदन दिलावर से इस संबंध में मिल चुके हैं लेकिन अभी तक नतीजा सिफर ही है। जल्द ही इसकी मरम्मत नहीं करवाई गई तो कॉलेज बंद करवा देंगे।

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रैन बसेरे में काम करने वाले ने बनवा कर दिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र

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अजमेर | आरपीएससी के स्टेनोग्राफर को फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाने में सबसे बड़ा मददगार मामले का तीसरा आरोपी गुरुवार को पुलिस के हत्थे चढ़ा है। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी जयपुर निवासी मनीष उर्फ मोटूराम ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं। मोटूराम अजमेर के जेएलएन अस्पताल के रैनबसेरे में काम करता था। उसने न केवल आरपीएससी के स्टेनोग्राफर अरुण शर्मा बल्कि 20 से ज्यादा लोगों को फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवाकर दिए हैं। इसके लिए हर आवेदक से 5 से 20 हजार रुपए तक वसूल करने की बात भी प्रारंभिक पूछताछ में कबूल की है। सिविल लाइंस थाने के एएसआई गिरिराज कुमार के मुताबिक फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाकर आरपीएससी में नौकरी कर रहे अरुण शर्मा के बाद पुलिस ने डेगाना निवासी ई-मित्र संचालक राम निवास को गिरफ्तार किया था। अब तक की पूछताछ में उसने जो कुछ बताया है उसकी तस्दीक की जानी बाकी है। पूरे मामले में और लोगों के शामिल होने का संदेह है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी मनीष उर्फ मोटूराम ने बताया है कि उसकी अस्पताल के ही एक कार्मिक से दोस्ती हो गई थी। इसके बाद उन्होंने धीरे धीरे फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने का काम शुरू किया। 2007 के बाद भी वह यह काम करता रहा है। पुलिस को संदेह है कि मोटूराम की मदद कई और लोग भी कर रहे होंगे।

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