शिविर में आए 121 आवेदन, 42 फूड लाइसेंस मौके पर ही जारी




हनुमानगढ़| जिले में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन के लिए गुरुवार को जंक्शन स्थित दुर्गा मंदिर धर्मशाला में शिविर लगाया गया। सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि शिविर में कुल 121 खाद्य लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन के आवेदन आए जिनमें से 42 आवेदनों को मौके पर ही फोस्कोस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन इन्द्राज कर रजिस्ट्रेशन किए। शेष आवेदनों की जांच एवं प्रक्रिया नियमानुसार की जा रही है। डॉ. शर्मा ने बताया कि शिविर में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुदेश कुमार व रफीक मोहम्मद ने उपस्थित सभी खाद्य कारोबारकर्ताओं को खाद्य सामग्री की स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण, खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, साफ बर्तन एवं स्वच्छ कार्यस्थल बनाए रखने के निर्देश दिए। सीएमएचओ ने बताया कि 27 जनवरी को भादरा स्थित लुहारीवाली धर्मशाला एवं 30 जनवरी को पीलीबंगा के व्यापार मंडल भवन में भी खाद्य लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने अधिकाधिक खाद्य कारोबारियों से इन शिविरों का लाभ उठाने की अपील की।



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नरेगा में किए बदलावों का विरोध किया




श्रीगंगानगर| महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष कमला बिश्नोई की ओर से मनरेगा महिला कर्मियों के साथ बैठक ग्राम पंचायत 3-ई छोटी व 2 एमएल में की गई। बैठक में कांग्रेस पार्टी की ओर से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साइन वाले पत्र सौंप कर भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर करने, इसे समाप्त करने के प्रयासों एवं उसमें किए जा रहे बदलावों की जानकारी दी गई। कमला बिश्नोई ने सरकार की इस सोच को जनता के सामने उजागर करने और इसका विरोध करने का आह्वान किया।



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बीकानेर रेलवे ट्रैक शिफ्टिंग पर हाई कोर्ट में नई उम्मीद:शहर के बीच से हटेगी रेलवे लाइन? विभाग ने कोर्ट में कहा- फिजिबिलिटी चेक करेंगे




बीकानेर शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली और दशकों से जाम का कारण बनी रेलवे लाइन को शहर से बाहर शिफ्ट करने की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है। राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में रेलवे विभाग ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि वे शहर के बीचोंबीच से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक को ही शिफ्ट करने की संभावना तलाशेंगे। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने गुरुवार को रामकृष्ण दास गुप्ता बनाम राजस्थान राज्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए रेलवे के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया है। फिजिबिलिटी मिली तो हट जाएगा ट्रैक सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वे रेलवे के सक्षम अधिकारियों के साथ मिलकर बीकानेर शहर से रेलवे ट्रैक को पूरी तरह हटाने/शिफ्ट करने की संभावना पर विचार-विमर्श करेंगे। वकील ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि – “यदि ट्रैक को शिफ्ट करना व्यावहारिक (फिजिबल) पाया गया, तो रेलवे द्वारा बीकानेर शहर से रेलवे ट्रैक को हटाने के लिए उचित कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी।” रेलवे के वकील ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विभाग के साथ होने वाली चर्चा और उसके परिणामों को कोर्ट के सामने रखने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए मामले की मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी तय की है। कोटगेट-सांखला फाटक: दशकों का दर्द बीकानेर शहर के बीच से गुजरने वाला यह ट्रैक पिछले 40 सालों से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। यह ट्रैक शहर के मुख्य बाजारों, विशेषकर कोटगेट और शीतला गेट (सांखला फाटक) के बीच से गुजरता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यहां से रोजाना 30 से 35 ट्रेनें गुजरती हैं, जिससे हर आधे-एक घंटे में फाटक बंद होते हैं और पूरा शहर जाम हो जाता है। एलिवेटेड रोड बनाम ट्रैक शिफ्टिंग अब तक इस समस्या के समाधान के लिए एलिवेटेड रोड या अंडरपास बनाने की बात होती रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों में भी यह एक बड़ा मुद्दा था, जहां तत्कालीन नेताओं ने एलिवेटेड रोड का वादा किया था। लेकिन स्थानीय व्यापारी और निवासी इसे शहर के विकास में बाधा मानते हुए ट्रैक को ही बाहर शिफ्ट करने की मांग कर रहे थे। व्यापारियों व स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल इमरजेंसी में फाटक बंद होना जानलेवा साबित होता है। अब हाई कोर्ट में रेलवे के ताजा रुख से शहरवासियों को उम्मीद जगी है कि पुल या अंडरपास के बजाय, जो कि अस्थायी समाधान थे, अब ट्रैक शिफ्टिंग जैसा स्थायी समाधान मिल सकेगा। अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी नजर इस मामले की सुनवाई अब दो अन्य पुरानी याचिकाओं के साथ 19 फरवरी को होगी। गौरतलब है कि रेलवे द्वारा बीकानेर में बाईपास के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे और मेड़ता रोड-बीकानेर लाइन के दोहरीकरण जैसी योजनाएं भी पाइपलाइन में हैं, जो ट्रैक शिफ्टिंग की दिशा में सहायक हो सकती हैं।



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नेशनल फायर सर्विस टूर्नामेंट:देश में पहली बार अग्निशमन कर्मचारियों का नेशनल खेल टूर्नामेंट, 26 से उदयपुर में खेलेंगे 1500 फायर फाइटर्स



गणतंत्र दिवस पर उदयपुर में देशभर के अग्निशमन अधिकारियों और कर्मचारियों का नेशनल फायर सर्विस टूर्नामेंट होगा। खास बात यह है ऐसा आयोजन देश में पहली बार हो रहा है। टूर्नामेंट में 1500 से अधिक फायर फाइटर्स विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में अपनी शक्ति, कौशल औ

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आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि टूर्नामेंट में एथलेटिक्स, आर्म रेसलिंग, बैडमिंटन, क्रिकेट, लॉन टेनिस, टेबल टेनिस, कुश्ती, सीढ़ी दौड़, मस्टर, ‘सबसे ताकतवर अग्निशामक’ और ‘अल्टीमेट फायर फाइटर’ जैसी विशेष प्रतियोगिताएं शामिल होंगी। टूर्नामेंट का समन्वय मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी करेंगे। इस दौरान उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त अग्निशमन अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

23 को फील्ड क्लब में उद्घाटन

टूर्नामेंट का भव्य उद्घाटन 23 जनवरी को फील्ड क्लब में होगा। कार्यक्रम में यूडीएच मंत्री जाबर सिंह खर्रा, कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद मन्नालाल रावत, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, सहित कई विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और अग्निशमन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।

व्यापक व्यवस्थाएं

आयुक्त खन्ना ने बताया कि प्रतिभागियों के ठहराव, भोजन, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, यातायात और स्वच्छता को लेकर विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है। नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग के बीच समन्वय स्थापित किया गया है।



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Rajasthan SIR List Errors | Living Declared Dead; Bhaskar Investigation


ऊपर तस्वीर में नजर आ रहे शख्स नसीबा खां जमींदार हैं। वहीं, 80 साल की मौजबी वार्ड पंच हैं।

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शर्मनाक लापरवाही है कि SIR की प्रक्रिया में इन्हें मरा हुआ मान लिया गया है। सिर्फ इन्हें ही नहीं, अलवर के एक गांव में 16 लोगों को इसी तरह कागजों में मरा हुआ मान लिया गया है।

भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में ये सच सामने आया है।

इतना ही नहीं, एक युवती को 2 बार घर से भागी हुई बताकर लिस्ट से नाम काट दिया गया। इतनी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी कि युवती ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। एक केस में युवक के माता-पिता को मरा हुआ बता दिया। पत्नी को शिफ्टेड और अविवाहित बेटी को शादीशुदा बताकर नाम काट दिया।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

नसीबा खां जमींदारी करते हैं और घर पर ही रहते है।

नसीबा खां जमींदारी करते हैं और घर पर ही रहते है।

केस-1 : घर में चारपाई पर बीड़ी पीते मिले नसीबा खां

बेरेबास गांव के नसीबा खां को SIR की प्रक्रिया में मृत मान लिया गया। भास्कर रिपोर्टर उनके घर पहुंचा तो वो चारपाई पर बीड़ी पीते मिले। रसोई में एक महिला खाना बना रही थी। रिपोर्टर ने नसीबा खां से बात की तो बोले- 68 साल का हूं। जिंदा भी हूं। पता नहीं कैसे लिस्ट में मरा हुआ मान लिया।

घर पर बीएलओ आए तो उन्हें फाॅर्म भरकर भी दिया था। अब मैंने एसडीएम आफिस जाकर अपने दस्तावेज दिए हैं और आपत्ति दर्ज कराई है। नसीबा खां जमींदारी करते हैं और घर पर ही रहते है। लिस्ट में क्रम संख्या- 1027 में 83 बूथ नंबर पर नसीबा का नाम है। नसीबा का वोटर नंबर 535 है। इन्हें सूची में मृत माना गया है। बीएलए नवाब की ओर से लिस्ट दी गई है।

लिस्ट में नसीबा के नाम के आगे मृत लिखा है।

लिस्ट में नसीबा के नाम के आगे मृत लिखा है।

वार्ड पंच मौजबी का कहना है कि उन्होंने फॉर्म भरकर जमा भी कराया था। इसके बावजूद उन्हें मृत बता दिया।

वार्ड पंच मौजबी का कहना है कि उन्होंने फॉर्म भरकर जमा भी कराया था। इसके बावजूद उन्हें मृत बता दिया।

केस-2 : जिस वार्ड पंच को मरा हुआ बताया, वो घर पर आराम करती मिलीं

लिस्ट में बेरेबास गांव की वार्ड पंच मौजबी को मरा हुआ बताया गया है। भास्कर रिपोर्टर उनके घर पहुंचा। उस वक्त मौजबी आराम कर रही थीं। क्रम संख्या 1060 में उनका नाम लिखा हुआ है। बूथ नंबर 83 पर वोटर नंबर 301 पर उनका नाम रिकॉर्ड दर्ज है। उनके नाम पर नवाब खां ने आपत्ति लगाई है।

80 साल की मौजबी बोलीं- पता नहीं किसी ने क्या दुश्मनी निकाली है। बीएलए फाॅर्म भरवाने आया था। फाॅर्म भरवाकर जमा भी करवा दिया था। इसके बावजूद मेरा नाम मृतकों की सूची में डाल दिया। इसके बाद एसडीएम के पास गए थे, लेकिन वे मिले ही नहीं। गांव में हम दो वार्डपंच हैं।

वार्ड पंच मौजबी को भी लिस्ट में मरा हुआ बता दिया गया।

वार्ड पंच मौजबी को भी लिस्ट में मरा हुआ बता दिया गया।

केस-3 : लिस्ट में युवती का 2 बार घर से भागना बताया

इन्वेस्टिगेशन के दौरान भास्कर रिपोर्टर ने रामगढ़ विधानसभा के बूथ नंबर 93 की लिस्ट देखी। लिस्ट में एक युवती को घर से दो बार भागना बताया गया। रिपोर्टर युवती के पिता तक पहुंचा। पिता बोले- बच्ची घर पर ही मौजूद है। उसकी अभी शादी भी नहीं हुई है। बीएलए आए थे तो फार्म और फोटो भी लगाकर दी थी। न फिर भी घर से भागने का कारण बता कर नाम काटने की आपत्ति दर्ज कराई गई है। बच्ची का शर्म से घर से निकलना मुश्किल हो गया है। पूरे गांव में ये बात फैल गई है।

केस-4 : माता-पिता को मृत, बेटी को विवाहित बताया

गांव की पंचायत में हमीर मिले। हमीर ने बताया- मेरे परिवार के पांच लोगों के नाम काट दिए हैं। हमीर ने बताया कि उन्होंने बीएलए नवाब खां से बात की तो वो बोला कि मुझे कोई जानकारी नहीं है, जबकि नवाब के नाम से नाम काटने की एप्लीकेशन लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि वे खुद इस बार सरपंच पद के लिए तैयारी कर रहे थे। पंचायत ही खत्म कर दी गई है और परिवार के ही नाम लिस्ट से काटे जा रहे है तो कैसे चुनाव लड़ पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर एक ही पार्टी को सपोर्ट करने वाले लोगों के नाम काटे जा रहे है।

भाजपा-कांग्रेस के बीएलए बोले-हमने कोई नाम नहीं काटे, न ही सूची भेजी

बेरेबास गांव में कांग्रेस के बीएलए हकमुद्दीन का कहना है कि बीएलओ इस्लाम खां है। उनके साथ हमने घर-घर जाकर फाॅर्म बांटे थे। फाॅर्म पूरे करके जमा भी करवा दिए थे। अंतिम सूची में भी नाम सहीं थे। बाद में लिस्ट में काफी परिवर्तन मिला। लिस्ट में 106 नाम काटे गए हैं। 16 जिंदा लोगों को मृतक बता दिया। हमारी ओर से कोई आपत्ति नहीं लगाई गई है। मेरी मां वार्डपंच है। उनका नाम भी मृत बता कर काट दिया गया है।

भाजपा के बीएलए नवाब खां ने बताया कि गांव के लोग काफी नाराज है। उनके नाम गलत तरीके से काट दिए गए हैं। मेरे परिवार के ही कई लोगों के नाम काट दिए गए है। मेरे नाम से एप्लीकेशन लगाई गई है, वो मैंने नहीं लगाई। मैंने एसडीएम से भी बात की है लेकिन उन्होंने भी कुछ नहीं बताया। अब हमने लोगों के नाम वापस जोड़ने को लेकर आपति दर्ज कराई है।

बीएलओ इस्लाम बोले : मैंने सही फॉर्म भरकर भेजे, मृत कैसे माना, पता नहीं

भास्कर ने मामले में बीएलओ इस्लाम से बात की। उनका कहना है कि मैंने तो सभी के नाम सही से भरकर जमा करवा दिए थे। बाद में उनके नाम मृतकों की सूची में कैसे आ गए, मुझे कोई जानकारी नहीं है। जिनके नाम से आपत्ति लगाई गई है, उन्हें भी नहीं पता है। सूची में केवल नाम और संख्या दी गई है जबकि पता और मोबाइल नंबर भी दिया जाना चाहिए। मैं नया हूं। आगे क्या होगा मुझे कोई जानकारी नहीं है।

वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के हजारों फाॅर्म मिले

उल्लेखनीय है कि करीब एक सप्ताह पहले अलवर में रिटर्निग अधिकारी की टेबल पर काफी संख्या में फाॅर्म रखे हुए थे। अलवर के खैरथल-तिजारा के कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने बताया कि वे जब रिटर्निग अधिकारी के ऑफिस पहुंचे थे तो करीब 20 हजार से ज्यादा फाॅर्म रखे हुए थे। ये फाॅर्म वोटरों के नाम काटने के रखे हुए थे। किसी को पता ही नहीं था कि ये फाॅर्म कहां से आए? उनकी टेबल पर कैसे पहुंचे? पूछताछ करने पर कर्मचारी ऑफिस से निकलकर चले गए। किसी ने कोई जवाब नहीं दिया था। उन्होंने फार्म देखे तो पता लगा कि ज्यादातर की लिखावट एक जैसी थी और एक ही नाम से 300 से 500 तक आपत्तियां आई थीं। ये फार्म अलवर ग्रामीण, रामगढ़, तिजारा, किशनगढबास, थानागाजी से आए हुए थे।

वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर की टेबल पर रखे हजारों फॉर्म।

वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर की टेबल पर रखे हजारों फॉर्म।

बेरेबास सरपंच बोले : पंचायत खत्म की, अब लोगों के नाम काटे

अलवर की रामगढ़ विधानसभा के बेरेबास गांव के सरपंच विनय वर्मा का कहना है कि मैं गांव का पहला सरपंच हूं। अब आखिरी भी हो गया हूं। 2019 में परिसीमन के बाद बेरेबास को पंचायत बनाया गया था। हमने जमीन खरीद कर पंचायत भवन बनाने के लिए दान की। इसके बाद सरकार ने 70 लाख रुपए बजट पास किया। पंचायत भवन भी नया बनाया गया। पटवारी ऑफिस से लेकर मीटिंग हॉल और सोफे से लेकर सारा फर्नीचर नया लगाया गया। लेकिन अब सब बेकार हो गया है।

वे बोले कि SIR प्रक्रिया में गांव के 106 लोगों के नाम काट दिए गए है। जीवित लोगों को मृत बता दिया। एक वार्डपंच को भी मृतक बता कर नाम काट दिया गया है जबकि वे हर मीटिंग और प्रशासन के सारे काम में आती जाती है।

उनके गांव बेरेबास में पहले दो गांव शामिल थे और कुल 1364 वोटर्स थे। उनका बूथ नंबर 83 है। अब उनके गांव के 844 वोटर हैं। इनमें 400 महिलाएं और 444 पुरुष है। दूसरे गांव को अलग कर दिया गया है। गांव में कांग्रेस के बीएलए हकमुकद्दीन और भाजपा के नवाब खां हैं।

14 फरवरी को होगी फाइनल वोटर लिस्ट

SIR प्रक्रिया में 7 फरवरी तक आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। इसके बाद 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया जाएगा। वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आएगा। हालांकि इसके बाद बीएलओ के जरिए आप अपना नाम वोटर लिस्ट में अपने दस्तावेज देकर जुड़वा सकेंगे।

पूरे राजस्थान में 41.85 लाख वोटर्स के नाम काटे

राजस्थान में SIR प्रक्रिया में 41.85 लाख वोटर्स के नाम काट दिए गए है। वोटर लिस्ट को निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। लिस्ट में 29.6 लाख परमानेंट शिफ्ट बताए गए और 8.75 लाख को मृतक बताया गया है। लिस्ट आने के बाद वोटर्स के नामों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। लिस्ट में ज्यादातर वोटर्स पलायन, विवाहित, मृत्यु, गलत, दोहरीकरण वोट बता कर आपत्ति बताकर नाम काटे गए हैं। अलवर, डीडवाना-कुचामन, झुंझुनूं सहित कई जिलों में लोगों में इसे लेकर गुस्सा है।

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राजस्थान में SIR से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…

15 मंत्रियों के इलाकों में जीत से ज्यादा वोट कटे:भजनलाल-गहलोत के इलाके में भी जीत से ज्यादा नाम कटे, जानिए वसुंधरा-पायलट के इलाके की स्थिति

राजस्थान में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सीएम, विधानसभा स्पीकर और 15 मंत्रियों के इलाकों में उनके जीत के अंतर से ज्यादा वोट कट गए हैं। सबसे ज्यादा दूसरी जगह शिफ्ट होने वाले और मृत वोटर्स के नाम हटाए गए हैं। पूरी खबर पढ़िए…



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मेडिकल शिक्षा विभाग और आरसीडीएफ के बीच एमओयू:एसएमएस मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के 81 अस्पतालों में खुलेगी ‘सरस कैंटीन व फूड कोर्ट’




एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर, जेएलएन अजमेर, एसएन जोधपुर, आरएनटी उदयपुर, एसपी बीकानेर, कोटा राजमेस से जुड़े 81 अस्पतालों में सरस कैंटीन एवं फूड कोर्ट खुलेंगे। मेडिकल शिक्षा विभाग और आरसीडीएफ के बीच 5 साल के लिए एमओयू हुआ है। मरीजों, परिजनों एवं डॉक्टर्स को स्वच्छ व क्वालिटी युक्त सरस उत्पाद जैसे दूध-जलेबी, समोसा, आइसक्रीम, दही-छाछ, पनीर पकोड़े, मिठाइयों के साथ ब्रेकफास्ट, लंच व डिनर मिल सकेगा। मसाला डोसा, इडली सांभर, खिचड़ी, दलिया और पानी की बोतल भी मिलेगी। पहले फेज में एसएमएस अस्पताल में तीन जगह फूड कोर्ट खुलेंगे। 6 माह में सभी 81 अस्पतालों में सरस कैंटीन एवं फूड कोर्ट प्रस्तावित है। आरसीडीएफ अस्पतालों में कैंटीन/फूड कोर्ट के लिए जगह 111 रुपए प्रतिमाह किराए पर देगा। सारी व्यवस्था आरसीडीएफ की होगी। चिकित्सा मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली मीटिंग में होगा अंतिम निर्णय सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में खुलने वाली सरस कैंटीन एवं फूड कोर्ट के लिए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की अध्यक्षता में जल्द मीटिंग होगी। इसमें सस्ती दरों पर शुद्ध एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने, बैठने की व्यवस्था, फूड सेफ्टी एक्ट, मॉनीटरिंग, खुला रखने का समय और निर्माण यूनिट आदि का निर्णय लिया जाएगा। इसमें मेडिकल शिक्षा विभाग, आरसीडीएफ के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य व अधीक्षक उपस्थित रहेंगे। “सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में सरस कैंटीन व फूड कोर्ट खोलने के लिए आरसीडीएफ से करार हुआ है। जगह चिह्नित की जा रही है।”
-नरेश कुमार गोयल, आयुक्त, मेडिकल शिक्षा



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जयपुर-आंधी के साथ बारिश, आज 14 जिलों के लिए अलर्ट:ओले गिरने की भी चेतावनी, कल से हो सकता है घना कोहरा




राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के एक्टिव होने के साथ ही मौसम में बड़ा बदलाव हो गया है। जयपुर में शुक्रवार सुबह से धूल भरी हवा के साथ हल्की बारिश भी हो रही है। मौसम विभाग में ने आज 14 जिलों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, 11 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। कल से घने कोहरे और शीतलहर की भी चेतावनी है। गुरुवार को सरहदी जिले (जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, गंगानगर, जोधपुर) समेत उनके आसपास के कई जिलों में गुरुवार दोपहर बाद हल्की बारिश हुई। वहीं, नागौर, जोधपुर, चूरू, फलोदी, बीकानेर, सीकर, झुंझुनूं, अजमेर के अलावा जयपुर के कुछ हिस्सों में देर रात बादल छाए। बादल छाने के बाद रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज हुई। तेज सर्दी से राहत रही। गुरुवार को अधिकांश शहरों का न्यूनतम तापमान डबल डिजिट यानी 10 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज हुआ। जयपुर हल्की बरसात, आंधी भी चली शुक्रवार सुबह से जयपुर का मौसम बदला हुआ है। आंधी के साथ रुक-रुककर हो रही बूंदाबादी से अचानक मौसम बदल गया है। हवा ठंडी होने से एक बार फिर सर्दी लौटती महसूस हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में आज ओले भी गिर सकते हैं। गुरुवार को भी 5 से ज्यादा जिलों में हल्की बरसात हुई। इस नए सिस्टम का असर 24 जनवरी को खत्म होगा और प्रदेश में घना कोहरा पड़ेगा। इस दिन जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, जयपुर, अलवर, दौसा, धौलपुर, करौली, भरतपुर और सवाई माधोपुर जिलों में कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। 25 जनवरी को जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, जयपुर, अलवर, दौसा, भरतपुर जिलों में कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है।



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हाईकोर्ट: हाईवे किनारे से हटाओ अवैध धर्मकांटे व निर्माण:बस-ट्रेलर भिड़ंत में 4 की मौतों पर कोर्ट सख्त, कहा- 6 फरवरी तक खुद हटा लो, वरना…




जोधपुर में रिंग रोड और हाईवे पर अवैध रूप से चल रहे धर्मकांटों (रॉयल्टी नाकों) के कारण हुए हाल ही में बस-ट्रेलर हादसे में 4 लोगों की मौत को राजस्थान हाई कोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि हाईवे के केंद्र बिंदु से 75 मीटर के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माण 6 फरवरी तक हटा लिए जाएं। याचिकाकर्ता हिम्मतसिंह गहलोत की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित पक्ष ने 6 फरवरी तक अवैध निर्माण नहीं हटाया, तो प्रशासन 9 फरवरी तक उसे ध्वस्त करके इसकी रिपोर्ट पेश करे। कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- 4 जानें गईं, हम मूकदर्शक नहीं रह सकते “आम तौर पर हम इस स्तर पर ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिसमें दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई है, यह कोर्ट मूकदर्शक नहीं बना रह सकता।” वकील ने दी अंडरटेकिंग: हम खुद हटा लेंगे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब प्रतिवादी पक्ष (मैसर्स रिद्धि सिद्धि व अन्य) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने कोर्ट में अंडरटेकिंग दी। एडवोकेट आचार्य ने तर्क दिया कि अगर कोई निर्माण हाईवे के नियमों (मध्य बिंदु से 75 मीटर के भीतर) का उल्लंघन कर रहा है, तो उनकी पार्टी 6 फरवरी तक उसे “स्वतः संज्ञान” लेते हुए खुद हटा लेगी। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि 6 फरवरी तक ऐसा नहीं होने पर, जिम्मेदार अधिकारी 9 फरवरी तक कार्रवाई सुनिश्चित करें। पुराना आदेश संशोधित, स्टे का लाभ नहीं मिलेगा गौरतलब है कि इससे पहले 20 जनवरी को एकल पीठ ने एक अन्य याचिका (मैसर्स रिद्धि सिद्धि हाउसिंग प्रा. लि. बनाम जेडीए) में ‘दंडात्मक कार्रवाई’ पर रोक लगा दी थी। खंडपीठ ने इस आदेश को संशोधित करते हुए स्पष्ट किया कि, “लागू मानदंडों का पालन किए बिना किया गया कोई भी निर्माण गैरकानूनी है।” कोर्ट ने कहा कि पुराने आदेश की आड़ में इंसानी जान लेने वाले हादसों की वजह बनने वाले निर्माणों को नहीं बचाया जा सकता। अधिकारियों की रिपोर्ट में खुलासा: अवैध था नाका कोर्ट के सामने सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), जेडीए और नेशनल हाईवे अथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के पत्र भी रखे गए, जिनसे अवैध गतिविधियों की पुष्टि हुई: पूरे राजस्थान में जांच के आदेश कोर्ट ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए एनएचएआई और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे पूरे राजस्थान में नेशनल हाईवे के आसपास हो रहे अवैध निर्माणों (दूरी के नियमों का उल्लंघन) पर एक स्वतंत्र रिपोर्ट और शपथ पत्र पेश करें। कोर्ट ने पूछा है कि वे यह सुनिश्चित कैसे करेंगे कि भविष्य में ऐसे अवैध निर्माणों से हादसे न हों। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को होगी।



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बच्चों को पशु कल्याण संबंधी सामग्री पढ़ाने के दिए निर्देश, 13 फरवरी तक पशु कल्याण जागरूकता माह



भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों पर सिर्फ विद्यार्थियों को पढ़ाने और अनुशासन सिखाने के साथ अब एक और नई जिम्मेदारी सौंपी है। विभाग के नए आदेश में पशु प्रेम जाहिर किया है। इसके तहत एक महीने तक स्कूलों में बच्चों को पशु कल्याण संबंधी सामग्री पढ़ाने के लिए कहा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (गुणवत्ता एवं नवाचार) डॉ. रामगोपाल शर्मा ने प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) को पत्र भेजकर पशु कल्याण के लिए आयोजन के निर्देश दिए हैं। इस माह का उद्देश्य आधुनिक पशुपालन के तरीकों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना, आधुनिक पशुपालन गतिविधियों में सुधार एवं पशुधन के कल्याण को बढ़ावा देना है। ज्ञात रहे कि कुछ ही दिनों पूर्व विभाग की ओर से आदेश जारी किए थे, जिसमें शिक्षकों को विद्यालय से कुत्तों को भगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। विद्यार्थियों को प्रार्थना सभा तथा अन्य गतिविधियों में पशु प्रेम और संवेदनशीलता अपनाने के लिए मुख्य प्रशासनिक भवन विभाग ने पशुपालन विभाग के साथ मिलकर पशु कल्याण जागरूकता माह के आयोजन का निर्णय किया है। यह गतिविधि 13 फरवरी तक चलेगी। हालांकि बोर्ड परीक्षाएं नजदीक होने के चलते इन दिनों शिक्षकों पर पाठ्यक्रम पूरा करने का दबाव है। आदेश में विद्यार्थियों को पशुपालन विशेषज्ञों की इंटरैक्टिव क्लासरूम भी विजिट करानी होगी। यह गतिविधियां की प्रस्तावित: पशु कल्याण और पशुपालन विषयों पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता, निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, नाटक मंचन और कला प्रतियोगिता। ^ इस समय स्कूलों में शिक्षकों के पास चार महत्वपूर्ण काम है। जिसमें पाठ्यक्रम पूरा कराना, प्रायोगिक परीक्षाएं लेना, एसआईआर का काम और वार्षिक परीक्षाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना है। शिक्षा विभाग को शिक्षकों को अध्यापन कार्यों के अलावा गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखना चाहिए, जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे मेधावी विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हों। शिक्षा विभाग नित नए कार्यों का बोझ शिक्षकों पर लाद रहे हैं। – मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा



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शिक्षा विभाग:​थर्ड ग्रेड की तबादला नीति नहीं, फर्स्ट ग्रेड में पति-पत्नी दोनों जॉब में फिर भी पोस्टिंग अलग-अलग




राजस्थान के शिक्षा विभाग में शिक्षकों तथा स्कूलों की संख्या बढ़ने के बाद प्रत्येक सरकार के समय शिक्षकों के तबादलों की नीति बनाने की मांग तथा सरकारी स्तर पर केवल कार्रवाई होती रही है। अनेक स्तर पर कमेटियां बनीं, दिशा-निर्देश जारी हुए, लेकिन शिक्षकों की आज भी तबादला नीति नहीं बनी। इससे रसूखदार शिक्षक तो अपना काम निकाल रहे हैं, मगर सामान्य शिक्षक इनमें पिस रहा है। हैरानी इस बात की है कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक महिलाओं के हितों की बातें तो करते हैं, मगर ट्रांसफर में महिला हितों को दरकिनार किया जा रहा है। दरअसल 5 जनवरी 2024 को जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता परिवर्तन के बाद अफसरों के तबादलों को लेकर संदेश दिया था कि अधिकारी कभी किसी पार्टी के नहीं होते हैं। तबादलों में नेताओं की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। पांच साल सत्ता में रहते हुए समय का सदुपयोग करें और बेहतर काम करें। मगर राजस्थान में शिक्षक ट्रांसफर का खेल ही अलग है। यहां राजनीति और राजनीतिक विचारधारा के आधार पर ही ट्रांसफर होते रहे हैं। पिछली सरकार ने आरएसएस विचारधारा वाले शिक्षकों को जमकर प्रताड़ित किया और अब मौजूदा सरकार उसी का बदला लेने में पीछे नहीं है। बिना नीति के तबादले राजनीतिक आधार पर होते जा रहे हैं। इस राजनीति में वे महिलाएं भी पिस रही हैं, जो किसी नेता को न तो जानती हैं और न ही उनकी विचारधारा से जुड़ी हैं। संभ्रांत परिवार की महिलाएं नेताओं के चक्कर लगाने से बेहतर ट्रांसफर को स्वीकार करना जरूरी समझती हैं। मौजूदा सरकार ने हाल ही में लेक्चरर के तबादले किए, उसमें महिलाओं को उनके ससुराल और पीहर से दूर फेंक दिया। महिला शिक्षकों का कहना है कि उनके लिए तबादला नीति अलग होनी चाहिए, क्योंकि दूर-दराज जगहों पर जाने से उन्हें शोषण होने का डर है। महिला शिक्षकों ने भास्कर को सुनाई आपबीती ये दर्द है …इधर राहत 5 कारण… जिससे नहीं हो रहे थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादले इस सरकार में संघ पृष्ठभूमि की ही सुनवाई नहीं हाल ही में जारी हुई लेक्चरर ट्रांसफर सूची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़ी विचारधारा वाले शिक्षकों की ही सुनवाई नहीं हुई। भास्कर के पास पूरे प्रदेश में ऐसे एक-दो-तीन नहीं, बल्कि 40 से ज्यादा प्रमाण हैं, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दायित्ववान कार्यकर्ता हैं, मगर उनके साथ उन्हें सजा जैसा सलूक किया गया। “हालांकि ये नियम है कि जो महिला जहां तैनात है, वह उसी स्थान पर रहे, पर गांव में बच्चों को छोड़कर रहना मुश्किल होता है। पति-पत्नी को एक साथ रखने का भी प्रावधान है, मगर सरकारें मानती कहां हैं। मैं तो स्पष्ट स्थानांतरण नीति के पक्ष में हूं। सामान्य महिलाओं को भी पीहर-ससुराल के पास रखा जाए, बेहतर होगा।” -महेंद्र पांडे, महामंत्री, राप्रामाशि संघ



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