प्रयोगशाला से खेत और खेत से नीति पर फोकस:घर बैठे बाजरा उत्पादक किसानों को वैज्ञानिक देंगे तकनीकी ज्ञान
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बाजरा का उत्पादन बढ़ाने के लिए अब किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक घर बैठे मार्गदर्शन करेंगे। खेती संबंधी समस्याओं को सुनते हुए उनका समाधान बताएंगे। सीधे वैज्ञानिकों से जुड़ने के लिए किसान सारथी 2.0 पोर्टल पर कई विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। इसी के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकी जानकारी घर बैठे उपलब्ध कराई जाएगी। राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान जयपुर में प्रयोगशाला से शोध और सरकार से नीति को धरातल तक लाने के लिए राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के सौ से ज्यादा वैज्ञानिकों ने इस पर चर्चा की। वर्तमान में पायलट प्रोजेक्ट उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल में संचालित है। अब राजस्थान में यह बाजरा उत्पादक किसानों के लिए शुरू किया जाएगा। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलगुरु प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि बाजरा राजस्थान की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। एक–दो जिलों को छोड़कर पूरे प्रदेश में बाजरा की खेती हो रही है। बारानी क्षेत्रों में आमदनी का स्रोत यही है। ऐसे में पोर्टल के माध्यम से कृषि वैज्ञानिक सटीक जानकारी किसानों को उपलब्ध कराएंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान की ओर से वैज्ञानिकों को तकनीकी पहलुओं के बारे में जानकारी दी जा रही है। ताकि उनकी और किसानों के बीच की दूरी को डिजिटल माध्यम से कम किया जा सके। किसान सारथी कोष बाजरे से जुड़ी तकनीकी सामग्री से ही तैयार किया गया है। यह कोष एक कृषि ज्ञान भंडार के रूप में काम करेगा। बाजरे की उन्नत किस्मों, पोषक तत्व, रोग नियंत्रण, कम पानी में खेती और ज्यादा भाव पाने में मददगार सामग्री इस एप पर मिलेगी। इसमें दो प्रमुख डिजिटल टूल्स किसान एप और विशेषज्ञ एप हैं। किसान एप के जरिए किसान सीधे वीडियो परामर्श और स्थानीय भाषा में व्यक्तिगत सलाह ले सकेगा। वहीं, विशेषज्ञ एप में प्रश्न, सलाह और फोन करने की सुविधा है। इसमें भाषिणी एआई के सहयोग से कई भाषाओं का विकल्प दिया गया है। कृषि वैज्ञानिक एआई के उपयोग पर किसानों को सावधानी बरतने की भी सलाह देंगे। वे पूरी तरह तकनीक पर निर्भर न हों। एक सवाल के जवाब के लिए मिलेंगे छह मिनट प्रदेश में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विश्वविद्यालयों के 47 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हो रहे हैं। इस पोर्टल पर वैज्ञानिकों से संपर्क करने के लिए किसान को ऐप डाउनलोड के बाद रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। उसी आधार पर अलग-अलग वैज्ञानिक एक समय में ऑनलाइन उपस्थित होंगे। वैज्ञानिक एक पंजीकृत सवाल को औसत छह मिनट में जवाब देकर किसान को संतुष्ट करेंगे। आने वाले समय में बाजरा के अलावा अन्य फसलों को भी धीरे–धीरे शामिल किया जाएगा।
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