अनार की उन्नत किस्म से बनी गांव की अलग पहचान:प्राचीन मंदिरों व धोरों ने बढ़ाई सुंदरता, यहां पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोग जागरुक
[ad_1]
![]()
जिला मुख्यालय से मात्र 16 किलोमीटर दूर स्थित राजेश्वर नगर को हाल ही में राज्य सरकार की ओर से नई ग्राम पंचायत का दर्जा दिया गया है। खेती-बाड़ी व पशुपालन आधारित इस गांव को प्रशासनिक पहचान मिलने से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सृजित हुई हैं। ग्राम पंचायत बनने के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बालोतरा–सिवाना मार्ग से ब्रह्मधाम आसोतरा जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित राजेश्वर नगर यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। गांव से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर भारतमाला परियोजना के तहत निर्मित जामनगर–अमृतसर नेशनल एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है, जिससे गांव का सीधा संपर्क देश के प्रमुख शहरों से स्थापित हो गया है। यहां से जोधपुर, जयपुर, अहमदाबाद, डीसा, सूरत और मुंबई के लिए सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे आवागमन व व्यापार को नई गति मिली है। प्राकृतिक दृष्टि से भी राजेश्वर नगर समृद्ध है। गांव की परिधि में रेतीले धोरे, मैदानी क्षेत्र, नाड़ियां और नया तालाब इसकी सुंदरता को बढ़ाते हैं। पोशलनगर क्षेत्र में अनार की खेती, अणियाला नाड़ा सहित अनेक जलाशय गांव की प्राकृतिक छटा को चार चांद लगाते हैं। गांव में राधा-कृष्ण मंदिर भरखाली, मामाजी का मंदिर, गोगाजी का मंदिर, जुंजार छतरी सहित कई प्राचीन मंदिर हैं, जो आस्था के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। राजेश्वर नगर क्षेत्र में पर्यावरण, प्रकृति और पक्षी संरक्षण का एक प्रेरणादायक केंद्र भी विकसित हुआ है। निम्बली नाडी और अणियाला नाडा के तट पर स्थित मामाजी के थान में वर्षों से पक्षी सेवा और हरियाली संरक्षण का सतत कार्य किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की पहचान पर्यावरण अनुकूल गांव के रूप में बनी है। कृषि के क्षेत्र में राजेश्वर नगर के किसानों की विशेष पहचान है। यहां के किसान हाईटेक तकनीक से थार अनार का उत्पादन कर रहे हैं, जिसका निर्यात देश-विदेश तक किया जा रहा है। इसके साथ ही गेहूं, जीरा, ईसबगोल, अरंडी तथा वर्षा आधारित फसलों का भी उत्पादन लिया जाता है।
[ad_2]
Source link
