Divorce Registration Cant Be Denied After 1 Year Separation


  • Hindi News
  • National
  • Delhi High Court: Divorce Registration Cant Be Denied After 1 Year Separation

नई दिल्ली3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि शादी के बाद अगर पति पत्नी साथ नहीं रह रहे हैं तो शादी की रजिस्ट्रेशन एक औपचारिकता से ज्यादा कुछ भी नहीं है।

जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीजन बेंच ने कहा कि इसका इस्तेमाल एक साल में तलाक लेने से इनकार करने के लिए नहीं किया जा सकता।

हाइकोर्ट बुधवार को एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें शादी की तारीख से एक साल पूरा होने से पहले आपसी सहमति से तलाक के लिए ज्वाइंट याचिका पेश करने की अनुमति खारिज कर दी गई थी।

याचिका में कहा गया कि दोनों पक्ष कभी एक दिन भी साथ नहीं रहे, शादी कभी पूरी नहीं हुई, और दोनों शादी के तुरंत बाद अपने-अपने माता-पिता के घरों में अलग-अलग रहने लगे।

फैमिली कोर्ट ने कहा था- शादी बचाने के प्रयास नहीं किए

फैमिली कोर्ट ने HMA की धारा 14 के तहत तलाक की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पक्ष असाधारण कठिनाई का मामला साबित करने में विफल रहे हैं।

कोर्ट के मुताबिक शादी को बचाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि शादी के तुरंत बाद रजिस्ट्रेशन उनके असाधारण कठिनाई के दावे के खिलाफ है।

हाइकोर्ट ने माना- शादी कबी पूरी नहीं हुई

महिला की याचिका पर हाईकोर्ट ने माना कि यह तथ्य कि दोनों पक्ष कभी साथ नहीं रहे और शादी कभी पूर्ण नहीं हुई, मौजूदा वैवाहिक रिश्ते की नींव पर ही सवाल उठाते हैं।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी शादी को जारी रखने पर जोर देना सही नहीं है जो केवल कागजों पर हो। हाइकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का फैसला पक्षों को अनावश्यक कठिनाई सहने के लिए मजबूर करेगा।

कोर्ट ने कहा कि यह मामला HMA की धारा 14 के तहत बनाए गए अपवाद के दायरे में आता है। इसलिए अदालत ने दंपति की अर्जी को मंज़ूरी दी और उन्हें आपसी सहमति से तलाक के लिए अपनी ज्वाइंट याचिका पेश करने की अनुमति दी। ———-

ये खबर भी पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट बोला-पत्नी से खर्चे का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं:इसके लिए केस नहीं कर सकते; व्यक्ति पर दर्ज FIR रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर पति घर के पैसों के फैसले खुद करता है या पत्नी से खर्च का हिसाब पूछता है तो इसे क्रूरता नहीं कहा जा सकता। यह टिप्पणी कोर्ट ने 2 जनवरी को दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के एक मामले को रद्द करते हुए की। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *