नाबालिग से छेड़छाड़ और सुसाइड मामला:पीड़ित पक्ष को बताए बिना गोवर्धन बना परिवादी, पॉक्सो कोर्ट में परिवाद लगाया
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प्रदेश के डूंगरपुर जिले में दिसंबर 2025 में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ व सुसाइड मामले में पीड़ित पक्ष की जानकारी के बिना बीसीआर से बर्खास्त गोवर्धन सिंह ने जयपुर मेट्रो की पॉक्सो कोर्ट में खुद पीड़ित पक्ष का परिवादी बन परिवाद दायर किया है, जबकि पीड़ित पक्ष ने गोवर्धन सिंह को ऐसा कोई अधिकार नहीं दिया। चौंकाने वाली बात तो यह है कि गोवर्धन सिंह ने पीड़ित पक्ष को इस परिवाद की कोई जानकारी भी नहीं दी। जब पीड़ित पक्ष को इसका पता चला तो उनकी ओर से मंगलवार को अधिवक्ता दीपक चौहान पॉक्सो कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र पेश किया कि पीड़ित पक्ष इस परिवाद में एक जरूरी पक्षकार है। वहीं पॉक्सो कानून में गोवर्धन सिंह पीड़ित पक्षकार नहीं है, ना ही पीड़ित पक्ष की ओर से दर्ज एफआईआर से उसका कोई भी संबंध है। यदि गोवर्धन सिंह के परिवाद पर कोर्ट एफआईआर दर्ज कराती है तो ऐसी स्थिति में पीड़ित पक्ष को जयपुर आकर पैरवी करनी होगी। इससे वह गैर जरूरी तौर पर और भी ज्यादा पीड़ित होगा, क्योंकि पीड़ित पक्ष डूंगरपुर जिले का रहने वाला है और उसने वहीं पर एफआईआर दर्ज कराई है, घटना भी वहीं की है। ऐसी मुकदमेबाजी से पीड़ित ही प्रभावित होंगे, ये न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग :दीपक चौहान पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता दीपक चौहान का कहना है कि यह घटना जयपुर से कई किमी दूर डूंगरपुर की है। जयपुर की पॉक्सो कोर्ट में इस तरह से परिवाद दायर करने और मुकदमेबाजी से पीड़ित पक्ष ही ज्यादा प्रभावित होगा। यह घटना डूंगरपुर की है और इसमें मूल एफआईआर भी वहीं पर ही दर्ज हुई है। यहां परिवाद होने से पीड़ित पक्ष को यहां आकर पैरवी करनी होगी। ऐसा होना भी न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। गोवर्धन ने निजी हितों के लिए लगाया परिवाद पीड़ित पक्ष ने कहा कि गोवर्धन सिंह ने खुद के निजी हितों के लिए जयपुर की पॉक्सो कोर्ट में परिवाद दायर कर पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की प्रार्थना की है। यदि इस तरीके से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जाता है तो वास्तव में पीड़ित पक्षकारों को भी इससे परेशानी होगी और उसे न्याय भी नहीं मिल सकेगा। पॉक्सो कोर्ट ने परिवाद पर जयपुर में सुनवाई के बिन्दु और न्यायिक क्षेत्राधिकार पर मंगलवार को पक्षकारों की बहस पूरी कर ली। क्रिमिनल केसों की जानकारी छिपाने पर बीसीआर ने गोवर्धन को किया था बर्खास्त बीसीआर (बार कौंसिल ऑफ राजस्थान) ने रजिस्ट्रेशन के लिए आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी को जानबूझकर छिपाने वाले गोवर्धन सिंह परिहार का नाम एडवोकेट ऑन रोल से हटा दिया है। इसलिए गोवर्धन सिंह अपने नाम के साथ में एडवोकेट शब्द का उपयोग नहीं कर पाएगा।
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