मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश में 19 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर 12 लाख से अधिक लखपति दीदी बनाई गई और अब लखपति दीदी मिलेनियर दीदी बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के आखिरी दो वर्षों (फरवरी 2022 से दिसं
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शर्मा मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में महिलाओं, युवाओं सहित उद्योग, सेवा क्षेत्र, व्यापार, कर सलाहकार एवं युवा प्रोफेशनल्स के साथ बजट पूर्व चर्चा कर रहे थे। इस दौरान उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, प्रमुख सचिव वित्त वैभव गालरिया, प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास भवानी सिंह देथा सहित वरिष्ठ अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
उद्योग व युवा प्रोफेशनल्स के साथ बजट पूर्व चर्चा
मुख्यमंत्री ने उद्योग, सेवा क्षेत्र, व्यापार, कर सलाहकार एवं युवा प्रोफेशनल्स के साथ बजट पूर्व चर्चा की। उन्होंने कहा कि उद्योगों की समृद्धि से ही विकास को नई गति मिलती है। एमएसएमई, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और तकनीकी सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में उद्यमशीलता ने प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव लाया है। राजस्थान निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है।
डूंगरपुर जिले के युवाओं के साथ संवाद
मुख्यमंत्री ने डूंगरपुर से आए युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और राजस्थान का गौरव हैं। वागड़ क्षेत्र आदिवासी बहुल क्षेत्र है तथा हमारी सरकार आदिवासियों के सशक्तीकरण के लिए निरन्तर निर्णय ले रही है। वागड़ क्षेत्र में भी विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान बेणेश्वर धाम के सौन्दर्यीकरण को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया गया। सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा मौजूद रहे।
नए साल में सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए खुश खबर आई है। पार्क में हाल ही दो मादा भेड़ियों ने 12 शावकों को जन्म दिया है। अब यहां भेड़ियों की संख्या 21 से बढ़कर 33 हो गई है। भेड़िया वर्तमान में संकटापन्न श्रेणी में ह
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भेड़िया एक स्वस्थ ईको-सिस्टम का संकेतक प्राणी है। अमेरिका के येलोस्टोन नेशनल पार्क में भेड़ियों के पुनर्वास से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन लौटा था। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भेड़िये को जहर देकर, फंदा लगाकर भेड़ियों को मारने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। क्योंकि, भेड़िये बकरी, गाय के बछ़डे आदि का शिकार कर देते हैं।
भेड़ियों के प्रजनन के अनुकूल केंद्र के रूप में उभरा बायो पाक राजस्थान में भी कभी कुंभलगढ़ अभयारण्य भेड़ियों के लिए जाना जाता था, लेकिन बीते दशकों में इनकी संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में बायो पार्क इनके प्रजनन के लिए अनुकूल केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। भेड़ियों के कुनबे में हुई यह वृद्धि न केवल पार्क की जैव विविधता को समृद्ध करेगी, बल्कि वन्यजीव पर्यटन को भी नया आयाम देगी। इससे आने वाले समय में बायो पार्क की पहचान भेड़िया संरक्षण के एक सफल मॉडल के रूप में और मजबूत होने की उम्मीद है।
दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब किसी भी स्टूडेंट और स्टाफ को यहां जॉइन करने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा।
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इसे लेकर पुलिस की तरफ से 3 टीमों का गठन किया गया है। जो यहां भर्ती होने वाले स्टाफ और एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट पर नजर रख रही हैं।
इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. उमर नबी ने 10 नवंबर को सुसाइड बॉम्बर बनकर दिल्ली के लाल किले के बाहर ब्लास्ट को अंजाम दिया था। जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने यूनिवर्सिटी के 2 डॉक्टरों शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया था।
इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. उमर नबी ने ब्लास्ट को अंजाम दिया था- फाइल फोटो।
अब जानिए…एडमिशन को लेकर क्या बदलाव हुए
रजिस्ट्रेशन करने वालों की जानकारी रख रही पुलिस: यूनिवर्सिटी में बीएससी सहित अलग-अलग डिप्लोमा कोर्स के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। स्टूडेंट को पहले यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, इसके बाद उसको कॉल करके बुलाया जाएगा। यूनिवर्सिटी में जो भी स्टूडेंट एडमिशन लेने के लिए आ रहा है, उसके बारे मे यूनिवर्सिटी के साथ पुलिस भी अपने पास पूरी जानकारी रख रही है।
पुलिस वेरिफिकेशन से गुजरना होगा: डीसीपी एनआईटी मकसूद अहमद ने बताया कि यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रोसेस और स्टाफ जॉइनिंग को लेकर इस बार पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। पुलिस की 3 टीम इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। एडमिशन लेने से पहले स्टूडेंट के बारे में पूरी जानकारी लेकर उससे संबधित थाने से भी उसकी पूरी जानकारी ली जाएगी।
आतंकी मॉड्यूल केस में नेशनल जांच एजेंसी (NIA) ने दो अन्य डॉक्टरों शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया था ।
दूसरे राज्यों से पुलिस की लेगी मदद डीसीपी एनआईटी मकसूद अहमद ने बताया कि, यूनिवर्सिटी की दाखिला प्रक्रिया और स्टाफ नियुक्ति लेकर इस बार पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं। पुलिस की तीन टीमें इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। दाखिले लेने से पहले स्टूडेंट के बारे में पूरी जानकारी लेकर उससे संबधित थाने से पूरी जानकारी ली जाएगी।
डीसीपी एनआइटी मकसूद अहमद ने बताया कि यूनिवर्सिटी की दाखिला प्रक्रिया और स्टाफ नियुक्ति लेकर इस बार पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड़ पर है।
स्टाफ भर्ती करेगी यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि दिल्ली ब्लास्ट के बाद यहां से आंतक के नेटवर्क में शामिल डॉक्टरों के गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने लगातार स्टाफ से पूछताछ की है। जिससे परेशान होकर मेडिकल और दूसरे विभागों का कुछ स्टाफ छोड़कर जा चुका है। स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए भर्ती की जाने की योजना है। यहां पर जो स्टाफ भर्ती होगा उसे भी पुलिस वेरिफिकेशन करानी होगी।
यूनिवर्सिटी में नए एडमिशन लाने के लिए प्रबंधन को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
एडमिशन के लिए लगाना पड़ रहा जोर सूत्रों ने यह भी बताया कि आतंकी मॉड्यूल में नाम आने के बाद यूनिवर्सिटी की बदनाम हुई। ऐसे में नए एडमिशन लाने के लिए प्रबंधन को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। एडमिशन के लिए स्टाफ में शामिल सहायक प्रोफेसर और गैर शैक्षणिक स्टाफ की भी ड्यूटी लगाई है। उनको बोला गया है कि वह लोगों में जाकर यूनिवर्सिटी की छवि सुधारने की कोशिश करें।
नए स्टूडेंट नहीं दिखा रहे रुचि MBBS फाइनल ईयर के छात्र शोभित ने बताया कि पहले जिस तरह से स्टूडेंट्स यहां पर आवेदन करने में रुचि दिखाते थे, इस बार ऐसा नहीं दिख रहा। दिल्ली ब्लास्ट के बाद सभी इस यूनिवर्सिटी के नाम को अपने साथ जोड़ने में डरते हैं। उन्होंने कहा कि जब वो यहां से दूसरी जगह जाएंगे तो उनको भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
28 जनवरी को NCMEI में सुनवाई राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) में यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी कोटे को लेकर 28 जनवरी को सुनवाई होनी है। इससे पहले NCMEI के दिल्ली मुख्यालय में 4 दिसंबर को सुनवाई हुई थी। ये सुनवाई आयोग द्वारा 24 नवंबर को यूनिवर्सिटी को जारी किए उस नोटिस को लेकर हुई थी। जिसमें पूछा गया था कि जब उसके डॉक्टरों की दिल्ली में 10 नवंबर को हुए विस्फोट में भूमिका को लेकर जांच चल रही है, जिसमें 15 लोग मारे गए थे, तो ऐसे में उसका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए।
4 दिसंबर को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी कोटा को लेकर हुई सुनवाई में यूनिवर्सिटी की तरफ से वकील मोहम्मद आरिफ मौजूद हुए थे। इसमें हरियाणा विभाग के प्रमुख सचिव नहीं पहुंचे थे। जिसको लेकर आयोग ने अगली सुनवाई की डेट तक या इससे पहले जबाव दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
अजमेर| इस सर्दी पहली बार आना सागर झील में प्रवासी पेलिकन्स का आगमन दर्ज किया गया। झील की सतह पर लंबे समय तक इनका झुंड मंडराता और तैरता नजर आया। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त भोजन, साफ पानी और शांत वातावरण मिलने पर प्रवासी पक्षी नए जलाशयों को अप
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प्रदेश में बीते चौबीस घंटे में ज्यादातर शहरों में पारे में बढ़ोतरी हुई है लेकिन सर्दी से राहत नहीं मिली। शीतलहर का असर जारी है और अगले दो दिन सर्द हवा जारी रहने से कड़ाके की सर्दी पड़ेगी। 6 शहरों में तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से कम रहा। करौली 2.0 डिग्री के साथ सबसे ठंडा शहर रहा। वहीं मौसम साफ रहने और धूप खिलने से दिन-रात के तापमान में बढ़ गया। पाली, जोधपुर, चूरू, गंगानगर, बीकानेर, सीकर, भीलवाड़ा, अलवर, सिरोही, झुंझुनूं, फतेहपुर समेत कई शहरों में अधिकतम तापमान में 3 से लेकर 5 डिग्री तक बढ़ोतरी हुई।
15 जनवरी से तक बढ़ेगा न्यूनतम तापमान : मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में 15 जनवरी तक सर्दी बढ़ेगी, इसके बाद न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी होगी, जबकि दिन के तापमान में भी 1 से 3 डिग्री तक की बढ़ोतरी होने अनुमान है। 16 जनवरी से सुबह-शाम की गलनभरी सर्दी से थोड़ी राहत मिलने की संभावना है।
मकर संक्रांति पर पंजाब के मुक्तसर में आज (14 जनवरी) माघी मेला है। बैसाखी और बंदी छोड़ दिवस (दिवाली) के बाद इसे सिख धर्म का तीसरा सबसे बड़ा त्योहार मनाया जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु गुरुद्वारे में माथा टेकने आते हैं और सरोवर में डुबकी लगाते हैं।
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इस मेले में सबसे चर्चित कब्र पर जूते-चप्पल मारने की परंपरा है। यहां आने वाले सिख श्रद्धालु श्री गुरू गोबिंद सिंह से धोखा करने के बदले मुस्लिम नूरदीन को सजा देते हैं। मेले के अंत में निहंग इसे बरछे से तोड़ देते हैं। हर साल इसे नया बनाया और तोड़ा जाता है।
मुक्तसर का माघी मेला 40 मुक्तों यानी उन 40 सिखों की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने पहले तो श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के लिए लड़ने से मना कर दिया। मगर, माई भागो की प्रेरणा से बाद में ऐसी लड़ाई लड़ी की अपनी जान भी कुर्बान कर दी।
माघी मेले में सुबह से ही लाखों श्रद्धालु माथा टेकने के लिए आते हैं।- फाइल फोटो
कौन था धोखेबाज नूरदीन, 40 मुक्तों से जुड़ी खिदराने की जंग का क्या इतिहास, ये जानने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़ें…
सबसे पहले जानिए, कौन था धोखेबाज नूरदीन..
नूरदीन को लेकर 3 मान्यताएं: सिख इतिहास के जानकार सुखराज सिंह व मेहताब सिंह बताते हैं कि नूरदीन को लेकर अलग-अलग बातें प्रचलित हैं। मान्यताओं के अनुसार श्री गुरू गोबिंद सिंह जी दातुन कर रहे थे। उसी समय नूरदीन ने सिख का वेश बनाया और गुरुजी पर पीछे से हमला करने की कोशिश की। गुरुजी ने उसके हमले को नाकाम कर दिया और उसे पकड़ लिया। उसके बाद नूरदीन की मौत हो गई। दूसरी मान्यता ये है कि जब नूरदीन ने धोखे से गुरुजी पर वार करना चाहा तो गुरुजी ने उस पर गढ़वी यानि लोटे से वार कर दिया और उसे मार दिया। तीसरी मान्यता ये है कि गुरुजी ने उसे हमला करते हुए पकड़ा और फिर उसे ज्ञान दिया। जिसके बाद उसे आत्मग्लानि हुई। इसके बाद आघात होने से उसकी मौत हो गई। जिसे वहीं कुछ दूरी पर दफना दिया गया।
मुगलों का जासूस था नूरदीन, वेश बदलकर गुरुजी की सेना में आया: भाजपा के सिख नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने अपने X अकाउंट पर लिखा- मुगल युद्ध के मैदान में गुरु गोबिंद सिंह जी का मुकाबला नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने नूरदीन को सिख के वेश में गुरु जी की सेना में शामिल करवा दिया। एक दिन जब गुरु गोबिंद सिंह जी दातुन कर रहे थे तो उसने पीछे तलवार से गुरु जी पर हमला कर दिया। गुरु जी के पास लोटा था, जिसे उन्होंने नूरदीन के सर पर दे मारा जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उस स्थान पर अब गुरुद्वारा दातनसर है और गुरुद्वारे से कुछ ही दूरी पर मुगल नूरदीन की कब्र है, जो भी संगत गुरुद्वारे आती है वो नूरदीन की कब्र पर 5-5 बार चप्पल-जूते मारती है।
श्रद्धालु इस जगह पर भी जरूर जाते हैं: नूरदीन की कब्र श्री मुक्तसर साहिब के मुख्य गुरुद्वारे से लगभग 2.5 किलोमीटर दूर, गुरुद्वारा दातनसर साहिब के पास स्थित है। माघी मेले में आने वाले श्रद्धालु इस जगह पर भी जरूर जाते हैं। यहां वे नूरदीन की कब्र पर जूते मारने की प्रथा को जारी रखते हैं।
नूरदीन की कब्र पर जूते-चप्पल मारते श्रद्धालु। – फाइल फोटो
माघी मेला और खिदराने की जंग की कहानी जानिए…
गर्मी की वजह से मेले का महीना बदला गया माघी मेला सिख इतिहास में बैसाखी और बंदी छोड़ दिवस (दीवाली) के बाद तीसरा बड़ा त्योहार है। यह मेला उन 40 सिखों की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने पहले गुरू गोबिंद सिंह जी के लिए लड़ने से इनकार कर दिया। मगर, माई भागो की प्रेरणा से ऐसी लड़ाई लड़ी कि अपने प्राण तक बलिदान कर दिए। इन्हें सिख इतिहास में गुरु गोबिंद सिंह जी के “चाली मुक्ते” (चालीस मुक्त हुए सिख योद्धा) कहा जाता है।
यह लड़ाई 3 मई 1705 यानी बिक्रमी कैलेंडर के मुताबिक 21 वैसाख 1762 को हुई थी। शुरू में यह मेला वैसाख में ही लगता था, लेकिन गर्मी और पानी की कमी के कारण इसे सर्दियों के माघ महीने में मनाने की परंपरा शुरू हुई। नानकशाही कैलेंडर में इसे जनवरी यानी माघ महीने में मनाना तय किया गया है।
इस बार यह मेला 11 जनवरी से शुरू हो चुका है। 14 जनवरी को यहां अखंड पाठ के भोग डाले जाएंगे। 15 जनवरी को नगर कीर्तन निकालने के साथ निहगों की घुड़दौड़, घोड़ों के मुकाबले होंगे। जिसके बाद पारंपरिक तौर पर मेले की समाप्ति हो जाएगी।
खिदराने की जंग: 40 सिख लड़ाई से हटे, फिर ऐसे लड़े कि जान तक कुर्बान की
1. मुगल सैनिकों से लड़ रहे थे गुरू गोबिंद सिंह जी, 40 सिखों ने भूख–प्यास से साथ छोड़ा सिख इतिहासकारों के मुताबिक बिक्रमी संवत 1761 में दसवें गुरू श्री गुरू गोबिंद सिंह जी किला आनंदपुर साहिब में मुगल सैनिकों से लड़ रहे थे। किले में राशन-पानी खत्म होता जा रहा था। यह देख 40 सिखों ने कहा कि वह भूखे-प्यासे लड़ाई नहीं लड़ सकते। इस पर गुरू गोबिंद सिंह जी ने उनसे कहा कि लिखकर दे दो कि मैं तुम्हारा गुरू नहीं और तुम मेरे शिष्य नहीं। उन्होंने लिखकर दिया और लड़ाई छोड़ अपने घर चले गए।
2. गुरू गोबिंद सिंह जी के 2 साहिबजादों ने शहीदी प्राप्त की किला आनंदपुर की लड़ाई के बाद गुरू गोबिंद सिंह जी चमकौर साहिब की गढ़ी में जा पहुंचे। वहां मुगल सैनिकों के साथ उनका मुकाबला हुआ। इसमें गुरू गोबिंद सिंह जी के 2 साहिबजादे भाई अजीत सिंह और भाई जुझार सिंह ने शहीदी प्राप्त की।
3. परिजनों ने 40 सिखों के घर लौटने पर खूब कोसा चमकौर की गढ़ी से गुरू गोबिंद सिंह जी ने खिदराने की ढाब (मुक्तसर) के ऊंचे रेतीले टिब्बों में अपना डेरा लगा लिया। इधर, 40 सिखों ने घर में लड़ाई छोड़कर आने की बात बताई ताे परिवार के लोगों ने उन्हें खूब कोसा। उन्होंने कहा कि मुसीबत के वक्त गुरू गोबिंद सिंह जी का साथ छोड़ना चाहिए था। परिवार की महिलाओं ने कहा कि आप सब घर बैठो, हम गुरू जी के साथ सेना बनकर लडेंगी। तब माई भागो ने भी 40 सिखों को लड़ने के लिए प्रेरित किया।
4. वापस लौटे 40 सिख, मुगल सेना को घुटनों पर ला दिया घरवालों के ताने सुन और माई भागो के प्रेरित करने पर वे फिर से गुरू गोबिंद सिंह जी की खोज में निकल पड़े। वह खिदराने की ढाब पहुंच गए, जहां गुरू गोबिंद सिंह जी ठहरे हुए थे। उन्होंने भी एक जलाशय के पास अपने डेरे लगा लिए। तभी गुरू गोबिंद सिंह जी को ढूंढते हुए मुगल सेना भी वहां आ पहुंची। उन्होंने इन्हीं 40 सिखों पर हमला किया। तब ये 40 सिख ऐसे लड़े कि मुगल सेना को घुटने पर ला दिया। मुगल सेना को वहां से भागना पड़ा। इस लड़ाई में 39 सिख शहीद हो गए। एक भाई महा सिंह घायल पड़े थे। तब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी वहां पहुंचे और महा सिंह का सिर अपनी गोद में रखते हुए कहा कि आप सब लोगों ने आज सिख धर्म की लाज रख ली।
5. गुरू गोबिंद सिंह ने पत्र फाड़कर कहा, यह 40 मुक्तों की धरती गुरू गोबिंद सिंह जी ने महा सिंह से कहा कि जो मांगना चाहते हो मांग लो। इस पर महा सिंह ने कहा कि हमें माफी दे दीजिए और आनंदपुर के किले में उन्होंने जो पत्र (बेदावा) दिया था, उसे फाड़ दीजिए। हमारी टूटी गांठ जोड़ दीजिए यानी हमें अपना शिष्य बना लीजिए। तब गुरू गोबिंद सिंह जी ने अपनी कमर से वह पत्र निकाला और फाड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह स्थान खिदराना नहीं बल्कि मुक्ति का धाम है। बाद में महा सिंह ने भी शहीदी प्राप्त कर ली।
6. 40 सिखों का अपने हाथ से अंतिम संस्कार किया इसके बाद गुरू गोबिंद सिंह जी ने युद्ध के मैदान से सभी 40 सिखों की पार्थिव देह को इकट्ठा किया। इसके बाद एक बड़ी चिता बनाई। फिर गुरू गोबिंद सिंह जी ने अपने हाथ से सभी 40 सिखों का अंतिम संस्कार किया। इसी जगह पर अब गुरूद्वारा शहीदगंज बना हुआ है। जहां पर बेदावा (पत्र) फाड़ा, वहां गुरुद्वारा टुट्टी गंडी साहिब बना।
मंडी में 400 से ज्यादा घोड़े, कीमत 100 करोड़ माघी मेले में सबसे आकर्षण घोड़ा मंडी रहती है। यहां 400 से ज्यादा घोड़े आते हैं, जिसमें नुकरा (सफेद घोड़ा), मारवाड़ी (राजस्थान) और मज्जुका नस्ल के घोड़े सबसे ज्यादा फेमस है। इन घोड़ों की कीमत 2 लाख से लेकर 2 करोड़ तक होती है। इस मंडी में ज्यादातर भारतीय नस्लें ही बेची और खरीदी जाती हैं।
विदेशी घोड़ों को इन मंडियों में नहीं ले जाया जाता है। यहां हॉर्स शो भी होता है। पिछले साल 2025 में हुए मुकाबले में मेल कैटेगरी में पहला स्थान हरियाणा के बुर्ज खलीफा को मिला था। जिसकी हाइट 71 इंच थी। बुर्ज खलीफा तब पौने 4 साल का था। फीमेल कैटेगरी में 5 साल की मारवाड़ी घोड़ी हिना जीती थी। जिसकी हाइट 66 इंच थी।
मुक्तसर में श्री गुरू गोबिंद सिंह जी से जुड़े 8 गुरुद्वारों के बारे में जानिए…
जयपुर| प्रदेश में वेरिफिकेशन के अभाव में 20.36 लाख से अधिक लाभार्थियों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन रोकी जा रही है। इस मामले में सामाजिक न्याय एवं अधिकरिता मंत्री अविनाश गहलोत ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले सभी लाभार्थियों से वार्षिक सत्यापन जल्द करव
बॉक्सर पूजा बोहरा रिकॉर्ड 10वीं बार चैंपियन बनी हैं।
हरियाणा के भिवानी की पूजा बोहरा नेशनल लेवल पर सीनियर कैटेगरी में 10 खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बन गई हैं। पहले भिवानी की ही कविता चहल के नाम यह रिकॉर्ड रहा। उन्होंने 9 बार नेशनल खिताब जीते।
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ग्रेटर नोएडा में 10 जनवरी को समाप्त हुई 9वीं एलीट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप- 2025 में पूजा ने 75-80 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में रोहतक की नैना को 5-0 से हराया। नैना यूथ चैंपियन रही हैं। प्रतियोगिता के बाद मंगलवार को भिवानी लौटी पूजा का जोरदार स्वागत हुआ।
पूजा का यहां का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। शुरुआत में परिवार से छिपकर बॉक्सिंग प्रैक्टिस की। फिर दिवाली पर हाथ में पटाखा फट गया। हाथ जल गए। उसके बाद कंधे में चोट लगी। यही नहीं, पूजा शादी के बाद फिर रिंग में लौटीं। हर बार कमबैक किया। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में पूजा ने अपने 17 साल के सफर के अनुभव साझा किए।
दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए बॉक्सर पूजा बोहरा।
अब पढ़िए….कैसे परिवार-समाज का विरोध झेला
पिता को बॉक्सिंग पसंद नहीं थी: पूजा के पिता राजबीर सिंह बोहरा पुलिस में थे। मां दमयंती घरेलू महिला हैं। पूजा ने 2009 में स्पोर्ट्स शुरू किया। उस समय परिवार भी इतना जागरूक नहीं था। आसपास के लोग भी लड़कियों के खेल को सहजता से नहीं लेते थे। पिता को बॉक्सिंग गेम ही पसंद नहीं था। मां को भी लगता था बेटी बॉक्सिंग करेगी तो कहीं उसे चोट ने लग जाए।
कोच की पत्नी ने पहचाना हुनर: पूजा ने पहले इंटर कॉलेज तक बॉस्केटबॉल खेली, कुछ और भी खेल आजमाए। इसी दौरान आदर्श गर्ल्स कॉलेज में कोच संजय श्योराण की पत्नी मुकेश श्योराण को लगा कि यह लड़की तो बॉक्सिंग में अच्छा कर सकती है। बस ग्लब्स मिले और बॉक्सिंग शुरू हो गई।
एक साल तक घर नहीं बताया: एक साल तक पूजा ने बॉक्सिंग को लेकर घर में ज्यादा कुछ नहीं बताया। पूजा की आंख के ऊपर चोट लग गई, काफी खून बहा। पूजा को लगा कि घर गई तो पक्का उसका गेम छुड़वा देंगे। इसके बाद कोच के घर पर ही तीन-चार दिन रही। कोच की पत्नी ने मां से बात की कि कोच साहब घर पर नहीं हैं, पूजा को अपने पास ही रख रही हूं दो-तीन दिन के लिए। जब आंख नॉर्मल हो गई तो घर गई।
बॉक्सर पूजा बोहरा घर लौटने पर अपनी मां के गले लगते हुए।
पिता को पता चला तो साफ कह दिया- कल से बॉक्सिंग बंद पूजा ने बताया कि शुरुआत में पापा को नहीं पता था कि मैंने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू कर दी। जब पता चला तो साफ मना कर दिया-कल से बॉक्सिंग में नहीं जाएगी। गेम करना है तो कोई और कर ले। फिर कोच ने पापा को मिलने बुलाया। कोच ने समझाया कि लड़की के पंच में दम है, ये कामयाब हो सकती है। तब पिता कुछ राजी हुए।
दिवाली पर हाथ में पटाखा फटा, लगा करियर खतरे में पड़ गया 2016 में दिवाली पर पूजा के हाथ में ही पटाखा फट गया। हाथ झुलस गए। उस दौरान नेशनल चैंपियनशिप होनी थी। जिसमें पूजा खेल नहीं पाई। उसके बाद रेस्ट के कारण पूजा के कंधे में भी इंजरी हो गई। यहीं से पूजा का स्ट्रगल स्टार्ट हुआ। तब लगा कि पूजा अब खेल नहीं पाएगी। इंजरी से उभरने में डेढ़ साल लग गया। उसने फिर कमबैक किया।
शादी के बाद रिंग में लौटीं, टॉप लेवल बॉक्सिंग में आसान नहीं होता फरवरी 2023 में पूजा की शादी जींद निवासी आकाश सिंहमार से हुई। पति का कोई स्पोर्ट्स बैकग्राउंड नहीं है। तब भी खेल जगत को लगा कि अब पूजा रिंग में नहीं लौटेंगी। शादी के कुछ महीने बाद ही पूजा ने कम बैक किया। और दिसंबर 2023 में नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीता।
पूजा कहती हैं- आपका एक अच्छा प्लेयर होना ही मायने नहीं रखता। आपका स्पोर्ट सिस्टम कैसा है, वह भी काफी मायने रखता है। इसमें सास सरला देवी और पति ने उनका पूरा सहयोग किया।
गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर पूजा बोहरा का भिवानी पहुंचने पर स्वागत करते हुए परिजन।
दैनिक भास्कर एप से बातचीत में पूजा ने कहीं ये 4 अहम बातें…
महसूस करो कि हमसे अच्छा कोई नहींः कोच संजय श्योराण काफी अच्छी टेक्नीक सिखाते हैं। वे माइंड भी ऐसा बना देते हैं कि हमें यह लगता है कि हमसे अच्छा कोई नहीं है। स्टार्टिंग में भी ऐसा ही था कि मुझे एक साल में ही यूं लगने लग गया था कि मेरे से अच्छा कोई नहीं है। लेकिन धीरे-धीरे रियल बॉक्सिंग को फेस किया तब लगा कि लगातार मेहनत की जरूरत है।
मेडल आने लगे तो सबका नजरिया बदलाः स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अच्छे दिनों की शुरुआत हुई। लोगों का नजरिया भी बदलने लगा। सीनियर नेशनल में शुरुआत के एक साल मेडल नहीं जीत पाई। इसके बाद धीरे-धीरे मेडल आने स्टार्ट हो गए।
फैमिली का सपोर्ट है तो हर लड़ाई आसानः फैमिली सपोर्ट कर रही हो तो बाकी कुछ मैटर नहीं करता। शुरुआत में परिवार को लगता था, बॉक्सिंग खेल खतरनाक है। कहीं चोट ना लग जाए। लेकिन बाद में बहुत सपोर्ट मिला। जब कभी 17 साल के सफर को देखती हूं तो लगता है कि खिलाड़ी के लिए सबसे मुश्किल टाइम वह होता है, जब वह करना चाहता है और कर नहीं पा रहा। जैसे कोई इंजरी हो जाए।
जो ठान लो, उसे करके दिखाओः जो लड़की खिलाड़ी बनना चाहती हैं, उनको के लिए बस यही राय है कि जो ठान लो, उसे करके दिखाओ। आजकल परिवार काफी जागरूक हो चुके हैं। यह देखना चाहिए कि कौन कोच अच्छे हैं और कौन-सी एकेडमी अच्छी है। यह अच्छे से निर्णय लेकर ही अपना गेम स्टार्ट करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित चैंपियनशिप में जीतने के बाद पूजा रानी विनिंग पोज देते हुए- फाइल फोटो।
पहाड़ों में बर्फबारी के कारण यूपी में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। यहां सीजन का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया। मंगलवार को मुजफ्फरनगर 2.1°C तापमान के साथ सबसे ठंडा रहा। बरेली, बिजनौर समेत 23 जिलों में घना कोहरा छाया रहा।
कोहरे के चलते 48 ट्रेनें लेट हुईं और कई जगह ट्रेन की रफ्तार घटाई गई। बिजनौर में बस पलटने से 38 यात्री घायल हुए। लखनऊ और वाराणसी एयरपोर्ट पर कई फ्लाइट्स भी देर से चल रही हैं।
राजस्थान में 10 शहरों में तेज सर्दी का यलो अलर्ट जारी किया है। अलवर में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री के करीब रहा। उदयपुर, चित्तौड़गढ़ में सुबह कोहरा भी रहा। राज्य के 10 से ज्यादा शहरों का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे दर्ज हुआ।
हरियाणा के गुरुग्राम का तापमान सोमवार को 0.6°C रहा। 60 साल पहले 5 दिसंबर 1966 में मिनिमम टेंपरेचर 0.4°C रहा था। चंडीगढ़ में ठंड और कोहरे के कारण प्रशासन ने सभी स्कूलों की सर्दियों की छुट्टियां 17 जनवरी तक बढ़ा दी हैं।
उत्तराखंड के 4 जिलों में नदी का पानी जम गया है। नदी के ऊपर पाले और बर्फ की मोटी चादर दिख रही है। पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के ऊंचाई वाले इलाकों में झरने जम गए हैं। इन इलाकों में पानी की पाइपलाइन जम चुकी है।
IMD के अनुसार, दिल्ली में मंगलवार को लगातार तीसरे दिन कोल्ड वेव बनी रही। न्यूनतम तापमान 3.0°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.4°C कम रहा और तीन साल में जनवरी की सबसे ठंडी सुबह रही। कई स्टेशनों पर भी करीब 3°C तापमान रिकॉर्ड हुआ।
देशभर में मौसम की 2 तस्वीरें…
यूपी के बिजनौर में कोहरे के कारण बस पलट गई।
उत्तराखंड के अल्मोडा में पाले की मोटी चादर दिखी।
अगले 2 दिन मौसम का हाल…
15 जनवरी: पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में बारिश का अलर्ट, पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी हो सकती है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश में घने कोहरे का अलर्ट, कड़ाके की सर्दी हो सकती है।
16 जनवरी: हिमाचल में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट
हिमाचल प्रदेश में 16 से 18 जनवरी के बीच कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है।
राजस्थान में नए समीकरणों को देखते हुए 12 जिला परिषदों को छोड़कर सभी पंचायतों के चुनाव मार्च में होंगे। पुरानी 11283 पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और प्रशासक नियुक्त हैं। दूसरी तरफ, 113 पालिकाओं और निगमों में चुनाव पर हाईकोर्ट का स्टे है। इनक
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राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारी पूरी है। इसमें ओबीसी आयोग की रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। आयोग की रिपोर्ट दिसंबर तक आनी थी, जिसे अब 31 जनवरी से पहले देने को कहा है। इस बीच, सरकार ने ओबीसी आयोग का कार्यकाल दूसरी बार बढ़ा दिया है। राजस्थान में संभवतया पहली बार ऐसा होगा जब 2026 में पंचायत चुनाव और विधानसभा सत्र, संसद सत्र साथ-साथ चलेंगे। 28 जनवरी से बजट सत्र होगा जो संभवतया मार्च तक चल सकता है। संसद सत्र भी इसी दौरान चलेगा जिसका 2 अप्रैल तक के लिए कार्यवाही तय हो चुकी है।
सीधी बात- राजेश्वरसिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्त
संसद और विधानसभा सत्र के साथ क्या चुनाव संभव है? संसद और विधानसभा सत्र तो चुनाव के समय चलेंगे, यह सही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक कराने को कहा है।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आई है, क्या 15 अप्रैल से पहले चुनाव संभव है? ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तो आनी चाहिए। पहले दिसंबर में रिपोर्ट देना तय था। अब तो 31 जनवरी तक आने वाली है।
क्या सभी पंचायतों के एक साथ चुनाव करा पाएंगे? नहीं, जिनका संभव है उनका एक साथ करा देंगे।
कितनी जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है? 12 जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है, उनको छोड़कर बाकी जिलों के करवा सकते हैं।
क्या निकायों के चुनाव भी एक साथ नहीं होंगे? 113 नगरीय निकायों के बिना क्षेत्र परिवर्तन और बिना जनसंख्या परिवर्तन के वार्ड बढ़ाए गए हैं, उन 113 में हाईकोर्ट ने स्टे लगा रखा है। उसके खिलाफ सरकार एसएलपी में गई है। स्टे वैकेट हुआ तो ही चुनाव हो पाएंगे। अन्यथा साथ-साथ नहीं होंगे। जिनका संभव है उनका चुनाव करा देंगे।
ओवरआल पंचायत और निकाय की क्या तैयारी है? हम पंचायत चुनाव मार्च में और बिना स्टे वाले निकायों के चुनाव अप्रैल में कराने की पूरी तैयारी में हैं।
राजस्थान में कुल निकाय…309 113 निकायों में स्टे है। 196 में चुनाव करा सकते हैं।
कुल ग्राम पंचायतें- 14699 11283 का कार्यकाल पूरा हो चुका है 12 जिला परिषदों का कार्यकाल बाकी 3416 नई ग्राम पंचायत बनाई गई हैं
भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन वनडे मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला आज राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच दोपहर 1:30 बजे से शुरू होगा और टॉस 1:00 बजे होगा।
टीम इंडिया पहले वनडे में जीत के साथ सीरीज में 1-0 से आगे है। भारत आज दूसरा मैच भी जीतता है, तो वह सीरीज भी जीत लेगा। भारतीय सरजमीं पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच अब तक 7 वनडे सीरीज खेली गई हैं। सभी 7 सीरीज भारतीय टीम ने जीती हैं। इस तरह भारत के पास कीवियों के खिलाफ लगातार आठवीं घरेलू वनडे सीरीज जीतने का मौका है।
पहले मैच में चोटिल हुए वॉशिंगटन सुंदर सीरीज से बाहर हो गए हैं। ऐसे में आज प्लेइंग-XI में बदलाव तय है। अगर टीम मैनेजमेंट पहले वनडे के प्लेइंग कॉम्बिनेशन को बरकरार रखता है, तो युवा ऑलराउंडर आयुष बडोनी को इंटरनेशनल वनडे में डेब्यू का मौका मिल सकता है। वहीं, अगर संतुलन के लिए टीम एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज के साथ उतरना चाहती है, तो ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी को भी प्लेइंग-XI में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है।
भारत में न्यूजीलैंड का वनडे परफॉर्मेंस सबसे कमजोर भारत ने सीरीज के पहले मैच में न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया था। दोनों टीमों के बीच अब तक 121 वनडे खेले गए। 63 में भारत और 50 मे न्यूजीलैंड को जीत मिली। 7 बेनतीजा रहे, वहीं 2014 में एक मैच टाई भी रहा।
भारत में कम से कम 20 वनडे मैच खेलने वाली विदेशी टीमों में न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड सबसे खराब है। न्यूजीलैंड ने भारत में अब तक 41 में से सिर्फ 8 वनडे मैच जीते हैं, जबकि 32 मैचों में उसे हार झेलनी पड़ी है। जबकि एक मुकाबला बेनतीजा भी रहा।
विराट ने पहले मैच में 93 रन बनाए पहले मैच में विराट कोहली ने शतक तो नहीं लगाया लेकिन 93 रन की पारी खेली। कोहली सीरीज में टॉप स्कोरर हैं। कोहली पिछले साल भी टीम के लिए सबसे ज्यादा 651 रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। वहीं, पहले मैच में मोहम्मद सिराज ने गेंदबाजी में अच्छा प्रदर्शन किया और 2 विकेट लिए।
जैमीसन ने पिछले मैच में 4 विकेट लिए डेरिल मिचेल ने इस सीरीज के पहले मैच में न्यूजीलैंड के लिए सबसे ज्यादा 84 रन बनाए थे। हालांकि टीम को जीत दिलाने में सफल नहीं हो सके। वहीं, काइल जैमीसन ने गेंदबाजी में 4 विकेट लिए। जैमीसन सीरीज के टॉप विकेट टेकर हैं।
राजकोट में भारत का रिकॉर्ड खराब राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है, हालांकि गेंदबाजों को भी कुछ मौके मिलते हैं। इस मैदान पर वनडे में भारत का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है।
भारत ने यहां अब तक 4 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें से 3 में उसे हार झेलनी पड़ी है। इस मैदान पर आखिरी वनडे मुकाबला 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया था, जिसमें भारत को 66 रन से हार मिली थी। यहां खेले गए अब तक के चारों वनडे मैच पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने जीते हैं।
राजकोट का मौसम साफ रहेगा मैच के दिन राजकोट में बारिश की कोई आशंका नहीं है। दिन में धूप निकलेगी, जिससे मैच में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। टेम्परेचर 13 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। राजकोट में ओस इतनी ज्यादा नहीं होगी कि गेंद पकड़ने में दिक्कत हो, लेकिन ठंडे मौसम की वजह से पिच थोड़ी तेज हो सकती है।
दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-11भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, नीतीश कुमार रेड्डी/आयुष बडोनी, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह।
मैच कहां देख सकते हैं? भारत और न्यूजीलैंड के बीच वनडे और टी-20 सीरीज के मुकाबले टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स के चैनलों पर देख सकेंगे। इसके अलावा मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार एप पर होगी। आप दैनिक भास्कर पर भी मैच के लाइव अपडेट्स पढ़ सकते हैं।