धौलपुर की पुरानी छावनी में विराट हिंदू सम्मेलन:समाज में एकता और समरसता का दिया संदेश, सामूहिक भोज भी हुआ
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धौलपुर जिले की पुरानी छावनी में सकल हिंदू समाज की आरे से एक विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में सभी समाजों की सहभागिता रही, जिसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देना था। कार्यक्रम में समरसता संगम और सामूहिक भोज का आयोजन भी किया गया। सम्मेलन से पूर्व कस्बे के मुख्य मार्गों से एक कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थीं, जबकि पुरुष हवन पताका के साथ सम्मिलित हुए। इस दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक एकता का वातावरण बना रहा। ‘जाति-पात की संकीर्णता छोड़कर एकजुट होना जरूरी’
सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय अधिकारी दुर्गादास ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र की वास्तविक उन्नति के लिए समाज को जाति-पात की संकीर्णता छोड़कर एकजुट होना आवश्यक है। उन्होंने समाज को एक विराट सागर के समान बताया और कहा कि हम सभी इसकी छोटी-छोटी बूंदें हैं, जिनसे मिलकर यह महासागर बनता है। दुर्गादास ने सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए ‘एक मंदिर, एक श्मशान और एक कुआं’ की अवधारणा को सभी समाजों द्वारा समान रूप से उपयोग करने का आग्रह किया। ‘सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की है आवश्यकता’
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रामदास जाटव ने कहा कि हिंदू समाज में जाति केवल एक सामाजिक व्यवस्था है और यह किसी भी प्रकार के भेदभाव या दुर्व्यवहार का आधार नहीं हो सकती। उन्होंने सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। सम्मेलन के दौरान समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्रामीणों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें दुपट्टा और रामलला स्मृति चिह्न भेंट किए गए। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण देखा गया। इस कार्यक्रम में हजारों लोगों ने सहभागिता की। सम्मेलन के समापन के बाद सभी समाजों के लोगों ने एक साथ बैठकर सामूहिक भोजन किया, जो सामाजिक एकता का एक सशक्त प्रतीक बना।
इस अवसर पर मीरा देवी, विमला देवी, अमर सिंह, राजू भगत, साहब सिंह, बदन सिंह, नरेंद्र बरगद मेन, हरेंद्र शर्मा, भानु यादव, राजकुमार गुर्जर, राहुल बघेला, रणजीत सिंह सिकरवार और बंगाली यादव सहित विभिन्न समाजों के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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