धौलपुर में सवर्ण समाज में आक्रोश:यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ हुए एकजुट, नारेबाजी कर जताया विरोध




धौलपुर में सवर्ण समाज ने यूजीसी की ओर से लागू किए गए नए कानून के विरोध में राधा बिहारी मंदिर परिसर में एक बैठक की। इस बैठक में समाज के वरिष्ठ नागरिक, शिक्षाविद, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए। बैठक की शुरुआत यूजीसी कानून के विरोध में जोरदार नारेबाजी से हुई। पूरे परिसर में “यूजीसी कानून वापस लो”, “शिक्षा पर हमला नहीं चलेगा”, “योग्यता से खिलवाड़ बंद करो” और “संविधान विरोधी कानून नहीं चलेगा” जैसे नारे गूंजते रहे। यूजीसी कानून की कड़ी निंदा की
बैठक में सर्वसम्मति से यूजीसी कानून की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया। वक्ताओं ने इस कानून को शिक्षा विरोधी, छात्र विरोधी और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यह योग्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के अधिकारों का हनन करता है तथा उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बिना समाज से संवाद किए थोपा गया यह कानून किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा। बैठक में आंदोलन की चरणबद्ध और व्यापक रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बड़ा जन आंदोलन करने की चेतावनी
समाज ने निर्णय लिया कि यदि सरकार ने शीघ्र ही यूजीसी कानून को वापस नहीं लिया, तो सवर्ण समाज जिला, संभाग और राज्य स्तर पर बड़ा जन आंदोलन शुरू करेगा। इस आंदोलन के तहत धरना-प्रदर्शन, रैलियां, ज्ञापन, जनजागरूकता अभियान तथा आवश्यकता पड़ने पर शांतिपूर्ण विरोध किया जाएगा। सर्वण समाज (संयुक्त मंच) की ओर से सरकार को चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस संबंध में अगली बैठक 31 जनवरी को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में सोनू शुक्ला, नीतेश मुदगल, विनोद शर्मा, करन सिंह सिकरवार (करणी सेना), रानू परमार, मोनू खलीफा, विपिन दुबे, सतीश दीक्षित, दिनेश परमार और राजेश शर्मा (सरपंच) सहित सैकड़ों लोग प्रमुख रूप से उपस्थित थे।



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