बिजयनगर रेप केस, अभियुक्तों पर आरोप तय:सरकार ने जयपुर के किशनावत को विशेष लोक अभियोजक किया नियुक्त

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राजस्थान के चर्चित बिजयनगर दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब्यावर ने तीनों संबंधित मामलों में अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप तय कर दिए हैं। राज्य सरकार ने इस प्रकरण की प्रभावी पैरवी के लिए जयपुर निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता महावीर सिंह किशनावत को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है। यह प्रकरण ब्यावर जिले के बिजयनगर थाना क्षेत्र से संबंधित है। यहां नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप सामने आए थे। पीड़िता के परिजनों द्वारा बिजयनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए, प्रकरण का पर्यवेक्षण पुलिस महानिदेशक, राजस्थान, तत्कालीन एडीजीपी (क्राइम) और आईजी अजमेर रेंज द्वारा किया गया था। पुलिस अधीक्षक ब्यावर और जिले के अन्य पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों ने स्थिति को सतर्कता से संभाला। जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था, जिसकी पड़ताल में अभियुक्तों के विरुद्ध गंभीर तथ्य सामने आए। 27 जनवरी 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब्यावर ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत आरोप पत्र के आधार पर अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप सुनाए और समझाए। अभियुक्तों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए विचारण की मांग की। विशेष लोक अभियोजक महावीर सिंह किशनावत ने न्यायालय में तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि पीड़िताओं के बयान, स्वतंत्र गवाहों के कथन, चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य दस्तावेज प्रथम दृष्टया अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। इन तीनों मामलों में विभिन्न अभियुक्तों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो अधिनियम, जेजे एक्ट और एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। विशेष लोक अभियोजक ने कोर्ट से प्रकरण की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। कोर्ट ने अभियोजन साक्ष्य के लिए 12 और 13 फरवरी 2026 की तिथियां निर्धारित की हैं।

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