Expenditure increased 133 times in one year, forcing the government to take an advance of Rs 91,251 crore from the Reserve Bank.
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प्रदेश में पिछले वित्तीय वर्ष में 133 बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है कि आय की तुलना में खर्च बढ़ गया। राजस्व आय और खर्चों के नकद बेमेल को दूर करने के लिए 91,251 करोड़ का रिजर्व बैंक से विशेष एडवांस लेना पड़ा। करीब 271 दिनों तक इस्तेमाल किए गए इस प
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रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024—25 के दौरान राज्य सरकार ने सरकारी कंपनियों, जॉइंट वेंचर और सहकारी समितियों में 1047 करोड़ का निवेश किया था। इसी तरह रोडवेज में 855 करोड़ रुपए और राजस्थान पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड में 170 करोड रुपए का निवेश किया गया। रिपोर्ट में सामने आया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार के 62 हजार 818 करोड़ के निवेश पर साल 2024—25 में केवल 6 करोड़ का लाभ हुआ था। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में राज्य सरकार ने अंश पूंजी के रूप में 62,818 करोड़ का निवेश था।
सरकार कोई भी, कर्ज लेने में कमी नहीं
प्रदेश में सरकार कांग्रेस की रही या फिर भाजपा की। सरकारों ने हर साल कर्ज लेने में कोई कमी नहीं छोड़ी। कैग रिपोर्ट से साफ है कि वर्ष 2020-21 से लेकर 2024-25 में सरकार ने हर साल कर्ज लिया। महत्वपूर्ण पहलु यह है कि इसमें से ठोस विकास और भविष्य की संपत्तियां बनाने में उसका आधा भी खर्च नहीं किया। कर्ज का आधा हिस्सा प्रशासनिक और दूसरे खर्चों में चला गया। सरकार ने 2024-25 में 59,098 करोड़ का कर्ज लिया और उसमें से पूंजीगत खर्च 30,777 करोड़ ही किया। साल 2020-21 में सरकार ने 48,941 करोड़ का कर्ज लिया लेकिन पूंजीगत खर्च 15,271 करोड़ ही रहा।
पंचायत-निकायों के अनुदान में 15000 करोड़ की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 साल में स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को दिए जाने वाले अनुदान के पैसे में करीब 15000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। साल 2020-21 में 39,745 करोड़ रुपए दिए गए थे जो 2024-25 में बढ़कर 54,819 करोड रुपए हो गए। जिला परिषद , पंचायत समितियां और नगर पालिकाओं को 2024-25 में 4819 करोड रुपए दिए गए इस में से जिला परिषदों को 7940 करोड़, नगर पालिका और नगर निगम को सजा 7355 करोड़, पंचायत और पंचायत समितियां को 12,313 करोड़ का अनुदान दिया गया।
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