दुनिया के 100 बड़े शहरों में आधे में जल संकट:दिल्ली चौथे नंबर पर, चेन्नई डे जीरो के करीब; मुंबई और बेंगलुरु भी प्रभावित

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संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया अब ‘जल महासंकट’ के दौर में है। दुनिया के 100 सबसे बड़े शहरों में आधे शहरों को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें दिल्ली, बीजिंग, न्यूयॉर्क और रियो जैसे बड़े शहर शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 39 शहरों में स्थिति बेहद गंभीर है। रिपोर्ट में दिल्ली 4वें स्थान पर है। कोलकाता 9वें, मुंबई 12वें, बेंगलुरु 24वें और चेन्नई 29वें स्थान पर हैं। इसके अलावा हैदराबाद, अहमदाबाद, सूरत और पुणे भी लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे हैं। काबुल में पानी पूरी तरह खत्म होने का खतरा है। मैक्सिको सिटी हर साल करीब 20 इंच की दर से धंस रही है क्योंकि भूमिगत जल अधिक उपयोग किया जा रहा है। अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी राज्यों में कोलोराडो नदी के पानी को लेकर विवाद चल रहा है। 4 अरब लोग पानी की कमी से जूझ रहे रिपोर्ट के मुताबिक, नदियां और झीलें सिकुड़ रही हैं, भूमिगत जल स्तर गिर रहा है और वाटरलैंड सूख रही हैं। जमीन धंस रही है, सिंकहोल बन रहे हैं और रेगिस्तान फैल रहे हैं। हर साल करीब 4 अरब लोग कम से कम एक महीने तक पानी की कमी का सामना करते हैं। डे जीरो के करीब चेन्नई तेहरान लगातार छठे साल सूखे का सामना कर रहा है और डे जीरो के बेहद करीब है, यानी वो दिन जब नागरिकों के लिए बिल्कुल पानी नहीं बचेगा। केप टाउन और चेन्नई भी पहले इसी स्थिति के करीब पहुंच चुके हैं। यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर वाटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ डिपार्ट्मेंट के डायेक्टर कावेह मदानी का कहना है कि एक नई और सीमित वास्तविकता के साथ जीना सीखना होगा। झील, ग्लेशियर और ग्राउंड वाटर में गिरावट 1990 के बाद से दुनिया की आधी बड़ी झीलों में पानी कम हो गया है। जमीन के नीचे मौजूद पानी के भंडार लगातार 70% तक घट चुके हैं। पिछले 50 सालों में यूरोप की बहुत सारी नमी वाली जमीनें यानी आर्द्रभूमि खत्म हो चुकी हैं। 1970 के बाद से ग्लेशियरों का आकार करीब 30% कम हो गया है। ———— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली में क्लाउड सीडिंग रोकी, 3 ट्रायल कामयाब नहीं रहे:एक की कीमत ₹64 लाख: IIT कानपुर ने कहा- नमी बेहद कम थी दिल्ली में बुधवार को होने वाली क्लाउड सीडिंग फिलहाल रोक दी गई है। एक्सपर्ट के मुताबिक, क्लाउड सीडिंग में तभी सफलता मिलती है जब हवा में करीब 50% नमी हो, इस समय हवा में नमी 10-15% के करीब है। पूरी खबर पढ़ें…

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पंचायत चुनाव:मनरेगा में बदलाव को पंचायत चुनाव में भुनाएगी कांग्रेस, यही रहेगा कैंपेन का टूल

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राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनाव में मनरेगा कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन का काम कर सकती है। पार्टी मनरेगा के नाम बदलने और नए एक्ट बनाए जाने को ही चुनाव कैंपेन का टूल बनाएगी। इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने ग्राउंड जीरो पर काम शुरू कर दिया है। नए साल की शुरुआत से ही प्रदेश कांग्रेस ने वॉर रूम स्तर पर इसकी रणनीति बनाना शुरू कर दिया था, जिसे अब अमली जामा पहनाया जा रहा है। पार्टी की ओर से किए गए विरोध और बयानों के बीच भाजपा ने भी हालांकि गांव-गांव, घर-घर तक विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025 के प्रावधानों की जानकारी देने का प्लान किया है। हालांकि अपनी बात लोगों के बीच ले जाने में कांग्रेस ने शुरुआत पहले कर दी। चुनाव का मिल गया मुद्दा असल में कांग्रेस मानकर चल रही है कि मनरेगा हटाकर नए कानून लाना पंचायत चुनाव में उनके लिए तुरूप का इक्का साबित हो सकता है। अब तक 14 हजार पंचायतों में से 9 हजार 5 सौ के करीब पंचायतों में घर-घर जनसंपर्क, सम्मेलन व यात्राओं जैसे कार्यक्रम या तो तय कर लिए गए हैं, या कर भी लिए गए हैं। टारगेट तय किया गया है कि 29 जनवरी तक सभी पंचायतों में यह काम पूरा कर लिया जाए। 30 जनवरी के बाद डोटासरा, जूली, गहलोत, पायलट जैसे दिग्गज नेताओं के दौरे भी बन सकते हैं। रणनीति… वॉर रूम रख रहा हर कार्यक्रम की खबर प्रदेश कांग्रेस महासचिव मीडिया सेंटर चेयरमैन स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि सभी तैयारियों, आयोजनों की रिपोर्ट वॉर रूम इकट्ठा कर रहा है। हर खबर, वीडियो-फोटो के साथ पूरी डिटेल का डाटा तैयार किया जा रहा है। कितने कार्यकर्ता काम में लगे, कितने सक्रिय, कितने निष्क्रिय ये डाटा भी जुटा रहे। डोटासरा मॉनिटरिंग कर रहे हैं। प्रदेश कमेटी से पंचायत तक
कांग्रेस ने पंचायत राज चुनाव को देखते हुए नए वर्ष की शुरुआत में ही स्टेट लेवल कमेटी बना दी थी। जिलों में भी को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई गई। यह को-ऑर्डिनेशन कमेटी कार्यक्रम तय कर मंडल स्तर पर मनरेगा के खत्म किए जाने को लेकर कार्यक्रम कराएगी। कांग्रेस सभी 14 हजार से अधिक पंचायतों में सम्मेलन और यात्राएं निकालेगी। इसमें मनरेगा के पूर्व के प्रावधानों से मिले लाभों को गिनाया जाएगा। प्रत्याशी चयन का जरिया भी हर विधानसभा क्षेत्र में एक पखवाड़ा पहले ऑब्जर्वर लगा दिए गए थे। वे हर पंचायतों की मीटिंग ले रहे हैं। जो सक्रिय हैं और अच्छा काम कर रहे हैं तो वे टिकट के भी दावेदार हो जाएंगे। यानी एक के साथ दो काम हो रहे हैं। आंदोलन भी कर रहे हैं और प्रत्याशियों की पहचान भी की जा रही है। प्रत्याशियों पर नजर डाली जा रही है। जब चयन किया जाएगा, तो सक्रिय कार्यकर्ताओं को सूची से निकालकर प्रत्याशियों की सूची में डाला जाएगा।

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डिस्कॉम्स की पहल:प्रदेश डेटा सेंटर्स का हब बनेगा, अब दो ग्रिड सब स्टेशनों से निर्बाध होगी बिजली सप्लाई

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राजस्थान आने वाले दिनों में डेटा सेंटर इंडस्ट्री का महत्वपूर्ण हब बनने जा रहा है। राजस्थान डिस्कॉम्स के प्रयासों से अब यह हकीकत बनेगा। विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों याचिका स्वीकार कर ली है। इससे अब डिस्कॉम्स एक डेटा सेन्टर को दो 132 केवी ग्रिड सब स्टेशनों से जोड़कर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर पाएंगे। डेटा सेंटर्स के लिए अनवरत एवं भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति एक अनिवार्य शर्त है। क्योंकि एक ही सोर्स से सप्लाई होने के कारण ट्रिपिंग, फॉल्ट, मेंटीनेंस और सिस्टम फेल होने जैसी आकस्मिक स्थिति में सप्लाई स्विच होकर दूसरे वैकल्पिक सोर्स पर आ जाती है। यह विद्युत आपूर्ति डेटा सेंटर को निरन्तर सक्रिय रखती है। अब तक प्रदेश में वितरण निगमों के वर्तमान सप्लाई कोड तथा टैरिफ फॉर सप्लाई ऑफ इलेक्ट्रिसिटी-2025 में ऐसे सेंटर्स को दो डेडीकेटेड फीडरों से जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं था। डेटा सेन्टर्स उद्योग के विकसित होने में यह बाधा बनी हुई थी। अब राजस्थान डिस्कॉम्स की पहल के बाद प्रदेश में भी डेटा सेन्टर्स को दोहरे स्रोत से बिजली मिल पाएगी। राजस्थान डिस्कॉम्स ने देश के उन राज्यों एवं शहरों में अपने इंजीनियर्स की टीम भेजी जहां डेटा सर्विस प्रदान करने वाली कंपनियां बड़ी संख्या में स्थापित हैं। इंजीनियर्स प्रमुख डेटा सेवा प्रदाता कंपनी एनटीटी और एसटीटी के वापी, मुम्बई तथा नोएडा स्थित ग्लोबल डेटा सेंटर्स पर गए और वहां इन सेंटर्स के विकसित होने के बारे में अध्ययन किया। इसमें यह सामने आया कि एक ही सिस्टम से पावर सप्लाई होना इस इंडस्ट्री के विकसित होने की राह में एक बड़ी बाधा है। इंजीनियरों की इस टीम ने अपनी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर डिस्कॉम्स ने नियामक आयोग के समक्ष डेटा सेन्टर्स को दोहरे स्रोत से विद्युत आपूर्ति की अनुमति प्रदान करने के लिए अपनी याचिका प्रस्तुत की। इस पर आयोग ने 21 जनवरी को आदेश पारित कर डिस्कॉम्स को दोहरे स्रोत से विद्युत सप्लाई करने की अनुमति प्रदान कर दी। राजस्थान विगत समय में तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते उपयोग, ऑनलाइन सेवाओं की हर स्तर तक पहुंच, राजकीय कार्यों में सूचना तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, हर हाथ में मोबाइल, आदि के कारण डेटा की खपत लगातार बढ़ी है। डेटा सेंटर्स इस पूरे डिजिटल इकोसिस्टम के केन्द्र होते हैं जो सम्पूर्ण सूचना प्रवाह को प्रोसेस और मैनेज करते हैं। भारत की लगभग 90 प्रतिशत डेटा सेंटर क्षमता मुम्बई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बंगलुरू जैसे शहरों में केन्द्रित है। गूगल, अमेजन जैसी टेक दिग्गज कंपनियां भारत में डेटा सेंटर्स स्थापित करने के लिए आगे आ रही हैं। अब राजस्थान भी इस दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ सकेगा। राजस्थान सरकार ने भी जारी की है नीति मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डेटा सेंटर्स की उपयोगिता को देखते हुए राजस्थान डेटा सेंटर पॉलिसी-2025 लागू की है। इसमें डेटा सेंटर सेक्टर को विकसित करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन एवं अन्य निर्णय लिए गए हैं। इसी तरह सुशासन में आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस को बढ़ावा देने के लिए एआई-एमएल नीति-2026 को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दी है। इन नीतियों की सफलता एवं राजस्थान को डेटा सेंटर का हब बनाने के लक्ष्यों की प्राप्ति में राजस्थान डिस्कॉम्स की यह पहल एक मजबूत कड़ी साबित होगी।

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गुरुकुल स्कूल में बच्चों ने मानव श्रृंखला बनाई

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बांसवाड़ा| गुरुकुल सीनियर सेकंडरी स्कूल आनंदपुरी में बसंत पंचमी का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य निखार पंचाल ने बताया कि इस अवसर पर नव प्रवेशित बालकों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती के आकार में खड़े होकर बसंत पंचमी मनाई।

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निपुण मेले का आयोजन, बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

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प्रतापगढ़| निपुण भारत मिशन के अंतर्गत निपुण मेले का आयोजन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ईंटों का तालाब छोटीसादड़ी में किया गया। मेले का उद्देश्य बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को बढ़ावा देना रहा। पीईईओ ईंटों का तालाब के अधीनस्थ सभी विद्यालयों से प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों ने पढ़ने, लिखने और गणित से जुड़े विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। मेले में बच्चों द्वारा बनाए गए शिक्षण मॉडल, चार्ट, खेल-आधारित गतिविधियां और कहानी वाचन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों की सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि देखने को मिली। संस्था प्रधान यश मेनारिया ने बताया कि निपुण भारत मिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस प्रकार के आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे बच्चों को सीखने का आनंददायक वातावरण मिलता है। अंत में बच्चों को प्रोत्साहित किया गया और कार्यक्रम का सफल समापन किया गया। अध्यापक धन्नालाल मीणा, लच्छीराम मीणा, पंकज कुमार मीणा, पुष्कर लाल टेलर, विजय कुमार गांछा, मनीष कुमार पाटीदार, यशपाल प्रजापत, कमलेश कुमावत, हरीश प्रजापत, पियूष जैन, दीपेश कुमावत, आकाश पाटीदार, अर्जुनलाल मीणा एवं अध्यापिका विनिशा सोलंकी मौजूद रहे।

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जयपुर डिस्कॉम में कंट्रोवर्सी:XEN 8 माह से एईएन का काम कर रहे, डिस्कॉम की दलील- पद खाली नहीं, दो अन्य XEN को वैशाली-रामबाग का अतिरिक्त चार्ज

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जयपुर डिस्कॉम ने सहायक अभियंता (एईएन) को अधिशाषी अभियंता (एक्सईएन) पद पर पदोन्नत तो कर दिया, लेकिन काम एईएन का ही ले रहा है। करीब 8 माह पहले करीब 15 एईएन-एक्सईएन का डिस्कॉम ने प्रमोशन किया था। इसमें से सभी को पदस्थ कर दिया, गया लेकिन एक्सईएन बने दिनेश बैरवा को अब तक पदोन्नति नहीं दी। इस पर डिस्कॉम का कहना है कि इनकी फाइल उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी, मगर तकनीकी कारणों से पदोन्नति नहीं दी गई। वहीं अभी एक्सईएन का पद खाली नहीं है, जबकि जयपुर शहर में ही दो महत्वपूर्ण एक्सईएन के पद खाली हैं और उनका अतिरिक्त कार्यभार दो अन्य एक्सईएन को दे रखा हैं। बता दें कि दिनेश बैरवा जगतपुरा एईएन ऑफिस में तैनात हैं। एक्सईएन के पद खाली
डिस्कॉम के जोनल चीफ इंजीनियर के टीए विवेक चौधरी को एक्सईएन सीडी-1 राममंदिर का अतिरिक्त कार्यभार दिया हुआ है। सीडी-2 रामबाग सर्किल का अतिरिक्त प्रभार एक्सईएन-एसएमवी राजेश शर्मा को दिया हुआ है। वहीं, आरडीएसएस जयपुर जोन और मेटेरियल मैनेजमेंट विंग में भी एक्सईएन के पद रिक्त हैं। पदोन्नति, नियुक्ति नहीं दी
“मेरी अधिशाषी अभियंता पद पर पदोन्नति हो गई है। लेकिन मुझे अभी नियुक्ति नहीं दी गई है।”
-दिनेश बैरवा, सहायक अभियंता, जगतपुरा, जयपुर डिस्कॉम फाइल का पता नहीं
“एईएन को एक्सईएन पद पर पदोन्नति दी गई है। फाइल के बारे में पता करता हूं।”
-बलदेव राम भोजक, सचिव (प्रशासन), जयपुर डिस्कॉम ट्रांसफर पर बैन, पदोन्नति पर नियुक्ति दी जा सकती है
“बैन होने पर ताबदले नहीं किए जाते, लेकिन प्रमोशन तबादला नहीं होता। दिसंबर-2025 में ही डिस्कॉम द्वारा जेईएन से एईएन और एईएन से एक्सईएन के पदों पर पदोन्नति कर नियुक्ति दी गई है।” भास्कर एक्सपर्ट- अर्जुनराम महनोत, उप मुख्य अभियंता (रिटायर्ड)

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सरफराज खान का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं वैभव सूर्यवंशी:U-19 वर्ल्ड कप में भारत Vs न्यूजीलैंड; इंडिया ने हेड टु हेड में 17 मैच जीते

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14 साल के वैभव सूर्यवंशी आज सरफराज खान का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। उनके नाम अभी 1047 रन दर्ज हैं, जबकि सरफराज खान के 1080 रन हैं। ऐसे में वैभव को सरफराज से आगे निकलने के लिए सिर्फ 33 रन की जरूरत है। इतना ही नहीं, अगर वे इस मुकाबले में 102 रन बना लेते हैं तो शुभमन गिल के 1149 यूथ वनडे रनों का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा। शनिवार को अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला खेला जाएगा। मैच दोपहर 1:00 बजे से जिम्बाब्वे के बुलावायो में शुरू होगा। यह दोनों टीमों का लीग स्टेज का आखिरी मैच है। भारत ने अब तक दोनों मुकाबले जीतकर ग्रुप-बी में टॉप पर जगह बनाई है, जबकि न्यूजीलैंड के दोनों मैच बेनतीजा रहे हैं और टीम 2 पॉइंट्स के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत का पलड़ा भारी अंडर-19 स्तर पर भारत और न्यूजीलैंड के हेड-टू-हेड आंकड़ों में भारत का दबदबा रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक खेले गए 20 मुकाबलों में भारत ने 17 मैच जीतकर बढ़त बनाई है, जबकि न्यूजीलैंड को सिर्फ 3 मैचों में जीत मिली है। कप्तान आयुष की फॉर्म चिंता भारतीय अंडर-19 टीम के कप्तान आयुष म्हात्रे की फॉर्म इस समय टीम मैनेजमेंट के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अभ्यास मैच में इंग्लैंड के खिलाफ 49 रन की पारी खेलने के बाद आयुष का बल्ला खामोश रहा है। अमेरिका के खिलाफ पहले मुकाबले में वे 19 रन बनाकर आउट हुए, जबकि बांग्लादेश के खिलाफ सिर्फ 6 रन ही बना सके। इससे पहले अंडर-19 एशिया कप में भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था, जहां पांच मैचों में उन्होंने कुल 65 रन बनाए और इनमें तीन बार उनका स्कोर सिंगल डिजिट में रहा। दूसरी ओर टीम में वैभव सूर्यवंशी और अभिज्ञान कुंडू शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं और लगातार रन बना रहे हैं। बॉलिंग डिपार्टमेंट में हेनिल पटेल ने शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने दो मैचों में 6 विकेट झटके हैं, जिसमें 16 रन देकर 5 विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। न्यूजीलैंड के लिए करो या मरो मुकाबला न्यूजीलैंड अंडर-19 टीम के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा है। बारिश के कारण उसके अब तक दोनों मैच बेनतीजा रहे हैं, ऐसे में बिना जीत के आगे बढ़ना मुश्किल होगा। मैच प्रैक्टिस की कमी के बावजूद न्यूजीलैंड अनुशासित गेंदबाजी और संभलकर बल्लेबाजी के दम पर भारत को कड़ी टक्कर देने की कोशिश करेगी। टीम के प्रदर्शन की बात करें तो आर्यन मान ने दो मैचों में 21 रन बनाए हैं, जबकि गेंदबाजी में फ्लीन मोरे ने दो मुकाबलों में 4 विकेट लेकर प्रभाव छोड़ा है। पिच रिपोर्ट जिम्बाब्वे के बुलावायो की पिच सुबह के समय थोड़ी धीमी रहती है। ऐसे में किसी भी ओपनर के लिए शुरुआती 25-30 गेंदें बेहद अहम मानी जाती हैं, क्योंकि इस दौरान संभलकर खेलने से आगे की पारी आसान हो जाती है। अब तक अंडर-19 वर्ल्ड कप के मुकाबलों में देखा गया है कि टॉस जीतने वाली टीमें यहां पहले गेंदबाजी करना ज्यादा पसंद कर रही हैं। वेदर रिपोर्ट जिम्बाब्वे के बुलावायो में शनिवार को मौसम मैच में खलल डाल सकता है। यहां तेज आंधी के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दिन के दौरान तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक बारिश की आशंका 65 प्रतिशत तक जताई गई है, जबकि नमी का स्तर लगभग 75 प्रतिशत रह सकता है। इसके अलावा हवा भी सामान्य से तेज चलने की उम्मीद है, जिसकी रफ्तार करीब 11 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-XI भारत- आयुष म्हात्रे (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, वेदांत त्रिवेदी, विहान मल्होत्रा, अभिज्ञान कुंडू (विकेटकीपर), हरवंश पंगालिया, आरएस अंबरीश, कनिष्क चौहान, हेनिल पटेल, दीपेश देवेंद्रन, खिलन पटेल। न्यूजीलैंड- टॉम जोन्स (कप्तान), आर्यन मान, ह्यूगो बोग, स्नेहित रेड्डी, मार्को विलियम एल्पे (विकेटकीपर), जैकब कॉटर, जसकरन संधू, कैलम सैमसन, फ्लिन मोरे, सेल्विन संजय, मेसन क्लार्क। कहां देखें लाइव मैच? भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले इस मुकाबले को फैंस टीवी पर सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर लाइव देख सकते हैं। वहीं, मोबाइल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मैच का लुत्फ उठाने वाले दर्शकों के लिए जियो हॉटस्टार एप पर लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा मैच से जुड़ी हर अपडेट, लाइव कवरेज और एनालिसिस आप दैनिक भास्कर एप पर भी पढ़ सकते हैं।

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फंदे से लटका मिला एक्टर कुणाल सिंह का शव:बाथरूम में थीं गर्लफ्रेंड, एक शक से हत्या की गुत्थी में तब्दील हुआ आत्महत्या का मामला

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बॉलीवुड एक्टर कुणाल सिंह महज 31 साल के थे, जब मुंबई के एक अपार्टमेंट में उनका शव मिला। शुरुआत में उनकी मौत को आत्महत्या माना गया, हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे केस को पलटकर रख दिया। फोरेंसिक एक्सपर्ट ने इसे आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या माना था। उनकी मौत हत्या थी या आत्महत्या, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने केस की रिपोर्ट तैयार करने वाले AIIMS के पूर्व फोरेंसिक एक्सपर्ट तिरथ दास डोगरा से संपर्क किया। आज अनसुनी दास्तान के 4 चैप्टर में जानिए एक्टर कुणाल सिंह की मौत की कहानी- 29 सितंबर 1977 को कुणाल सिंह का जन्म हरियाणा में हुआ था। मॉडलिंग में पहचान बनाने के बाद कुणाल ने तमिल फिल्म कधालार धीनम (1999) से एक्टिंग डेब्यू किया था। फिल्म में उनके साथ सोनाली बेंद्रे लीड रोल में थीं। साउथ में ये फिल्म हिट रही, जिसके बाद इसकी हिंदी रीमेक फिल्म दिल ही दिल में (2000) बनाई गई, जिसमें कुणाल और सोनाली लीड रोल में रहे। ये फिल्म भी हिट रही, जिसका गाना ऐ नाजनीन सुनो न काफी पसंद किया गया था। इन दो फिल्मों की बदौलत कुणाल सिंह को एक-एक कर कई बड़ी साउथ फिल्में मिलने लगीं। वो अनीता हंसनंदानी के साथ 2002 की फिल्म ‘वरुशामेल्लम वसंतम’ और धनुष स्टारर फिल्म ‘देवथैयाई कंदेन’ जैसी कई पॉपुलर साउथ फिल्मों का हिस्सा रहे। साउथ फिल्मों में बढ़ती पॉपुलैरिटी के बीच उन्होंने अनुराधा सिंह से शादी की, जिससे उन्हें दो बच्चे हुए। साल 2007 तक कुणाल को फिल्मों में काम मिलना लगभग बंद हो गया। जो एक-दो फिल्में उन्होंने की थीं, उसमें भी उनका साइड रोल ही होता था। यही वजह रही कि कुणाल ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी बालागिरी शुरू की। उन्होंने अपने प्रोडक्शन की पहली फिल्म योगी की तैयारियां शुरू की थीं, जिनमें उनके साथ एक्ट्रेस लवीना भाटिया लीड रोल में थीं। 2007 में फिल्म की शूटिंग शुरू हुई ही थी कि कुणाल सिंह और लवीना भाटिया की नजदीकियां बढ़ने लगीं और दोनों के अफेयर की खबरें सुर्खियों में आ गईं। जल्द ही ये खबरें कुणाल सिंह के परिवार तक भी पहुंच गईं। कुणाल की पत्नी अनुराधा इससे बेहद नाराज हुईं। दोनों के आए दिन झगड़े बढ़ने लगे और एक रोज अनुराधा दोनों बेटियों के साथ कुणाल को छोड़कर मायके चली गईं। कुछ समय बाद लवीना भाटिया कुणाल के साथ उनके मुंबई स्थित अपार्टमेंट में आकर रहने लगीं। 7 फरवरी 2008 कुणाल सिंह और लवीना भाटिया अपार्टमेंट में अकेले थे। देर रात लवीना ने मुंबई पुलिस को कॉल कर कुणाल की आत्महत्या की जानकारी दी। पुलिस पहुंची तो देखा कि कुणाल का शव पंखे पर लगे फंदे से लटक रहा था। लवीना पास बैठी रो रही थीं। पुलिस ने शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। शुरुआत में इसे आत्महत्या माना गया। पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी फंदे से दम घुटने से मौत होने की संभावनाएं सामने आईं। कुछ दिन बीते ही थे कि कुणाल के पिता कर्नल राजेंद्र सिंह ने हत्या का शक जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने 4 अहम सवाल खड़े किए। पहला सवाल- अगर कुणाल ने आत्महत्या की, तो उनके शरीर पर खरोंच के निशान कैसे आए। दूसरा सवाल- लवीना ने कहा था कि कुणाल उन्हें रात को घर छोड़ने वाले थे, तो अगर कुणाल को आत्महत्या करनी ही थी, तो वो लवीना को छोड़ने के बाद भी कर सकते थे। तीसरा सवाल- लवीना ने कहा कि वो बाथरूम में थीं, अगर कुणाल आत्महत्या करने वाले थे, तो उन्हें इस बात का अंदाजा कैसे लगा कि वो कितनी देर में बाथरूम से बाहर आने वाली हैं। चौथा सवाल- कुणाल ने मौत से चंद घंटे पहले ही पॉपुलर म्यूजिक कंपोजर डब्बू मलिक को काम के सिलसिले में मैसेज किया था। उन्होंने जल्द ही डब्बू को अपने घर पर इनवाइट किया था। अगर कुणाल को आत्महत्या करनी थी, तो वो उसी रोज आगे की प्लानिंग क्यों कर रहे थे। जांच में सामने आया कि जिस दिन कुणाल का शव मिला, उसी दिन उन्होंने अपकमिंग फिल्म योगी की टीम से मुलाकात की थी और आगे की प्लानिंग बनाई थी। पिता की शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने कुणाल सिंह की गर्लफ्रेंड लवीना भाटिया को गिरफ्तार कर लिया गया। लवीना भाटिया ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि वो सुबह नहाने गई थीं। करीब 10 मिनट बाद वो बाहर निकलीं तो देखा कि कुणाल फंदे पर लटके हैं। पुलिस के पास लवीना के खिलाफ कोई सबूत नहीं था, जिसके चलते उन्हें छोड़ दिया गया। पहले भी कलाई काटकर की जान देने की कोशिश पुलिस जांच के दौरान ये भी सामने आया कि कुणाल सिंह फिल्मों में ठीक काम न मिलने और निजी जिंदगी की उथल-पुथल से काफी परेशान चल रहे थे। परिवार और दोस्तों ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि फरवरी 2008 में आत्महत्या करने से कुछ दिनों पहले भी उन्होंने कलाई की नस काटकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी, हालांकि तब उन्हें बचा लिया गया था। जब पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी, तो ये केस CBI को सौंपा गया। जिसके बाद उनकी मौत के कारण की गहराई से जांच की गई। कुणाल की फोरेंसिक रिपोर्ट उस समय AIIMS के फोरेंसिक एक्सपर्ट रहे डॉक्टर टी.डी.डोगरा ने तैयार की थी। कुणाल सिंह की मौत का असल कारण जानने के लिए दैनिक भास्कर ने डॉक्टर टी.डी.डोगरा से संपर्क किया। उन्होंने हमसे बातचीत में शुरुआती जांच पर कहा, कुणाल के निधन के बाद 20 अगस्त 2008 को बॉम्बे में उनका पोस्टमॉर्टम किया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने मृत्यु का कारण गर्दन पर लिगेचर (फंदे) द्वारा दबाव बताया, जो उनकी संभावित मृत्यु का कारण था।’ ‘मृतक के शरीर पर फांसी के सामान्य लक्षण मौजूद थे। जैसे गर्दन पर तिरछा लिगेचर मार्क, मुंह के दाहिने कोने से लार का बहना, जो हैंगिंग का एक महत्वपूर्ण संकेत होता है। उनकी जीभ दांतों के बीच फंसी हुई थी और हाथ-पैरों के नाखून नीले पड़ चुके थे। आंखों में पेटीकीअल हैमरेज पाया गया, जो इस तरह की मृत्यु में अक्सर देखा जाता है। निष्कर्ष में डॉक्टरों ने कहा कि मृत्यु दम घुटने से संभव है और सभी फाइंडिंग्स उससे मेल खाती हैं। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इसे आत्महत्या माना गया, लेकिन जब कुणाल सिंह के पिता की शिकायत पर केस सीबीआई को सौंपा गया, तो 27 जुलाई 2008 को फिर उनका पोस्टमॉर्टम किया गया। इस पर टी.डी.डोगरा कहते हैं, ‘नाखूनों की जांच की गई, जिसमें किसी प्रकार का खून या किसी अन्य व्यक्ति की कोशिकाएं नहीं पाई गईं। आमतौर पर हत्या के मामले में विक्टिम द्वारा स्ट्रगल किए जाने पर उनके नाखूनों में आरोपी की स्किन फंसी होती है। हालांकि रिपोर्ट में ऐसा कुछ सामने नहीं आया।’ ’27 फरवरी 2009 को कूपर अस्पताल के डॉक्टरों की राय ली गई। इसमें कहा गया कि जो लिगेचर मार्क दिखाई दे रहा है, वह किसी नरम सामग्री से बन सकता है। यदि गर्दन दाईं ओर झुकी हो तो निशान दाईं ओर होना संभव है। हाथ पर जो नीला निशान था, वह किसी कठोर वस्तु से बन सकता है। इस रिपोर्ट में आत्महत्या की संभावना से इनकार नहीं किया गया। विसरा में शराब या किसी अन्य जहर के प्रमाण नहीं मिले।’ ’20 जनवरी 2009 को ग्रांट मेडिकल कॉलेज बोर्ड की राय सामने आई। पहले कूपर अस्पताल का बोर्ड बना, उसके बाद ग्रांट मेडिकल कॉलेज का। उन्होंने कहा कि मृत्यु खाना खाने के 4 से 6 घंटे बाद संभव है और पोस्टमॉर्टम से 12 से 24 घंटे पहले मृत्यु हुई थी। मृत्यु का कारण पार्शियल हैंगिंग (दम घुटना) बताया गया। मृत्यु के समय को लेकर कोई विरोधाभास नहीं पाया गया।’ ’12 अगस्त 2009 को कूपर अस्पताल की एक बार फिर से राय ली गई, जिसमें मृत्यु को होमिसाइडल (हत्या) प्रकृति की बताया गया। जबकि पहले इसे सुसाइडल बताया गया था। यही विरोधाभास आगे चलकर एम्स की रिपोर्ट से टकराया। इन्हीं अलग-अलग रिपोर्टों के कारण सीबीआई यह मामला लेकर एम्स पहुंची।’ डॉक्टर टी.डी.डोगरा ने आगे कहा, ‘16 सितंबर 2009 को कूपर अस्पताल से तीसरी राय ली गई, जिसमें लिगेचर मार्क को होमिसाइडल डेथ यानी हत्या के पक्ष में बताया गया। मुट्ठी बंद होने को किसी ब्लंट ऑब्जेक्ट से जोड़ने की कोशिश की गई। यह राय भी एम्स की रिपोर्ट से मेल नहीं खा रही थी।’ ‘7 दिसंबर 2009 को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को कपड़े और अंडरवियर जांच के लिए भेजे गए। अंडरवियर पर खून नहीं था। शर्ट, जींस और बेडशीट पर न तो लार, न वीर्य और न ही संघर्ष के कोई निशान पाए गए। यौन हमले या संघर्ष का कोई प्रमाण नहीं मिला।’ कुणाल सिंह की मौत के 2 साल बीत गए थे, लेकिन सीबीआई के पास अब भी कुणाल सिंह की मौत की सटीक जानकारी नहीं थी। आखिरकार, 22 जनवरी 2010 को सीबीआई ने सभी दस्तावेज, रिपोर्ट्स और पेपर्स एम्स को सौंपे और सीन री-कंस्ट्रक्शन का अनुरोध किया। 12 फरवरी 2010 को सीबीआई ने एम्स को एक रिपोर्ट भेजते हुए 24 सवालों के जवाब मांगे। डी.टी.डोगरा कहते हैं, ’13 फरवरी 2010 को एम्स और सीएफएसएल की संयुक्त टीम मेरे चेयरमैन शिप में गठित की गई। टीम का मुख्य निष्कर्ष यह था कि कुर्सी पर खड़े होकर फांसी लगाना आसान और पूरी तरह संभव था। सूटकेस या सोफे पर खड़े होकर भी फांसी लगाई जा सकती थी, हालांकि वह थोड़ा कठिन होता। बेडशीट लंबी, मजबूत और मृतक जैसे व्यक्ति का वजन सहने में सक्षम थी। गांठ स्थिर और कसी हुई थी। किसी भी कपड़े पर खिंचाव, फटने या संघर्ष के निशान नहीं थे।सोफे का एक पैर और सूटकेस से छूना जीवित रहने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया भी हो सकती है। पूरा दृश्य फांसी की प्रक्रिया से मेल खाता था।’ 2 साल बाद सीबीआई की जांच के बाद कुणाल की मौत आत्महत्या करार दी गई 2 साल की लंबी जांच के बाद आखिरकार बॉम्बे हाईकोर्ट ने कुणाल सिंह डेथ केस में फैसला सुनाते हुए इसे आत्महत्या करार दिया। हालांकि केस की जांच में लापरवाही करने के चलते बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 पुलिस अफसरों के सस्पेंशन का ऑर्डर दिया। आरुषि तलवार, इंदिरा गांधी की फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं टी.डी.डोगरा टी.डी.डोगरा एम्स के पूर्व फोरेंसिक एक्सपर्ट रह चुके हैं। उन्होंने अपने मेडिकल करियर में इंदिरा गांधी की हत्या, आरुषि तलवार मर्डर केस, निठारी केस, बाटला हाउस एनकाउंटर केस, माधवराव सिंधिया एक्सीडेंट केस की रिपोर्ट भी तैयार की थी।

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Process to operate 8,250 e-rickshaws begins

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चारदीवारी क्षेत्र के जोन 7A से 7E में लॉटरी सिस्टम से ई-रिक्शा संचालन से यातायात व्यवस्था में सुधार हुआ है। इसी को देखते हुए अब प्रायोगिक तौर पर तीन नए क्षेत्रों में 8,250 ई-रिक्शा संचालन की अनुमति दी जा रही है। इनमें सेंट्रल जोन में 2,000, उत्तर जोन

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डीसीपी ट्रैफिक सुमित मेहरडा ने बताया कि इन जोनों में ई-रिक्शा संचालन के इच्छुक वाहन स्वामी 28 जनवरी तक (समय सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक) अपने आवेदन जमा करा सकते हैं। आवेदन एवं निर्धारित प्रपत्र निशुल्क रूप से यादगार भवन, अजमेरी गेट, जयपुर से प्राप्त किए जा सकते हैं। आवेदन के साथ वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र, फिटनेस सर्टिफिकेट तथा ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा। प्राप्त आवेदनों की जांच के उपरांत 30 जनवरी को लॉटरी के माध्यम से जोनवार आवंटन किया जाएगा। चयनित ई-रिक्शा के लिए नई व्यवस्था 1 फरवरी से प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी।

सेंट्रल जोन – 2,000 ई-रिक्शा को अनुमति रंग- नारंगी

मुख्य मार्ग- सीकर रोड मुख्य मार्ग को छोड़ दाहिनी ओर का क्षेत्र- विद्याधर नगर, विश्वकर्मा, शास्त्री नगर, अम्बाबाड़ी, बनीपार्क, संजय सर्किल, एमआई रोड, अशोक मार्ग, सरदार पटेल मार्ग, हवा सड़क, सिविल लाइन्स, हसनपुरा एवं रेलवे स्टेशन।

क्षेत्र- विश्वकर्मा, विद्याधर नगर, अम्बाबाड़ी, पानीपेच, एमआई रोड, अशोक मार्ग, सरदार पटेल मार्ग, अजमेर पुलिया, सिविल लाइन्स, विधायकपुरी थाना क्षेत्र, हथरोई, संजय सर्किल तथा स्टेशन से चिंकारा तक।

रंग: ग्रे/सलेटी – 250 ई-रिक्शा को अनुमति

क्षेत्र- रिजर्व पुलिस लाइन, पारीक कॉलेज मोड़, सिंधी कैंप तथा पोलो विक्ट्री से रेलवे स्टेशन तक का मार्ग।

उत्तर जोन – 6,000 ई-रिक्शा को अनुमति रंग- नीला

मुख्य मार्ग- एम.आई. रोड को छोड़कर-अजमेरी गेट, संजय सर्किल, माउंट रोड आमेर, दिल्ली रोड (आयुक्तालय सीमा तक), ट्रांसपोर्ट नगर तथा आगरा रोड मुख्य मार्ग को छोड़कर उत्तरी भाग। क्षेत्र- जालूपुरा, न्यू कॉलोनी, जयन्ती बाजार, ब्रह्मपुरी, गलता गेट एवं आमेर–दिल्ली रोड। संजय सर्किल-स्टेशन रोड-रेलवे स्टेशन जोन।

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भारत ने छठी बार 200+ का टारगेट चेज किया:ईशान को कप्तान ने गले से लगाया, सूर्या की 23 इनिंग बाद फिफ्टी; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

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रायपुर में भारत ने न्यूजीलैंड को 28 गेंद रहते हरा दिया। 200 से ज्यादा रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए यह भारत की अब तक की सबसे तेज जीत रही। टीम इंडिया ने 209 रन का टारगेट सिर्फ 15.2 ओवर में 3 विकेट खोकर हासिल किया और छठी बार 200+ का टारगेट चेज किया। इसके साथ ही सीरीज में भारत ने लगातार दूसरी जीत हासिल कर ली। मैच में कई रिकॉर्ड बने, लेकिन सबसे यादगार प्रदर्शन ईशान किशन का रहा। उन्होंने महज 21 गेंदों में अर्धशतक जड़कर मुकाबले का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। एक खास पल तब देखने को मिला, जब आउट होने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने ईशान को गले लगाकर उनकी पारी की सराहना की। सूर्या ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 23 पारियों बाद टी-20 में फिफ्टी पूरी की और 37 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। दोनों के बीच 122 रन की साझेदारी ने न्यूजीलैंड को मुकाबले से बाहर कर दिया। पढ़िए दूसरे टी-20 के टॉप रिकॉर्ड्स और मोमेंट्स… 1. भारत ने छठी बार 200+ रन का लक्ष्य हासिल किया टी-20 इंटरनेशनल में भारत ने 200 या उससे ज्यादा रन का लक्ष्य छठी बार हासिल कर लिया। इस उपलब्धि के साथ टीम इंडिया इस मामले में ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। भारत ने 209 रन का लक्ष्य हासिल कर अपने दूसरे सबसे बड़े रन चेज की बराबरी कर ली। इससे पहले टीम इंडिया का सबसे बड़ा रन चेज 2009 में मोहाली में देखने को मिला था, जब भारत ने 211 रन का टारगेट सफलतापूर्वक पूरा किया था। यह जीत इसलिए भी खास रही, क्योंकि घर पर 100वां टी-20 मैच खेल रही भारत ने मैच जीता। 2. ईशान की 21 गेंदों में फिफ्टी, भारत Vs न्यूजीलैंड इतिहास की सबसे तेज भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 मुकाबलों में सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड अब ईशान किशन के नाम दर्ज हो गया है। ईशान ने 21 गेंदों में फिफ्टी पूरी कर यह उपलब्धि हासिल की। इससे पहले इस सूची में अभिषेक शर्मा का नाम था, जिन्होंने नागपुर में 22 गेंदों में अर्धशतक लगाया था। इस मैच में ईशान किशन का आक्रामक अंदाज पावरप्ले में ही देखने को मिला, जहां उन्होंने शुरुआती 6 ओवर में 56 रन ठोक दिए। यह टी-20 इंटरनेशनल में किसी भारतीय बल्लेबाज का पावरप्ले में दूसरा सबसे बड़ा स्कोर है। इस मामले में उनसे आगे सिर्फ अभिषेक शर्मा हैं, जिन्होंने 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ पावरप्ले में 58 रन बनाए थे। 3. सूर्या की 23 इनिंग बाद फिफ्टी 11वें ओवर में भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपना अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने 23 गेंदों में फिफ्टी लगाई, जो 23 पारियों के बाद आई। सूर्या ने 37 गेंदों पर नाबाद 82 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें 9 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। यह आठवीं बार था जब उन्होंने 25 या उससे कम गेंदों में अर्धशतक जड़ा, जबकि 200 से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से फिफ्टी लगाने का यह उनका 11वां मौका रहा। 4. न्यूजीलैंड का भारत में भारत के खिलाफ हाईएस्ट टी-20 टोटल भारत की सरजमीं पर न्यूजीलैंड ने टी-20 इंटरनेशनल में अपना सबसे बड़ा स्कोर 208 रन बनाया। इससे पहले न्यूजीलैंड का भारत में सबसे बड़ा स्कोर 2017 में राजकोट में 196 रन का था, और उस मुकाबले में न्यूजीलैंड को जीत भी मिली थी। 5. फाउक्स एक पारी में सबसे ज्यादा रन देने वाले बॉलर कीवी तेज गेंदबाज जैक फाउक्स ने टी-20 इंटरनेशनल में एक पारी की शुरुआत में सबसे ज्यादा रन लुटाने का रिकॉर्ड बना दिया। फाउक्स ने अपने शुरुआती तीन ओवर में 67 रन खर्च कर दिए, जो इस फॉर्मेट में अब तक का सबसे महंगा स्पेल है। इससे पहले यह रिकॉर्ड आयरलैंड के लायम मैक्कार्थी के नाम था। मैक्कार्थी ने 2025 में ब्रेडी में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले तीन ओवर में 63 रन दिए थे। अब मोमेंट्स… 1. कैच ड्रॉप का फायदा नहीं उठा सके सैमसन भारतीय ओपनर संजू सैमसन को पारी की शुरुआत में ही जीवनदान मिला। पहले ओवर में मैट हेनरी की दूसरी गेंद पर डेवोन कॉन्वे ने उनका कैच छोड़ दिया, तब सैमसन का खाता भी नहीं खुला था। हालांकि, वह इस मौके का ज्यादा फायदा नहीं उठा सके और पांचवीं गेंद पर रचिन रवींद्र को कैच थमाकर 6 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। 2. अभिषेक शर्मा पहली बार जीरो पर आउट भारतीय ओपनर अभिषेक शर्मा टी-20 करियर में पहली बार शून्य के स्कोर पर आउट हुए। दूसरे ओवर में जैकब डफी की गेंद पर डेवोन कॉन्वे ने उनका कैच लपका, जिससे अभिषेक बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। 3. ईशान के हाथ से बल्ला छूटा, फिर 3 चौके लगाए 5वें ओवर की तीसरी गेंद पर ईशान किशन के हाथ से बल्ला छूट गया, जिसे रचिन रवींद्र ने उठाकर खेल भावना दिखाते हुए उनके पास पहुंचा दिया। इसके बाद ईशान ने अगले ही तीन गेंदों पर लगातार चौके जड़ दिए। इसी के साथ भारत का स्कोर 50 रन के पार पहुंच गया। मिचेल सैंटनर के इस ओवर से कुल 12 रन आए। 4. ईशान के आउट होने पर सूर्या ने गले से लगाया 10वें ओवर की पहली गेंद पर ईशान किशन 32 गेंदों पर 76 रन बनाकर आउट हो गए। उन्हें ईश सोढ़ी की गेंद पर मैट हेनरी ने कैच किया। इससे पहले ईशान ने सिर्फ 21 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। आउट होने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने उन्हें गले लगाकर शानदार पारी की सराहना की। यह ईशान के करियर की खास पारी रही, क्योंकि उन्होंने दो साल एक महीना और 28 दिन बाद टी-20 में फिफ्टी लगाई। 5. सूर्या को दो जीवनदान 11वें ओवर में जैकब डफी की तीसरी गेंद पर स्क्वेयर लेग बाउंड्री के पास मार्क चैपमैन से सूर्यकुमार यादव का कैच छूट गया, जो छक्के में भी तब्दील हो गया। इसके बाद 14वें ओवर में भारतीय कप्तान को दूसरा जीवनदान मिला, जब जैक फाउक्स से अपनी ही गेंद पर उनका कैच छूट गया। सूर्या ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए अगली ही गेंद पर छक्का जड़ दिया। इस ओवर से कुल 18 रन आए।

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