SC Slams ED, CBI Over Bank Fraud Probe Delays; Anil Ambani


नई दिल्ली4 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) जुड़े ₹40 हजार करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में जांच एजेंसियों पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- CBI और ED जांच में देरी का कारण नहीं बता सकीं। दोनों एजेंसियां पहले ही काफी समय ले चुकी हैं। आगे ऐसी ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने CBI और ED से चार हफ्ते में ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने यह रिकॉर्ड किया कि अनिल अंबानी उसकी पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।

असल में याचिकाकर्ता और पूर्व आईएएस अफसर ईएएस सरमा ने अनिल के देश छोड़ने की आशंका जताई थी। सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी ने अपने वकील मुकुल रोहतगी के जरिए कोर्ट को आश्वासन दिया कि वे कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।

ED ने कहा- 40 हजार करोड़ सायफन, अपराध की कमाई ₹20 हजार करोड़

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि अनिल अंबानी के खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किए जा चुके हैं। मेहता ने कोर्ट को बताया- अनिल समूह की कंपनियों के जरिए करीब ₹40 हजार करोड़ सायफन किए जाने का आरोप है।

इस पर कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की- यह इतनी बड़ी रकम सायफन होने का मामला है। कोर्ट ने ED के हलफनामे को रिकॉर्ड में लिया कि अपराध से अर्जित आय ₹20 हजार करोड़ से अधिक आंकी गई है। एजेंसी ₹8,078 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है।

अनिल बोले- कारोबारी घाटा, कर्ज में चूक पर आपराधिक केस न बने

अनिल अंबानी की ओर से पेश वकील श्याम दीवान ने सार्वजनिक धन की हेराफेरी के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा- रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने करीब ₹20 हजार करोड़ चुका दिए हैं। कारोबारी घाटे व कर्ज में चूक को आपराधिक केस नहीं बनाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने

इससे पहले 23 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था और अनिल अंबानी और ADAG को नोटिस जारी किया था। याचिका में आरोप है कि 2007-08 से फ्रॉड चल रहा था, लेकिन FIR 2025 में दर्ज हुई।

याचिका के मुताबिक 2013-17 के बीच RCOM, RITL और RTL ने SBI के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम से ₹31,580 करोड़ का कर्ज लिया था। बाद में लोन की रकम का तय मकसद के बजाय दूसरी जगह इस्तेमाल हुआ। कुछ मामलों में ग्रुप की दूसरी कंपनियों को फंड ट्रांसफर किया गया। समय पर लोन चुकाने में भी चूक (NPA) हुई।

जांच में फंड्स के गलत इस्तेमाल का खुलासा

ED ने अपनी जांच में पाया है कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था।

दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए। RHFL का 1,353 करोड़ और RCFL का 1,984 करोड़ अभी तक बकाया है। कुल मिलाकर यस बैंक को 2,700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। ED के मुताबिक ये फंड्स रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किए गए।

लोन अप्रूवल प्रोसेस में भी कई गड़बड़ियां मिलीं। जैसे, कुछ लोन उसी दिन अप्लाई, अप्रूव और डिस्बर्स हो गए। फील्ड चेक और मीटिंग्स स्किप हो गईं। डॉक्यूमेंट्स ब्लैंक या डेटलेस मिले। ED ने इसे ‘इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर’ बताया है। जांच PMLA की धारा 5(1) के तहत चल रही है और 31 अक्टूबर 2025 को अटैचमेंट ऑर्डर जारी हुए।

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