Plane Crash Pilot Shambhavi Pathaks Last Message to Grandmother
कैप्टन सांभवी पाठक ने आज सुबह दादी को वॉट्सएप मैसेज किया था।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार सुबह 8.45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर प्लेन क्रैश में निधन हो गया। हादसे में पवार के सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत 5 लोगों की जान चली गई। इनमें से कैप्टन सांभवी पाठक मध्य प्रदेश के ग्व
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फिलहाल, सांभवी का परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया है। ग्वालियर में शांभवी की दादी मीरा पाठक बसंत विहार के मकान नंबर डी-61 में रहती हैं। शांभवी ने आज सुबह साढ़े 6 बजे ही दादी को मैसेज किया था। उन्होंने लिखा था- हाय, गुड मॉर्निंग दादा।
दादी मीरा ने जवाब में लिखा- गुड मॉर्निंग, चीनी। अब वे यही मैसेज देख-देखकर अपनी पोती को याद करके रो रही हैं।
दादी बोली- नहीं जानती थी कि यह आखिरी मैसेज है दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए दादी मीरा पाठक ने कहा- शांभवी को घर में सभी चीनी कहते हैं। वह मुझे कभी मैसेज नहीं करती थी। पता नहीं, आज कैसे उसे याद आ गई। मैं नहीं जानती थी कि यह उसका अपनी दादी को आखिरी मैसेज है।
सुबह 9 बजे शांभवी के पिता विक्रम का फोन आया था। वह रो रहा था। मैंने प्लेन क्रैश की खबर सुनी थी। मैं समझ गई कि कुछ गड़बड़ है। विक्रम ने बाद में कॉल करता हूं, कहकर फोन कट कर दिया।
करीब दो घंटे बाद ही विमान हादसे में शांभवी की मौत की खबर आ गई।

ज्योतिषी ने कहा था कि नाम रोशन करेगी मीरा पाठक ने बताया- सांभवी मेरे दिल के सबसे करीब थी। काम की व्यस्तता की वजह से बात कम होती थी लेकिन जब भी होती थी, लंबी होती थी। वह प्यार से मुझे दादी की बजाय ‘दादा’ कहकर पुकारती थी। वह कहती थी कि दादाजी के चले जाने के बाद आप ही मेरे दादा हो।
मीरा ने बताया- उसकी कुंडली बनवाते वक्त ज्योतिषी ने बताया था कि आपकी बिटिया साल 2026-27 में ऐसा नाम रोशन करेगी कि पूरे देश में आपकी पहचान बन जाएगी। पर पता नहीं था कि वह साल 2026 की 28 जनवरी को इस तरह नाम रोशन कर सभी को छोड़कर चली जाएगी।
देखें, सांभवी की तस्वीरें…

सांभवी की दादी मीरा पाठक ग्वालियर में बसंत विहार के मकान नंबर डी-61 में रहती हैं।

पिता विक्रम और मां रोली के साथ सांभवी पाठक की पुरानी तस्वीर।

भाई वरुण पाठक के साथ शांभवी की सबसे अच्छी ट्यूनिंग थी।

अगस्त 2025 में सीएम मोहन यादव किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने ग्वालियर पहुंचे थे। तब उनका विमान सांभवी पाठक ने ही उड़ाया था।
पिता और दादा एयरफोर्स में रहे दादी मीरा पाठक ने कहा- शांभवी बचपन से ही मेधावी थी। उसे उड़ान का जुनून अपने दादा श्रीकिशन पाठक और पिता विक्रम पाठक से मिला है। दादा एयरफोर्स में विंग कमांडर के पद से रिटायर्ड हुए थे, जबकि पिता एयरफोर्स में ग्रुप कैप्टन रह चुके हैं। यही कारण है कि वह एविएशन फील्ड में ही जाना चाहती थी।
मीरा ने बताया कि सांभवी पिता, मां और भाई वरुण के साथ दिल्ली में ही रहते थी।

हादसे की खबर सुनने के बाद मीरा पाठक से मिलने रिश्तेदार पहुंच रहे हैं।
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