राव इंद्रजीत पर सीधे बयानबाजी क्यों:विश्लेषक मान रहे- जानबूझकर राव नरबीर-अभय को खुली छूट, BJP हाईकमान की मौन स्वीकृति

[ad_1]


अहीरवाल की सियासत में एकछत्र राज कर रहे राव इंद्रजीत पर पहली बार सीधे हमले हो रहे हैं। वो भी नाम लेकर। नायब सरकार में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह व पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव खुलकर केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत और प्रदेश में कैबिनेट मंत्री उनकी बेटी आरती राव को सीधे निशाने पर ले रहे हैं। राव इंद्रजीत के लिए “छोटे दिल वाला” और “अहीर समाज के ठेकेदार” जैसे शब्द इस्तेमाल हो रहे हैं। रविवार को राव नरबीर सिंह ने यहां तक कह दिया- “राव इंद्रजीत पर उम्र का तकाजा है। वे पुरानी बातें भूल गए हैं। मेरा तो राजनीतिक जीवन ही राव इंद्रजीत को हरा कर शुरू हुआ है। 26 साल की उम्र में मैंने जाटूसाना जाकर राव इंद्रजीत को उनके गढ़ में हराया था।” असल में अहीर वोटरों के प्रभाव वाली 11-12 विधानसभा सीटों वाले अहीरवाल में BJP नेताओं में मचे घमासान पर पार्टी की चुप्पी हैरान कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस खुली बयानबाजी को पार्टी हाईकमान की मौन स्वीकृति हो सकती है। राव नरबीर और डॉ. अभय सिंह को ‘खुली छूट’ मिली है, तभी तो सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की बयानबाजी के बावजूद किसी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई। सबसे पहले पिछले कुछ दिनों में अहीर नेताओं की बयानबाजी पर नजर डालें मंत्री राव नरबीर 3 बड़े बयान… अभय सिंह यादव के 2 बयान… राव इंद्रजीत के 2 ताजा बयान… आरती राव के 2 अहम बयान… अब समझिए राजनीतिक विश्लेषक इसे किस नजरिए से देख रहे राव इंद्रजीत काे घर बैठाने की तैयारी के संकेत
दक्षिण हरियाणा की राजनीति पर नजर रखने वाले पॉलिटिकल एनालिस्ट नरेश चौहान का कहना है कि ऐसा मान सकते हैं कि भाजपा अब राव इंद्रजीत को “घर बैठाने” के लिए तैयार है। इसलिए उनके धुर विरोधी राव नरबीर को कंट्रोल नहीं किया जा रहा। इसलिए वे बाकायदा नाम लेकर राव इंद्रजीत पर निशाना साध रहे हैं। यह कोई एक दिन का नैरेटिव नहीं, बल्कि पिछले कुछ महीनों से राव इंद्रजीत की हर एक्टिविटी पर पार्टी की नजर है। क्या पार्टी आलाकमान को यह सब पता नहीं चल रहा? मीडिया में लगातार छप रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं। ये सोचने वाली बात है कि अनुशासनहीनता के बावजूद पार्टी चुप्पी क्यों साधे हुए है। ये जुबानी जंग अहीरवाल का बड़ा नेता बनने की होड़
हरियाणा की राजनीति पर द पॉलिटिक्स ऑफ चौधर शीर्षक से किताब लिख चुके वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सतीश त्यागी का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि अहीरवाल की राजनीति में रामपुरा हाउस (राव इंद्रजीत का पैतृक आवास) का बड़ा प्रभाव रहा है। तीन पीढ़ियों से उनकी प्रतिद्वंद्विता राव नरबीर के परिवार से रही है। राव नरबीर पहले भी नाम लेकर राव इंद्रजीत पर निशाना साधते रहे हैं। इस बार खुलकर बोल रहे हैं, नाम ले रहे हैं। अब राव इंद्रजीत भी खुलकर बोल रहे हैं, तो कंट्रोवर्सी बढ़ गई है। यह जुबानी जंग केवल अहीरवाल का बड़ा नेता बनने की होड़ के चलते हो रही है। डॉ. अभय सिंह अपने वजूद के लिए लड़ रहे हैं। उन्हें केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल का खासमखास माना जाता है। राव इंद्रजीत के कंट्रोवर्सी में रहने की 3 बड़ी वजह… अब जानिए चुप रहने वाले राव इंद्रजीत इतने मुखर क्यों हुए… राजनीतिक रिटायरमेंट की आहट और उत्तराधिकार की चिंता
राव इंद्रजीत की उम्र अब 75 वर्ष पार हो चुकी है। पहले वे शांत रहकर प्रभाव बनाए रखते थे, लेकिन अब रिटायरमेंट की आशंका से वे आक्रामक हो गए हैं। वे खुद को अहीरवाल का “राजा” मानते हैं और बेटी आरती राव को अपना उत्तराधिकारी बता चुके हैं। विरोधियों के बड़बोलेपन से नाराज: राव नरबीर और राव अभय सिंह उन्हें आउटडेटेड साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वे नाम लेकर हमला कर रहे हैं। उनके तीखे बयान से उनका प्रभाव बनाए रखने की कोशिश साफ दिखती है। महत्वाकांक्षा का दर्द
पहले वे पार्टी लाइन पर चलते थे, लेकिन 2024 चुनाव जीत के बाद भी मुख्यमंत्री न बन पाने की टीस बढ़ गई। वे दक्षिण हरियाणा को “उचित इनाम” न मिलने की शिकायत करते हैं और अब नाम लेकर सीएम नायब सैनी, पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर या राव नरबीर पर निशाना साधते हैं। वर्चस्व के खेल में डॉ. अभय सिंह भी खिलाड़ी बनना चाह रहे
अहीरवाल की राजनीति में पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव का रोल मुख्य रूप से राव इंद्रजीत सिंह के धुर विरोधी के रूप में सामने आया है। वे पूर्व IAS अधिकारी और नांगल चौधरी से भाजपा विधायक और खट्टर सरकार में मंत्री रह चुके हैं। अब वे राव इंद्रजीत के खिलाफ खुलकर बोलते हैं और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बने हैं।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *