उदयपुर में ईडाणा माता ने किया अग्नि स्नान:12 फीट से ज्यादा ऊपर उठी लपटें, माताजी की प्रतिमा और आभूषणों को नुकसान नहीं
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सलूंबर जिले में स्थित ईडाणा माता ने 11 महीने बाद आज सुबह फिर अग्नि स्नान किया है। इसकी लपटें 12 फीट से ज्यादा उठी थी और वहां मौजूद भक्तों ने अग्नि स्नान के दर्शन कर अपने आप को भाग्यशाली माना और माता की जयकारा लगाई। गुरुवार सुबह करीब 8 बजकर 50 मिनट पर माताजी के अग्नि स्नान की जानकारी सामने ही भक्तों ने दर्शन किए। मान्यता है कि माता के प्रसन्न होने पर मंदिर में अग्नि प्रज्वलित होती है। इससे पूर्व माताजी ने 18 मार्च 2025 को अग्नि स्नान किया था। माना जाता है कि इसको देखने वाले हर व्यक्ति की इच्छा पूरी होती है।
अग्नि स्नान के दौरान मंदिर परिसर में जहां माता रानी बिराजित है वहां स्वयं अग्नि प्रज्वलित हुई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर जयकारे लगाए और माताजी की आराधना की। परंपरा के अनुसार अग्नि स्नान के समय समस्त सामग्री भस्म हो जाती है, किंतु आश्चर्यजनक रूप से माताजी की प्रतिमा एवं आभूषणों को किसी प्रकार की क्षति नहीं होती-जिसे श्रद्धालु माताजी की महिमा का प्रतीक मानते हैं।
अग्नि स्नान कोई समय तय नहीं होता
माता रानी के अग्नि स्नान का कोई दिन और समय तय नहीं हाेता है। यह माता की इच्छा से होने वाला चमत्कार है। मंदिर में अग्नि अपने आप ही जलती है और शांत भी अपने आप ही होती है। इस दौरान मंदिर में रखी माता की चुनरी, नारियल जल जाता है। माता रानी का यह अग्नि स्नान काफी बड़ा होता है, जिसके चलते कई बार नजदीक के पेड़ को भी नुकसान पहुंचता है। आज तक माता की मूर्ति पर इसका कोई असर नहीं हुआ। भक्तों का कहना चमत्कार से कम नहीं दर्शन
बरगद के पेड़ के नीचे यहां माता विराजमान हैं और मान्यता है कि प्रसन्न होने पर वह खुद अग्नि स्नान करती हैं। इस दृश्य को देखने वाले हर किसी की इच्छा पूरी होती है। मेवल क्षेत्र में ईडाणा गांव सहित करीब 52 गांव आते हैं।
मान्यता यहां लकवा रोगी होते हैं ठीक
बताते है कि मान्यता है कि लकवा से ग्रसित रोगी मां के दरबार में आकर ठीक हो जाते हैं। प्रतिमा के पीछे त्रिशूल लगे हैं,भक्त अपनी मन्नत पूरी करवाने के लिए यहां त्रिशूल चढ़ाते हैं। संतान की मन्नत रखने वाले भक्त यहां झूले चढ़ाते हैं।
इनपुट : करण औदिच्य, पाणूंद
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