Sonam Wangchuk Bail Detention Update; Supreme Court
नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से पूछा कि क्या सरकार क्लाइमेट एक्टिविस्ट और साइंटिस्ट सोनम वांगचुक की तबीयत को देखते हुए उनकी हिरासत पर फिर से विचार कर सकती है?
जस्टिस अरविंद कुमार और पी बी वराले की बेंच ने कहा कि वांगचुक की हेल्थ रिपोर्ट अच्छी नहीं है। कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज से इस मामले में निर्देश लेने को कहा।
कोर्ट ने कहा-
दलीलों और कानून के बिंदुओं के अलावा, कोर्ट के अधिकारी के तौर पर इस पर थोड़ा सोचिए। हिरासत का आदेश 26 सितंबर, 2025 को पारित किया गया था, लगभग पांच महीने हो गए हैं।

इसपर नटराज ने कहा कि वह यह सुझाव संबंधित अधिकारियों के सामने रखेंगे। दरअसल, 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 26 वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया गया था। तब से वे जोधपुर जेल में हैं।

3 फरवरी: केंद्र के वकील ने वांगचुक की हिरासत को सही ठहराया था
मंगलवार को, केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वांगचुक को एक सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को भड़काने के लिए हिरासत में लिया गया था, जहां क्षेत्रीय संवेदनशीलता शामिल है।
वांगचुक की हिरासत को सही ठहराते हुए, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी हिरासत का आदेश देते समय सभी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किया गया था।
2 फरवरी: सरकार बोली– वांगचुक लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश बनाना चाहते थे
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं। ऐसे व्यक्ति को और जहर उगलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। मेहता ने कहा कि नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे उदाहरण देना, युवाओं को भड़काने और देश की एकता के खिलाफ माहौल बनाने के बराबर है। पूरी खबर पढ़ें…

पत्नी गीतांजलि बोली थीं- अधिकारियों ने सही फैसला नहीं किया
इससे पहले वांगचुक की पत्नी गीताांजलि अंग्मो ने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनके पति को हिरासत में लेने के फैसले में अधिकारियों ने ठीक से सोच-विचार नहीं किया। उन्हें बेकार व गैर-जरूरी बातों के आधार पर नजरबंद किया गया।
अंग्मो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच में दावा किया कि जिन चार वीडियो के आधार पर नजरबंदी की गई वे सोनम वांगचुक को दिए ही नहीं गए।
इससे उनका अपना बचाव में सही ढंग से बात रखने का अधिकार छिन गया। वीडियो नहीं देने से वांगचुक का सलाहकार बोर्ड और सरकार के सामने अपनी बात रखने का अधिकार प्रभावित हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे थे। आन्दोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया।
NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।
अंग्मो ने कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा का सोनम वांगचुक के बयानों या कामों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख का शांतिपूर्ण आंदोलन विफल हो जाएगा।
दरअसल लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने यहां से धारा 370 और 35 ए को हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग राज्य बनाया था। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला राज्य बनाया था, जिसका प्रशासन राज्य सरकार के पास और सुरक्षा व्यवस्था केंद्र सरकार के पास है, जबकि लद्दाख को पूरी तरह केंद्र शासित राज्य बनाया था।


