PM Modi Inaugurates Projects in Puducherry & Madurai; 8 Railway Stations in Tamil Nadu
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चेन्नई11 मिनट पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तमिलनाडु और पुडुचेरी जाएंगे। वह तमिलनाडु में आठ नए बने रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे। इसी के साथ चेन्नई बीच चेन्नई एग्मोर चौथी लाइन देश को समर्पित करेंगे। इस मौके पर पीएम वहां इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित भी करेंगे।
पीएम सुबह करीब 11.45 बजे पुडुचेरी में 2,700 करोड़ रुपये से ज़्यादा के अलग-अलग डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन, राष्ट्र को समर्पित और आधारशिला रखेंगे। इसके बाद वह मदुरै में 4,400 करोड़ रुपये से ज़्यादा के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन करेंगे।
NH-332A के मरक्कनम-पुडुचेरी सेक्शन और NH-87 के परमकुडी-रामनाथपुरम सेक्शन की फोर-लेनिंग का दोपहर करीब 3 बजे आधारशिला रखेंगे। पीएम कुंभकोणम, येरकॉड और वेल्लोर में तीन नए आकाशवाणी FM रिले ट्रांसमीटर का उद्घाटन भी करेंगे।

तिरुप्परनकुंद्रम में अरुलमिगु सुब्रमण्यस्वामी मंदिर में पूजा करेंगे PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यक्रमों के बाद शाम करीब 4 बजे, मोदी तिरुप्परनकुंद्रम में अरुलमिगु सुब्रमण्यस्वामी मंदिर जाएंगे और पूजा करेंगे। ये मंदिर मदुरै से करीब 8 किमी दूर है।
पिछले साल दिसंबर तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर में पहाड़ी पर दरगाह के पास दीपस्तंभ (दीपथून) पर दीप जलाने को लेकर विवाद में आया था मंदिर।

दीपम जलाने की जगह को लेकर विवाद
तमिलनाडु के मदुरै से 10 किमी दूर दक्षिण में तिरुप्परनकुंड्रम शहर है। इसे भगवान मुरुगन के 6 निवास स्थानों में से एक माना जाता है। यहां की तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी पर सुब्रमण्य स्वामी मंदिर है, जो छठी शताब्दी का माना जाता है।
पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर दीपस्तंभ है। मान्यता है कि इतिहास काल से ही तमिल महीने कार्तिगई की पूर्णिमा तिथि (नवंबर-दिसंबर के दौरान) को कार्तिगई दीपम पर्व के दौरान स्तंभ पर दीपक जलाया जाता जाता रहा है। 17वीं शताब्दी में पहाड़ी पर सिकंदर बधूषा दरगाह का निर्माण कराया गया था।
दरगाह से दीपस्तंभ करीब 15 मीटर की दूरी पर है। दरगाह के निर्माण के बाद वहां पर दीपक जलाने को लेकर मंदिर प्रशासन और दरगाह के बीच विवाद शुरू हुआ था। दरगाह प्रबंधन दावा करता है कि लंबे समय से मंदिर के पास उचि पिल्लैयार मंडपम के पास दीप जलाने की प्रथा रही है।
प्रो. मय्यप्पन (अन्नामलाई यूविवर्सिटी) के 1984 के एक रिसर्च के अनुसार, दीपस्तंभ की स्थापना 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच नायकर काल में हुई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला भूमि स्वामित्व का नहीं, बल्कि मंदिर प्रशासन और धार्मिक प्रथा का है।
6 जनवरी को हाईकोर्ट ने निचली अदलात का दीप जलाने का फैसला बरकरार रखा
तमिलनाडु के मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने 6 जनवरी को तिरुप्परनकुंड्रम मंदिर में पहाड़ी पर दरगाह के पास दीपस्तंभ (दीपथून) पर दीप जलाने की इजाजत दे दी है। जस्टिस जी जयचंद्रन और जस्टिस केके रामकृष्णन की बेंच ने जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के सिंगल बेंच का फैसला बरकरार रखा।
कोर्ट ने कहा कि दीप जलाने के मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया गया, जबकि यह लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा से जुड़ा मामला है। कोर्ट ने कहा कि जिला प्रशासन को इस मामले को समुदायों के बीच संवाद और समन्वय के अवसर के रूप में देखना चाहिए था।

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