ऑल इंडिया मास्टर्स एथलेटिक्स:83 साल के एथलीट… 24 साल से धोती-कुर्ते-साफे में नंगे पैर दौड़ रहे, एक हाथ नहीं फिर भी 80 मेडल जीते

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पटेल मैदान में 7वीं ऑल इंडिया मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप शुरू हुई। देश के 90 साल तक के एथलीट अपना जोश दिखाने जुटे हैं। 1700 से ज्यादा एथलीट अपने-अपने राज्य का प्रतिनिधित्व रंग-बिरंगे और नाम लिखे ट्रैक सूट पहने कर रहे हैं, ट्रैक के बाहर बैठे खिलाड़ी ठंड के मारे जूते और सिर से कैप भी नहीं उतार पा रहे, लेकिन इस आधुनिक परिवेश के खिलाड़ियों के बीच धोती, कुर्ता और साफा पहने नंगे पैर अनोखे अंदाज में भी एक व्यक्ति दिखा। हवा में कुर्ते की बांह लहराती दिखी तो पता चला एक हाथ भी नहीं है। एक बार में अंदाजा लगा गया कि यह खिलाड़ी नहीं हो सकता, लेकिन खिलाड़ी के लिए शायद उसका जुनून ही सबसे बड़ा हथियार है जो उसे मैदान में जीत दिलाने के लिए काफी होता है। बात करने पर पता चला कि वो 83 साल के हरियाणा के झज्जर जिले के तेज सिंह हैं जो अब तक 8 देशों में खेलकर नेशनल और स्टेट चैंपियनशिप में 80 से ज्यादा मेडल जीत चुके हैं। परिवार में खेल से किसी का जुड़ाव नहीं रहा। खुद भी खेतों में हल जोतने वाले किसान रहे। किसान से एथलीट बनने की कहानी भी रोचक है जिसकी शुरुआत बचपन या जवानी में नहीं बल्कि 59 साल की उम्र में हुई। मशीन में हाथ कट गया, जिंदगी यहीं से बदली खेतों में काम करते समय तेज सिंह का दायां हाथ थ्रेशर में आने की वजह से कट गया था। 59 साल की उम्र में बतौर किसान सीधा हाथ कटा तो जिंदगी मुश्किल होने लगी, लेकिन यही पल इनके जीवन में बदलाव की वजह भी बना। हादसे के 6 महीने बाद हरियाणा में हुई पंचायती प्रतियोगिता में एक धावक नहीं आया। दर्शक के रूप में गए तेज सिंह को लोगों ने पकड़कर मजाकिया अंदाज में ट्रैक के बीच लाकर खड़ा कर दिया, लेकिन तेज सिंह ने शर्मिंदा होने के बजाए उन्हें जवाब देने के लिए वो दौड़ पूरी की और अन्य पांच प्रतिभागियों को हराकर पहला स्थान हासिल किया। हरियाणा की शान है धोती-साफा : 100 मीटर इवेंट में ट्रैक पर उतरने वाले हरियाणा के तेज सिंह पिछले 24 साल से धोती-साफा पहनकर नंगे पैर दौड़ रहे हैं। उनका कहना है कि दौड़ूंगा तो इसी में, वरना नहीं। बैंगलुरु की चैंपियनशिप में गर्म ट्रैक से पैर जलने के बावजूद उनकी जिद नहीं टूटी। आज भी वे उसी अंदाज में ट्रैक पर उतरते हैं।

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राजस्थान में आज बारिश और ओले गिरने का अलर्ट:तेज हवा चलेगी, 12 जिलों में बदलेगा मौसम; जानिए- कहां रहेगा असर

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मौसम केन्द्र जयपुर ने शनिवार को 12 जिलों में ओले-बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, शुक्रवार को राजस्थान में कड़ाके की सर्दी और सर्द हवाओं से शुक्रवार को थोड़ी राहत रही। उत्तरी हवा कमजोर रहने से न्यूनतम और दिन में तेज धूप निकलने से अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी हुई। जोधपुर, जालौर, पाली, बाड़मेर में शुक्रवार का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज हुआ। वहीं, दोपहर बाद उदयपुर, कोटा संभाग के एरिया में मौसम में बदलाव हुआ। वेस्टर्न डिर्स्टबेंस के कारण आसमान में हल्के बादल छाए। पिछले 24 घंटे का मौसम देखे तो जयपुर, भरतपुर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर संभाग के एरिया में शुक्रवार को पूरे दिन आसमान साफ रहा और दिन में तेज धूप रही। दिन का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस पाली में दर्ज हुआ। सर्द हवा से मिली राहत उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं से भी शुक्रवार को राजस्थान में थोड़ी राहत रही। बीकानेर, गंगानगर, जयपुर, पिलानी, फतेहपुर, दौसा समेत कई जिलों में न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री तक बढ़ोतरी हुई। सबसे कम न्यूनतम तापमान सिरोही में 4.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। सर्द हवाएं नहीं चलने से सुबह-शाम की कड़ाके की सर्दी से भी मामूली राहत रही। आज से बदलेगा मौसम मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया- आज से ​एक पश्चिमी विक्षोभ राजस्थान पर एक्टिव होगा। इस सिस्टम का असर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के जिलों में 31 जनवरी यानी आज और एक फरवरी को देखने को मिलेगा। इस दौरान उदयपुर, कोटा, जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग के एरिया में बादल छाएंगे और कहीं-कहीं तेज हवाएं चलने के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। इसको देखते हुए कुछ जिलों के लिए ऑरेंज और कुछ जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है।

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हिस्ट्रीशीटर को दो मामलों में सजा:कोर्ट ने 5-5 साल का कठोर कारावास और 50 हजार जुर्माना की सजा सुनाई

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जोधपुर कमिश्नरेट के भगत की कोठी थाना के हिस्ट्रीशीटर राहुल गुर्जर को नकबजनी के दो मामलों में 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। केस ऑफिसर स्कीम के तहत भगत की कोठी थाना के मामलों में यह सजा सुनाई गई। इसमें सहायक लोक अभियोजनक आनन्द व्यास और कोर्ट पैरोकार सुखराम की विशेष भूमिका रही। पुलिस उपायुक्त पश्चिम विनीत कुमार बंसल की आरोपी के खिलाफ दर्ज प्रकरणों को केस ऑफीसर स्कीम में लिया गया। भगत की कोठी थानाधिकारी को केस ऑफीसर नियुक्त कर लोकर अभियोजक के मार्फत प्रभावी पैरवी की गयी और थाना के कोर्ट पेरोकार के द्वारा समस्त गवाहान, साक्ष्य समय पर न्यायालय मे प्रस्तुत किये गये। इस पर न्यायालय द्वारा दिनाक 27 जनवरी को निर्णय करते हुए दोनों प्रकरणो मे आरोपी राहुल गुर्जर को 5-5 साल कठोर कारावास व 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। इन मामलों में हुई सजा 1. पुलिस थाना भगत की कोठी, जोधपुर में परिवादी कमलेश द्वारा 6 दिसंबर 2021 को दर्ज करवाया कि कोई अज्ञात घर मे से रात्रि मे एक सोने की चेन व 50 हजार रूपये नकद चोरी कर भाग गया। इस पर पर 26/2021 धारा 454, 380 भादस मे प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। 2. पुलिस थाना भगत की कोठी, जोधपुर में परिवादी जयसिंह मेवाडा द्वारा 4 अगस्त 2023 को केस दर्ज करवाया कि कोई अज्ञात व्यक्ति 12 हजार रूपये पेंट की जेब से चोरी कर ले गया। इस पर 190/2023 धारा 457, 380 भादस मे प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। सीसीटीवी फुटेज से की पहचान पुलिस ने मामले का त्वरित अनुसंधान कर सीसीटीवी फुटेज से अवलोकन कर प्रकरण में अज्ञात आरोपी की पहचान कर राहुल गुर्जर (24) पुत्र बाबुलाल निवासी देवनारायण मंन्दिर की प्रथम गली भगत की कोठी, जोधपुर की पहचान व दस्तयाब किया। इसके बाद न्यायिक अभिरक्षा मे भिजवाकर तय समय मे चालान एसीजेएम (सीबीआई कैसेज) जोधपुर महानगर के कोर्ट में पेश किया गया। मामलों में प्रभावी पैरवी की गई और आरोपी को सजा दिलाई गई। ये रहे टीम में शामिल आरोपी को सजा दिलाने वाली टीम में भगत की कोठी थानाधिकारी राजीव भादू (आरपीएस) , आनन्द व्यास, सहायक लोक अभियोजक अधिकारी कोर्ट, एसीजेएम (सीबीआई कैसेज) जोधपुर महानगर और कोर्ट पैरोकार सुखराम शामिल रहे।

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Maharashtra Oath Ceremony Today | Ajit Pawars Son Parth Rajya Sabha; Ajit Pawars Wife Dy CM

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मुंबई/बारामती6 मिनट पहले

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29 जनवरी को बारामती में अजित पवार का अंतिम संस्कार हुआ। दोनों बेटों पार्थ और जय पवार ने मुखाग्नि दी थी। अजित की फोटो के पास बैठीं पत्नी सुनेत्रा। - Dainik Bhaskar

29 जनवरी को बारामती में अजित पवार का अंतिम संस्कार हुआ। दोनों बेटों पार्थ और जय पवार ने मुखाग्नि दी थी। अजित की फोटो के पास बैठीं पत्नी सुनेत्रा।

अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम होंगी। सूत्रों के मुताबिक आज दोपहर 2 बजे मुंबई में NCP के विधायक दल और विधान परिषद सदस्यों की बैठक के बाद उनके नाम का ऐलान किया जाएगा। शाम 5 बजे सुनेत्रा शपथ ले सकती हैं।

सुनेत्रा वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। उनके डिप्टी सीएम बनने के बाद यह पद खाली हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अजित के बड़े बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी है। हालांकि पार्टी-परिवार की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

दरअसल अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती में प्लेन क्रैश में मौत हुई है। उनके जाने से महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम पद खाली हुआ है। अजित के पास वित्त, आबकारी और खेल विभाग के साथ-साथ डिप्टी चीफ मिनिस्टर का पद था। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय सीएम फडणवीस के पास रह सकता है।

यह भी दावा भी किया जा रहा है कि अजित पवार NCP के दोनों गुट के जिस मर्जर पर बातचीत कर रहे थे, उस पर आखिरी फैसला शरद पवार लेंगे।

कल दोपहर में बैठक, शाम को शपथ

  • एनसीपी विधायक दल-विधान परिषद सदस्यों की दोपहर 2 बजे मुंबई में बैठक होगी।
  • बैठक के बाद दोपहर सुनेत्रा पवार के नाम का ऐलान किया जाएगा।
  • सुनेत्रा पवार शाम 5 बजे डिप्टी सीएम की शपथ ले सकती हैं।
  • अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा है, हालांकि इस मामले में अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है।
तस्वीर 28 जनवरी की है। अजित पवार के निधन के बाद बारामती के मेडिकल कॉलेज में महाराष्ट्र CM फडणवीस और डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की थी।

तस्वीर 28 जनवरी की है। अजित पवार के निधन के बाद बारामती के मेडिकल कॉलेज में महाराष्ट्र CM फडणवीस और डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की थी।

अमरावती से मुंबई तक दिन भरा चला मीटिंग का दौर

सुबह 11 बजे: एनसीपी नेता डिप्टी सीएम और विभागों की मांग को लेकर मुंबई में शुक्रवार सुबह फडणवीस से मिलने उनके घर वर्षा बंगले पहुंचे। इनमें प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे शामिल थे। मीटिंग आधे घंटे तक चली। शाम 6 बजे: अजित की पत्नी सुनेत्रा पवार ने नरेश अरोड़ा को राजनीतिक सलाह के लिए बारामती बुलाया। नरेश, अजित पवार के चुनावी रणनीतिकार हैं। उनकी संस्था ‘डिजाइनबॉक्स’ एनसीपी के लिए काम करती है। रात 8 बजे: नरेश अरोड़ा मुंबई के लिए रवाना हुए, तब खबर आई कि सुनेत्रा डिप्टी सीएम बनने के लिए राजी हो गई हैं। हालांकि राज्य में बजट को देखते हुए उन्हें फिलहाल वित्त विभाग नहीं दिया जाएगा। रात 8:30 बजे: सीएम फडणवीस ने कहा, जो भी फैसला लेना है, NCP लेगी। चाहे पवार परिवार हो या पार्टी, हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। NCP नेताओं ने मुझसे इस बारे में दो बार बात की है।

NCP विलय को लेकर 3 लोगों के दावे

अजित के करीबी किरण गुजर ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि वे दोनों गुटों को मिलाने के लिए 100% उत्सुक थे। उन्होंने पांच दिन पहले कहा था कि प्रक्रिया पूरी हो गई है और अगले कुछ दिनों में विलय होने वाला है। गुजर ने कहा कि अजीत के पास विलय और एकजुट NCP के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार था।

एनसीपी के सीनियर नेता जयंत पाटिल ने भी कहा है कि विलय को लेकर अजित दादा और उनके बीच कई बैठकें हो चुकी थी। अजित इसे लेकर सकारात्मक थे। जिला परिषद चुनाव के बाद इस पर अंतिम निर्णय होना था। अजित दादा ने कहा था पहले स्थानीय निकाय के चुनाव गठबंधन करके लड़ा जाए, विलय का फैसला चुनाव के बाद लेंगे।

एनसीपी शरद गुट के नेता एकनाथ खड़से ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा है कि एनसीपी के दोनों गुट एक साथ आएंगे। मर्जर तय हो चुका था।

NCP का विलय हुआ तो क्या होगा…

NCP (SP) के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि बुधवार को हुए प्लेन क्रैश से पहले NCP के दोनों पक्ष बातचीत के एडवांस्ड स्टेज पर पहुंच गए थे। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के खत्म होने के तुरंत बाद विलय की घोषणा किए जाने का प्लान था।

अजित की रणनीति यह थी कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान माहौल का जायजा लिया जाए और पूरी तरह से विलय की घोषणा करने से पहले दोनों पार्टियों के वोट बैंक को मजबूत किया जाए।

सूत्रों का कहना है कि विलय से कैबिनेट के गणित में मौलिक बदलाव आएगा। अगर विलय होता है, तो NCP (SP) के नेता राज्य के शासन और पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस मर्जर को पश्चिमी महाराष्ट्र के शुगर बाउल पर फिर से कब्जा करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां BJP ने हाल के नगर निगम चुनावों में अहम पकड़ बनाई है।

विलय के बाद NCP के पास 9 लोकसभा सांसदों और 51 विधायकों का एक मजबूत संयोजन होगा, जो संभावित रूप से सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन या विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर संतुलन बदल सकता है।

अजित की जगह CM फडणवीस पेश कर सकते हैं बजट

अजित के निधन के बाद अब लगभग यह तय है कि महाराष्ट्र का वित्त विभाग फिलहाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास रहेगा और मार्च में CM ही महाराष्ट्र का बजट पेश करेंगे। जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे तब उपमुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस के पास गृह और वित्त दोनों महत्वपूर्ण विभाग थे। फडणवीस ने 9 मार्च 2023 को महाराष्ट्र राज्य का बजट भी पेश किया था।

जुलाई 2023 में जब अजित पवार महायुति सरकार में शामिल हुए तब वित्त मंत्रालय फडणवीस ने अजित पवार को सौंप दिया था। वे 23 फरवरी को राज्य का बजट पेश करने वाले थे। फडणवीस के पहले कार्यकाल (2014-2019) में वित्त मंत्रालय सुधीर मुनगंटीवार के पास था।

सुधीर मुनगंटीवार अभी सिर्फ विधायक हैं लेकिन फडणवीस सरकार का हिस्सा नहीं है। उनके मंत्री बनने और फिर से वित्त मंत्रालय मिलने की संभावना बेहद कम है।

जुलाई 2023 में टूटी थी NCP

शरद पवार ने 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बनाई थी। जुलाई 2023 में अजित पवार, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए थे। इसके बाद NCP दो हिस्सों में बंट गई थी। उस समय उन्हें उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी पवार उसी पद पर बने रहे।

(NCP के) पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावे को लेकर दोनों गुटों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी, जिसमें अजित पवार के गुट को मूल NCP नाम और एनालॉग अलार्म घड़ी चुनाव चिह्न मिला था। वर्तमान में, NCP महायुति सरकार का हिस्सा है, जबकि NCP (SP) विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में शामिल है।

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अजित पवार ने कहा था-नियति बुलाए तो जाना पड़ता है: 4 दिन बाद प्लेन क्रैश में मौत; बारामती के कान्हेरी की सभा का वीडियो वायरल

महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार ने बारामती के कान्हेरी में 24 जनवरी को एक चुनावी रैली में यह बात कही थी। महज 4 दिन बाद, यानी 28 जनवरी को बारामती जाते समय प्लेन क्रैश में उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में गुरुवार को हुआ। अब अजित के बयान का वही वीडियो सामने आया है। वे मराठी में सभा को संबोधित कर रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…

अजित पवार का अंतिम संस्कार, पत्नी ने गंगाजल चढ़ाया: बेटों ने मुखाग्नि दी, गन सैल्यूट दिया गया

बारामती के काटेवाड़ी स्थित विद्या प्रतिष्ठान मैदान में गुरुवार को महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार का अंतिम संस्कार हो गया। उनके दोनों बेटों पार्थ और जय पवार ने मुखाग्नि दी। पत्नी सुनेत्रा पवार ने पति के पार्थिव शरीर पर गंगाजल चढ़ाकर अंतिम विदाई दी। इस मौके पर चाचा शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले, गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। पूरी खबर पढ़ें…

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Mithun Chakrabortys First Film Feeling & Manoj Muntashirs Emotional Songwriting

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4 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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‘बॉर्डर 2’ में देशभक्ति, जज्बे और जमीन से जुड़े इमोशंस का ऐसा संगम है कि फिल्म का हर सीन दर्शकों के दिल में सीधे उतर रहा है। फिल्म के गाने भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान फिल्म के गीतकार मनोज मुंतशिर ने बताया कि जब तक अच्छे शब्द नहीं मिले तब तक गाने 9 महीनों तक लगातार लिखते रहे। कई बार गीत लिखते वक्त उनकी आंखों में आंसू आ जाता था। म्यूजिक डायरेक्टर मिथुन ने बताया कि उन्हें 20 साल के करियर के बाद भी लगा कि ‘बॉर्डर 2’ उनकी पहली फिल्म है। पेश है मनोज मुंतशिर और मिथुन से हुई बातचीत के कुछ और प्रमुख अंश..

सवाल: जब ‘बॉर्डर 2’ का ऑफर आया तो मन में पहला सवाल क्या था? पुरानी विरासत को बचाना या नई पहचान बनाना?

मनोज मुंतशिर/ जवाब: पुरानी लेगेसी को सम्मान देना। ‘बॉर्डर’ ने जो इज्जत कमाई है, उसे बनाए रखना ही हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य था। हमने अन्नू मलिक और जावेद अख्तर साहब से बहुत कुछ सीखा। ‘बॉर्डर 2’ की नई कहानी और नई सिचुएशन हैं। लेकिन पुराने गानों के आगे हमारा सिर हमेशा झुका रहा। हमने अपना बेस्ट दिया। लेकिन मूल बॉर्डर साउंडट्रैक के लिए हमेशा सम्मान रहा। सभी रिक्रिएटेड गानों में हमारी श्रद्धांजलि झलकती है।

सवाल: मिथुन आप इस बारे में क्या कहना चाहेंगे?

मिथुन/जवाब: मनोज जी जिस सम्मान की बात कर रहे रहे हैं, वो गानों में साफ सुनाई देता है। “घर कब आओगे” और “जाते हुए लम्हों” सुनिए तो पता चलेगा। ये मूल गानों के सामने नमन हैं। पूरे एहतराम और प्रार्थना के साथ बनाए गए। हमारा यही भाव था। जो लोग पसंद कर रहे हैं, उन्हें ये भावना महसूस हुई।

'बॉर्डर 2' सिनेमाघरों में 23 जनवरी 2026 को रिलीज हुई।

‘बॉर्डर 2’ सिनेमाघरों में 23 जनवरी 2026 को रिलीज हुई।

सवाल: ‘बॉर्डर 2’ के गाने बनाते समय प्रेशर महसूस हुआ?

मिथुन/ जवाब: मुझे लगता है कि प्रेशर ऐसा शब्द है, जिससे मैं या शायद मनोज जी भी ज्यादा रिलेट नहीं करते। हां, जिम्मेदारी जरूर होती है, और वो हर फिल्म में होती है, क्योंकि हर कहानी कुछ न कुछ कहना चाहती है। इसलिए संगीतकार और गीतकार से वही उम्मीद की जाती है।

लेकिन जब बात ‘बॉर्डर’ की होती है, तो जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है। ये सिर्फ एक ब्रांड की बात नहीं है। अगर कुछ देर के लिए फिल्म का नाम ‘बॉर्डर’ न भी मानें, तब भी ये हमारे सैनिकों की सच्ची कहानियों पर आधारित है। 1971 में भारत ने कई मोर्चों पर युद्ध लड़े थे।

‘बॉर्डर’ लोंगेवाला की लड़ाई पर थी, जबकि इस बार कहानी एक अलग फ्रंट की है। इस फिल्म की कहानी से हमारे देश के शहीदों के नाम जुड़े हैं, और यही इसे बेहद गंभीर और संवेदनशील बनाता है। हम हाल ही में शहीदों के परिवारों से मिले और तब समझ आया कि इस कहानी से जुड़ना कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।

सवाल: ‘बॉर्डर’ के म्यूजिक से आपका रिश्ता कैसा रहा है, और नए वर्जन को लेकर आपका नजरिया क्या था?

मनोज मुंतशिर/जवाब: ‘बॉर्डर’ के दो गाने मेरी जिंदगी का हिस्सा तब से हैं, जब वे कैसेट पर आए थे। तब प्लेलिस्ट का कॉन्सेप्ट नहीं था, लेकिन शायद ही कोई हफ्ता ऐसा गया हो जब मैंने उस म्यूजिक को दोबारा न सुना हो। उस म्यूजिक से हम बेहद करीबी रिश्ता महसूस करते हैं।

ऐसे में न मैं और न ही मिथुन सर कभी किसी रेस में थे कि हम इससे बेहतर कुछ करेंगे। जिस चीज से आप इतना प्यार करते हैं, उससे मुकाबला नहीं, उसे एंजॉय और सेलिब्रेट किया जाता है। हमारी कोशिश बस इतनी थी कि पूरी विनम्रता के साथ देखें, क्या हम अपने तरीके से उसमें कुछ जोड़ सकते हैं।

सवाल : ‘संदेशे आते हैं’ जैसे आइकॉनिक गीत में कुछ नया लिखने की जरूरत क्यों पड़ी?

मनोज मुंतशिर/जवाब: ‘संदेशे आते हैं’ अपने आप में एक कम्प्लीट सॉन्ग है। जावेद अख्तर साहब ने उसमें अपनी आत्मा डाली थी। वो सिर्फ गीत नहीं, एक धड़कता हुआ दिल है। उसमें कुछ नया जोड़ना यह दिखाने के लिए नहीं था कि हम भी लिख सकते हैं। बात सिर्फ इतनी थी कि ‘बॉर्डर 2’ एक नई फिल्म है, इसके मोर्चे और इसके किरदार अलग हैं।

जो किरदार सीधे ‘बॉर्डर’ पर नहीं थे, उनकी भी अपनी कहानी है, और उस कहानी को कहने के लिए एक भाषा चाहिए। अनु मलिक का म्यूजिक और जावेद साहब का इमोशनल लैंडस्केप पहले से मौजूद था। हमने बस उसी कैनवस पर अपने हिस्से के चार रंग जोड़े। ‘संदेशे’ हमेशा जावेद अख्तर, अनु मलिक, रूप कुमार राठौड़ और सोनू निगम का ही गीत रहेगा। इस पर न मिथुन की दावेदारी है, न मेरी, न किसी और की।

सवाल: क्या यह गीत अचानक लिखा गया था या इसके पीछे लंबा सफर रहा?

मनोज मुंतशिर/जवाब: यह गीत किसी एक दिन या कुछ घंटों में नहीं लिखा गया। इसे लगभग 9 महीनों तक लगातार लिखा और बदला गया। कई बार शब्द अच्छे लगे, फिर नई धुन आई तो लगा इससे भी गहरा लिखा जा सकता है। यह एक सतत साधना थी, जिसमें भावनाएं हर दिन शामिल रहीं।

सवाल: इस गीत को लिखते समय भावनात्मक जुड़ाव कितना गहरा था?

मनोज मुंतशिर/जवाब: बहुत गहरा। कई बार लिखते हुए आंसू आ जाते थे। कुछ पंक्तियां ऐसी थीं जिन्हें लिखते समय भावनाओं पर काबू नहीं पाया जा सका। यह गीत उन किरदारों और उस कहानी की पुकार था, जिसे बिना संवेदनशील हुए लिखा ही नहीं जा सकता।

सवाल: मिथुन, उस पल अपनी भावनाओं को संभालना आपके लिए कितना मुश्किल था?

मिथुन/जवाब: मैं इसे मुश्किल नहीं कहूंगा। जब दिल सही जगह पर हो और नीयत साफ हो, तो भावनाएं खुद बहने लगती हैं। कमरे में मनोज मुंतशिर जी और अनुराग सिंह जी जैसे लोग थे, जिनका सेना से गहरा जुड़ाव और भावनात्मक समझ बहुत मजबूत है। उनकी मौजूदगी मेरे लिए सही रोशनी जैसी थी। मुझे बस अपनी भावना को खुलकर बाहर आने देना था। जो धुन आपने सुनी, वही मेरी पहली और सच्ची अभिव्यक्ति थी।

सवाल: गीत लिखना और कविता लिखना अलग कैसे होता है, और मिथुन के साथ आपका जुड़ाव कैसा रहा?

मनोज मुंतशिर/जवाब: फिल्मों के गाने लिखते वक्त कविता नहीं, बल्कि ऐसे बोल लिखे जाते हैं जो संगीत के साथ सांस ले सकें। मिथुन के साथ हमेशा पूरा भरोसा रहा, क्योंकि वो शब्दों की गहराई को तुरंत समझ लेते हैं और उसी पल उसका सही एक्सप्रेशन ढूंढ लेते हैं।

सवाल: जिस धुन पर गाना बना, वो कैसे तय हुआ?

मनोज मुंतशिर/जवाब: मैंने उन्हें दो लाइनें सुनाईं और उसी पल उन्होंने पियानो पर जो धुन बनाई, वही आज गाने में है। उसे संवारने में एक साल लगा, लेकिन धुन वही रही। यही कनेक्शन है। मिथुन हमेशा यूनिवर्स से जुड़े हुए लगते हैं, जैसे वो बस चुने हुए इंस्ट्रूमेंट हों।

सवाल: आप दोनों को बहुत शानदार फीडबैक मिले होंगे। वीर जवानों के परिवारों से भी आप मिले। ऐसा कोई खास कॉम्प्लिमेंट या प्रतिक्रिया, जो आज भी जहन में हो?

मनोज मुंतशिर/जवाब: हजारों-हजारों कमेंट आए। कई लोगों ने लिखा कि सिर्फ इस गीत के लिए मैं ये फिल्म 10 बार देखूंगा। ये पढ़कर बहुत अच्छा लगा। लेकिन सच कहूं तो आप शायद गाने के लिए फिल्म देखने जाएं, मगर फिल्म इतनी अच्छी बनी है कि आप 20 बार देखेंगे। 10 बार गाने के लिए और 10 बार फिल्म के लिए।

सवाल: मिथुन, आपको कोई ऐसा फीडबैक मिला जो दिल को छू गया हो?

मिथुन/जवाब: मैं फीडबैक से थोड़ा दूर रहता हूं, सोशल मीडिया से भी दूरी रखता हूं। लेकिन जब मेरा गाना लोगों तक पहुंचता है, तो उसकी फ्रीक्वेंसी मुझे महसूस होती है। मेरे लिए सबसे खास लम्हा तब था जब हम INS विक्रांत पर परफॉर्म कर रहे थे। स्टेज पर सोनू निगम जी, मनोज जी, 50 म्यूजिशियन और हमारे भारतीय नौसेना के अफसर मौजूद थे।

दो अंतरों के बाद मुझे लगा जैसे वक्त थम गया हो। मैंने सब से खड़े होकर हमारे “मिट्टी के बेटों” को श्रद्धांजलि देने की गुजारिश की। फिर कोरस ने गाया- “कुछ दर्द कभी सोते ही नहीं…” वो पल कला, सिनेमा, अवॉर्ड्स, व्यूज, सब से परे था। वो अनुभव किसी भी सम्मान से बड़ा था।

सवाल: मनोज जी, आप सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव हैं। पॉजिटिव और क्रिटिकल फीडबैक को कैसे फिल्टर करते हैं?

मनोज मुंतशिर/जवाब:मेरे पास सिर्फ एक फिल्टर है कि क्या मेरी बात से देश का, समाज का, लोगों का भला हो रहा है? अगर जवाब “हां” है, तो मैं डरता नहीं। लेकिन अगर कोई बात सिर्फ मुझे मजा दे और समाज को नुकसान पहुंचाए, तो मैं उसे कभी नहीं कहूंगा। मेरे लिए सब कुछ मुझसे बड़ा है। ये मेरे बारे में नहीं, देश के बारे में है।

सवाल: जब लोग कहते हैं कि आपके गीतों या धुनों ने उनकी जिंदगी बदल दी, तब आप क्या महसूस करते हैं?

मनोज मुंतशिर/जवाब: हम बस ईश्वर का आभार मानते हैं। अगर सब कुछ हमारी काबिलियत से होता, तो मैं रोज सुबह उठकर एक बड़ा गीत लिख देता। सच ये है कि हम बहुत सीमित हैं। हम पत्थर हैं और हमारे वीरों की कहानियां वो पारस हैं, जो हमें सोना बना देती हैं।

सवाल: मिथुन, आप इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे?

मिथुन/ जवाब: नम्रता एक कलाकार की सबसे बड़ी ताकत है। मैंने ये अपने गुरुओं से सीखा है। प्यारेलाल जी कहा करते थे कि ईश्वर हमें तभी इस्तेमाल करता है, जब हम खाली होते हैं। 20 साल के करियर के बाद भी मुझे लगता है कि ‘बॉर्डर 2’ मेरी पहली फिल्म है और हर काम ऐसे करता हूं जैसे ये आखिरी हो।

सवाल: इतना गहरा असर छोड़ने वाले गीत कैसे रचे जाते हैं?

मनोज मुंतशिर/जवाब: फैज साहब ने कहा था कि जिस दिन मेरे सीने का नासूर रिसना बंद हो जाएगा, मैं लिखना छोड़ दूंगा। जिस दिन मैं दूसरों का दर्द महसूस करना बंद कर दूं, उस दिन मैं लिखना भी छोड़ दूंगा।

आज मैं लिखता हूं क्योंकि मैं तड़पता हूं। मेरी आंखों में आंसू हैं, और शायद यही वजह है कि मेरे गीत लोगों को छू पाते हैं।

सवाल: आज देशभक्ति को पैट्रियोटिज्म बनाम जिंगोइज्म के चश्मे से क्यों देखा जा रहा है? आप क्या कहना चाहेंगे?

मनोज मुंतशिर/जवाब: ये फिल्म बनाने वालों की नीयत पर निर्भर करता है। अगर इरादा सिर्फ भावनाएं भड़काकर पैसा कमाने का है, तो जिंगोइज्म लगेगा। लेकिन अगर ईमानदारी से कहानी कही जाए, तो उस पर कभी जिंगोइज्म की मुहर नहीं लगती।

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बारिश के साथ ओले भी, ज्यादा सर्द होगी फरवरी:फसलों को नुकसान का खतरा, जनवरी में कहीं 308% मावठ, कहीं रहा सूखा

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दिसंबर (2025) तक राजस्थान में सर्दी लगभग नदारद रहीI फिर जनवरी (2026) के तीसरे हफ्ते में मौसम ने अचानक करवट ली। शेखावाटी में पारा माइनस में पहुंचा। कई जिलों में हल्की बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। सर्दी बढ़ गई। अब सवाल यह है कि क्या फरवरी में भी मौसम ऐसे ही चौंकाएगा? मौसम विभाग की मानें तो पश्चिमी विक्षोभ के कारण फरवरी में भी आधे महीने सर्दी का असर हमेशा की तुलना में ज्यादा रहेगा। ओलावृष्टि भी हो सकती है, जो कई फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
बाड़मेर में 308% मावठ, पांच जिले सूखे
जनवरी में मौसम ने मावठ की दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाईं। रेगिस्तानी इलाकों बाड़मेर, जैसलमेर और जालोर में मावठ हुई। दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और नागौर जिला सूखे ही रहे। जनवरी में बाड़मेर में सामान्य से 308 फीसदी ज्यादा मावठ हुई। मौसम विभाग इसे ‘सामान्य पश्चिमी विक्षोभों वाला साल’ बता रहा है। जनवरी में प्रदेश में सामान्य (3.6 मिमी) की तुलना में 4.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो 39% ज्यादा है। आईएमडी (IMD) के मुताबिक सर्दियों में 10 मिमी बारिश भी ‘अच्छी’ मानी जाती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मावठ का यह असंतुलन फरवरी में रबी फसलों की सेहत और तापमान के उतार-चढ़ाव दोनों की परीक्षा ले सकता है। 7 जिले रह गए सूखे : बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही, प्रतापगढ़, नागौर में बिल्कुल मावठ नहीं हुई। उदयपुर में 0.2 व चितौड़गढ़ में 1.5 एमएम मावठ हुई।
जनवरी में 3 सिस्टम रहे एक्टिव, 4 बिना बरसे गुजरे मौसम केंद्र, जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा का कहना है कि दिसंबर में सटीक अनुमान लगाया था कि इस साल की सर्दी सामान्य रहेगी। राजस्थान में सर्दी कितनी कड़ाके की पड़ेगी] यह पूरी तरह पश्चिमी विक्षोभों (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) की सक्रियता पर निर्भर करता है। आमतौर पर सर्दियों में एक महीने में 5 से 6 पश्चिमी विक्षोभ आते हैं। जनवरी में ऐसे 3 सक्रिय विक्षोभ 31 दिसंबर–1 जनवरी, फिर 22–23 जनवरी, 26–27 जनवरी में एक्टिव रहे। इसके चलते, कहीं हल्की बारिश, कहीं ओलावृष्टि हुई। शेखावाटी में कुछ दिनों तक पारा माइनस तक गया, लेकिन यह सब सीमित अवधि (1-2 दिन) ही रहा। इसके अलावा जनवरी में 4 पश्चिमी विक्षोभ आए तो सही लेकिन बिना बारिश किए ही गुजर गए। हालांकि इसका मतलब ये कतई नहीं कि वो निष्क्रिय रहे। दरअसल पश्चिमी विक्षोभ एक बड़े इलाके को प्रभावित करते हैं। ऐसे में जो विक्षोभ राजस्थान में नहीं बरसे वो पहाड़ी इलाकों और अन्य राज्यों में बरस सकते हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी में 2–3 दिन ही पाला पड़ा। उत्तरी-पश्चिमी हवाओं और पहाड़ों में बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक देखने को मिला, जिससे शीत लहर और कोहरे की स्थिति भी बनी। मौसम विभाग के अनुसार जमीन नहीं, हवा का तापमान सर्दी की तीव्रता तय करता है। इसी कारण कई जगह पाला पड़ा। फरवरी में भी सक्रिय रहेंगे पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विभाग के अनुसार जनवरी के तीसरे सप्ताह से शुरू हुआ सर्दी का यह सितम फरवरी में भी जारी रहेगा। दरअसल, 31 जनवरी से 3 फरवरी के बीच एक नया पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होगा जिससे बारिश, ओलावृष्टि और हवा में नमी बढ़ेगी। इसके बाद 6–7 फरवरी, 9–10 फरवरी और 11–15 फरवरी के बीच अलग-अलग स्पेल्स में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेंगे। इसके चलते फ़रवरी के दूसरे सप्ताह तक सर्दी का असर बना रहेगा। बारिश से नमी बढ़ेगी, इसलिए पाला जमने की स्थिति कम बनेगी। कोहरा रहेगा, जो रबी के लिए फायदेमंद है। दुर्गापुरा कृषि अनुसंधान केंद्र के प्रोफेसर केसी गुप्ता का कहना है कि जनवरी में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। वहीं बारिश वरदान साबित हुई। फरवरी में भी हो सकती है ओलावृष्टि
हालांकि मौसम विभाग ने चेताया है कि पूर्वी राजस्थान में ओला वृष्टि होने की संभावना है। जो फसलें पककर तैयार हो रही हैं, उनके लिए ये ओलावृष्टि नुकसानदायक हो सकती है। इसके अलावा जालोर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर में जीरा, धनिया, ईसबगोल, हल्दी जैसी मसाला फसलें भी काफी सेंसिटिव हैं। इन फसलों के लिए 8 से 10 डिग्री तापमान अनुकूल माना जाता है। अगर फरवरी में तापमान 6 से 7 डिग्री तक गया तो जोखिम बढ़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक फरवरी का पहला पखवाड़ा किसानों के लिए निर्णायक रहेगा। एक ओर जहां मावठ रबी की पैदावार बढ़ा सकती है, वहीं ओलावृष्टि और तापमान में गिरावट नुकसान का जोखिम भी साथ लाएगी। मौसम विभाग का कहना है कि आमतौर पर 15 से 20 जनवरी के बाद दिन का तापमान बढ़ने लगता है। इस बार की सर्दी ने राजस्थान में कई उलटफेर दिखाए हैं, लेकिन किसानों के लिए यह उम्मीद की किरण भी लेकर आई है। अगर फरवरी में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे तो रबी की फसल के लिए यह मौसम यादगार साबित हो सकता है।

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