सरकारी बैंकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर:करौली में बैंकिंग सेवाएं ठप, कर्मचारियों ने "5 दिन काम, 2 दिन आराम" के लगाए नारे

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करौली में सरकारी बैंकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं ठप रहीं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर कर्मचारियों और अधिकारियों ने 5-दिवसीय कार्य सप्ताह सहित विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। इस हड़ताल से आम ग्राहकों, किसानों और छोटे व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। करौली जिला मुख्यालय पर बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा के बाहर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग दो साल पुराने समझौते को लागू करना है, जिसमें सभी शनिवार को अवकाश के साथ 5-दिवसीय कार्य सप्ताह का प्रावधान है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समझौते पर सहमति और IBA की मंजूरी के बावजूद, सरकार ने अब तक इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। इस देरी के कारण कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। धरने के दौरान “5 दिन काम, 2 दिन आराम” और “समझौता लागू करो” जैसे नारे लगाए गए। स्थानीय यूनियन नेता रामेश्वर मीणा ने बताया कि स्टाफ की कमी और बढ़ते कार्यभार के कारण कर्मचारियों का वर्क-लाइफ बैलेंस प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि नवंबर 2023 में हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में 5-दिवसीय कार्य सप्ताह पर सहमति बनी थी, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल पूरे राजस्थान में देखी गई, जहाँ जयपुर, जोधपुर और उदयपुर सहित कई जिलों में बैंक कर्मचारी सड़कों पर उतरे। करौली में भी इसका सीधा असर दिखा; अधिकांश बैंक शाखाएं बंद रहीं, एटीएम में नकदी की कमी हुई और ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग पर निर्भर रहना पड़ा। लगातार छुट्टियों और हड़ताल के कारण चार दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। UFBU ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्राहकों को फिलहाल डिजिटल माध्यमों से लेनदेन करने की सलाह दी जा रही है।

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