नीति आयोग:राजस्थान में निर्यात का औद्योगिक वातावरण तो बना पाए , पर MSME के इकोसिस्टम में हम पिछड़ गए

[ad_1]


देश के एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स-2024 यानी निर्यात की तैयारी में राजस्थान 4 स्थान और फिसल गया है। यह 13वें से 17वें स्थान पर पहुंच गया है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट ने देश और राज्यों की स्थिति पर फोकस करते हुए कहा है कि राज्यों के इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकार की पॉलिसीज में बदलाव के कारण यह उतार-चढ़ाव आता है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान निर्यात की तैयारी में पीछे जरूर हुआ, लेकिन औद्योगिक वातावरण बनाने में बेहतर स्थिति में रहा, जबकि सबसे बड़े मैनुफैक्चरिंग सेक्टर एमएसएमई का इकोसिस्टम बनाने में कमजोर स्थिति में रहे। राजस्थान की स्थितियों को नीति आयोग ने 4 पिलर्स और उनके सब पिलर्स को पैमाना बनाया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के आने वाले बजट में निर्यात के लिए बेहतर तैयारी करनी होगी। वैश्विक अस्थिरता के बीच राज्यों को दीर्घकालिक विकास, रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और ग्लोबल वैल्यू चेन में रणनीतिक तालमेल के लिए निर्यात की तत्परता बढ़ाने की आवश्यकता होगी। एमएसएमई इकोसिस्टम 10 में से सिर्फ 4 अंक मिले
प्रदेश का इकोसिस्टम 2024 की रिपोर्ट के अनुसार खराब स्थिति में है। यानी कुल 10 में से रिपोर्ट में इसे सिर्फ 2.1 अंक दिए गए हैं। जबकि पर्यावरण क्लियरेंस सर्टिफिकेट जारी करने, सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर फेसिलिटेशन और डिजिटल मैच्योरिटी में भी 5 राज्य की खराब स्थिति के कारण निर्यात तैयारी पर असर पड़ा है। लॉजिस्टिक स्टेट ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार करने में भी हम काफी पीछे हैं। औद्योगिक वातावरण 5 में से 4.1 से बेहतर बने
भले ही राज्य निर्यात तैयारी में कमजोर हुआ, लेकिन इस रिपोर्ट के अनुसार हम औद्योगिक वातावरण बनाने में बेहतर स्थिति में हैं। साथ ही नवाचार में भी आगे हैं। इसी तरह सरकार की पॉलिसी सपोर्ट भी बेहतर रहा है। ओवरऑल ट्रेंड्स भी राजस्थान के लिए अच्छी खबर लेकर आए। सूचकांक के अनुसार बाजार विकसित करने में भी राजस्थान को आधे से अधिक अंक मिले हैं। “राज्यों में निर्यात की तैयारियों का बेंचमार्किंग करने के लिए निर्यात की गति व्यापक और समावेशी हो। जिलों को निर्यात केंद्रों के रूप में स्थापित करके और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर यह सूचकांक मजबूत निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने की रणनीति का सुझाव देता है। आने वाले राज्य के बजट में ऐसे प्रावधान कर सरकार तैयारी को मजबूत कर सकती है।”
– डॉ मनीष तिवारी, डायरेक्टर, एससीएम सोशल पालिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *