हॉस्टल्स तैयार कर रहे कॉलगर्ल-स्कूल टॉपर को बनाया सेक्स एडिक्ट:आईफोन गिफ्ट किया, कहते थे– जिंदगी बदल देंगे, 3000 में होटल भेजते




‘मैं काफी गरीब परिवार से थी। पापा को मेरे ऊपर गर्व था। हमेशा कहते थे मेरी बेटी ऑफिसर बनेगी। साल 2022 में मैट्रिक की परीक्षा में स्कूल टॉप किया। पटना की एक बड़ी कोचिंग ने फ्री में तैयारी के लिए एडमिशन का ऑफर दिया। घर वाले तैयार हो गए, मैं पटना पहुंच गई। राजीवनगर में एक सस्ता हॉस्टल मिल गया। कोचिंग में लड़कियां आईफोन और जींस टॉप में आती थीं, मैं गांव की लड़की की पैड वाले मोबाइल और देहाती सलवार सूट में जाती थी। हॉस्टल की वार्डन मेरी इस कमजोरी को भांप गई और मेरा ब्रेनवॉश करने लगी। मुझे आईफोन और लग्जरी लाइफ का सपना दिखाकर कॉलगर्ल बना दिया।’ 17 साल की उम्र में वार्डन ने मुझे पहली बार 3000 रुपए में होटल में अधेड़ के पास भेजा था। धीरे-धीरे मैं सेक्स एडिक्ट हो गई। इसके बाद हर दिन हॉस्टल से होटल जाने लगी। घर वालों को पता नहीं है, मैं ऐसे दलदल में फंसी हूं, जहां से निकलना मुश्किल है..। ये कहानी पूर्णिया की एक स्कूल टॉपर छात्रा की है, जो पटना के हॉस्टल में रहती थी। ऑपरेशन डर्टी हॉस्टल पार्ट-3 में पढ़िए और देखिए कैसे गांव से शहर आई भोली भाली लड़कियों को हॉस्टल में बनाया जा रहा कॉलगर्ल…। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से शुरू हुई भास्कर की इन्वेस्टिगेशन पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET स्टूडेंट के साथ हुई घटना के बाद हॉस्टल से सेक्स रैकेट का कनेक्शन जोड़ा गया। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाया। आरोप है कि पटना के गर्ल्स हॉस्टल्स से कॉलगर्ल तैयार की जा रही हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने कई लड़कियों और एजेंट्स से बात कर डर्टी हॉस्टल की डर्टी कहानी समझी। इस दौरान पीड़ित लड़कियों की झकझोर देने वाली कहानी भी सामने आई है। मैं पटना के एक गरीब परिवार की बेटी हूं। घर वालों के पास मेरी पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। मैं पढ़ना चाहती थी, इसलिए बोरिंग रोड के एक हॉस्टल में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी कर ली। कुछ दिनों तक सब ठीकठाक चला, लेकिन हॉस्टल में पढ़ाई करने वाली लड़कियों के साथ कुछ ऐसी भी लड़कियां थीं, जो गलत काम करती थीं। मेरे घर की कंडीशन ठीक नहीं थी, यह हॉस्टल वालों को पता था। बाहर जाने वाली लड़कियों ने मुझे पहले नशे का एडिक्ट बनाया। वह बाहर जाती थी तो मुझे भी ले जाया करती थी। हॉस्टल की गलत लड़कियों के साथ उठते-बैठते मैं भी उनके साथ इन्वॉल्व हो गई। लड़कियों ने बॉयफ्रेंड बनवा दिया। इसके बाद आईफोन और महंगे कपड़े के साथ लग्जरी लाइफ वाली जिंदगी जीने लगी। लड़कियां होटल तक ले जाने लगीं। कुछ ही दिनों में मैं सेक्स की एडिक्ट हो गई। फिर मेरे लिए पैसे से जरूरी सेक्स हो गया था। मैं एक दिन में 5 से 6 लड़कों के पास जाने लगी थी। सेक्स और नशे का ऐसा एडिक्शन लगा कि पढ़ाई लिखाई सब छूट गई। कभी कभी लगता था कि जिंदगी बर्बाद हो गई है। एक दिन ऐसा लगा कि मैं प्रेग्नेंट हो गई हूं। मैं भागकर काउंसलर के पास गई। काफी काउंसलिंग के बाद भी ऐसा एडिक्शन है कि मैं आजतक इससे बाहर नहीं निकल पाई हूं। पटना की हाई प्रोफाइल फैमिली में हॉस्टल से कोचिंग पढ़ने गई लड़की ने सेक्स रैकेट का नेटवर्क एक्टिव कर दिया। सेक्स एडिक्ट हुई स्टूडेंट की लंबे समय तक काउंसलिंग करने वाली काउंसलर ने पूरा ट्रेंड बताया। काउंसलर के मुताबिक पटना के एक बड़े और हाई प्रोफाइल परिवार की बेटी के लिए होम ट्यूशन लगाया गया। ट्यूशन पढ़ाने वाली लड़की पटना के बोरिंग रोड में एक गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। वह घर पर ट्यूशन के लिए आते ही धीर-धीरे स्टूडेंट और उसकी मां का ब्रेन वॉश करने लगी। मां को काले जादू की बात कहकर अपने बहकावे में ले लिया। वो उनसे पैसे ऐंठने लगी। एक वक्त ऐसा आया जब ट्यूशन टीचर ने लड़की को पूरी तरह से अपने वश में कर लिया। पहले लड़के से दोस्ती कराई फिर सूखे नशे की लत लगवा दी। देखते ही देखते पटना के एक बड़े स्कूल में पढ़ने वाली लड़की 17 साल की उम्र में सेक्स एडिक्ट हो गई। वह इस कदर सेक्स की एडिक्ट हुई कि हर दिन लड़कों के पास जाने लगी। वह खुद बड़े घर से थी, इसलिए उसे पैसे का नहीं लड़कों का नशा हो गया था। ट्यूशन टीचर और उसके साथ लड़की का बॉयफ्रेंड बनकर ब्रेनवॉश करने वाले हर दिन नए लड़कों से पैसे लेकर लड़की को उसके पास भेजते थे। काउंसलर ने बताया कि काफी समय बाद जब लड़की के पिता को पूरी कहानी पता चली तो मामला पुलिस तक पहुंचा, लेकिन इसमें इतने हाईप्रोफाइल लोग जुड़ चुके थे कि पुलिस भी कुछ नहीं कर पाई। घर वाले चाहते थे कि बेटी की जिंदगी बर्बाद करने वालों पर कार्रवाई हो, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। काउंसलर के मुताबिक मामला पुराना है, लंबे समय तक काउंसलिंग के बाद लड़की नई जिंदगी में वापस लौट आई है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने उस पीड़िता से बात की जिसे हॉस्टल ने कॉलगर्ल बना दिया है। वह कैमरे के सामने आकर अपनी बात रखने को तैयार नहीं हुई। अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए लड़की ने बातचीत की है। रिपोर्टर – आप गांव से कब पटना आईं? पीड़िता – मैट्रिक के बाद, एक बड़ी कोचिंग के फ्री में पढ़ाने के ऑफर पर आई। रिपोर्टर – रहने का इंतजाम कोचिंग ने कराया? पीड़िता – कोचिंग वालों ने कहा, हॉस्टल देख लो, फिर राजीव नगर में एक गर्ल्स हॉस्टल में शिफ्ट हुई। रिपोर्टर – हॉस्टल का माहौल कैसा था? पीड़िता – बस बाहर से ठीक था, अंदर से अजीब। रिपोर्टर – क्यों? पीड़िता – वार्डन बोलती थी – तुम जैसी होनहार को आगे बढ़ाना मेरा काम है। रिपोर्टर – पढ़ाई में कैसी थीं? पीड़िता – मैं पढ़ाई में क्लास और स्कूल टॉपर थी। रिपोर्टर – फिर कैसे सब कुछ हुआ? पीड़िता – एक दिन वार्डन बोली – चलो बाहर खाना खाते हैं। लग्जरी लाइफ का सपना दिखाकर बनाते हैं सेक्स एडिक्ट पीड़िता ने बातचीत में बताया कि कोई भी लड़की हॉस्टल में आई तो वहां वह एजेंट की रडार पर होती है। वहां बाहर काम करने वाली भी लड़कियां होती हैं, वही पढ़ने वाली लड़कियों को बर्बाद करती हैं। पटना के अधिकतर हॉस्टल में ऐसा ही चलता है, पढ़ाई और तैयारी करने के अलावा हॉस्टल में बाहरी लड़कियों को इसीलिए रखा ही जाता है। रिपोर्टर – आपके साथ फिर क्या हुआ? पीड़िता – पहले रेस्टोरेंट, फिर मॉल। इस बीच आईफोन और महंगे कपड़ों का गिफ्ट। रिपोर्टर – किसने ऐसा किया? पीड़िता – वार्डन के साथ दो-तीन और लड़कियां आती थीं, खुद को सीनियर बताती थीं। रिपोर्टर – वार्डन की भूमिका क्या रही? पीड़िता – वही सब कुछ थी, उसने कहा- कुछ अच्छे लड़के रईस घरों के हैं दोस्ती कर लो। रिपोर्टर – ऐसा क्यों बोलती थी? पीड़िता – कहती दोस्ती करोगी तो पैसे की दिक्कत नहीं होगी, पढ़ाई भी चलती रहेगी। रिपोर्टर – आपने दोस्ती की? पीड़िता – दोस्ती हुई, फिजिकल हुई फिर आम लोगों के लिए सब कुछ हो गया। रिपोर्टर – आपने मना नहीं किया? पीड़िता – किया था, लेकिन हॉस्टल खाली कराने लगी। रिपोर्टर – क्या यह सब अकेले आपके साथ हुआ? पीड़िता – नहीं, हॉस्टल में और भी लड़कियां थीं, सबके साथ नहीं, लेकिन जो मजबूर थीं, उनके साथ होता है। रिपोर्टर – सबके साथ ऐसा नहीं होता? पीड़िता – सबकी कहानी अलग-अलग है, कोई गांव तो कोई छोटे शहर से आता है, लेकिन अंत एक जैसा। रिपोर्टर – सिंडिकेट कैसे काम करता है? पीड़िता – पहले भरोसा, फिर लालच, फिर डर। वार्डन ही करती है लड़कियों का ब्रेनवॉश पीड़िता ने बताया कि वार्डन ही लड़कियों का ब्रेनवॉश करती है। हॉस्टल संचालक अधिकतर वार्डन बाहर से लाते हैं। पटना में अधिकतर वार्डन झारखंड और बंगाल की है। इस कारण से वहां की लड़कियां रहती है जो पटना में स्पा सेंटर से लेकर अन्य काम करती हैं। रिपोर्टर – लड़कियां कैसे फंसती हैं? पीड़िता – वार्डन ही सेट करती है, पैसे सीधे उसके पास जाते हैं, लड़की को इतना दिया जाता है ताकि चुप रहे। रिपोर्टर – कितना मिलता है? पीड़िता – पहले तो ज्यादा मिलता था, अब बहुत कम। रिपोर्टर – कितना? पीड़िता – अब 1500 से 1000 रुपए। रिपोर्टर – क्या निकलने की कोशिश की? पीड़िता – कई बार, लेकिन नहीं निकल पाई। रिपोर्टर – सबसे ज्यादा तकलीफ किस बात की है? पीड़िता – मेरी मेहनत, मेरी होशियारी, सब बेकार हो गई। रिपोर्टर – डर कब लगता है? पीड़िता – यहां सब कुछ नाम से चलता है, नाम बाहर आ गया तो घर तक बात पहुंच जाएगी। मेरे पापा ये बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे… फिर मैं भी नहीं रह पाऊंगी। रिपोर्टर – परिवार में कौन-कौन है? पीड़िता – पिताजी किसान हैं, मां अनपढ़ हैं, लेकिन चाहती थीं कि मैं पढ़ूं। दो छोटे भाई हैं, उनके लिए भी मुझे ही उदाहरण बनना था। हमने एजेंट, वार्डन और पीड़िता से बात करने के बाद पटना के कई बड़े हॉस्टल्स संचालकों से झारखंड की कॉलगर्ल को हॉस्टल में स्टूडेंट्स के साथ रखने की डील की। पटना में शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई घटना के बाद पुलिस की सख्ती के बीच हॉस्टल संचालक स्टूडेंट्स के साथ बाहरी लड़कियों को रखने को तैयार हो गए। इन्वेस्टिगेशन के दौरान स्टिंग ऑपरेशन में बेरिंग रोड के हॉस्टल मैनेजर कुलदीप ने तो लड़कियों को फ्री हैंड रखने का दावा किया। रिपोर्टर – मुझे 6 लड़कियों को हॉस्टल में रखना है? कुलदीप – ठीक है, बोरिंग रोड में, पानी टंकी मोड़ के पास है। रिपोर्टर – सभी झारखंड की रहने वाली हैं, क्या सुविधा मिल पाएगी? कुलदीप – खाने और रहने की सुविधा है। रिपोर्टर – आने–जाने में कोई परेशानी तो नहीं? कुलदीप – कभी भी आ-जा सकती हैं, 9 बजे तक गेट खुलता है, लेट होने पर कॉल करेंगी। रिपोर्टर – देखिए, बाद में चिक-चिक नहीं होना चाहिए, लड़कियां कब आ जा रही हैं। कुलदीप – कोई परेशानी नहीं है, पूरी स्वतंत्रता है। रिपोर्टर – अभी कौन सी लड़कियां हैं आपके वहां? कुलदीप – सब पढ़ने वाली हैं, कुछ जॉब वाली भी हैं। रात में लड़की नहीं आए तो कोई टेंशन ही नहीं हॉस्टल मैनेजर कुलदीप ने बातचीत में कहा, लड़कियां अगर देर रात में आएंगी तो कॉल करना होगा। क्योंकि गेट रात 9 बजे ही बंद हो जाता है। अगर रात में नहीं आती हैं तो भी कोई टेंशन ही नहीं। रिपोर्टर – रात में बहुत लेट हुआ तो लड़की सुबह आएगी। कुलदीप – तब तो ठीक है, कोई टेंशन ही नहीं। रिपोर्टर – ये पढ़ने वाली लड़कियां नहीं हैं। कुलदीप – हां, ठीक है, अभी मेरे यहां बंगाल की चार लड़कियां आई थीं। रिपोर्टर – मतलब बंगाल की लड़कियां भी रहती थीं? कुलदीप – हां, चारों लड़कियां एक साथ आई थीं, सभी टॉप फ्लोर पर रहती थीं। रिपोर्टर – पढ़ने वाली लड़कियां कहां रहती हैं? कुलदीप – वह नीचे फ्लोर पर हैं, पढ़ाई वाली नहीं तो एक ही कमरे में रह सकती हैं। रिपोर्टर – सभी स्पा सेंटर में काम करती हैं।कुलदीप – अच्छा, स्पा में? कोई बात नहीं, कुछ भी करती हों, खुलकर बता दीजिएगा। रिपोर्टर – बाकी आपका कोई नियम कानून? कुलदीप – कोई नहीं, बस आधार और फोटो देना होगा। कहां की लड़कियां हैं सब? रिपोर्टर – झारखंड वाली हैं सब। कुलदीप – जो भी बात हो, स्पष्ट रहे ताकि बाद में कोई दिक्कत नहीं हो। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पटना के बोरिंग रोड स्थित गर्ल्स हॉस्टल चलाने वाले कुलदीप ने खुलासा कर दिया कि कैसे बाहरी लड़कियों को पढ़ने वाली लड़कियों के साथ हॉस्टल में रखा जाता है। कुलदीप बंगाल की लड़कियों को हॉस्टल में स्टूडेंट्स के साथ रखता है। पटना में बंगाल और झारखंड की लड़कियां ही अधिक संख्या में कॉलगर्ल का काम कर रही हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पहले भी यह खुलासा हुआ है कि हॉस्टल से लड़कियों को नेताओं के पास भेजा जाता है। इसकी पुष्टि हमारी इन्वेस्टिगेशन में झारखंड की रहने वाली पटना के एक बड़े गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन मिस्टी की है। इन्वेस्टिगेशन के दौरान मिस्टी हमें नेताओं को लड़कियां सप्लाई करने वाली गैंग से मिलाने झारखंड ले गई थी। यहां कई नेताओं से मिलवाई जो लड़कियां सप्लाई करते हैं। जब झारखंड के नेताओं ने लड़कियों को पटना में सेफ रखने की बात कही तो मिस्टी ने दावा किया था कि ऐसी लड़कियों को हॉस्टल में पढ़ने वाली लड़कियों के साथ रखती है। मिस्टी ने नेताओं के सामने दावा किया कि वहां रहने वाली सभी लड़कियां सीधे उसकी निगरानी और नियंत्रण में रहेंगी। मिस्टी ने कहा वहां मैं ही सब कुछ हूं। मिस्टी ने कहा, मैं ही वार्डन हूं, इसलिए पूछताछ भी मैं ही करूंगी। मिस्टी ने यह भी बताया कि उस हॉस्टल में किसी तरह की ज्यादा पूछताछ नहीं होती और न ही कोई रोक-टोक है। ऐसे कई हॉस्टल का खुलासा किया था जहां पढ़ने वाली लड़कियों को रखा जाता है जो नेताओं की डिमांड पर भेजी जाती हैं। मिस्टी तक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को पहुंचाने वाली कड़ी राहुल बना था। राहुल पटना के स्पा सेंटर में लड़कियां सप्लाई करता है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में वह पहले ही खुलासा कर चुका है कि कोचिंग के नाम पर लड़कियों को टेस्ट दिलाकर पटना लाया जाता है, इसके बाद उनका ब्रेनवॉश कर स्पा सेंटर में लगा दिया जाता है। एजेंट बनकर जब भास्कर रिपोर्टर राहुल से मिला तो उसने हॉस्टल की लड़कियों की सप्लाई की पूरी चेन बताई। राहुल ने बताया कि उसके जैसे पटना में सैकड़ों लड़के काम करते हैं। वह गांव और अन्य छोटे शहरों से लड़कियों को टेस्ट लेकर मुफ्त पढ़ाई के नाम पर पटना लाते हैं। इसके बाद उन्हें हॉस्टल में रखा जाता है। इन्हीं में से कुछ लड़कियों को वह अपने काम में लगा देते हैं। राहुल ने खुलासा किया कि वह कई तरह का काम करता है, जॉब और एजुकेशन से भी जुड़ है। इसलिए इस क्षेत्र में लड़कियों से अक्सर संपर्क होता है, लेकिन हर लड़की से एक जैसा व्यवहार या बात नहीं की जा सकती। सबसे पहले लड़कियों को रीड किया जाता है फिर उनका ब्रेन वॉश किया जाता है। अगर लड़की अपने सांचे में फिट हो गई तो उसे काम में लगा दिया जाता है। राहुल ने बताया, यह समझना पड़ता है कि सामने वाली लड़की का स्वभाव कैसा है, उसकी सोच क्या है और उसकी पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि क्या है। बिना समझे सीधे कोई बात कहना कई बार गलत भी साबित हो सकता है। इसलिए उसकी पूरी टीम बड़ी सावधानी से काम करती है। हमारे काम का दायरा काफी बड़ा है इसी सिलसिले में हाल ही में हम लोग मोतिहारी गए थे, जहां एक कोचिंग संस्थान की ओर से एजुकेशन कैंप लगाया गया था। उस कैंप का मकसद छात्रों, खासकर लड़कियों को टारगेट करना था और उन्हें कोचिंग से लेकर हॉस्टल तक पहुंचाना था। अब जानिए एक्सपर्ट क्या कहते हैं हॉस्टल से बड़ा रैकेट जुड़ा है जो लड़कियों को कॉलगर्ल बना रहा क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रतिभा सिंह बताती हैं कि, लड़कियां छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर महानगरों में आती हैं। वो सोचती हैं कि यहां आकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलेंगी और अपनी जिंदगी बेहतर बनाएंगी। पटना जैसे शहरों में बड़ी संख्या में हॉस्टल हैं, जहां से ऐसे कई केस हमारे पास आते हैं। इन लड़कियों के सपनों को जानबूझकर और बड़ा दिखाया जाता है।



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