Rajasthan SOG to Arrest Firm Owner in RSSB OMR Scam

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तीन भर्तियों में ओएमआर शीट में गड़बड़ी कर 38 अभ्यर्थियों को एग्जाम पास कराया गया था। इस मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के पूर्व चेयरमैन बीएल जाटावत से भी पूछताछ करेगी। उनके कार्यकाल में जिस फर्म राभव लिमिटेड को

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एसओजी ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर संजय माथुर और सिस्टम एनालिस्ट प्रवीण गंगवाल सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रामप्रवेश पहले से पेपर में गड़बड़ी के चलते विवादित था। उसकी एक कंपनी ब्लैकलिस्ट हो चुकी थी। एसओजी के मुताबिक, तत्कालीन चेयरमैन बीएल जाटावत के कार्यकाल में टेंडर उसी विवादित व्यक्ति की कंपनी को दे दिया गया।

जब वही कंपनी (राभव लिमिटेड) उत्तर प्रदेश में ओएमआर शीट में गड़बड़ी के विवादों में आई तो बोर्ड ने आनन-फानन में एक जांच कमेटी बना दी। चौंकाने वाली बात ये है कि जांच का जिम्मा भी संजय माथुर और प्रवीण गंगवाल को दिया गया था, जबकि ये दोनों ही अफसर पेपर की गड़बड़ियों में शामिल थे।

आज संडे बिग स्टोरी में पढ़िए अबतक इस मामले में क्या-क्या सामने आए हैं…

जिसे टेंडर दिया वो फर्म हो चुकी थी ब्लैक लिस्ट

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने 2019 में गोपनीय फर्म राभव लिमिटेड कंपनी को सरकारी भर्तियों में OMR शीट जांचने का ठेका दिया था। तब बोर्ड के चेयरमैन बीएल जाटावत थे। उन्हीं की ओर से ही टेंडर पास किया गया था। इस कंपनी के डायरेक्टर राम प्रवेश का प्रोफाइल पहले से ही विवादित था।

साल 2018 में राम प्रवेश ने एक फर्म एक्सिस डिजी नेट लिमिटेड बनाई थी। फर्जीवाड़े के चलते पहले ही साल में वह ब्लैकलिस्ट हो गई थी। तब उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ के गोमती नगर थाने में दर्ज मामले में कार्रवाई कर रामप्रवेश सिंह को अरेस्ट किया था।

डॉ. बी.एल. जाटावत का कार्यकाल 24 फरवरी 2018 से 16 जनवरी 2021 तक था।

डॉ. बी.एल. जाटावत का कार्यकाल 24 फरवरी 2018 से 16 जनवरी 2021 तक था।

इस मामले में जेल से बाहर आने पर साल 2019 में रामप्रवेश सिंह ने ब्लैकलिस्ट फर्म को छोड़कर दो नई फर्म बनाई। इसमें से एक राभव लिमिटेड थी। ये कंपनी नई दिल्ली के एड्रेस- सी-136, मंगोलपुरी इण्डस्ट्रियल एरिया, फेज-1 पर रजिस्टर्ड थी।

एसओजी के मुताबिक, सवाल उठता है कि टेंडर देने के दौरान नियमों को ताक पर रखा गया। फर्म के सही होने की पुष्टि कर रामप्रवेश का टेंडर पास कर दिया गया।

दोषी खुद ही कर रहे थे जांच राम प्रवेश यादव की गिरफ्तारी के बाद यूपी एसटीएफ ने 15 अगस्त 2019 को दलाल शादान और विनोद गौड़ को भी अरेस्ट किया था। इनके पास से तब राजस्थान की तीन भर्तियों महिला पर्यवेक्षक, कृषि पर्यवेक्षक और प्रयोगशाला सहायक की कई OMR शीट मिली थी।

तब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने जांच के लिए आनन-फानन में एक टीम बना दी। जांच टीम का हेड तकनीकी प्रमुख संजय माथुर और प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल को बनाया गया। ये दोनों अधिकारी खुद ही लंबे समय से उस कंपनी के साथ मिलकर ओएमआर शीट्स में गड़बड़ी कर रहे थे। यही वजह रही कि इस मामले में कंपनी पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। आरोप है कि तत्कालीन बोर्ड चेयरमैन बीएल जाटावत ने फर्म के विवादों में आने के बाद भी उस कंपनी को सौंपे गए किसी एग्जाम की जांच नहीं करवाई।

सरकार से भी छिपाए रखा सच उत्तर प्रदेश में फर्म राभव लिमिटेड के मालिक पर हुई कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी के बाद भी राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने इसकी जानकारी सरकार से छिपाई। सरकार को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई कि उनके द्वारा नियुक्त की गई फर्म उत्तर प्रदेश में OMR शीट्स में गड़बड़ी करने के मामले में पकड़ी गई है। पकड़ी गई फर्म और राजस्थान में काम कर रही फर्म का मालिक एक है।

फर्म संचालक खुद देता था निर्देश बोर्ड का उपनिदेशक (सिस्टम एनालिस्ट) संजय माथुर और प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल से हुई पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि दोनों फर्म संचालक राम प्रवेश यादव के डायरेक्ट संपर्क में थे। यादव जिन कैंडिडेट को पास कराने की डील करता था, उनकी OMR शीट के नंबर सीधे प्रवीण गंगवाल और संजय माथुर को भेजता था।

यादव से मिले निर्देश के बाद वह खाली छोड़े प्रश्नों में गोले भर दिया करते थे। इसके बाद OMR शीट आगे जाती थी। एग्जाम में बैठे सभी कैंडिडेट की OMR शीट एक साथ स्कैन होने के लिए बाद में यादव की ही फर्म में जाती थी। जहां उनके अंक दिए जाते थे।

संजय माथुर ने साली के लिए परीक्षा में की थी धांधली संजय माथुर ने एसओजी रिमांड के दौरान बताया कि उसकी साली को परीक्षा में पास कराने के लिए उसने ओएमआर शीट्स में धांधली की थी। इसके बाद अन्य परीक्षाओं में भी पैसा लेकर अभ्यर्थियों को पास कराना शुरू कर दिया था।

अब रामप्रवेश और बीएल जाटावत से पूछताछ करेगी SOG एसओजी राजस्थान का कहना है कि आरोपी राम प्रवेश सिंह यादव को भी वह जल्द पूछताछ के लिए जयपुर लेकर आएंगे। फर्म के कौन-कौन से कर्मचारी इस काम में शामिल थे, इसका भी पता लगाएंगे।

माना जा रहा है कि इस कार्रवाई में एसओजी जांच व पूछताछ के बाद उसकी गिरफ्तारी भी कर सकती है, जिसके बाद बीएल जाटावत की भूमिका के पूरे सबूत जुटाने के बाद अगली कड़ी में पूछताछ की जाएगी। इससे पहले एसओजी OMR शीट्स में फर्जीवाड़ा कर जॉब पाने वाले 38 कैंडिडेट्स से पूछताछ कर अरेस्ट करेगी।

कर्मचारी चयन बोर्ड से डेटा गायब! राभव लिमिटेड ने राजस्थान में 3 एग्जाम के अभ्यर्थियों की OMR शीट जांची थी। बोर्ड के पास अभ्यर्थियों की OMR शीट का रिकॉर्ड रहता है। लेकिन अब इनका डेटा ही गायब होने की आशंका है। एसओजी के डीआईजी पारिस देशमुख ने बताया कि पिछले एक साल से करीब 5 बार बोर्ड को पत्र लिखकर तीनों एग्जाम में पास हुए अभ्यर्थियों की OMR शीट्स मांग चुके हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अभी तक बोर्ड केवल 5 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट उपलब्ध करा सका है। बोर्ड के इस तरह से रवैये को लेकर भी एसओजी का शक अन्य लोगों पर भी गहराता जा रहा है।

पिछले 8 साल का रिकॉर्ड खंगालेगी एसओजी एसओजी के रिमांड पर चल रहे पांचों आरोपियों को एसओजी ने रिमांड खत्म होने के बाद जेल भेज दिया है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में आईटी हेड संजय माथुर और प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल कई साल से परीक्षा करवा रहे थे। वर्ष 2018 में हुई परीक्षा में की गई धांधली के बाद एसओजी को शक है कि आरोपियों ने वर्ष 2025 तक हुई कई अन्य परीक्षा में भी धांधली की होगी, इसलिए 8 साल के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।

पूर्व चेयरमैन बोले- हमने तो खुद आरोपियों के नाम ढूंढकर FIR करवाई कर्मचारी चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष बीएल जाटावत ने कहा- इस मामले में हमने खुद सांगानेर थाने में 25 नवंबर, 2019 और 27 दिसंबर, 2019 को दो FIR करवाई थी। इन मामलों को दर्ज करवाने से पहले अपने स्तर पर जांच की गई थी, इसके लिए कर्मचारी चयन बोर्ड के सदस्यों वाली एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी।

जाटावत ने बताया कि पहले इस मामले की जांच गोमती नगर एसओजी-एटीएस उत्तर प्रदेश ने शुरू की थी। ओएमआर शीट से संबंधित ये मामला जब हमारी जानकारी में आया, तो ये उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी।

संबंधित परीक्षाओं की भी पूरी स्कैनिंग की गई थी। समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड के सचिव ने संदिग्ध कैंडिडेट्स की नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इस मामले में हाईकोर्ट में भी कुछ रिट याचिकाएं लगाई गई थीं, जिन्हें हाईकोर्ट ने सराहनीय मानते हुए खारिज कर दिया था।

संबंधित संदिग्ध कैंडिडेट्स के सिलेक्शन की तो कोई बात ही नहीं है, क्योंकि हमारी जांच के बाद शुरुआती लिस्ट में ही इन संदिग्धों की पहचान हो गई थी। बोर्ड ने फिर री स्केलिंग के बाद रिजल्ट जारी किया था। फिर भी एसओजी या कोई अन्य एजेंसी जांच करेगी तो पूरा सहयोग करेंगे।

SOG के अधिकारी बोले- अभी होंगी और गिरफ्तारियां डीआईजी परिस देशमुख ने बताया कि जिस समय यूपी पुलिस की एसआईटी ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी, उस दौरान बोर्ड ने एक शिकायत सांगानेर थाने में दी थी। एसओजी ने जब जांच ली तो पता चला कि यूपी एसआईटी ने दर्ज केस में चालान पेश कर दिया है। चालान में राजस्थान में हुई गड़बड़ी को लेकर कोई भी पॉइंट पेश नहीं किए गए थे। उसी को बेस बनाते हुए हमने यह कार्रवाई शुरू की है। कार्रवाई का यह पहला चरण है। आगे और बड़ी गिरफ्तारियां की जाएंगी।

एसओजी ने 5 आरोपियों को किया था गिरफ्तार SOG ने 20 जनवरी को बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए OMR शीट में नंबर बढ़ाने वाली गैंग का खुलासा किया था। RSSB के तकनीकी प्रमुख संजय माथुर सहित प्रवीण गंगवाल, शादान खान, विनोद कुमार गौड़ और पूनम माथुर को अरेस्ट किया था। प्रवीण गंगवाल राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड जयपुर में प्रोग्रामर है। दोनों आरोपी पूरी OMR शीट्स की स्कैनिंग और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया के प्रभारी थे। इन दोनों ने आउटसोर्स फर्म के कर्मचारी शादान खान और विनोद कुमार गौड़ के साथ मिलीभगत की। इस तरह 38 लोगों की नौकरी लगवाई गई।

डी-बार हुए अभ्यर्थी हुए अंडर ग्राउंड ओएमआर शीट्स में नंबर बढ़ाने के लिए 10 लाख रुपए तक देने वाले 38 अभ्यर्थियों के घर जब एसओजी की टीम पहुंची तो वह सभी अंडर ग्राउंड हो चुके हैं। एसओजी की टीम निरंतर संभावित ठिकानों पर दबिश दे कर डीबार किए गए अभ्यर्थियों को पकड़ने का प्रयास कर रही है।

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