Drone survey of 380 km Jaisalmer-Bhabhar railway line to be conducted, hope revived after 9 years
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जैसलमेर-भाभर के बीच 380 किमी लंबे रेल लाइन के ड्रोन व टोपोग्राफिकल सर्वे के लिए करीब 8 महीने पहले रेल मंत्रालय ने स्वीकृति दी थी, जिसके लिए 10 करोड़ रुपए के बजट का भी प्रावधान किया गया था। लेकिन रेलवे विभाग की उदासीनता के चलते 8 महीने के इंतजार के बाद
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गौरतलब है कि 2016 में केंद्र में भाजपा सरकार ने बजट में राजस्थान-गुजरात को जोड़ने के लिए जैसलमेर-भाभर की रेल लाइन निर्माण के लिए 5 हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी। 9 साल पहले घोषणा और उसके बाद अब तक जल्द ही काम शुरू करवाने का आश्वासन ही दिए जा रहे थे। लेकिन जैसलमेर-भाभर रेल लाइन का काम शुरू नहीं किया गया है। इन 9 सालों में रेलवे द्वारा सिर्फ एक बार सर्वे का काम करवाया गया है।
जैसलमे पर्यटन नगरी है। फिलहाल जैसलमेर सीधे तौर पर नॉर्थ इंडिया से तो जुड़ा हुआ है। लेकिन साउथ इंडिया से अभी तक जैसलमेर की कोई कनेक्टविटी नहीं है। हालांकि बांद्रा के लिए एक सप्ताहिक ट्रेन का संचालन हो रहा है। लेकिन वह भी जोधपुर से होकर निकलती है। जैसलमेर से बाड़मेर के लिए भी कोई रेलवे ट्रेक नहीं है।
रेल लाइन परियोजना
तीन चरणों में होगा सर्वे, 5000 करोड़ रुपए लागत आएगी जैसलमेर से भाभर तक रेल लाइन के लिए दो तथा भाभर से कांडला पोर्ट तक हुए पहले सर्वे को तीन चरणों में पूरा किया गया था। इनमें जैसलमेर-बाड़मेर, बाड़मेर-भाभर, थराद रोड-बनासरा तक का अलग-अलग सर्वे हुआ था। जैसलमेर-बाड़मेर तक 145 किमी की लागत करीब 517 करोड़ रुपए, बाड़मेर-भाभर तक 193.84 किमी की लागत करीब 798 करोड़ रुपए तथा थराद रोड-बनासरा तक 80.75 किमी की लागत करीब 370 करोड़ रुपए आंकी गई थी।
यह कुल 380 किमी रेललाइन है। इस पर सरकार को करीब 5000 करोड़ की लागत आएगी। रेलवे ने जैसलमेर, बाड़मेर और जालोर के कलेक्टरों को पत्र लिखकर फील्ड में काम कर रही सर्वे टीम के लिए प्रशासनिक सहयोग और सुरक्षा की मांग की है।
रेलवे का कहना है कि सर्वे दल वर्तमान में फील्ड में तैनात है। कार्य के दौरान स्थानीय निवासियों और हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय बना रहे और किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन का सहयोग अपेक्षित है। जैसलमेर से बाड़मेर के बीच में 8 और बाड़मेर से भाभर के बीच 23 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित है कुल 31 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित है।
जिसमें जैसलमेर, बखरानी, सांगड़, गूंगा, शिव, निंबला, बाड़मेर, महाबार, उण्डखा, अराबा का तला, सनावड़ा, बाछड़ाऊ, दूदवा, दूदू, धोरीमन्ना, भाउड़ा, माणकी, सिंछावा, पादरड़ी, भादरून, सरवाना, कसवी, रतनपुरा, भोरोल, भाचर, थराद रोड जंक्शन, मोरीखा, सनसेड़ा, कुवाला व भाभर रेलवे स्टेशन होंगे। जैसलमेर से भाभर तक 31 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित जोधपुर मंडल के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) सौरभ कुमार द्वारा जारी पत्र के अनुसार जैसलमेर से वाया बाड़मेर होते हुए गुजरात के भाभर तक बनने वाली इस नई लाइन के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा।
इस सर्वे में जमीन की ऊंचाई, ढलान और भौगोलिक बाधाओं का सटीक विवरण जुटाने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रोजेक्ट का सटीक डिजाइन और डिटेल्ड एस्टीमेट तैयार करने में मदद मिलेगी।
“जैसलमेर-भाभर रेल लाइन परियोजना के तहत एफएलएस का काम चल रहा है।डीजीपीएस एवं ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए टोपोग्राफिकल सर्वे में लैंड एक्वायर का काम किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद इसे आगे भेज दिया जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
-हितेश यादव, वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक, रेलवे जोधपुर
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