पूर्णिमा आज:माघ पूर्णिमा पर रवि पुष्य व प्रीति योग, दान-पूजन का खास अवसर
[ad_1]
![]()
माघ पूर्णिमा पर रविवार को रवि-पुष्य और प्रीति योग का विशेष संयोग बन रहा है। रवि पुष्य योग सुबह 7.10 बजे से बनेगा और यह रात 11:58 बजे तक रहेगा। माघ नक्षत्र के प्रभाव के कारण ही इसे माघी पूर्णिमा कहा जाता है। शास्त्रों में इस तिथि को स्नान, दान और पुण्य कर्मों के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। वेद प्रचारक, मंत्र अन्वेषक अजय कुमार श्यामानंदी के अनुसार इस दिन कंबल, सूती कपड़े दान, पगड़ी, जूते दान, गोशाला में गाय माता की सेवा, बच्चों को तिल के लड्डू और गर्म कपड़ों का अपने वैभव के अनुसार दान विशेष पुण्य देता है। मत्स्य पुराण के अनुसार इस दिन जो व्यक्ति ब्रह्मवैवर्त पुराण’ का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। इस दिन पूर्णमासी का व्रत रखकर भगवान विष्णु- सत्यनारायण भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस शुभ तिथि पर भगवान शालीग्राम को दूध, दही, घी, शहद और आटे के चूरे से स्नान करा तुलसीजी अर्पित करना शुभ माना गया है। कथा श्रवण का समय सुबह या संध्याकाल उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस दिन प्रारंभ किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल होता है। माघ पूर्णिमा पर सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा पर सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में रहने से यह दिन पुण्यकारी बन जाता है। गुरु दीक्षा ले चुके श्रद्धालुओं को गुरु पूजन, वस्त्र-पादुका दान और पांच माला जप करना शुभ माना है। माघ की प्रत्येक तिथि पुण्यपर्व है, उनमें भी माघी पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर भगवत्पूजन, श्राद्ध, दान करने का विशेष फल है। इस दिन भगवान शिव-हनुमानजी की पूजा करना भी शुभ माना है। प्रदोषकाल में करते हैं माता लक्ष्मी की पूजा
माघ पूर्णिमा माघ मास का अंतिम दिन होता है, इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन लोग व्रत-उपवास रखकर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनते हैं। माता लक्ष्मी की पूजा प्रदोषकाल में करने की परंपरा रही है। प्रदोषकाल सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। माघ पूर्णिमा पर सूर्यास्त का समय शाम 6 बजे है। इसके बाद आप लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं, वहीं निशिता पूजा मुहूर्त देररात 12.08 से लेकर मध्य रात्रि 1.01 तक है।
[ad_2]
Source link
