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शर्मनाक लापरवाही है कि SIR की प्रक्रिया में इन्हें मरा हुआ मान लिया गया है। सिर्फ इन्हें ही नहीं, अलवर के एक गांव में 16 लोगों को इसी तरह कागजों में मरा हुआ मान लिया गया है।
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में ये सच सामने आया है।
इतना ही नहीं, एक युवती को 2 बार घर से भागी हुई बताकर लिस्ट से नाम काट दिया गया। इतनी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी कि युवती ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। एक केस में युवक के माता-पिता को मरा हुआ बता दिया। पत्नी को शिफ्टेड और अविवाहित बेटी को शादीशुदा बताकर नाम काट दिया।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
नसीबा खां जमींदारी करते हैं और घर पर ही रहते है।
केस-1 : घर में चारपाई पर बीड़ी पीते मिले नसीबा खां
बेरेबास गांव के नसीबा खां को SIR की प्रक्रिया में मृत मान लिया गया। भास्कर रिपोर्टर उनके घर पहुंचा तो वो चारपाई पर बीड़ी पीते मिले। रसोई में एक महिला खाना बना रही थी। रिपोर्टर ने नसीबा खां से बात की तो बोले- 68 साल का हूं। जिंदा भी हूं। पता नहीं कैसे लिस्ट में मरा हुआ मान लिया।
घर पर बीएलओ आए तो उन्हें फाॅर्म भरकर भी दिया था। अब मैंने एसडीएम आफिस जाकर अपने दस्तावेज दिए हैं और आपत्ति दर्ज कराई है। नसीबा खां जमींदारी करते हैं और घर पर ही रहते है। लिस्ट में क्रम संख्या- 1027 में 83 बूथ नंबर पर नसीबा का नाम है। नसीबा का वोटर नंबर 535 है। इन्हें सूची में मृत माना गया है। बीएलए नवाब की ओर से लिस्ट दी गई है।
लिस्ट में नसीबा के नाम के आगे मृत लिखा है।
वार्ड पंच मौजबी का कहना है कि उन्होंने फॉर्म भरकर जमा भी कराया था। इसके बावजूद उन्हें मृत बता दिया।
केस-2 : जिस वार्ड पंच को मरा हुआ बताया, वो घर पर आराम करती मिलीं
लिस्ट में बेरेबास गांव की वार्ड पंच मौजबी को मरा हुआ बताया गया है। भास्कर रिपोर्टर उनके घर पहुंचा। उस वक्त मौजबी आराम कर रही थीं। क्रम संख्या 1060 में उनका नाम लिखा हुआ है। बूथ नंबर 83 पर वोटर नंबर 301 पर उनका नाम रिकॉर्ड दर्ज है। उनके नाम पर नवाब खां ने आपत्ति लगाई है।
80 साल की मौजबी बोलीं- पता नहीं किसी ने क्या दुश्मनी निकाली है। बीएलए फाॅर्म भरवाने आया था। फाॅर्म भरवाकर जमा भी करवा दिया था। इसके बावजूद मेरा नाम मृतकों की सूची में डाल दिया। इसके बाद एसडीएम के पास गए थे, लेकिन वे मिले ही नहीं। गांव में हम दो वार्डपंच हैं।
वार्ड पंच मौजबी को भी लिस्ट में मरा हुआ बता दिया गया।
केस-3 : लिस्ट में युवती का 2 बार घर से भागना बताया
इन्वेस्टिगेशन के दौरान भास्कर रिपोर्टर ने रामगढ़ विधानसभा के बूथ नंबर 93 की लिस्ट देखी। लिस्ट में एक युवती को घर से दो बार भागना बताया गया। रिपोर्टर युवती के पिता तक पहुंचा। पिता बोले- बच्ची घर पर ही मौजूद है। उसकी अभी शादी भी नहीं हुई है। बीएलए आए थे तो फार्म और फोटो भी लगाकर दी थी। न फिर भी घर से भागने का कारण बता कर नाम काटने की आपत्ति दर्ज कराई गई है। बच्ची का शर्म से घर से निकलना मुश्किल हो गया है। पूरे गांव में ये बात फैल गई है।
केस-4 : माता-पिता को मृत, बेटी को विवाहित बताया
गांव की पंचायत में हमीर मिले। हमीर ने बताया- मेरे परिवार के पांच लोगों के नाम काट दिए हैं। हमीर ने बताया कि उन्होंने बीएलए नवाब खां से बात की तो वो बोला कि मुझे कोई जानकारी नहीं है, जबकि नवाब के नाम से नाम काटने की एप्लीकेशन लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि वे खुद इस बार सरपंच पद के लिए तैयारी कर रहे थे। पंचायत ही खत्म कर दी गई है और परिवार के ही नाम लिस्ट से काटे जा रहे है तो कैसे चुनाव लड़ पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर एक ही पार्टी को सपोर्ट करने वाले लोगों के नाम काटे जा रहे है।
भाजपा-कांग्रेस के बीएलए बोले-हमने कोई नाम नहीं काटे, न ही सूची भेजी
बेरेबास गांव में कांग्रेस के बीएलए हकमुद्दीन का कहना है कि बीएलओ इस्लाम खां है। उनके साथ हमने घर-घर जाकर फाॅर्म बांटे थे। फाॅर्म पूरे करके जमा भी करवा दिए थे। अंतिम सूची में भी नाम सहीं थे। बाद में लिस्ट में काफी परिवर्तन मिला। लिस्ट में 106 नाम काटे गए हैं। 16 जिंदा लोगों को मृतक बता दिया। हमारी ओर से कोई आपत्ति नहीं लगाई गई है। मेरी मां वार्डपंच है। उनका नाम भी मृत बता कर काट दिया गया है।
भाजपा के बीएलए नवाब खां ने बताया कि गांव के लोग काफी नाराज है। उनके नाम गलत तरीके से काट दिए गए हैं। मेरे परिवार के ही कई लोगों के नाम काट दिए गए है। मेरे नाम से एप्लीकेशन लगाई गई है, वो मैंने नहीं लगाई। मैंने एसडीएम से भी बात की है लेकिन उन्होंने भी कुछ नहीं बताया। अब हमने लोगों के नाम वापस जोड़ने को लेकर आपति दर्ज कराई है।
बीएलओ इस्लाम बोले : मैंने सही फॉर्म भरकर भेजे, मृत कैसे माना, पता नहीं
भास्कर ने मामले में बीएलओ इस्लाम से बात की। उनका कहना है कि मैंने तो सभी के नाम सही से भरकर जमा करवा दिए थे। बाद में उनके नाम मृतकों की सूची में कैसे आ गए, मुझे कोई जानकारी नहीं है। जिनके नाम से आपत्ति लगाई गई है, उन्हें भी नहीं पता है। सूची में केवल नाम और संख्या दी गई है जबकि पता और मोबाइल नंबर भी दिया जाना चाहिए। मैं नया हूं। आगे क्या होगा मुझे कोई जानकारी नहीं है।
वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के हजारों फाॅर्म मिले
उल्लेखनीय है कि करीब एक सप्ताह पहले अलवर में रिटर्निग अधिकारी की टेबल पर काफी संख्या में फाॅर्म रखे हुए थे। अलवर के खैरथल-तिजारा के कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने बताया कि वे जब रिटर्निग अधिकारी के ऑफिस पहुंचे थे तो करीब 20 हजार से ज्यादा फाॅर्म रखे हुए थे। ये फाॅर्म वोटरों के नाम काटने के रखे हुए थे। किसी को पता ही नहीं था कि ये फाॅर्म कहां से आए? उनकी टेबल पर कैसे पहुंचे? पूछताछ करने पर कर्मचारी ऑफिस से निकलकर चले गए। किसी ने कोई जवाब नहीं दिया था। उन्होंने फार्म देखे तो पता लगा कि ज्यादातर की लिखावट एक जैसी थी और एक ही नाम से 300 से 500 तक आपत्तियां आई थीं। ये फार्म अलवर ग्रामीण, रामगढ़, तिजारा, किशनगढबास, थानागाजी से आए हुए थे।
वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर की टेबल पर रखे हजारों फॉर्म।
बेरेबास सरपंच बोले : पंचायत खत्म की, अब लोगों के नाम काटे
अलवर की रामगढ़ विधानसभा के बेरेबास गांव के सरपंच विनय वर्मा का कहना है कि मैं गांव का पहला सरपंच हूं। अब आखिरी भी हो गया हूं। 2019 में परिसीमन के बाद बेरेबास को पंचायत बनाया गया था। हमने जमीन खरीद कर पंचायत भवन बनाने के लिए दान की। इसके बाद सरकार ने 70 लाख रुपए बजट पास किया। पंचायत भवन भी नया बनाया गया। पटवारी ऑफिस से लेकर मीटिंग हॉल और सोफे से लेकर सारा फर्नीचर नया लगाया गया। लेकिन अब सब बेकार हो गया है।
वे बोले कि SIR प्रक्रिया में गांव के 106 लोगों के नाम काट दिए गए है। जीवित लोगों को मृत बता दिया। एक वार्डपंच को भी मृतक बता कर नाम काट दिया गया है जबकि वे हर मीटिंग और प्रशासन के सारे काम में आती जाती है।
उनके गांव बेरेबास में पहले दो गांव शामिल थे और कुल 1364 वोटर्स थे। उनका बूथ नंबर 83 है। अब उनके गांव के 844 वोटर हैं। इनमें 400 महिलाएं और 444 पुरुष है। दूसरे गांव को अलग कर दिया गया है। गांव में कांग्रेस के बीएलए हकमुकद्दीन और भाजपा के नवाब खां हैं।
14 फरवरी को होगी फाइनल वोटर लिस्ट
SIR प्रक्रिया में 7 फरवरी तक आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। इसके बाद 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया जाएगा। वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आएगा। हालांकि इसके बाद बीएलओ के जरिए आप अपना नाम वोटर लिस्ट में अपने दस्तावेज देकर जुड़वा सकेंगे।
पूरे राजस्थान में 41.85 लाख वोटर्स के नाम काटे
राजस्थान में SIR प्रक्रिया में 41.85 लाख वोटर्स के नाम काट दिए गए है। वोटर लिस्ट को निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। लिस्ट में 29.6 लाख परमानेंट शिफ्ट बताए गए और 8.75 लाख को मृतक बताया गया है। लिस्ट आने के बाद वोटर्स के नामों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। लिस्ट में ज्यादातर वोटर्स पलायन, विवाहित, मृत्यु, गलत, दोहरीकरण वोट बता कर आपत्ति बताकर नाम काटे गए हैं। अलवर, डीडवाना-कुचामन, झुंझुनूं सहित कई जिलों में लोगों में इसे लेकर गुस्सा है।
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राजस्थान में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सीएम, विधानसभा स्पीकर और 15 मंत्रियों के इलाकों में उनके जीत के अंतर से ज्यादा वोट कट गए हैं। सबसे ज्यादा दूसरी जगह शिफ्ट होने वाले और मृत वोटर्स के नाम हटाए गए हैं। पूरी खबर पढ़िए…