गीता बसरा बोलीं- पोस्टर देखकर फिदा हो गए थे भज्जी:युवराज से मैसेज कराया, पहले मैंने इग्नोर किया, फ्रेंडशिप से प्यार, फिर शादी हुई

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बॉलीवुड एक्ट्रेस गीता बसरा ने पहली बार पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह भज्जी से शादी को लेकर खुलकर बात की। गीता ने कहा कि भज्जी पोस्टर में उसे देखकर फिदा हो गए थे। भज्जी ने क्रिकेटर साथी युवराज सिंह के जरिए उनसे कॉन्टैक्ट किया। पहले तो उन्होंने भज्जी के प्रपोजल को इग्नोर कर दिया। वह अपने एक्टिंग करियर पर फोकस करना चाहती थीं, जिसके लिए वह इंग्लैंड छोड़कर मुंबई आई थीं। हालांकि दोनों में फ्रेंडशिप हो गई। करीब 4-5 साल के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला गया। गीता ने बॉलीवुड में अब लड़कियों को मिल रही तरजीह को लेकर भी संतुष्टि जताई। उन्होंने पिछले टाइम को चैलेंज वाला बताया। गीता ने भज्जी को बेस्ट हसबैंड बताया। भज्जी क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। इस वक्त वह पंजाब से राज्यसभा के सांसद हैं। इंग्लैंड से इंडिया कैसे पहुंचीं गीता बसरा… हरभजन भज्जी से कैसे हुई गीता बसरा की शादी

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महासमर शिविर आज से प्रारम्भ

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बाड़मेर | जय राजपूताना संघ के तत्वावधान में आयोजित होने वाला महासमर शिविर शुक्रवार से रानी रूपादे संस्थान में होगा। रणजीतसिंह बूल ने बताया कि महासमर शिविर में राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों से क्षत्रिय युवा भाग ले रहे हैं। जिसमें शिक्षा, शक्ति, संस्कार की कलाओं का प्रशिक्षण सुबह से प्रारंभ होगा। जिसमें तलवार बाजी, साफा बांधना आदि जानकारी देंगे।

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मरीज युवती से अश्लील हरकत करने के आरोप:इलाज के लिए आई युवती से छेड़छाड़ पर्ची पर लिखकर दिया अपना नंबर

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हलैना के गांव झालाटाला के ग्रामीणों ने पीएचसी प्रभारी डॉक्टर से इलाज कराने आई लड़की से अश्लील हरकत करने और बात करने के लिए पर्ची पर निजी मोबाइल लिखकर देने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने गुरुवार दोपहर को डॉक्टर को 7 दिन में निलंबित करने की मांग करते हुए पीएचसी पर ताला जड़ दिया। पीएचसी पर करीब 2 घंटे हंगामा रहा। हलैना के एक गांव की 20 वर्षीय लड़की 19 जनवरी को दोपहर करीब 12 बजे पीएचसी पर इलाज कराने दादी के साथ गई। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर ने दादी को ओपीडी पर पर्ची लेने भेज दिया। तभी डॉक्टर ने चेकअप के बहाने लड़की से अश्लील हरकत की। दादी के पर्ची लाने पर डॉक्टर ने दवाएं लिख दी। डॉक्टर ने लड़की की पर्ची पर नम्बर लिखते हुए बात करने को कहा। युवती ने घर आकर लड़की ने मां को घटना बताई, लेकिन पिता घर पर नहीं था। पिता के आने पर परिजन 20 जनवरी को पीएचसी पहुंचे लेकिन डॉक्टर 2 दिन की छुट्टी पर जाने से पीएचसी पर नहीं मिला। सूचना पर वैर तहसीलदार व बीसीएमएचओ भुसावर पहुंचे। जिन्होंने 7 दिन में जांच करवाकर कार्रवाई का आश्वासन दिया तो ग्रामीण माने। डॉक्टर के निलंबन की मांग, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन प्रभारी बोले – मारने की मिल रही धमकी, इसलिए नहीं आ रहा अस्पताल… पीएचसी प्रभारी डॉक्टर धर्मेंद्र का कहना है कि लड़की से मैंने कोई अश्लील हरकत नहीं की उल्टा मुझे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। “कमेटी गठित की है। जांच करवाकर 7 दिवस में निष्पक्ष कार्रवाई कि जाएगी।”
– मनोज भारद्वाज, नायब तहसीलदार “युवती ने शिकायत दी है। सीएमएचओ ने जांच कमेटी गठित कर दी है।”
– योगेश शुक्ल, BCMHO भुसावर।

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हलवा खाने के बाद बीमार पड़े पुलिसकर्मियों का मामला:दुकान सील, हलवा छोड़ 3 सैंपल लिए, 20 दिन की रिपोर्ट अब तक नहीं आई, दुकान खुल गई

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गांधीनगर मोड़ स्थित शंकर मिष्ठान भंडार से गाजर का हलवा खाने के बाद बीमार पड़े पुलिसकर्मियों का मामला अब सिस्टम की लापरवाही का हलवा बन गया। घटना को 40 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक फूड सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं आई। हैरानी की बात यह है कि जिस हलवे से

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अब बिना जांच पूरी हुए ही सील किए गए मिष्ठान भंडार को फिर खोल दिया गया। इस पूरे मामले ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 दिसंबर 2025 को पुलिस मुख्यालय के अधिकारी और स्टाफ ने शंकर मिष्ठान भंडार से गाजर का हलवा और समोसे मंगवाए थे। खाना खाने के कुछ समय बाद 10 पुलिसकर्मियों की तबीयत बिगड़ गई। जी मिचलाना, पेट दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायत पर सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 6 कांस्टेबल-हैड कांस्टेबल, 1 एएसआई, 3 सब-इंस्पेक्टर बीमार हुए थे।

बड़ा सवाल- मिलावट किसमें? खाद्य विभाग के सिस्टम या हलवे में

सूचना मिलते ही सीएमएचओ जयपुर प्रथम डॉ. रवि शेखावत के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा टीम सक्रिय हुई। एफएसओ वीरेंद्र कुमार ने शंकर मिष्ठान भंडार पर छापा मारा, दुकान को सील किया और तीन खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए। अब एफएसओ का कहना है कि टीम के पहुंचने तक दुकान में गाजर का हलवा मौजूद नहीं था, इसलिए हलवे का सैंपल लिया ही नहीं जा सका। पुलिसकर्मियों के पास बचे हलवे अथवा उनकी उल्टी के सैंपल लेने के सवाल पर भी अधिकारियों ने इंकार कर दिया।

जांच रिपोर्ट अब तक नहीं मिली, दुकान कैसे खुली? घटना के 40 दिन बाद भी लैब रिपोर्ट नहीं आई, लेकिन शंकर मिष्ठान भंडार दोबारा खुल चुका है। भास्कर रिपोर्टर ने जब दुकान संचालकों से सवाल किया तो उनका कहना था कि सीएमएचओ के निर्देशन में ही दुकान खोली है।

दुकान जनहित में सील, लेकिन जवाबदेही नदारद

खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि दुकान में फूड सेफ्टी की अनियमितताएं पाई गई थीं, इसलिए जनहित में सील किया गया था। लेकिन, रिपोर्ट नहीं आने से अब तक यह तय नहीं किया गया कि फूड पॉइजनिंग किस चीज से हुई। न दोष तय हो पाया और ना ही जिम्मेदारी।

प्रदेश में हर चौथा सैंपल फेल, जयपुर प्रथम ने तो जुर्माना तक नहीं लगाया

  • 2024 में प्रदेशभर में कुल 13,981 खाद्य सैंपल लिए। इनमें 3,392 सैंपल अमानक पाए। यानी लगभग हर चौथा सैंपल फेल। 3.51 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला।
  • जयपुर प्रथम में 2024 के दौरान 645 खाद्य सैंपल लिए। इनमें से 178 सैंपल अमानक पाए, लेकिन जुर्माना नहीं लगाया। द्वितीय में वर्ष 2024 में 667 सैंपल में 180 अमानक मिले। महज 1.82 लाख रुपए जुर्माना वसूला।
  • सफाई और वस्तुएं हाइजेनिक रखने की हिदायत दी: शेखावत
  • सीएमएचओ डॉ. रवि शेखावत का कहना है कि सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने में 15 से 20 दिन का समय लगता है। लैब में पहले आए सैंपल की पहले जांच होती है, इसलिए देरी हो रही है।
  • भास्कर: पुलिसकर्मी आखिर किस वजह से बीमार हुए?
  • जवाब: उपचार करने वाले डॉक्टर बताएंगे।
  • भास्कर : जिन तीन खाद्य वस्तुओं के सैंपल लिए थे, जांच रिपोर्ट नहीं आई?
  • जवाब : रिपोर्ट में 15-20 दिन लगते हैं। लैब में पहले आए सैंपल की पहले जांच होती है, इसलिए देरी हो रही है।
  • सवाल : दुकान बिना निष्कर्ष के खोल दी गई?
  • जवाब : दुकान में सफाई रखने और वस्तुओं को हाइजेनिक रखने की हिदायत दी गई है।

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आपके काम की खबर:RUHS अस्पताल में लगेगी मॉडर्न सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन, पहले 16 स्लाइस की थी, अब 128 स्लाइस, हाई रेजोल्यूशन इमेज मिलेगी

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आरयूएचएस और कैंसर हॉस्पिटल के मरीजों को अब सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच कराने 14 किमी दूर एसएमएस नहीं जाना पड़ेगा। आरयूएचएस में जल्द सीटी स्कैन के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी की मशीन लगेगी। वहीं, पहली बार हॉस्पिटल ने 1.5 टेस्ला की एमआरआई मशीन लगाने की भी तैयारी कर ली है। दोनों मशीनों के लिए वर्कऑर्डर दे दिया है। 3 महीने में दोनों जांचें शुरू हो जाएंगी। गौरतलब है कि भास्कर ने खबर प्रकाशित कर मामला उठाया था। जिसमें बताया था कि मरीज 14 किमी दूर जाकर एसएमएस में सीटी स्कैन कराते हैं, वहीं आरयूएचएस में एमआरआई आजतक शुरू नहीं हुई थी और सीटी स्कैन मशीन भी 3 महीने से बंद पड़ी है। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई की है। आरयूएचएस में रोजाना करीब 25 सीटी स्कैन होती थी। आरयूएचएस में 16 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन लगी थी, जिसका टेंडर पिछले साल खत्म हो गया। इसके बाद 3 महीने से जांच नहीं होने की वजह से मरीज परेशान हो रहे थे। अब 128 स्लाइस की मशीन लगेगी। टेक्नोलॉजी अपडेट हाेने से मरीजों को बेहतर रिपोर्ट मिलेगी। हाई रेजोल्यूशन इमेज मिलेगी, गुणवत्ता बढेगी, समय भी कम लगेगा। कैंसर हॉस्पिटल में एबीजी मशीन लगेगी आरयूएचएस के पास स्टेट कैंसर हॉस्पिटल में आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की एबीजी जांच नहीं हो रही है। इसको लेकर हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. संदीप जसूजा का कहना है कि एबीजी जांच के लिए मशीन के टेंडर प्रक्रिया में है। वहीं, कैंसर हॉस्पिटल में भी सीटी स्कैन, एमआरआई के लिए प्रपोजल भेज दिए गए हैं। “नई टेक्नोलॉजी की सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन के लिए ऑर्डर कर दिए हैं। पहले हॉस्पिटल में 16 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन थी। अब 128 स्लाइस की लगाई जाएगी। जिससे मरीजों की हाई रेजोल्यूशन इमेज से माइनर डिटेल्स भी देख पाएंगे।” – डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, अधीक्षक आरयूएचएस हॉस्पिटल

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ब्यूरो क्रेसी:41 जिलों में नए प्रभारी सचिव, इनमें 13 महिला आईएएस

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राज्य सरकार ने ब्यूरोक्रेसी में बड़ा फेरबदल करते हुए सभी 41 जिलों के प्रभारी सचिवों की अदला-बदला कर दी है। इसमें 13 जिलों की जिम्मेदारी महिला आईएएस अधिकारियों को दी गई है। सभी संभागीय आयुक्तों को उनके ही क्षेत्र के किसी एक जिले का प्रभार दिया गया है। वहीं, एपीओ चल रहे दो अधिकारियों को प्रभार दिया गया है, ऐसे में अनुमान है कि उन्हें भी जल्द ही कोई जिम्मेदारी मिलने वाली है और तबादल सूची संभावित है। गौरतलब है कि इससे पहले दो साल पहले फरवरी,2024 में प्रभारी बदले गए थे। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी सूची में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव भवानी देथा को जोधपुर, खान विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकांत को उदयपुर, यूडीएच के प्रमुख देबाशीष पृष्टि को बीकानेर, खेल सचिव नीरज के. पवन को अजमेर व डीओआईटी सचिव रविकुमार सूरपुर को कोटा की जिम्मेदारी दी गई है। केंद्र से प्रतिनयुक्ति पर लौटे आईएएस पीसी किसन को दौसा और एपीओ खजान सिंह को सलूंबर का प्रभारी सचिव बनाया गया है। 13 महिला अधिकारी अब प्रभारी सचिव राज्य सरकार ने 13 महिला आईएएस अधिकारियों को भी जिला प्रभारी बनाया है। इसमें जयपुर, भरतपुर जैसे संभाग मुख्यालय भी शामिल हैं। प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ को जयपुर व सहकारिता सचिव आनंदी को भरतपुर की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य भंडारण निगम की सीएमडी आरूषि अजेय मलिक, प्रमुख सचिव मंजू राजपाल को भीलवाड़ा, पर्यटन आयुक्त रूक्मणि रियार को बूंदी, भरतपुर की संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया को डीग, आजीविका निदेशक नेहा गिरी को डूंगरपुर, परिवहन सचिव शुचि त्यागी को करौली, राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा अनुपमा जोरवाल को कोटपूतली-बेहरोड़ एवं जयपुर की संभागीय आयुक्त पूनम को खैरथल-तिजारा का प्रभारी सचिव बनाया गया है। इसी तरह उदयपुर की संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी को प्रतापगढ़, रीको एमडी शिवांगी सवर्णकार को सवाई माधोपुर व जोधपुर की संभागीय आयुक्त डा. प्रतिभा सिंह को सिरोही की जिम्मेदारी दी गई है।

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युवक से मारपीट व झूठे केस में फंसाने का मामला:प्रतापगढ़ में पुलिस की कथित बर्बरता मामले में एसएचओ को तत्काल हटाने के दिए निर्देश

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राजस्थान हाईकोर्ट में प्रतापगढ़ में पुलिस की कथित बर्बरता का गंभीर मामला सामने आया है। याची युवक शाकिर शेख के साथ मारपीट, घर में जबरन घुसपैठ, लूट और बाद में झूठे एनडीपीएस केस में फंसाने के आरोपों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने घायल युवक की तस्वीरें देखकर इसे प्रथम दृष्टया कस्टोडियल टॉर्चर और जानवरों जैसा सुलूक बताते हुए नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने इस मामले में सएचओ को तत्काल हटाने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि 31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 की दरमियानी रात आरोपी पुलिस अधिकारी दीपक बंजारा और उनकी टीम ने घर में घुसकर याचिकाकर्ता के पिता व एक अन्य व्यक्ति पर घातक हथियारों से हमला किया। आरोप है कि इसके बाद युवक के हाथ-पैर तोड़ दिए गए और उसे फंसाने के लिए उसकी जेब में एक मोबाइल फोन प्लांट किया गया, जिसे चार साल पुराने एनडीपीएस मामले (धारा 29) से जोड़कर झूठी बरामदगी दिखाई गई। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित व प्रस्तुत करने की मांग की गई थी, जिसे निचली अदालत ने स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने भी इन निर्देशों को दोहराते हुए सबूतों मौखिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। कोर्ट ने एसपी प्रतापगढ़ को आदेश दिया कि आरोपी एसएचओ दीपक बंजारा को तत्काल थाने से हटाया जाए, उसे किसी भी ड्यूटी से दूर रखा जाए। एसपी व्यक्तिगत रूप से निगरानी करेंगे कि कोई सबूत नष्ट या प्रभावित न हो। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि आरोप सही पाए गए, तो जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई को सौंपने पर विचार किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। बाल संरक्षण संस्थानों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर सरकार से मांगी ताजा रिपोर्ट जोधपुर | हाईकोर्ट ने राज्य के बाल अवलोकन गृहों और चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को गंभीरता से लेते हुए सरकार से ताजा स्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर एवं न्यायाधीश चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि पूर्व आदेशों के बावजूद कई पद अब भी खाली हैं, जो बच्चों के संरक्षण व पुनर्वास व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। बीकानेर में रेलवे ट्रैक शिफ्टिंग के मामले में रेलवे को संभावना तलाशने के निर्देश जोधपुर | हाईकोर्ट ने बीकानेर शहर से होकर गुजर रहे रेलवे ट्रैक को स्थानांतरित करने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर रेलवे प्रशासन को संभावना तलाशने के निर्देश दिए हैं। इससे पूर्व इसी विषय से संबंधित जनहित याचिकाओं को वर्तमान मामले के साथ कनेक्ट करने के निर्देश भी कोर्ट ने दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

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Khabar Hatke Bodyguards for Satellite Security

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आसमान में सैटेलाइट्स की सिक्योरिटी के लिए भारत बॉडीगार्ड्स भेजने जा रहा है। वहीं, एक थानेदार नौकरी जॉइन करने के तीसरे दिन ही गिरफ्तार हो गया। इधर, दिल्ली पुलिस एक खास चश्मा लेकर आई है, जिसे पहनते ही अपराधी दिखने लगेंगे।

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तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ…

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Rani Mukerji Success Story Explained; Mardaani KKHH

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4 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी/वीरेंद्र मिश्र

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रानी मुखर्जी कहती हैं कि सशक्त किरदार चुनने की हिम्मत, माता-पिता की सीख और फैंस के प्यार की वजह से मिली है। - Dainik Bhaskar

रानी मुखर्जी कहती हैं कि सशक्त किरदार चुनने की हिम्मत, माता-पिता की सीख और फैंस के प्यार की वजह से मिली है।

बॉलीवुड में अक्सर यह माना जाता है कि फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों के लिए रास्ते आसान होते हैं, लेकिन रानी मुखर्जी की कहानी इस धारणा को पूरी तरह तोड़ देती है। पिता के सख्त विरोध, इंडस्ट्री में मजाक, आर्थिक परेशानियों और उनके आत्मविश्वास पर लगातार हमले किए गए।

कभी यह कहकर दुत्कारा गया कि हीरोइन मटेरियल नहीं हैं। कभी उनकी कद-काठी, रंग और आवाज को लेकर मजाक उड़ाया गया। बावजूद इसके रानी मुखर्जी ने न सिर्फ अपनी जगह बनाई, बल्कि तीन दशक तक सिनेमा पर राज किया। आज वह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकी एक सशक्त, गंभीर और सम्मानित अभिनेत्री हैं।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानेंगे रानी मुखर्जी के करियर और लाइफ से जुड़ी कुछ खास बातें..

रानी मुखर्जी की फिल्म 'मर्दानी 3' सिनेमाघरों में 30 जनवरी 2026 को रिलीज होगी।

रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ सिनेमाघरों में 30 जनवरी 2026 को रिलीज होगी।

पिता के मना करने के बावजूद बॉलीवुड में कदम रखा

रानी मुखर्जी का जन्म 21 मार्च 1978 को मुंबई में हुआ। वह मशहूर फिल्ममेकर राम मुखर्जी की बेटी और अभिनेत्री तनुजा की भतीजी हैं। यानी फिल्मी बैकग्राउंड मजबूत था, लेकिन इसके बावजूद उनके पिता राम मुखर्जी नहीं चाहते थे कि रानी फिल्मों में जाएं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान रानी ने इस बारे में बात की।

रानी मुखर्जी कहती हैं- मेरे पापा खुद फिल्म इंडस्ट्री से थे, लेकिन उस समय का माहौल इतना आसान नहीं था। पेरेंट्स का पहला फर्ज बच्चों को बचाना होता है। यह बात मुझे तब समझ में आई जब मैं मां बनी। हमारा पहला ख्याल बच्चों की सुरक्षा का होता है। जब बच्चे 12वीं पास करके करियर चुनने वाले होते हैं, तो पेरेंट्स ज्यादा प्रोटेक्टिव हो जाते हैं, लेकिन हम सबको तो दुनिया में आगे बढ़ना ही पड़ता है, अपनी राह खुद बनानी पड़ती है। हमारी जर्नी अलग होती है।

औरत की सहनशक्ति को एक औरत ही समझ सकती है

उस समय डैडी को लगा होगा कि इंडस्ट्री के उतार-चढ़ाव मैं झेल नहीं पाऊंगी। शायद उन्हें डर था कि उनकी बेटी ये सब संभाल न पाए। इसलिए वे ज्यादा खुश नहीं थे कि मैं इंडस्ट्री में हूं। हमेशा लोग लड़कियों को कम आंकते हैं। सोचते हैं कि हम मुश्किलें नहीं झेल पाएंगी, लेकिन एक औरत की सहनशक्ति बहुत मजबूत होती है। यह बात सिर्फ औरत ही समझ सकती है।

करियर की शुरुआत में खूब मजाक उड़ाया गया

रानी मुखर्जी ने अपने पिता राम मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी बंगाली फिल्म ‘बियेर फूल’ (1996) से एक्टिंग डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। करियर की शुरुआत में कद-काठी, रंग और आवाज को लेकर खूब मजाक उड़ाया गया। बावजूद इसके रानी ने बॉलीवुड में अपनी एक अलग जगह बनाई।

रानी कहती हैं- मैं अपने फैंस का तहेदिल से शुक्रिया करती हूं। आर्टिस्ट जैसा होता है, उसे अपनाना दर्शकों का फैसला होता है। इंडस्ट्री ने शुरुआत में मेरी आवाज पसंद न आने पर डब कर दी, लेकिन फैंस ने दिल से सराहा। उनकी ताकत से ही आलोचकों की बोलती बंद हो गई।

हार के बाद ही जीत का असली मजा है

मेरी जिंदगी में बहुत उतार चढ़ाव आए, लेकिन ऊपर वाले ने जो जिंदगी दी है, उसे हम आसानी से हार नहीं सकते। इसलिए हमेशा ग्रेटफुल रहना जरूरी है। चाहे आगे क्या हो जाए, ये तो बस घटनाएं हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि हम इस दुनिया में पैदा हुए हैं और कुछ न कुछ करना है। भले ही मैं फिल्मों में काम कर रही हूं, लेकिन कोई वर्दी में देश की सेवा कर रहा है, कोई डॉक्टर हॉस्पिटल में मरीजों की मदद कर रहा है। सबका अपना-अपना रोल है। मेरा काम ऐसे किरदार लाना है जो सबको इंस्पायर करें। डल या हारने वाले पल भी महसूस करने चाहिए। तभी जीत का असली मजा आता है।

‘कुछ कुछ होता है’ से बदली किस्मत

1998 में रिलीज फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ रानी मुखर्जी के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। काजोल और शाहरुख खान के साथ सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद रानी ने टीना मल्होत्रा के किरदार से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला और बॉलीवुड ने पहली बार रानी मुखर्जी को गंभीरता से लेना शुरू किया।

‘कुछ कुछ होता है’ के अलावा रानी को हम तुम, ब्लैक, युवा, साथिया, ब्लैक, नो वन किल्ड जेसिका’ ‘मिसेस चटर्जी वर्सेस नार्वे’ जैसी फिल्मों को मिलाकर 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल चुके हैं।

रानी मुखर्जी की खसियात यह रही है कि उन्होंने खुद को सिर्फ रोमांटिक फिल्मों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने लगातार अलग-अलग और जोखिम भरे किरदार चुने। ‘साथिया’, ‘ब्लैक’ ‘बंटी और बबली’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘मर्दानी’ जैसी फिल्मों से रानी ने खुद को प्रूव किया है।

फिल्म ब्लैक 4 फरवरी 2005 को रिलीज हुई थी।

फिल्म ब्लैक 4 फरवरी 2005 को रिलीज हुई थी।

‘ब्लैक’ बनी करियर की मील का पत्थर

फिल्म ‘ब्लैक’ को रानी मुखर्जी के करियर की मील का पत्थर कहा जाता है। इस फिल्म में उनके अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज के सामने रानी का प्रदर्शन बराबरी का था। करीब 30 साल के करियर में रानी मुखर्जी ने खुद को बार-बार साबित किया। उन्हें फिल्म ‘मिसेस चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जो उनके संघर्ष, धैर्य और प्रतिभा की आधिकारिक मुहर है।

नेशनल अवॉर्ड अपने पिता को समर्पित किया

नेशनल अवॉर्ड मिलने पर रानी मुखर्जी भावुक हो गई थीं। इस अवॉर्ड को उन्होंने अपने पिता राम मुखर्जी को समर्पित कर दिया था। रानी कहती हैं- ये एक ऐसी कमी है जो कभी पूरी नहीं होगी। पापा मेरे सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम थे, मेरे एंकर थे। उनके जाने के बाद हर खुशी अधूरी लगती है। नेशनल अवॉर्ड ही नहीं, मेरी जिंदगी का हर बड़ा पल उनसे जुड़ा है। जब भी कुछ अच्छा या बुरा होता है, सबसे पहले पापा याद आते हैं। ये खलिश हमेशा रहेगी।

रानी मुखर्जी को फिल्म 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' के लिए अवॉर्ड मिला था।

रानी मुखर्जी को फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ के लिए अवॉर्ड मिला था।

औरत वाले इंस्टिंक्ट को फॉलो किया

रानी मुखर्जी कहती हैं- मुझे कभी एक्ट्रेस बनना नहीं था। बचपन से ये सपना नहीं था कि मुझे ये अचीव करना है। बस मुझे मम्मी-पापा को एक बहुत ही बेहतरीन जिंदगी देनी थी। मैं बस चांस से एक्ट्रेस बनी। फिर अपने इंसानी और औरत वाले इंस्टिंक्ट को फॉलो किया। किसी को कुछ प्रूव नहीं करना था। बस दर्शकों तक अच्छी कहानियां और स्ट्रॉन्ग फीमेल कैरेक्टर्स पहुंचाने थे।

स्टारडम को अपना लक्ष्य कभी नहीं बनाया

लोगों को लगता था कि मैंने ऐसे किरदारों का चयन करके जोखिम लिया है, लेकिन मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं कोई रिस्क ले रही हूं, क्योंकि मैंने कभी स्टारडम को अपना लक्ष्य बनाया ही नहीं। मेरे लिए जरूरी था कि मैं उन कहानियों का हिस्सा बनूं जो मुझे अंदर से छूती हैं। अगर कोई किरदार समाज को असहज करता है, सवाल खड़े करता है या किसी औरत की ताकत दिखाता है, तो मुझे लगता है कि मैं सही दिशा में काम कर रही हूं।

छोटी सी उम्र में ही बड़े स्टार्स के साथ मौका मिला

जब मैंने करियर शुरू किया था, तब मैं बहुत छोटी थी। जिन स्टार्स के साथ काम कर रही थी, उन्हें भी लगा होगा कि ये इतनी छोटी है और फिर भी काम कर रही है। इसलिए शायद उनका प्यार मेरे प्रति उभरा। मेरे माता-पिता हमेशा साथ रहते थे, तो सब उन्हें भी बहुत चाहते थे। ये एकदम नेचुरल पसंद थी। मैंने अपने सारे रिश्ते ईमानदारी से निभाए, चाहे शाहरुख के साथ हो, आमिर के साथ, बॉबी के साथ या सलमान के साथ। दोस्ती कभी काम के लिए नहीं थी, इसलिए आज भी वही ईमानदारी बरकरार है। काम हो या न हो, रिश्ता वैसा ही है।

शाहरुख को दर्शक स्पेशल मानते हैं

चाहे कोई कितना भी बड़ा हो या छोटा। सबकी देखभाल करना, हर किसी को बराबर इज्जत देना, शाहरुख के व्यक्तित्व में है। ये उनकी सबसे अच्छी बात लगती है। काम के मामले में उनकी मेहनत, डिसिप्लिन और ईमानदारी कमाल की है। सलमान, आमिर सबकी तरह उन्होंने करियर बनाया, जो मेरे लिए बहुत इंस्पायरिंग रहा। यही वजह है कि दर्शक उन्हें इतना स्पेशल मानते हैं।

आमिर के साथ काम करने में बहुत रोमांच था

आमिर खान के साथ फिल्म ‘गुलाम’ में काम करना कमाल का था। तब मैं बहुत छोटी थी,17-18 साल की। उनकी ‘कयामत से कयामत तक’ और ‘रंगीला’ देखी थी। बचपन से उनकी फैन थी। मंजे हुए कलाकार के साथ काम करने का रोमांच था। साथ ही जिम्मेदारी भी कि हमारी जोड़ी दर्शकों को अच्छी लगे।

सलमान हमेशा से मासूम लगते हैं

सलमान खान के साथ बहुत अच्छा बॉन्ड है। सलमा आंटी, सलीम अंकल, खासकर सलमान के घर का माहौल ऐसा है कि सबको खाना मिलता है। सलमान सबको बहुत प्यार से खिलाते हैं। जो खाना खिलाता है, उसमें एक खास रूहानियत होती है। अपने लोगों के लिए खड़े होने की उनकी आदत भी कमाल की है।

मुझे सलमान हमेशा मासूम लगते हैं। उनके बिहेवियर में एक फीसदी भी छल-कपट नहीं। जो फील करते हैं, 100 प्रतिशत ईमानदार। बाहर और अंदर, दोनों एक जैसे। इतने सालों में ये ईमानदारी बरकरार रखना मुश्किल है, लेकिन सलमान में ये आज भी है।

ईमानदारी से सर ऊंचा रखकर काम किया

अपने 30 साल के करियर में रानी मुखर्जी ने कई तरह के चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए हैं। वह कहती हैं- आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं तो डैडी की एक सीख याद आती है। पापा ने शुरू में कहा था कि ये दुनिया चढ़ते सूरज को सलाम करने वाली है। सक्सेस मिले तो ज्यादा उत्साहित न हों, फेलियर आए तो हताश न हों। बस सर ऊंचा रखकर ईमानदारी से अपना काम करते रहें। मैंने यही किया, अपने क्राफ्ट, फिल्मों और कहानियों के प्रति समर्पित रही। आज ऊपर वाले के लिए ग्रेटफुल हूं कि मैं चुन कर काम कर सकती हूं।

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पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए…

गांव में गोबर उठाते थे जयदीप अहलावत:आज बॉलीवुड के ‘महाराज’ बने, इरफान खान से तुलना पर छलके आंसू, शाहरुख को अपना इश्क बताया

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसी शख्सियत हैं, जो चीख-चिल्लाहट नहीं, बल्कि एक सुकून भरे सुर की तरह आपके दिल में बस गई है। यह सुर इतना गहरा है कि आप शायद कभी अपनी दिलों से इन्हें निकाल ही न पाएं।पूरी खबर पढ़ें….

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आज ओले-बारिश का अलर्ट:2 डिग्री चढ़ा पारा, बीती रात 12.6 डिग्री रहा तापमान, इस सीजन का सबसे मजबूत पश्चिमी ​विक्षोभ होगा सक्रिय

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मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से अगले 24 घंटे में राजधानी में मौसम पलटेगा। इसके प्रभाव से आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते उत्तरी हवाओं का प्रभाव कम होने से एक ही रात में पारे में 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हुई है। बीती रात न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। आज सबसे ज्यादा असर यह पश्चिमी विक्षोभ सीजन का सबसे मजबूत सक्रिय सिस्टम है। इसके असर से जयपुर सहित कई जिलों में आंधी, ओले के साथ सीजन की पहली मावठ होगी। दो दिन तक इसका असर रहेगा। 24 जनवरी को प्रभाव खत्म होगा और दो दिन सुबह घना कोहरा छाया रहेगा। पारा 2 से 4 डिग्री लुढ़केगा और सर्दी का दौर फिर से शुरू होगा।

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