ठेकेदार-बिजनेसमैन ने दाढ़ी-मूंछों के लिए खाना छोड़ा:रोजाना मक्खन से करते हैं शामिल; डाइट में भी दूध और सूप, एक साल से काम भी छोड़ा

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जैसलमेर का मरु महोत्सव कल से शुरू होने जा रहा है। तीन दिन तक होने वाले इस फेस्टिवल में सबसे अहम हिस्सा है मिस्टर डेजर्ट और मिस मूमल का खिताब। कहा जाता है इन दोनों खिताब को जीतने के लिए एक साल के इंतजार के साथ ही एक साल की मेहनत भी करनी पड़ती है। ऐसा ही जुनून है जैसलमेर शहर के मनीष पंवार ने। मिस्टर डेजर्ट बनने के लिए उन्होंने अपनी डाइट से लेकर अपना पूरा रूटीन तक बदल दिया। मनीष पेशे से बिजनेसमैन और ठेकेदार है लेकिन इस खिताब को ​जीतने के लिए एक साल से काम भी छोड़ दिया है। खाने में यदि दाल-रोटी भी खानी है तो वे उसे चूरकर खाते हैं ताकि दाढ़ी-मूंछें खराब नहीं हो और इसकी चमक पर कोई असर न पड़े। पढि़ए इस एक खिताब के लिए कितनी मेहनत लगती है… एक साल से कर रहे हैं मेहनत, दो घंटे रोजाना करते हैं मालिश मनीष तंवर की शहर में इलेक्ट्रॉनिक्स की शॉप है। वे साथ में ठेकेदारी का भी काम करते है। लेकिन, एक साल से वे मिस्टर डेजर्ट बनने के लिए दाढ़ी-मूंछों पर ध्यान दे रहे हैं। उनका ये जुनून देख पिछले एक साल से उनके पिता और भाई दुकान और उनका काम संभाल रहे हैं। मनीष बताते हैं- मिस्टर डेजर्ट प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की नजरें सबसे पहले मूंछों के घुमाव, उनकी मोटाई और चमक पर टिकती हैं। इसके लिए किसी खिलाड़ी की ट्रेनिंग जैसी मेहनत की जरूरत होती है। ऐसे में अपनी दाढ़ी-मूंछों को संवारने के लिए एक कड़ा शेड्यूल अपनाया है। मनीष ने बताया- इसके लिए सबसे जरूरी है- सुबह के समय इन पर मसाज करना। इसके साथ इन्हें एक दिशा में सेट करने के लिए रोजाना मालिश करनी पड़ती है। इसलिए रोजाना सुबह दो घंटे मालिश करना जरूरी है। आधा किलो मक्खन से करते हैं मालिश, मुल्तानी मिट्टी का लेप भी मनीष ने बताया कि सबसे जरूरी है बालों की ग्रोथ। इसके लिए वे देसी और कुछ मार्केट प्रोडक्ट दोनों का यूज कर रे है। बालों की ग्रोथ के लिए वे सरसों और नारियल तेल को यूज करते हैं। वहीं इनकी सॉफ्टनेस (मुलायमियत) के लिए मक्खन और मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाया जाता है। इसके अलावा कई बियर्ड सिरम और दूसरे प्रोडक्ट को भी वे यूज करते है। मनीष ने बताया कि एक साल में वे दाढ़ी-मूंछों पर 70 हजार रुपए से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। दाढ़ी न बिगड़े, इसलिए अन्न का त्याग इस प्रतियोगिता की तैयारी में सबसे बड़ी चुनौती ‘डाइट कंट्रोल’ नहीं, बल्कि ‘ईटिंग स्टाइल’ (खाने का तरीका) है। जब दाढ़ी और मूंछें एक निश्चित लंबाई पार कर लेती है तो भोजन के दौरान उनके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। मनीष ने बताया कि दाढ़ी की सफाई और उसके ‘सेट’ को बनाए रखने के लिए उन्होंने लंबे समय से अन्न छोड़ दिया है। यानी वे किसी भी ठोस खाने को नहीं खाते। रोटी भी खानी है तो दाल या सब्जी के साथ चूरकर ताकि दाढ़ी-मूंछें खराब न हो। इतना ही नहीं वे एक साल से ज्यादातर लिक्विड डाइट पर निर्भर हैं। सूप, जूस और दूध को ही अपनी डाइट में शामिल किया है। 20 हजार की ड्रेस खरीदी, दादा के गोखरू पहने मनीष बताते हैं- मिस्टर डेजर्ट का लुक तब तक पूरा नहीं होता जब तक शरीर पर पारंपरिक आभूषण और राजसी वेशभूषा न हो। इसके लिए उन्होंने सिंधी जूती और कस्टमाइज राजस्थानी ड्रेस तैयार करवाई है, जिस पर 20 हजार खर्च किए है। इसके साथ ही चांदी के भारी पुराने गहने जुटाए है। इसके लिए पुराने म्युजियम और घरानों से ज्वेलरी ली है। इनमें हंसली, चंदन हार के साथ हाथ और पैरों के भारी कड़े भी शामिल है। इसके अलावा कानों में पहने के लिए दादा के गोखरू डाले है, जो राजस्थानी लुक को बढ़ा रहे है। रोजाना चार घंटे प्रैक्टिस, तलवार लेकर चलना पड़ता है दाढ़ी-मूंछों और पुराने गहनों के अलावा सबसे जरूरी है, इन्हें पहनकर स्टेज पर चलना। मनीष ने बताया कि ये प्रतियोगिता केवल दाढ़ी-मूंछों तक सीमित नहीं है। इसमें अपने आप को प्रजेंट भी करना पड़ता है।

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