यूजीसी कानून के विरोध में झुंझुनूं का सवर्ण समाज लामबंद:भाजपा को दी आंदोलन और 'वोट की चोट' की चेतावनी, ब्राह्मण, राजपूत, अग्रवाल और जैन समाज के प्रतिनिधियों ने एक सुर में भरी हुंकार
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उच्च शिक्षा और सामाजिक संतुलन को प्रभावित करने वाले प्रस्तावित यूजीसी कानून (एक्ट) के खिलाफ अब झुंझुनूं जिले का सवर्ण समाज मुखर हो गया है। बुधवार को शहर के पीरू सिंह सर्किल स्थित एक’ रेस्टोरेंट में सवर्ण समाज जिला झुंझुनूं के बैनर तले एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया या इसमें जरूरी संशोधन नहीं किए, तो सवर्ण समाज पूरे देश में बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा। वफादारी को कमजोरी न समझे सरकार प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज दशकों से भाजपा का परंपरागत वोट बैंक रहा है और हर चुनाव में मजबूती के साथ पार्टी के साथ खड़ा रहा है। लेकिन, प्रस्तावित यूजीसी एक्ट समाज के हितों पर कुठाराघात है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी भावनाओं की अनदेखी की गई, तो आगामी चुनावों में समाज अपना राजनीतिक रुख बदलने से भी परहेज नहीं करेगा। सामाजिक और शैक्षिक संतुलन पर खतरे की आशंका समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूजीसी के नए प्रस्तावित प्रावधान उच्च शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक समरसता के खिलाफ हैं। इससे न केवल परंपरागत अधिकारों का हनन होगा, बल्कि उच्च शिक्षण संस्थानों में योग्यता और निष्पक्षता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
एकजुटता: ब्राह्मण, राजपूत, अग्रवाल एवं जैन समाज सहित सभी सवर्ण संगठनों ने एकजुट होकर विरोध का संकल्प लिया। मांग: केंद्र सरकार तुरंत इस कानून को वापस ले या समाज के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर आवश्यक संशोधन करे।
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