अहमदाबाद प्लेन क्रैस-हादसे से पहले विमान कई बार खराब हुआ,:अमेरिकी रिपोर्ट में इलेक्ट्रिकल फेल्योर की आशंका; 260 लोगों की मौत हुई थी

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अहमदाबाद में 12 जून 2025 को क्रैश हुए एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान में पहले से कई गंभीर तकनीकी दिक्कतें थीं। अमेरिका स्थित फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) ने दावा किया है कि विमान में इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल होने से एक के बाद एक कई सिस्टम बंद हुए। यही हादसे की वजह बना हो सकता है। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी। विमान टेकऑफ के कुछ ही सेकेंड बाद अहमदाबाद के रिहायशी इलाके में गिर गया था। 2014 से तकनीकी दिक्कतें आ रही FAS के मुताबिक, यह बोइंग 787 विमान 2014 से उड़ानों में इस्तेमाल हो रहा था। व्हिसलब्लोअर के दस्तावेजों के आधार पर संगठन का दावा है कि विमान में शुरुआत से ही बार-बार तकनीकी और सिस्टम से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में उड़ान के दौरान विमान में आग लगने की घटना भी हुई थी। इससे विमान के अंदरूनी सिस्टम को नुकसान पहुंचा हो सकता है। FAS का कहना है कि ऐसी घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इलेक्ट्रिकल फेल्योर से कई सिस्टम एक साथ फेल हुए FAS का मैन दावा है कि हादसे की जड़ इलेक्ट्रिकल फेल्योर हो सकता है। संगठन के मुताबिक, आधुनिक विमानों में ज्यादातर सिस्टम बिजली और सॉफ्टवेयर से जुड़े होते हैं। ऐसे में बिजली सप्लाई में खराबी आने पर कई सिस्टम एक साथ बंद हो सकते हैं। संगठन ने कहा कि विमान की तकनीकी हालत और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग से जुड़ा पूरा डेटा अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इनके बिना यह साफ नहीं हो पा रहा कि सिस्टम किस क्रम में फेल हुए। दूसरे देशों में भी बोइंग 787 को लेकर शिकायतें FAS ने कहा कि यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में उड़ रहे दूसरे बोइंग 787 विमानों में भी करीब 2,000 फेल्योर की शिकायतें दर्ज की गई हैं। एफएएस का मानना है कि यह पूरी 787 फ्लीट से जुड़ा सुरक्षा का गंभीर मुद्दा है। एयर इंडिया को 15 हजार करोड़ के घाटा का अनुमान अहमदाबाद विमान हादसे और क्षेत्रीय एयरस्पेस बंद होने का असर एयर इंडिया की कमाई पर पड़ा है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में कंपनी को 15,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का रिकॉर्ड घाटा हो सकता है। पाकिस्तान के भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद करने से यूरोप और अमेरिका की उड़ानों का खर्च भी बढ़ गया।

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मोबाइल पर गेम खेल रहा था, थोड़ी देर बाद मौत:10 साल के बच्चे के गले में फंदा, पिता को बेड पर बेसुध मिला

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भरतपुर में एक 10 साल के बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि बच्चा कमरे में अकेला मोबाइल पर गेम खेल रहा था। घर के सभी लोग बरामदे में बैठे थे। कुछ देर बाद जब वह कमरे में गए तो, बच्चा बेड पर बेहोश पड़ा हुआ था। जिसे लेकर तुरंत वह अस्पताल पहुंचे। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना चिकसाना थाना क्षेत्र के जिरौली गांव की गुरुवार रात 10 बजे की है। मोबाइल पर गेम खेल रहा था शिवा बच्चे के रिश्तेदार और नगर निगम के पार्षद श्याम सुंदर गौड़ ने बताया कि घटना के समय शिवा (10) कमरे में अकेले था। शिवा के पिता रवि शंकर मां, शिवा का बड़ा भाई सूर्यांश (11) बड़ी बहन जीया (14) घर के बरामदे में बैठे थे। कुछ देर पिता शिवा को बुलाने कमरे में गए तो वो बेड पर अचेत मिला। उसके गले में कपड़े का फंदा लगा हुआ था। शिवा के पिता ने उसे उठाने की कोशिश की लेकिन, शिवा नहीं उठा तो। वह उसे लेकर तुरंत आरबीएम अस्पताल पहुंचे। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। आखिर कैसे हुई शिवा की मौत? शिवा के परिवार को समझ नहीं आ रहा है कि कुछ मिनटों के दौरान क्या हुआ? शिवा जब कमरे में गया था तो वो काफी खुश था। उसके गले में कपड़ा फंदे की तरह क्यों लिपटा था? न कमरे से कोई आवाज आई, न ही परिवार के किसी मेंबर में कमरे में किसी को जाते हुए देखा। क्या मोबाइल गेम के कारण कुछ हुआ? ऐसे बहुत से सवाल परिवार को परेशान कर रहे हैं। मासूम बच्चे की मौत से परिवार सदमें है। मां बार-बार रोते हुए बेसुध हो रही है।

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उत्तराखंड में टेंपरेचर -18°C, पंजाब में 2.6°C:राजस्थान में बारिश और आंधी से सर्दी बढ़ी; हिमाचल में बर्फबारी का अलर्ट

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उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में टेंपरेचर में गिरावट जारी है। पिथौरागढ़ के आदिकैलाश और केदारनाथ धाम में न्यूनतम टेंपरेचर -18°C रहा। वहीं पंजाब के आदमपुर में 2.6°C टेंपरेचर रहा। राजस्थान के जैसलमेर और सीकर में गुरुवार रात बारिश हुई। बीकानेर और जैसलमेर में पाकिस्तान बॉर्डर के पास के एरिया में गुरुवार दोपहर आंधी चली। जिले के सीमावर्ती रामगढ़ कस्बे में तेज गर्जना के साथ बूंदाबांदी हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। उधर, हिमाचल प्रदेश गुरुवार रात से बारिश-बर्फबारी शुरू होगी। मौसम विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन जारी कर चंबा, कुल्लू और लाहौल स्पीति जिला के ऊंचे क्षेत्रों में भारी हिमपात का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 2 तस्वीरों में देखें मौसम का हाल… अगले 2 दिन के मौसम का हाल… 24 जनवरी 25 जनवरी

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स्मार्ट सिटी योजना:चौराहो पर लगेंगी ट्रैफिक लाइटें, उल्लंघन पर ऑटोमैटिक कटेगा चालान

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स्मार्ट सिटी योजना के तहत बीकानेर को मिले 80 करोड़ रुपए से होने वाले कामों की सूची तैयार हो गई है। सूची में इतने भारी-भरकम काम लिए गए हैं कि यह राशि ही कम हो जाएगी। बावजूद इसके सार्वजनिक वाहन चार्जिंग सेंटर, जमीन के नीचे सभी तारों को एक डक्ट में शामिल करने, सीसीटीवी, चौराहों और सड़कों पर नई बत्तियां तथा सड़कों पर ट्रैफिक का उल्लंघन करने पर ऑटोमेटिक चालान होने जैसे काम होंगे। जानकार कहते हैं कि अगर सच में बीकानेर की दशा और दिशा सुधारनी है तो कम से कम 2000 करोड़ रुपए चाहिए। क्योंकि स्मार्ट सिटी योजना से जो 80 करोड़ रुपए मिले हैं, उससे हर क्षेत्र में एक-एक मॉडल काम ही तैयार हो पाएंगे। मगर मॉडल काम इक्का-दुक्का जगह ही बनेंगे, जबकि जरूरत पूरे शहर में है। कोटा में सरकार ने 5500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। वहां काम नजर भी आता है। बीकानेर में भी आमूल-चूल बदलाव और विकास के लिए कम से कम 2000 करोड़ रुपए तो चाहिए, तभी कुछ बदलाव देखा जा सकेगा। इस राशि से होने वाले कामों के लिए तमाम विभागों के अधिकारियों की एक टीम बनाई गई थी, जिसने पूरे शहर में होने वाले कामों की सूची तैयार की है। 21 जनवरी को कमेटी के सचिव और आरयूआईडीपी के एक्सईएन दीपक मांडन ने रिपोर्ट निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों को भेज दी है। अब यह रिपोर्ट जयपुर जाएगी और उसके बाद काम होने शुरू होंगे। विरासत संरक्षण एवं स्मार्ट पर्यटन स्मार्ट मोबिलिटी एवं बहु-मॉडल एकीकरण जलवायु अनुकूलन एवं हरित आवरण ये भेजे प्रस्ताव

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भोजशाला में 10 साल बाद फिर पूजा-नमाज एक साथ:बसंत पंचमी पर 6 लेयर सिक्योरिटी में वाग्देवी पूजन; 8000 पुलिसकर्मी तैनात, ड्रोन-AI से निगरानी

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मध्य प्रदेश के धार की भोजशाला में बसंत पंचमी पर आज पूजा और नमाज दोनों एक साथ की जाएंगी। सूर्योदय के साथ ही भोजशाला में हिंदू समाज का पूजन शुरू होगा, जो सूर्यास्त तक चलेगा। वहीं, दोपहर में 1 से 3 बजे तक भोजशाला परिसर में ही मुस्लिम समाज नमाज भी अदा करेगा। इस मौके पर किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए जिला प्रशासन ने धार को छावनी में तब्दील कर दिया है। स्थानीय पुलिस, सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स के 8 हजार से ज्यादा जवान शहरभर में तैनात हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मौजूदगी है। ड्रोन और एआई की मदद से कोने-कोने पर नजर रखी जा रही है। इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला में पूजा और नमाज के मुद्दे पर बड़ा आदेश दिया। इसमें आज के लिए हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती (वाग्देवी) की पूजा की पूरी छूट दी गई है, जबकि मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने प्रशासन को दोनों के लिए अलग-अलग जगह तय करने, विशेष पास व्यवस्था करने और शांति-सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह व्यवस्था हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की। देखिए, भोजशाला में पूजन की तैयारियों की दो तस्वीरें… दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग जगह उपलब्ध कराने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा- इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को है। ऐसे में प्रशासन को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हमने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज और मध्य प्रदेश राज्य की ओर से महाधिवक्ता को सुना। केएम नटराज ने ASI की ओर से भी पक्ष रखा। इसी प्रकार, आवेदक की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की दलीलें भी सुनी गईं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) और महाधिवक्ता ने सुझाव दिया कि जब यह स्पष्ट हो जाए कि शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय से कितने लोग आने वाले हैं, तो उसी परिसर के भीतर एक अलग और विशिष्ट स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि निर्धारित समय में नमाज अदा की जा सके। इसी प्रकार पूर्व प्रथा के अनुसार, बसंत पंचमी के अवसर पर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करने हेतु हिंदू समुदाय को भी अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की 20 जनवरी को लगाई गई उस याचिका पर दिया, जिसमें भोजशाला में 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर पूरे दिन अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति मांगी गई थी। 2006, 2013 और 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार को आई हर मंगलवार को सुंदरकांड, शुक्रवार को नमाज होती है
धार के भोजशाला परिसर में मंगलवार को ढोल, झांझ, मंजीरे के साथ हिंदू समाज के लोग सुंदरकांड का पाठ करते हैं। वहीं, शुक्रवार को मुस्लिम समाज जुमे की नमाज अदा करता है। बाकी दिनों में परिसर सभी धर्म के लोगों के लिए खुला रहता है। कोई भी टिकट लेकर अंदर जा सकता है। हिंदू पक्ष ने कहा- बसंत पंचमी पर दिनभर अखंड पूजन भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा- भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा होगी। हिंदू समाज ने अखंड पूजा का संकल्प लिया था। इसी भावना को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट तक गए थे। इसमें कहीं भी विघ्न नहीं होगा। पूजा का कोई समय निर्धारित नहीं है यानी पूजा सूर्याेदय के साथ ही शुरू होगी और सूर्यास्त तक चलेगी। मस्जिद कमेटी बोली- हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे कमाल मौलाना मस्जिद कमेटी अध्यक्ष जुल्फिकार पठान ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमें सर्व सम्मति से स्वीकार है। जो आदेश है, उसका हम निश्चित तौर पर पालन करेंगे। कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिए हैं कि भोजशाला के भीतर ही सुरक्षा के बीच नमाज करवाई जाए। वहीं, पूर्व सदर अब्दुल समद ने कहा- 23 जनवरी को बसंत पंचमी के बाद 26 जनवरी हमें एक साथ मनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया है कि 1 से 3 बजे तक वहीं नमाज हो, जो स्थान मुकर्रर किया गया है। दोनों समाजों को अलग-अलग रास्ता देने की बात कही गई है। हम लिमिटेड संख्या में वहां जाएंगे ताकि किसी तरह का टकराव न हो। दिग्विजय सिंह बोले- कोर्ट ने पूर्व की व्यवस्था कायम रखी
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा- कोर्ट के फैसले का स्वागत है। इसमें साल 2003, 2013 और 2016 की व्यवस्था ही कायम रखी गई है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करे। दर्शन के लिए जिग-जैग बैरिकेडिंग, छत पर भी टेंट
भोजशाला में ज्योति मंदिर के सामने मेन गेट से लेकर मुख्य परिसर तक करीब 300 मीटर लंबे रास्ते में जिग-जैग बैरिकेडिंग की गई है। दर्शन के बाद पिछले हिस्से से भक्तों के बाहर निकलने के लिए व्यवस्था है। परिसर के अंदर और छत पर भी बेरिकेडिंग के साथ चार छोटे टेंट लगाए गए हैं। विक्रम नगर से लकड़ी पीठा मार्ग को टीन शेड से पूरी तरह सील कर दिया गया है। पूरा क्षेत्र सीसीटीवी निगरानी में है। समितियों और सेवकों की ड्यूटी भी तय
भोजशाला परिसर भगवा ध्वज और फूलों से सजा है। हवन कुंड गुरुवार शाम को ही विधिवत रूप से तैयार कर लिया गया था। हवन में उपयोग होने वाली लकड़ी और अन्य आवश्यक पूजन सामग्री भी सुरक्षित रूप से भोजशाला परिसर में पहुंचा दी गई थी। आयोजन को लेकर संबंधित समितियों और सेवकों की ड्यूटी भी तय कर दी गई थी। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की नजर
आईजी अनुराग सिंह और एसपी मयंक अवस्थी ने गुरुवार को भोजशाला में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। आईजी ने अधिकारियों के साथ फोर्स की तैनाती, प्रवेश-निकास व्यवस्था और सुरक्षा घेराबंदी की समीक्षा की। उन्होंने कहा- इस बार ड्रोन कैमरों से भीड़ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम लोगों की संख्या, भीड़ की दिशा और किसी स्थान पर अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत जैसी जानकारियां रियल टाइम पर उपलब्ध करा रहा है। भोजशाला की सुरक्षा को 6 लेयर में बांटा गया है। शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी भ्रामक या आपत्तिजनक गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। परिसर का 300 मीटर क्षेत्र नो-फ्लाई जोन
भोजशाला क्षेत्र के 300 मीटर के दायरे में नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस दायरे में ड्रोन, यूएवी, पैरा ग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलून सहित ऐसी किसी भी गतिविधि पर पूरी तरह पाबंदी है। सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर भवन निर्माण सामग्री, मलबा, टायर और लावारिस गुमटियां रखने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। पीजी कॉलेज में अस्थाई जेल, तीन बड़े हॉल रिजर्व
किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए इस बार पीजी कॉलेज में अस्थाई जेल तैयार की गई है। विधिक कक्षा संचालित परिसर में तीन बड़े हॉल रिजर्व किए गए हैं। 21 से 27 जनवरी तक कॉलेज को अस्थाई जेल के रूप में उपयोग करने के लिखित आदेश भी जारी किए गए हैं। भोजशाला से जुड़ी ये खबर भी पढे़ं… भोजशाला पर अलाउद्दीन खिलजी के हमले के 700 साल धार की भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 साल से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई. में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर…

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जनशताब्दी एक्सप्रेस:बम की अफवाह पर एक घंटे तक रुकी रही जनशताब्दी ट्रेन

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दिल्ली से कोटा जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12060) में गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रेलवे कंट्रोल रूम को ट्रेन में बम होने की सूचना मिली। दोपहर 2:25 बजे जैसे ही ट्रेन मथुरा जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या 7 पर पहुंची, सुरक्षा बलों और बम निरोधक दस्ते ने उसे घेर लिया। करीब एक घंटे की सघन तलाशी के बाद जब कुछ नहीं मिला, तब जाकर यात्रियों और प्रशासन ने राहत की सांस ली। युवक से पूछताछ की तो उसने बताया वह कोटा का निवासी है और वर्तमान में दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्रालय में कार्यरत है। वीडियो कॉल की एक गलतफहमी और रुक गई ट्रेन जांच में सामने आया कि यह पूरा घटनाक्रम महज एक गलतफहमी का नतीजा था। दिल्ली से कोटा जा रहा गोविंद नाम का एक युवक अपनी प्रेमिका से वीडियो कॉल पर बात कर रहा था। बातचीत के दौरान उसने बम शब्द का इस्तेमाल किया। पास खड़े एक अन्य यात्री ने उसके मोबाइल स्क्रीन पर बम लिखा देख लिया और उसे शक हुआ कि कोई खतरा है। उस यात्री ने तुरंत इसकी जानकारी ट्रेन के टीटीई को दी, जिसने 139 पर कॉल कर कंट्रोल रूम को बम की सूचना दे दी।

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आज तय होगा, कब खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट:बसंत पंचमी पर टिहरी नरेश करेंगे घोषणा; नंदा राजजात पर भी होगा फैसला

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बसंत पंचमी का पर्व इस बार उत्तराखंड की आस्था और परंपरा के लिहाज से बेहद अहम रहने वाला है। 23 जनवरी को एक ओर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की शुभ तिथि की घोषणा होगी, वहीं दूसरी ओर 2026 की नंदा देवी राजजात यात्रा को लेकर चल रहे विवाद पर नौटी (कर्णप्रयाग) में प्रस्तावित संयुक्त बैठक में अहम निर्णय लिए जाएंगे। परंपरा के अनुसार, टिहरी के नरेंद्र नगर स्थित राजदरबार में राजपुरोहित पंचांग गणना के आधार पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त निकालेंगे। इसके बाद टिहरी नरेश महाराजा मनुजयेंद्र शाह की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। मान्यता है कि यह परंपरा जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा बद्रीनाथ धाम की स्थापना के समय से चली आ रही है। गढ़वाल क्षेत्र में राजा को भगवान का प्रतिनिधि मानते हुए ‘बुलांदा बदरी’ कहा जाता रहा है। चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद करीब छह महीने तक नियमित पूजा-अर्चना होती है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गाडू घड़ा यात्रा से जुड़ी है कपाट खुलने की परंपरा पौराणिक परंपरा के अनुसार गाडू घड़ा यात्रा राजमहल पहुंचती है। यहां कुंवारी और सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर बद्रीनाथ धाम के लिए तिल का तेल निकालती हैं। तेल की पवित्रता बनाए रखने के लिए महिलाएं मुंह पर पीला कपड़ा बांधकर यह धार्मिक कार्य करती हैं। इसी तेल से धाम में भगवान बदरी विशाल की पूजा-अर्चना होती है। बदरी-केदार मंदिर समिति के प्रवक्ता हरीश गौड़ ने बताया, राजपुरोहित पंचांग और गणना के आधार पर शुक्रवार को कपाट खुलने की तिथि और शुभ मुहूर्त घोषित करेंगे। नरेंद्रनगर में इस आयोजन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने आगे कहा, यह परंपरा उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। पिछले पांच वर्षों में श्रद्धालुओं के आंकड़े अब नंदा देवी राजजात के बारे में जानिए… नंदा देवी राजजात उत्तराखंड की सबसे प्रमुख धार्मिक यात्राओं में से एक है। यह यात्रा देवी नंदा को उनके मायके से ससुराल कैलाश भेजने का प्रतीक मानी जाती है। करीब 280 किलोमीटर लंबी इस पैदल यात्रा को राज्य की सबसे लंबी धार्मिक यात्रा कहा जाता है। यात्रा में चौसिंगा खाडू, रिंगाल की छंतोलियां और सैकड़ों देवी-देवताओं की डोलियां प्रमुख आकर्षण होती हैं। यात्रा रूपकुंड और शैल समुद्र ग्लेशियर के पास से होते हुए होमकुंड तक जाती है। वाण गांव के बाद महिलाएं, बच्चे, चमड़े की वस्तुएं और गाजे-बाजे आगे नहीं जाते। अब 3 प्वाइंट्स समझिए पूरा विवाद… 1. कुरुड़ बनाम नौटी: परंपरा को लेकर टकराव 2026 की नंदा देवी राजजात यात्रा की तैयारियां शुरू होते ही विवाद उभरा। आरोप लगे कि यात्रा के पारंपरिक प्रारंभ स्थल और रीति-रिवाजों में बदलाव किया जा रहा है, जिससे ऐतिहासिक आस्था और लोक परंपराओं से छेड़छाड़ हो रही है। कुरुड़ गांव के लोगों का दावा है कि यात्रा की शुरुआत हमेशा उनके मंदिर से होती रही है और इसे बदलना धार्मिक परंपरा के खिलाफ है। वहीं, नौटी गांव और राजजात समिति का कहना है कि यात्रा राजा द्वारा स्थापित पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार ही आयोजित होती रही है और कोई बदलाव नहीं हुआ। 2. श्रीनंदा राजजात समिति ने यात्रा स्थगित की इसके बाद, श्रीनंदा राजजात समिति (कांसुवा-नौटी) की एक कोर कमेटी बैठक हुई। इस बैठक में अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने घोषणा की कि साल 2026 में प्रस्तावित नंदा राजजात यात्रा को स्थगित कर दिया गया है। समिति के अनुसार, मई-जून में मलमास होने के कारण यात्रा देरी से शुरू होगी, जिससे होमकुंड (अंतिम पड़ाव) पर मुख्य पूजा 20 सितंबर के आसपास पड़ेगी। सितंबर के अंत तक उच्च हिमालयी क्षेत्रों और बुग्यालों में बर्फबारी शुरू हो जाती है, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कहा गया कि, यात्रा मार्ग के निर्जन क्षेत्रों में अभी तक ठहरने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए हैं। 3. स्थानीय ग्रामीणों और कुरुड़ समिति की महापंचायत नौटी समिति के इस एकतरफा फैसले का चमोली के 484 गांवों के लोगों ने कड़ा विरोध किया। स्थानीय लोगों का मानना है कि आस्था के इस महापर्व को प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से टाला नहीं जाना चाहिए। 19 जनवरी 2026 को चमोली के नंदानगर (घाट) ब्लॉक सभागार में 484 गांवों के प्रतिनिधियों की एक विशाल महापंचायत हुई। इसमें नौटी समिति के फैसले को खारिज करते हुए ‘मां नंदा देवी सिद्धपीठ मंदिर कुरुड़ आयोजन समिति’ का गठन किया गया। कर्नल (सेवानिवृत्त) हरेंद्र सिंह रावत को इसका अध्यक्ष चुना गया। महापंचायत ने घोषणा की कि राजजात यात्रा हर हाल में 2026 में ही आयोजित की जाएगी। ‘राज’ शब्द पर विवाद और नाम परिवर्तन इस विवाद को लेकर महापंचायत में ‘राजजात’ शब्द से ‘राज’ शब्द को हटाने की मांग की गई। ग्रामीणों का तर्क है कि यह किसी राजा की यात्रा नहीं बल्कि देवी की अपनी प्रजा से मिलने की यात्रा है। इसे ‘नंदा की बड़ी जात’ के नाम से जाना जाए। प्रशासन समाधान की कोशिश में प्रशासन की पहल पर 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर नौटी (कर्णप्रयाग) में एक संयुक्त बैठक प्रस्तावित है। इसमें राज परिवार, नंदा राजजात समिति और कुरुड़ मंदिर समिति के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इससे पहले चमोली के डीएम गौरव कुमार की अध्यक्षता में कुरुड़ मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई थी, जिसमें सभी पक्षों को साथ बैठाकर समाधान निकालने का प्रस्ताव रखा गया। अल्मोड़ा नंदा देवी से भी आएगा दल अल्मोड़ा में मां नंदा देवी मंदिर समिति ने डीएम अंशुल सिंह से मुलाकात कर यात्रा पर चर्चा की है। समिति ने बताया कि चंद वंशज युवराज नरेंद्र चंद्र राज सिंह के नेतृत्व में अल्मोड़ा नंदा देवी से एक दल भी कर्णप्रयाग में होने वाली संयुक्त बैठक में हिस्सा लेगा।

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The 50 Reality Show: 50 Contestants Survival Battle in Palace

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4 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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1 फरवरी 2026 से कलर्स टीवी और जियो हॉटस्टार पर शुरू होने वाला नया रियलिटी शो ‘द 50’ दर्शकों को एक बिल्कुल अलग दुनिया में ले जाएगा। यह शो फ्रेंच सुपरहिट रियलिटी शो लेस सिंक्वांटे से प्रेरित है और इसे भारत में एक नए अंदाज में पेश किया जा रहा है।

दैनिक भास्कर की टीम ने शो के सबसे खास हिस्से यानी ‘महल’ (The Palace) के अंदर का एक्सक्लूसिव टूर किया, जहां 50 कंटेस्टेंट्स अगले 50 दिनों तक सर्वाइवल की जंग लड़ते नजर आएंगे।

लायन करेगा खेल का संचालन

इस शो की सबसे बड़ी खासियत है ‘लायन’, जो पूरे गेम का संचालन करेगा। 50 कंटेस्टेंट्स लायन के इशारों पर खेलेंगे, रणनीति बनाएंगे और सर्वाइवल के लिए लड़ेंगे। लायन का डेन महल का सबसे ताकतवर और रहस्यमयी हिस्सा है, जहां से वह कंटेस्टेंट्स को नए-नए सरप्राइज गेम्स देगा।

महल के अंदर हर जगह जानवरों के प्रतीक नजर आते हैं। शेर, लोमड़ी, चीता, भालू और अन्य जानवरों की मूर्तियां और डिजाइन यह याद दिलाते हैं कि यह सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट का खेल है। यहां दोस्ती भी होगी, धोखेबाजी भी, और हर पल नई रणनीतियां बनेंगी।

एरीना: जहां होगी असली परीक्षा

महल का सबसे खतरनाक हिस्सा है एरीना, जहां फिजिकल और मेंटल दोनों तरह के गेम्स होंगे। यह एरिया स्क्विड गेम की याद दिलाता है, लेकिन यहां मौत नहीं, बल्कि बुद्धि और स्ट्रेटजी की लड़ाई होगी। जो कंटेस्टेंट्स यहां हारेंगे, उन्हें भेजा जाएगा अनसेफ जोन में, जहां आगे का फैसला लायन करेगा।

अनसेफ जोन: खतरे की घंटी

अनसेफ जोन शो का सबसे डरावना हिस्सा है। यहां पहुंचना मतलब एलिमिनेशन का खतरा। भले ही यह जगह देखने में खूबसूरत हो, लेकिन यहां बैठने वाले कंटेस्टेंट्स के लिए समय बेहद मुश्किल होगा। यही वह जगह है जहां गेम का रुख बदल सकता है।

रॉयल लेकिन वाइल्ड महल

‘द 50’ का महल राजस्थान की कारीगरी और जंगल की थीम का अनोखा मेल है। लकड़ी की नक्काशी, शेर के मुखौटे, झूमर, गैलरी और हर कोने में एनिमल किंगडम की झलक मिलती है। महल के अलग-अलग हिस्सों में सिटिंग एरिया बनाए गए हैं, जहां कंटेस्टेंट्स बातचीत करेंगे, दोस्ती करेंगे और चालें चलेंगे।

बेडरूम और लिविंग एरिया इस शो में कंटेस्टेंट्स को आम रियलिटी शोज की तरह एक बड़े हॉल में नहीं सुलाया जाएगा। यहां अलग-अलग बेडरूम्स हैं, जिनमें तीन से चार बेड लगे हैं। हर कमरे का रंग और थीम अलग है, कहीं ग्रीन टोन तो कहीं एक्वा ब्लू। हर जगह कैमरे लगे हैं, जो 24 घंटे कंटेस्टेंट्स की हर चाल पर नजर रखेंगे।

किचन नहीं, बुफे एरिया ‘द 50’ में किचन नहीं होगा। लायन को अपने साम्राज्य में गंदगी पसंद नहीं है। इसलिए कंटेस्टेंट्स को खाना बुफे एरिया में मिलेगा। यहां भी रणनीति और बातचीत होगी, लेकिन किचन पॉलिटिक्स नहीं।

कोई फिक्स नियम नहीं इस शो का सबसे बड़ा ट्विस्ट है कि इसमें कोई तय नियम नहीं होंगे। एलिमिनेशन वोटिंग से नहीं, बल्कि स्ट्रेटजी और सोशल इंटेलिजेंस से होगा। गेम पूरी तरह अनप्रेडिक्टेबल रहेगा।

जियो हॉटस्टार पर शो देखने वाले दर्शक अपने पसंदीदा कंटेस्टेंट्स को सपोर्ट कर सकेंगे। अगर उनका सपोर्ट किया गया कंटेस्टेंट जीतता है, तो दर्शक भी इनाम का हिस्सा बन सकते हैं।

कौन-कौन हैं कंटेस्टेंट्स? शो में कई जाने-माने चेहरे नजर आएंगे, जिनमें दिव्या अग्रवाल, करण पटेल, उर्वशी ढोलकिया, शाइनी दोशी, फैसल शेख और मोनालिसा जैसे नाम शामिल हैं। ये सभी 50 दिन तक सर्वाइवल की लड़ाई लड़ेंगे और प्राइज मनी बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

कब और कहां देखें शो?

‘द 50’ का प्रसारण 1 फरवरी 2026 से शुरू होगा। यह शो जियो हॉटस्टार पर रात 9 बजे स्ट्रीम होगा और कलर्स टीवी पर रात 10:30 बजे टेलीकास्ट किया जाएगा।

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लोंग हो रहे परेशान:10 साल पहले कोटड़ा के लिए 27 बसें थीं, अब तीन, ओवरलोड जीपों में सफर मजबूरी

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जिला मुख्यालय से 120 किमी दूर स्थित कोटड़ा आने-जाने के लिए ग्रामीण आज भी निजी बसों और टैंपों पर निर्भर हैं। इनकी संख्या भी सीमित है। ऐसे में लगभग हर वाहन ओवरलोड चलता है।इस रूट पर रोडवेज की महज तीन बसें ही उपलब्ध हैं। जबकि, कोटड़ा रूट से रोज हजारों लोग रोजगार, इलाज और अन्य कामों के लिए शहर आते हैं। 10 साल पहले कोटड़ा के लिए रोजाना 27 बसें चलती थीं। रोजाना 5 हजार से ज्यादा लोग इनमें सफर करते थे। फिर धीरे-धीरे बसों की संख्या घटती गई। इन्हीं हालातों के चलते बुधवार को कोटड़ा क्षेत्र में ससरेठी घाटा में एक ओवरलोड जीप खाई में उतर गई। हादसे में एक मासूम सहित तीन लोगों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हुए। यह जीप 20 साल पुरानी थी। घाटे से उतरते समय इसके ब्रेक फेल हो गए थे। इसमें 27 लोग सवार थे। नौ लोगों को गंभीर हालत में रेफर किया गया था। गत वर्ष भी बेकरिया थाना क्षेत्र में ओवरलोड टैंपों की ट्रेलर से टक्कर होने से 5 लोगों की मौत और 10 घायल हो गए थे। 5 सीटर ऑटो में 15 सवारी बैठी थी। ओगणा, पानरवा के लिए चार माह बस चलाई, फिर बंद जून 2025 में गोगुंदा, ओगणा, पानरवा रूट पर रोडवेज बस शुरू की गई थी। यह 4 माह तक चली। फिर इसे बंद कर दिया गया। यह सुबह 5:30 बजे पानरवा से रवाना होकर 9 बजे उदयपुर पहुंचती थी। दोपहर 3:15 बजे उदयपुर से रवाना होकर शाम 6:30 बजे पानरवा पहुंचती थी। उदयपुर से सुबह 7:30 व कोटड़ा से दोपहर 2:15 बजे बाद कोई बस नहीं वर्ष 2013-14 में कोटड़ा के लिए 10 ग्रामीण बसें शुरू की गई थीं। ये बसें साल 2016 में बंद हो गईं। 2017 तक रोडवेज की 17 गाड़ियां चलती थीं। अभी पहली बस सुबह 5:45 बजे वाया झाड़ोल होकर जाती है। इसके बाद वाया देवला होते हुए सुबह 6:45 बजे रवाना होती है।तीसरी बस सुबह 7:30 बजे झाड़ोल-पानरवा होते हुए जाती है। वापसी में ये बसें सुबह 11:30, दोपहर 1 बजे, दोपहर 2:15 बजे रवाना होती हैं। इसके बाद उदयपुर आने के लिए कोई बस नहीं है। उदयपुर से कोटड़ा जाने वाली बसें 3:30 से 4 घंटे का समय लेती हैं। ये सभी 48 सीटर हैं। इस मामले को लेकर आगार प्रबंधक हेमंत शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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