प्रदेश में साइबर ठगों के बढ़ रहे हौंसले:रिटायर्ड अफसर को मनीलॉन्ड्रिंग केस में संदिग्ध बता धमकी दी, 5 माह डिजिटल अरेस्ट करते रहे, 66.49 लाख रुपए ठगे




भरतपुर के जवाहर नगर निवासी एक सेवानिवृत अधिकारी के साथ ठगों ने खतरनाक और लंबा जाल बिछाया। ठगों ने खुद को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस और बैंगलोर पुलिस बताकर पीड़ित को करीब पांच महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उसे डरा-धमका कर करीब 66.49 लाख रुपए ठग लिए। जिले के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने इस मामले में साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। पीड़ित ने बताया वह ठगों से इस कदर डर गया कि उसने कई बार सुसाइड करने की भी कोशिश की। ठगी का यह सिलसिला 18 अगस्त 2025 से शुरू होकर 29 जनवरी 2026 तक यानी लगभग साढ़े पांच महीने तक चला। ठगों ने जांच के नाम पर पीड़ित को करीब पांच महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। रोज सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उसे ऑनलाइन निगरानी में रखा जाता था। इसके बाद भी हर तीन घंटे में रिपोर्टिंग करानी पड़ती थी। पीड़ित को अपनी लोकेशन, गतिविधि और साथ मौजूद व्यक्ति की जानकारी देनी होती थी। डिजिटल अरेस्ट के चलते पीड़ित ने दिन के सभी रुटीन कार्य छोड़ दिए थे। घर में उस समय केवल पत्नी साथ रहती थी। पत्नी को बार-बार शक होता था, लेकिन पीड़ित खुद को किसी सरकारी प्रोजेक्ट में व्यस्त बताकर बात टाल देता था। पीड़ित का बेटा एमबीए कर मुंबई में नौकरी करता है और रोज शाम बातचीत होती थी। पीड़ित की दो बेटियां भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है, उन्हें भी कुछ नहीं बताया गया। ठगों ने धमकाया था कि यदि किसी को बताया तो परिवार के सदस्यों को सात साल की सजा होगी। इसी डर के कारण पीड़ित किसी को कुछ नहीं बता पाया। पीड़ित ने पत्नी की पीएनबी बैंक की एफडी और पोस्ट ऑफिस की 36 लाख रुपए की एफडी तुड़वाई।ठगों ने आरटीजीएस और यूपीआई से अलग-अलग किस्तों में 22.05 लाख, 35.70 लाख और 6.55 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए। पैसे मिलने पर ठग बाकायदा सुप्रीम कोर्ट के फर्जी लेटरहैड पर राशि प्राप्ति की रसीद भी भेजते थे ताकि पीड़ित को शक न हो। यह पूरा मानसिक टॉर्चर तब खत्म हुआ जब पीड़ित अहसास हुआ कि वह किसी बड़ी साजिश का शिकार हो चुका है। इसके बाद पीडि़त ने पुलिस को सूचना दी। भरतपुर एसपी दिगंत आनंद ने बताय कि पीड़ित को करीब पांच महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 66.49 लाख रुपये की ठगी की गई। मामला सामने आते ही तुरंत एफआईआर दर्ज की गई और एक विशेष टीम गठित कर जांच शुरू कर दी गई है।



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