जयपुर विकास प्राधिकरण:जेडीए ने लैंड फॉर लैंड के लिए बनाई नई एसओपी प्रभावितों को एक ही योजना में दिए जाएंगे विकसित भूखंड




सेक्टर रोड में अवाप्त होने वाली जमीन के बदले जमीन देने में अब मिलीभगत और मनमर्जी नहीं चलेगी। जेडीए अब सेक्टर रोड के लिए जमीन अवाप्त करने के बाद सभी प्रभावितों के लिए एक ही जगह मुआवजे में विकसित जमीन देगा। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान सेक्टर रोड के बदले मिलीभगत से बेशकीमती जमीनें मुआवजे में बांट दी गई थीं। इस पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी सवाल उठाए थे। जेडीए ने अब सेक्टर रोड से प्रभावित काश्तकारों को विकसित जमीन देने के लिए नई एसओपी तैयार की है। नई एसओपी के अनुसार ही जमीन अवाप्त कर प्रभावित जमीन के नजदीक ही सरकारी जमीन पर योजना विकसित कर मुआवजा दिया जाएगा। गौरतलब है कि शहर में मास्टर प्लान 2025 में प्रस्तावित सेक्टर सड़कों में से 50 फीसदी सड़कें भी नहीं बनी हैं। ऐसे में शहर की मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और ट्रैफिक जाम से शहर की सांसें फूल रही हैं। सेक्टर सड़क के लिए जमीन अवाप्ति को लेकर आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए जेडीसी सिद्धार्थ महाजन ने जोन, इंजीनियरिंग और प्लानिंग विंग को नई एसओपी लागू करने के निर्देश दिए हैं। जेडीए पुराने रीजन में मास्टर प्लान में प्रस्तावित करीब 300 प्रमुख सेक्टर सड़कें 15 साल में भी नहीं बना पाया है। नई SOP में ऐसे होगा काम 15 दिन में पीटी सर्वे करना होगा जेडीए की इन सेक्टर सड़कों को बनाने की प्लानिंग



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औद्योगिक भूखंडों को फ्री होल्ड करने का आश्वासन मिला



जयपुर | लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग एवं व्यापार शिखर अग्रवाल से मुलाकात कर औद्योगिक भूखंड को लीज की जगह फ्री होल्ड करने की मांग की है। वहीं, अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया की इस बारे में जल्द कदम उठाया जाएगा। लघु उद्योग भारती के जयपुर प्रांत के अध्यक्ष महेंद्र मिश्रा बताया कि हमने लीज डीड में बदलाव की मांग की थी। इसे व्यवहारिक मानते हुए जल्द नोटिफिकेशन जारी करने का आश्वासन दिया गया है। अभी औद्योगिक क्षेत्र में 99 साल की लीज पर भूखंड आवंटन होते हैं। इससे शहरी आबादी से घिर चुके पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। फ्री होल्ड होने से इनका समाधान होगा।



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ईस्टमैन ऑटो एंड पावर के सोलर समाधान प्रदर्शित



जयपुर | ईस्टमैन ऑटो एंड पावर लिमिटेड ने हाल ही संपन्न भारत रिन्युएबल एक्सपो में सोलर और ऊर्जा भंडारण समाधानों के उन्नत पोर्टफोलियो का प्रदर्शन किया। यह उत्पाद आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किए गए हैं। कंपनी ग्रिड टाई इनवर्टर, हाइब्रिड इनवर्टर, सोलर ऑफ-ग्रिड इनवर्टर, लिथियम बैटरी, सोलर लेड एसिड बैटरी व सोलर पैनल का उत्पादन कर रही है।



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त्रिवेणी पुलिया से गुर्जर की थड़ी तक जाम:सड़क 160 फीट चौड़ी, मौके पर 140 ही; एलिवेटेड के लिए 40 फीट में बैरिकेड्स लगाए, 25-25 फीट में कब्जे




त्रिवेणी पुलिया से गुर्जर की थड़ी तक बन रहे एलिवेटेड रोड से भविष्य में ट्रैफिक को राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल यह प्रोजेक्ट आमजन के लिए परेशानी का कारण बन गया है। कागजों में जहां सड़क की चौड़ाई 160 फीट है, वहीं मौके पर यह केवल 140 फीट ही रह गई है। एलिवेटेड रोड के लिए जेडीए ने करीब 2100 मीटर क्षेत्र में 40 से 50 फीट चौड़ा कॉरिडोर बैरिकेड्स लगाकर घेर लिया है, जिससे सड़क की दो लेन पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। ऊपर से सड़क के दोनों ओर व्यावसायिक गतिविधियां होने के कारण बेतरतीब पार्किंग और अस्थायी अतिक्रमण ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। गुर्जर की थड़ी, महेश नगर, रिद्धि-सिद्धि चौराहा और त्रिवेणी नगर से रोजाना करीब 1 से डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। निर्माण कार्य और अतिक्रमण के चलते ट्रैफिक के लिए केवल 2 से 3 लेन ही बची हैं। ऐसे में पीक ऑवर्स में हालात बेहद खराब हो जाते हैं। 5 मिनट का सफर तय करने में 20 मिनट तक लग रहे हैं। 2.1 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में चार ट्रैफिक सिग्नल हैं, जहां चौड़ाई कम होने से हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। सुबह करीब 3 घंटे और शाम को 4 घंटे तक वाहन चालकों को जाम में फंसना पड़ता है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, एंबुलेंस और जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे समझें परेशानी एलिवेटेड रोड का काम शुरू होते ही सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लिया गया। इसके साथ दुकानों के सामने वाहन खड़े होने लगे और कई जगह अस्थायी अतिक्रमण हो गया। इससे दोनों तरफ करीब 10-10 फीट की जगह और कम हो गई। नतीजा यह हुआ कि पूरा कॉरिडोर रोजाना ट्रैफिक जाम की चपेट में आ गया है। यह प्रोजेक्ट 30 महीने में पूरा होना है, लेकिन यदि ट्रैफिक प्रबंधन नहीं सुधरा तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। अस्थायी अतिक्रमण हटे तो मिल सकती है राहत
इस समस्या का सबसे जल्द समाधान सड़क किनारे से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हटाना है। यदि प्रशासन सख्ती करे तो मौजूदा चौड़ाई में भी यातायात काफी हद तक सुचारू हो सकता है। निर्माण कार्य के साथ ट्रैफिक प्रबंधन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है, ताकि विकास की कीमत जनता को जाम में खड़े होकर न चुकानी पड़े। अस्थायी अतिक्रमण हटे तो मिल सकती है राहत
इस समस्या का सबसे जल्द समाधान सड़क किनारे से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हटाना है। यदि प्रशासन सख्ती करे तो मौजूदा चौड़ाई में भी यातायात काफी हद तक सुचारू हो सकता है। निर्माण कार्य के साथ ट्रैफिक प्रबंधन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है, ताकि विकास की कीमत जनता को जाम में खड़े होकर न चुकानी पड़े।



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तीसरी तिमाही में एयू बैंक का शुद्ध लाभ 26% बढ़कर 668 करोड़ रुपए हुआ



जयपुर | मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 26 फीसदी बढ़कर 668 करोड़ रुपए हो गया। नेट इंटरेस्ट मार्जिन तिमाही आधार पर 0.5% बढ़कर 5.7 फीसदी पर पहुंच गया। जमा राशि में सालाना आधार पर 23.3% की वृद्धि रही। ऋण में 19.3 फीसदी की वृद्धि रही, जबकि क्रेडिट कॉस्ट 0.41 फीसदी घटी है। बैंक निदेशक मंडल की ओर मंजूर वित्तीय परिणामों के मुताबिक बैंक की शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर 16% बढ़कर 2,341 करोड़ रुपए हो गई। अन्य आय 17 फीसदी की वृद्धि के साथ 724 करोड़ रुपए रही। वहीं, ग्रास एनपीए घटकर 2.30% और नेट एनपीए 0.88% पर स्थिर रहा। नए लेबर कोड के कार्यान्वयन के लिए बैंक ने 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। बैंक ने तीसरी तिमाही में 27 नई शाखा सहित कुल 100 नए टचपॉइंट जोड़े हैं। इससे बैंक के टचपॉइंट 2,726 हो गए। बैंक के बोर्ड में तीन नए स्वतंत्र निदेशक एन एस वेंकटेश, सत्यजीत द्विवेदी और फणी शंकर की नियुक्ति करने के साथ मालिनी ठडानी को तीन वर्ष के दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया गया है। उत्तम टिबरेवाल डिप्टी सीईओ के रूप में काम करते रहेंगे। जबकि, विवेक त्रिपाठी का पूर्णकालिक निदेशक के रूप में नियुक्ति के लिए आरबीआई के पास प्रस्ताव भेजा गया है।



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रिकॉर्ड तोड़ तेजी से सोना 1.50 लाख रुपए प्रति दस ग्राम, चांदी 3.12 लाख रु. किलो



जयपुर | ग्र्रीनलैंड को लेकर अमेरिका व यूरोप के बीच बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। इससे मंगलवार को जयपुर सर्राफा बाजार में सोना स्टैंडर्ड 2,250 तथा 22 कैरेट जेवराती सोना 2,100 रुपए प्रति दस ग्राम महंगा होकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं, चांदी ने 12,000 रुपए प्रति किलोग्राम की छलांग लगाई और 3.12 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर बिकी। दूसरी तरफ, अमेरिकी वायदा एक्सचेंज कॉमेक्स में फरवरी डिलीवरी सोना 142 डॉलर बढ़कर 4,737.40 डॉलर तथा मार्च डिलीवरी चांदी 4.928 डॉलर की तेजी से 93.465 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रही थी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनलैंड को खरीदने की ट्रम्प की इच्छा और नए टैरिफ की चेतावनी से अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच रिश्ते बिगड़ रहे हैं। इससे सुरक्षित निवेश के लिए सोना-चांदी की मांग बढ़ी है। सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी, जयपुर के भाव : चांदी (999) 312 चांदी रिफाइनरी 311.5 रुपए प्रति ग्राम। सोना स्टैंडर्ड 15,025 रुपए, सोना जेवराती 14,050 तथा वापसी 13,750 रुपए प्रति ग्राम।



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खबर हटके- ₹10 करोड़ की कब्र में AC-किचन की सुविधा:धरती जैसे ग्रह पर कांच की बारिश; दुनिया के खराब खानों में भारतीय डिश




10 करोड़ रुपए की कीमत से बना एक ऐसा कब्रिस्तान, जिसमें AC, टीवी, किचन और टॉयलेट जैसी सुविधाएं हैं। वहीं पृथ्वी की तरह दिखने वाला एक नीला ग्रह, जिसपर कांच की बारिश हो रही है। उधर दुनिया के ‘100 सबसे खराब खानों’ की लिस्ट में भारत की एक डिश को शामिल किया गया है। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…



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जमीन खोदकर निकाले एक्ट्रेस और परिवार के 6 कंकाल:कातिल तसल्ली होने तक कुचलता रहा सिर, एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, पार्ट-2




बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के लैला खान हत्याकांड के पार्ट-1 में अब तक आपने पढ़ा कि कैसे लैला खान छुट्टी मनाने फार्महाउस गईं और अचानक लापता हो गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ लैला ही नहीं उनके परिवार के 6 और लोग लापता हैं। एक साल तक लैला की कोई खबर नहीं मिली और फिर कश्मीर में हुए बम ब्लास्ट के पास लैला की मां के नाम पर रजिस्टर्ड कार मिली। जांच में एक्ट्रेस लैला खान के सौतेले पिता परवेज टाक की गिरफ्तारी हुई। परवेज जांच टीम को फार्महाउस ले गया, जहां एक-एक कर 6 कंकाल बरामद किए गए। इनमें परिवार के पालतु कुत्ते का भी कंकाल था। लैला खान हत्याकांड, पार्ट- 2 में जानिए कैसे और क्यों हुआ परिवार के 6 लोगों का कत्ल…. 10 जुलाई 2012 को परवेज टाक को सदर्न मुंबई किला कोर्ट में पेश कर क्राइम ब्रांच ने कस्टडी ली। मामला गंभीर था, तो जांच टीम सख्ती करने से नहीं चूकी। हाथ-पैर बांधकर परवेज टाक को तबीयत से पीटा गया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर फार्महाउस से कंकाल निकाले गए। इससे पहले ही उसने फरवरी 2011 की रात की पूरी कहानी सुना दी थी। परवेज कश्मीर का रहनेवाला था। देखने में सुंदर और आम कद-काठी का था। उसने कश्मीर में एक चुनाव लड़ा, जिसमें खूब पैसे लगे, लेकिन वो चुनाव हार गया। कर्जा बढ़ गया तो वो गुजारे के लिए दिल्ली आकर काम ढूंढने लगा। यहीं उसकी मुलाकात लैला की मां सेलिना से हुई। सेलिना देखने में सुंदर थीं और रहन-सहन भी काफी ग्लैमरस था। दोनों की पहले दोस्ती हुई और फिर अच्छी बातचीत होने लगी। सेलिना ने परवेज को बताया था कि उनकी बेटी हीरोइन हैं। परवेज को लगा कि अगर वो सेलिना के संपर्क में रहा तो उसे भी फिल्मों में काम मिल सकता है। जब एक रोज परवेज ने सेलिना से कहा कि वो फिल्मों में काम करना चाहता है। जवाब मिला कि इस काम के 25 लाख लगेंगे। परवेज ने रकम जमा कर उसे दी और कुछ समय बाद मुंबई पहुंच गया। समय के साथ सेलिना और परवेज में नजदीकियां बढ़ने लगीं और दोनों ने 2010 में शादी कर ली। परवेज अब सेलिना के घर में ही उनके बच्चों के साथ रहने लगा। परिवार ने उसे अपना लिया। दिन गुजरने लगे और परवेज को ये अंदाजा लगाने में देर नहीं लगी कि सेलिना ने पैसों के लिए उसे फिल्मों में काम दिलवाने का झूठा झासा दिया था। पैसे मांगने पर उसके सेलिना से झगड़े बढ़ने लगे। लैला और उसके भाई-बहनों का भी रवैया उसके लिए बिगड़ने लगा। परवेज से शादी के बावजूद सेलिना पहले पति नादिर पटेल और दूसरे पति आसिफ शेख से मिला करती थीं। इसके अलावा भी उनके कई पुरुषों से मिलना-जुलना था। 2010 के आखिर में सेलिना, परवेज को मुंबई में अकेले छोड़कर परिवार के साथ अफ्रीका चली गईं। कुछ महीने वहां रहने के बाद वो दुबई गईं। परवेज मुंबई में अकेला था, उसके पास कोई खास पैसे नहीं थे, बमुश्किल उसका गुजारा हुआ। सेलिना ने उसका पासपोर्ट भी छिपा दिया, जिससे वो भाग न सके। 3 महीने बाद सब मुंबई लौटे, परवेज अब भी घर पर ही था। कुछ दिनों बाद उसे पता चला कि सेलिना मुंबई की अपनी सारी प्रॉपर्टी बेचकर बच्चों के साथ दुबई शिफ्ट हो रही हैं। उनका परवेज को साथ ले जाने का कोई प्लान नहीं था। प्रॉपर्टी बेचने के लिए वो दूसरे पति आसिफ शेख की मदद ले रही थीं। परवेज के लिए मुंबई में कुछ नहीं था, उसके 12 लाख डूब चुके थे और कश्मीर लौटने के सवाल ही नहीं था। तभी उसने एक प्लान बनाया। प्लान था, बेइज्जती का बदला लेना और प्रॉपर्टी पर कब्जा। उसने पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची। मुंबई जैसे शोर-शराबे वाले शहर में पूरे परिवार को अकेले मार पाना मुश्किल होता, तो उसने साजिश के लिए इगतपुरी फार्महाउस चुना। वो जानता था कि लैला का परिवार अक्सर छुट्टियां मनाने वहीं जाता था। एक रोज उसने सेलिना से कहा कि इगतपुरी वाले फार्महाउस में एक वॉचमैन रख लेना चाहिए। खाली पड़े फार्महाउस की देख-रेख भी हो जाएगी और वहां का सामान भी सुरक्षित रहेगा। सेलिना ने साफ इनकार कर दिया। उनके लिए ये फिजूल खर्च था। कई दिनों तक वो यही दोहराता रहा और आखिरकार सेलिना मान गईं। वॉचमैन रखने की जिम्मेदारी परवेज ने अपने कंधों पर ली। ये उसके लिए सुनहरा मौका था। उसने वॉचमैन के नाम पर कश्मीर से अपना दोस्त साकिर हुसैन मानी बुलाया, जो इस साजिश में उसकी मदद करने वाला था। 8 फरवरी 2011 सभी फार्महाउस पहुंचे। लैला, लैला की मां सेलिना, बहन अजमीना (आफरीन), जारा, भाई इमरान और कजिन रेशमा। पालतु कुत्ता भी साथ था। सभी ने मिलकर डिनर किया और फिर बच्चे सोने के लिए नीचे वाले कमरों में चले गए, जबकि परवेज और सेलिना पहली मंजिल के कमरे में रुके। देर रात हो चुकी थी, लेकिन परवेज के अंदर एक हलचल थी। वो बार-बार झांकते हुए सबके सोने की तसल्ली करता रहा। उस समय सेलिना जाग रही थीं। परवेज ने तुरंत दोस्त साकिर मानी को बुला लिया। पूरे फार्महाउस में सन्नाटा था, आसपास कोई न था। तभी उसने मौका पाते ही सेलिना के सिर पर लोहे की रॉड से जोरदार हमला किया। पहले हमले के बाद सेलिना चीख पड़ीं और फर्श पर गिर पड़ीं। परवेज ने एक और हमला किया। सेलिना की चीख, ग्राउंड फ्लोर के कमरों तक पहुंची, लैला जाग रही थीं, वो भागते हुए सीढ़ियों से ऊपर बढ़ीं। देखा मां फर्श पर खून से लथपथ पड़ी कराह रही थीं और परवेज के हाथ में हथियार था। लैला कुछ समझ पातीं, उससे पहले ही परवेज ने एक-एक कर उन पर कई हमले कर दिए। चीखें सुनकर पहली मंजिल पर जैसे-जैसे भाई-बहन पहुंचे, वैसे-वैसे परवेज एक-एक कर सबको मारता चला गया। उन 5 महिलाओं में इमरान ही इकलौता लड़का था। लेकिन वो भी दो हट्टे-कट्टे आदमियों के सामने कब तक टिक पाता। उसे भी मार दिया गया। सभी फर्श पर तड़प रहे थे, खून बहता चला जा रहा था। लेकिन परवेज को अब भी तसल्ली नहीं हुई। उसने रॉड उठाई और सबके सिर पर लगातार तब तक मारता रहा, जब तक उनकी सांसे रुक नहीं गईं। अब बारी थी लाशों को ठिकाने लगाने की। इसका इंतजाम वो महीनेभर पहले सेलिना से ही करवा चुका था। परवेज ने सेलिना से कहा था कि वो फार्महाउस में एक स्वीमिंग पूल बनवाना चाहता है। उन्होंने इनकार किया, लेकिन उसने जिद कर पैसे ले लिए। एक जेसीबी बुलवाई और जनवरी में ही फार्महाउस के पीछे एक बड़ा गड्ढा खुदवा लिया। परवेज और साकिर ने पहले इमरान, जारा और रेशमा की लाशों को गड्ढे में डाला फिर खून से सने गद्दे ढक दिए। थोड़ी मिट्टी डाली और बची हुई लैला, सेलिना और आफरीन और कुत्ते की लाशों को उनके ऊपर रखा। हड़बड़ाहट इस कदर थी कि परवेज ने लाशों से गहने तक नहीं हटाए। एक साल बाद जब कंकाल मिले तो लैला के गले की चेन, सेलिना के कंगन, आफरीन की अंगूठी जस की तस थी। दोनों ने फार्महाउस से हर कीमती सामान उठाया और पूरे फार्महाउस में आग लगा दी। एक कार को साकिर लेकर निकला और दूसरी कार से परवेज कश्मीर आया। जिसे उसने किश्तवाड़ में किराए की दुकान लेकर पार्क कर दिया। गुजारे के लिए वो दिहाड़ी का काम करने लगा। 14 साल बाद कोर्ट ने दी सजा-ए-मौत 2011 में हुई लैला खान और परिवार की हत्या का केस 13 सालों तक चला। आखिरकार 24 मई 2024 को मुंबई सत्र न्यायालय ने परवेज टाक को परिवार के 6 लोगों की हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा, सबूत मिटाने के आरोप में 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना। ये अपनी तरह का मामला था, जिसमें कोई चश्मदीद नहीं था। हत्याकांड में परवेज टाक का साथ देने वाला साकिर मानी कभी पकड़ा नहीं गया। जेल में परवेज टाक से हुई थी एजाज खान की मुलाकात एक्टर ऐजाज खान, लैला की छोटी बहन के दोस्त थे। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में ऐजाज ने कहा, ‘लैला से मेरी सीधी दोस्ती नहीं थी, लेकिन उसकी छोटी बहन आफरीन और जारा मेरी बहुत अच्छी दोस्त थीं। मेरा उनके घर आना-जाना लगा रहता था। पहले हम अकसर फोन पर बात करते थे, लेकिन अचानक एक दिन उसका फोन बंद आने लगा। मैंने इधर-उधर लोगों से पूछा, लेकिन किसी को कुछ पता नहीं था। मुझे लगा कि शायद वो लोग फिर से उमराह, मक्का-मदीना या ईरान गए होंगे, इसलिए संपर्क नहीं हो पा रहा है। लेकिन जब मुझे न्यूज के जरिए यह पता चला कि लैला और उनका परिवार अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो मैं अंदर से पूरी तरह टूट गया। लैला, उसकी बहनें, भाई कोई भी ऐसी मौत डिजर्व नहीं करता था। बहुत कम उम्र थी, सब मेहनती, होशियार और खूबसूरत थे।’ ‘पहली बार मेरी परवेज टाक से लैला के घर पर मुलाकात हुई थी और दूसरी बार मुंबई के आर्थर रोड जेल में। मैं कुछ दिन जेल में था। एक दिन मुझे किसी ने कहा कि कोई आपसे मिलने आया है। मैंने पूछा कौन? उसने कहा- “वही, जो गैंग मर्डर करके आया है।” मैं समझ गया। परवेज टाक लंगड़ाते हुए आया। उसके दोनों पैर किसी बीमारी से सड़ चुके थे। मैंने उससे पूछा- “तूने ऐसा क्यों किया?” तो उसने कहा- “मैंने कुछ नहीं किया।” उसी वक्त उसकी बीवी और बच्चे भी उससे मिलने आए थे। मैंने उसकी तरफ इशारा करके कहा- “अगर इनके साथ ऐसा हो, तो तुझे कैसा लगेगा?” उसी जेल में वो सड़-सड़ कर मर रहा है।’ कई स्कैंडल के नाम रही लैला खान की जिंदगी राकेश ने हमसे बातचीत में लैला खान की कंट्रोवर्शियल जिंदगी पर भी बात की। उन्होंने कहा, मेरी फिल्म वफा के रिलीज होने के 3-4 महीने बाद की बात है। ओशिवारा में ‘समर्थ वैभव’ नाम की बिल्डिंग है, उसके नीचे एक व्हाइट लामा कैफे है। लैला ने मुझे फोन कर वहां आने को कहा। मैं वहां गया तो देखा कि लैला, उसकी मां, उसका बॉयफ्रेंड (जो एक बिल्डर का बेटा था) और दुबई से आया मेरा ही एक दोस्त, सब एक टेबल पर बैठे थे। उस टेबल पर बंदूक रखी हुई थी। मैं देखकर डर गया। दुबई वाले दोस्त ने मुझे बताया कि “देख राकेश, लैला ने मुझसे 5 करोड़ लिए थे। वो मेरे साथ लिव-इन में थी और अब इस लड़के के साथ है। तुम लैला को समझाओ, वरना ये बड़ी मुश्किल में फंस जाएगी।” इस घटना के 1-2 साल बाद लैला हमेशा के लिए लापता हो गई । लैला खान के बारे में- लैला खान का असली नाम रेशमा पटेल था। उनका जन्म 1978 में मुंबई में हुआ था। हालांकि जन्म की असल तारीख क्या है, इस बात का जिक्र कहीं नहीं मिलता। लैला खान की मां का नाम अथिया पटेल था, हालांकि हर कोई उन्हें सेलिना नाम से बुलाता था। लंबे संघर्ष के बाद लैला खान को 2002 की बिग बजट कन्नड़ फिल्म ‘मेकअप’ में काम मिला। 30 नवंबर 2002 को रिलीज हुई फिल्म को क्रिटिक्स की तो सराहना मिली, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई। इस फिल्म से मेकर्स को 75 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। इसके बाद लैला खान को भारत के पहले सुपरस्टार रहे राजेश खन्ना की कमबैक फिल्म ‘वफाः ए डेडली लव स्टोरी’ में उनके अपोजिट कास्ट किया गया। फिल्म में लैला खान को एक बेवफा पत्नी के रूप में दिखाया गया था। फिल्म को राखी सावंत के भाई राकेश सावंत ने डायरेक्ट किया था। 19 दिसंबर 2008 को रिलीज हुई फिल्म वफा बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं कर सकी और सी-ग्रेड फिल्म करने के लिए राजेश खन्ना की भी जमकर आलोचना हुई। (नोटः ये खबर लैला खान की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाने वाले डायरेक्टर राकेश सावंत से बातचीत, केस की जांच कर रहे डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अंबादास पोते के पुराने इंटरव्यू और दैनिक भास्कर की सीनियर रिपोर्टर वर्षा राय की रिसर्च के आधार पर लिखी गई है। ) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय ………………………………………………. फार्महाउस गया एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता: एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी बम ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा, पार्ट-1 छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। पूरी खबर पढ़िए… बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस 2 में अगले मंगलवार-बुधवार पढ़िए कहानी नीरज ग्रोवर हत्याकांड की, जिनकी लाश के एक्ट्रेस ने 300 टुकड़े किए गए थे। …………………………………………………………………. एक्ट्रेस के घर से लापता हुए नीरज ग्रोवरः लाश के सामने बनाए गए शारीरिक संबंध, 300 टुकड़े कर थैलियों में ठिकाने लगाई गई लाश, पार्ट-1 मई 2008 की बात है, उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, ‘जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी।’ जिग्ना जो बड़े-बड़े केस पर रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया, ‘सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।’ अमरनाथ ग्रोवर ने दबाव देकर कहा, ‘नहीं, ये केस कुछ अलग है।’ पूरी कहानी पढ़िए अगले मंगलवार-बुधवार, बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-2 में।



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26 से फ्री होगा SMS स्टेडियम, IPL तैयारी को मिलेंगे 2 महीने




भास्कर खास खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025, श्री श्री रविशंकर का प्रोग्राम ‘उत्साह-एक युवा संगम’, आर्मी डे शौर्य संध्या और अब 26 जनवरी के कार्यक्रम के बाद सवाई मानसिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम क्रिकेट के लिए पूरी तरह से फ्री हो जाएगा। आईपीएल शुरू होने में अभी करीब 2 महीने हैं। 26 जनवरी के बाद आईपीएल की तैयारियां शुरू की जा सकती हैं। और अगर आईपीएल की मेजबानी जयपुर को मिलती है तो यह एक बार फिर आईपीएल शुरू होने तक दुल्हन की तरह सज-धज कर तैयार भी हो जाएगा। खास बात यह है कि राजस्थान क्रिकेट संघ और राजस्थान राज्य स्पोर्ट्स काउंसिल दोनों ही चाहते हैं कि आईपीएल के मैच जयपुर में ही हों लेकिन राजस्थान रॉयल्स सुरक्षा का हवाला देकर पता नहीं क्यों अपना बेस पुणे शिफ्ट करना चाहती है। इस संबंध में मंगलवार को आरसीए के कन्वीनर डीडी कुमावत और स्पोर्ट्स काउंसिल अध्यक्ष नीरज के. पवन ने आपस में चर्चा भी की। टॉप लेवल पर भी आईपीएल जयपुर में ही कराने के प्रयास हो रहे : नीरज के. पवन नीरज के पवन ने कहा, ‘हम तो यही चाहते हैं कि आईपीएल मैच जयपुर में ही हों। 26 जनवरी के बाद स्टेडियम पूरी तरह से फ्री हो जाएगा। इसके बाद क्रिकेट एरीना पर किसी तरह की कोई गतिविधि प्रस्तावित नहीं है। 2 महीने में इसे आईपीएल के लिए आराम से तैयार किया जा सकता है। इस बारे में हम बुधवार को खेलमंत्रीजी (राज्यवर्धन सिंह राठौड़) से चर्चा करेंगे। टॉप लेवल पर भी मैच जयपुर में ही कराए जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।’ उल्लेखनीय है कि पिछले दो बार स्पोर्ट्स काउंसिल ने आईपीएल मैचों का आयोजन किया था। लेकिन पिछले साल 6 मार्च 2025 को बीसीसीआई के एक मेल से स्थिति असमंजस की हो गई है। उस मेल में साफ-साफ लिखा था कि अगले साल से जयपुर में अगर कोई आईपीएल कराएगा तो वह हमारी इकाई यानी राजस्थान क्रिकेट संघ ही कराएगा। कैसे कराएगा आरसीए आईपीएल, जब स्टेडियम का एमओयू ही नही : आरसीए एडहॉक कमेटी भी उसी स्थिति में आईपीएल का आयोजन कर सकती है जबकि उसके पास अपना खुद का स्टेडियम हो या फिर स्टेडियम का एमओयू हो। आरसीए का खुद का स्टेडियम तो है नहीं। जोधपुर के बरकतुल्ला खां स्टेडियम का एमओयू आरसीए से है। एसएमएस में आईपीएल मैच कराने हैं तो स्टेडियम का एमओयू होना जरूरी है। एसएमएस स्टेडियम में चल रही 26 जनवरी की तैयारियां।



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RCA स्टाफ के लिए खुशखबरी, तीन ग्रेड होंगे, न्यूनतम वेतन होगा 25 हजार रुपए




जयपुर | राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) स्टाफ के लिए खुशखबरी है। अब यहां स्टाफ के लिए ग्रेडिंग सिस्टम लागू होगा। 25 हजार से कम वेतन किसी का भी नहीं होगा। अभी यह 14 हजार रुपए है। तीन ग्रेड लागू होंगे। ग्रेड के अनुसार ही आरसीए के स्टाफ का ड्रेस कोड भी लागू होगा। मंगलवार को पूरी आरसीए स्टाफ के साथ मीटिंग करके आरसीए एडहॉक कमेटी के कन्वीनर डीडी कुमावत ने ये फैसला लिया। इसके लिए आरसीए एडहॉक कमेटी के अन्य सदस्यों से भी परमिशन ली जा रही है।



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