फार्महाउस से एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता:एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा




एक्ट्रेस लैला खान अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने इगतपुरी फार्महाउस गई थीं। लेकिन फिर अचानक वो और उनका पूरा परिवार लापता हो गया। एक साल की तलाश के बाद खुदाई हुई तो उनके कंकाल ठीक उसी जगह मिले, जहां से वो लापता हुए थे। बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-1 के पार्ट-1 में पढ़िए एक्ट्रेस लैला खान और उनके परिवार की गुमशुदगी, हत्या और तलाश की कहानी- मुंबई से 150 किलोमीटर दूर वो इगतपुरी फार्महाउस…. फरवरी 2011 की बात है, छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। लैला की मां सेलिना बेहद मॉडर्न थीं। उन्होंने खुद को ऐसे मैंटेन कर रखा था कि वो लैला की मां कम बड़ी बहन ज्यादा लगती थीं। उनका असली नाम वैसे तो अथिया पटेल था, लेकिन मॉडर्नाइजेशन के दौर में उन्होंने नाम बदलकर सेलिना कर लिया। पहली शादी उनकी नादिर पटेल से हुई, जिससे उन्हें एक बेटी लैला हुई। मुंबई जैसे बड़े शहर में जब नादिर पटेल के लिए गुजारा करना मुश्किल हुआ, तो वो नौकरी की तलाश में साउथ अफ्रीका चले गए। जल्द ही ठीक-ठाक नौकरी मिली और नादिर वहीं बस गए। सेलिना, मुंबई में बेटी लैला के साथ अकेले ही रहीं। हर महीने की शुरुआत में नादिर उन्हें खर्चा दे देते थे। ईद-दीवाली में नादिर मुंबई आते थे और एक-दो दिन ठहर कर लौट जाते। 1988 के आसपास की बात है, जब पति की गैरमौजूदगी में सेलिना की नजदीकियां मुंबई की मीरा रोड में रहनेवाले आसिफ शेख से बढ़ने लगीं। आसिफ भी तलाकशुदा थे और अकेले रहते थे। अकेलेपन से थक चुकीं सेलिना ने बिना पहले पति को तलाक दिए ही आसिफ शेख से दूसरी शादी कर ली। इस शादी से उन्हें तीन बच्चे जारा, इमरान और आफरीन (अजमीना) हुए। समय के साथ सेलिना और आसिफ में भी मतभेद होने लगे और दोनों ने तलाक ले लिया। कुछ सालों तक अकेले रहने के बाद 2010 में सेलिना ने कश्मीर के परवेज टाक से तीसरी शादी कर ली। परवेज उम्र में सेलिना से काफी छोटे थे, इसके बावजूद उनके रिश्ते पर कोई असर नहीं पड़ा। समय के साथ लैला के परिवार ने परवेज को अपना लिया और वो उनके घर का अहम हिस्सा बन गया। फरवरी 2011 में जब लैला का परिवार इगतपुरी फार्महाउस गया तो परवेज टाक भी उनके साथ थे। फिल्म जिन्नात की आधी शूटिंग हो चुकी थी और लैला छुट्टियों से लौटकर फिल्म पूरी करने वाली थीं। ये बात उन्होंने पहले ही डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राकेश सावंत को बता रखी थी। फरवरी 2011 के मिड में फिल्म की शूटिंग शुरू होनी थी। डायरेक्टर राकेश सावंत ने जब डेट्स कन्फर्म करने के लिए लैला को कॉल किया, तो नंबर बंद था। उन्हें लगा नेटवर्क की दिक्कत होगी, लेकिन फिर एक-एक दिन कर हफ्ते बीतने लगे और फिर पूरा महीना बीत गया। राकेश सावंत झल्लाने लगे। शूटिंग टलती जा रही थी। पैसे अटकने लगे थे और बड़े नुकसान की आहट थी। राकेश सावंत के मन में अब एक सवाल उठा- ‘कहीं लैला मेरे पैसे लेकर भाग तो नहीं गई?’ राकेश ने न आव देखा न ताव, वो सीधे लैला के पते पर पहुंचे। राकेश और लैला एक ही सनशाइन बिल्डिंग के फेज-4 में रहते थे, जबकि लैला 6 नंबर पर रहती थीं। उन्हें घर जाना मुनासिब नहीं लगा, तो वो सीधे बिल्डिंग के सेक्रेटरी के पास पहुंचे। उन्हें सेक्रेटरी से कहा- ‘मुझे लैला से मिलना है।’ वो बात पूरी कर पाते तभी पीछे से एक आवाज आई, ‘आप कौन?’ राकेश पलटे तो देखा, लैला के सौतेले पिता आसिफ शेख थे। राकेश लैला के परिवार को करीब से जानते थे और हर सदस्य से परिचित थे। आसिफ शेख करीब आए और झल्लाते हुए कहा- ‘यहां से निकल जाओ।’ राकेश ने अब जरा ठहरकर कहा, ‘उसने मेरी फिल्म साइन की है, मेरे पास कॉन्ट्रैक्ट है?’ जवाब मिला- ‘कोई कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट नहीं, निकलो यहां से। वो फॉरेन में है।’ राकेश को ऐसे जवाब की उम्मीद न थी, लेकिन अब उनका गुस्सा, चिंता में बदल गया। वो सीधे बिल्डिंग के ही सामने स्थित ओशिवारा पुलिस स्टेशन पहुंचे। पूरा मामला बताया। कहा- ‘लैला मिल नहीं रही, मुझे उसकी मिसिंग कंप्लेंट लिखवानी है।’ पुलिस ने सीधे कहा- ‘क्या आप उसके खून के रिश्ते में हैं। नहीं न। आप शिकायत नहीं लिखवा सकते।’ राकेश लैला को ढूंढने में अड़े थे। उन्होंने फिर कॉन्ट्रैक्ट दिखाया और कहा, ‘मेरे पैसे फंसे हैं।’ उनकी जिद पर पुलिस ने जवाब दिया, ‘ठीक है, हम शिकायत लिख लेते हैं, कुछ अपडेट मिली, तो बताएंगे।’ सिर्फ लैला ही नहीं पूरा परिवार था लापता पुलिस कंप्लेंट हुई तो ये बात उस जमाने के क्राइम रिपोर्टर निशात शमसी तक भी पहुंची, लेकिन कुछ इस ढंग से- ‘जानी-मानी हीरोइन प्रोड्यूसर के पैसे लेकर भाग गई।’ निशात को कहानी में दिलचस्पी हुई। जब उन्होंने रिसर्च शुरू की, तो आम सी लगने वाली ये स्टोरी कुछ बड़ी अनहोनी की तरफ इशारा करने लगी। निशात को मालूम पड़ा कि सिर्फ लैला खान ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार कई महीनों से लापता है। न परिवार को कहीं देखा गया, न किसी की उनसे बात हो रही है। एक रिपोर्टर के लिए मामले की तह तक जाना मुश्किल था, तो उन्होंने पुलिस की मदद लेनी चाही। वो भी राकेश की तरह मिसिंग कंप्लेंट करवाने पहुंचे, लेकिन जवाब वही मिला- ‘आप खून के रिश्ते में नहीं हैं।’ निशात ने इस बार लंबा रास्ता अपनाया। उन्होंने लंबी जद्दोजहद से लैला खान के सौतेले पिता आसिफ शेख का नंबर ढूंढा। आसिफ ने खुद तो मदद करने से इनकार कर दिया, लेकिन निशात की जिद पर उन्होंने लैला खान के बायोलॉजिकल पिता नादिर पटेल का नंबर दे दिया। नादिर को कॉल मिलाया, तो उन्होंने लैला का नाम सुनते ही बात करने से इनकार कर दिया। नादिर परिवार को छोड़ चुके थे और अफ्रीका के इथोपिया में नौकरी कर रहे थे। निशात ने जैसे-तैसे बात संभाली और उन्हें बताया कि लैला और उनका परिवार लापता है। उनकी कोई खबर नहीं है। पुलिस जब तक शिकायत नहीं लिखेगी, जब तक को रिश्तेदार आगे न आए। नादिर पटेल मदद तो करना चाहते थे, लेकिन ऐसी तंगी थी कि उनके पास भारत आने तक के पैसे नहीं थे। निशात ने खुद उनके भारत आने का बंदोबस्त करवाया। फिर शुरू हुई लैला खान और उनके परिवार की तलाश मुंबई पुलिस के पास जब ये केस पहुंचा, तो उन्होंने इसकी तरफ बेहद ठंडा रवैया अपनाया। प्रोड्यूसर राकेश सावंत भी पैसे डूबने के डर से बार-बार पुलिस स्टेशन के चक्कर काटते हुए अपडेट ले रहे थे। एक बार तो उन्हें ये कहते हुए केस से दूर रहने को कहा गया कि लैला पाकिस्तानी थीं, वो आतंकवादियों के संपर्क में थीं, दाऊद इब्राहिम के साथ काम करती थीं। राकेश सावंत को बार-बार मामले में पड़ते देख इस केस की जांच से जुड़े पूर्व पुलिस कमिश्नर ने ये तक कह दिया,“तुम केस को क्यों उलझा रहे हो? लैला एक टेररिस्ट है। तुम्हारी बेवकूफी की वजह से राखी सावंत को भी दिक्कत होगी। तुम इस मामले में दखल मत दो।” अब ये कुछ महीने साल में बदल गए। समय के साथ केस ठंडा पड़ गया। राकेश सावंत ने भी मान लिया कि लैला पैसे लेकर भाग गईं। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि ये केस न सिर्फ चर्चा में आया, बल्कि फिल्मी जगत का सबसे भयावह केस बन गया। जून 2012 कश्मीर के किश्तवाड़ में एक आतंकी बम ब्लास्ट हुआ। जांच में सामने आया कि जिस जगह ब्लास्ट हुआ, वहां से कुछ दूरी पर स्थित ओम मेहता रोड की एक दुकान में एक कार मिली। काले रंग की लग्जरी आउटलेंडर कार पर महाराष्ट्र का नंबर (MH02BY7867) था। पड़ोसियों ने एटीएस टीम को बताया कि ये कार करीब 8 महीनों से यही है। न किसी ने इसे निकाला न इस्तेमाल किया। रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच की तो सामने आया कि कश्मीर में मिली ये कार लैला खान की मां सेलिना के नाम पर रजिस्टर थी। लैला को पहले ही आतंकवादी कहा जा रहा था, ऐसे में उनकी कार का एक ऐसी जगह मिलना जहां आतंकी बम ब्लास्ट हुआ था, काफी अटपटा था। इससे भी अटपटा ये था कि पूरा परिवार लापता था। सवाल उठना लाजमी था कि क्या आतंकवाद से जुड़ीं लैला खान का इस बम ब्लास्ट में हाथ है, क्या लैला खान सोची-समझी साजिश के तहत परिवार के साथ लापता हुईं। संयोग ये रहा कि जिस समय बम ब्लास्ट हुआ, प्रोड्यूसर राकेश सावंत भी कश्मीर में ही शूटिंग कर रहे थे। एक दिन फारुख अब्दुल्लाह (कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री) ने एक गेट-टुगेदर रखा। कश्मीर के कई बड़े लोग इसमें पहुंचे। तभी एक पुलिस ऑफिसर ने राकेश सावंत को नजदीक बुलाकर पूछा- “क्या आप किसी लैला खान को जानते हैं? वो बॉम्बे में रहती है, राजेश खन्ना के साथ फिल्म कर चुकी है।” राकेश ने झट से कहा, ‘हां, जिस फिल्म की आप बात कर रहे हैं वो मेरी फिल्म है।’ राकेश ने अपनी तरफ से पूरी कहानी बताई और पुलिस ऑफिसर ने अपनी। राकेश को ये सुनते ही अनहोनी का एहसास हुआ। कश्मीर पुलिस की जांच में सामने आया कि जिस दुकान में लैला खान की कार मिली थी, वो परवेज टाक ने 10 महीने पहले किराए पर ली थी। वो हर महीने किराया भरता था, लेकिन आता नहीं था, उसने उस दुकान में सिर्फ कार पार्क कर रखी थी। अब पुलिस को परवेज टाक की तलाश थी। जैसे-जैसे जांच तेज हुई, वैसे-वैसे कई परतें खुलीं। सामने आया कि परवेज लैला के परिवार के साथ इगतपुरी फार्महाउस गया था, इसके बाद से ही परिवार लापता है। लैला के घर की तलाश में परवेज का वोटर आईडी कार्ड भी मिला। कार की जानकारी के लिए लैला खान तक पहुंचना जरूरी थी। क्राइम ब्रांच भी केस की जांच कर रहा था। जून 2012 में मुंबई पुलिस टीम, क्राइम ब्रांच की टीम और फोरेंसिक टीम इगतपुरी फार्महाउस पहुंचीं। घंटों तक छानबीन हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। दूसरी तरफ कश्मीर से परवेज टाक के दोस्त की गिरफ्तारी हुई। उसने पुलिस की मदद की और परवेज को ट्रेस करने में मदद की। 12 जून को आखिरकार कश्मीर बॉर्डर से परवेज टाक को गिरफ्तार कर लिया गया। वो पाकिस्तान भागने की फिराक में था। परवेज को कई सवालों के जवाब देने थे। पहला सवाल- उसका कश्मीर में हुए बम ब्लास्ट से क्या लेना-देना है। दूसरा सबसे अहम सवाल- लैला खान और उनका परिवार कहां हैं। कश्मीर में हुए बम ब्लास्ट के मामले में परवेज टाक का कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन लैला खान के बारे में वो काफी कुछ जानता था। उसने पुलिस को एक अटपटा बयान दिया। पहले उसने कहा, लैला दुबई भाग गई। फिर सख्ती होने पर उसने कहा- लैला के परिवार की एक साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये सच था। लैला वाकई अब इस दुनिया में नहीं थीं, लेकिन परवेज ने मुकम्मल सच नहीं बताया था। अगले दिन क्राइम ब्रांच, मुंबई पुलिस और फोरेंसिक टीम उसकी निशानदेही पर उसी फार्महाउस पहुंचीं। परवेज आगे की तरफ चल रहा था और सभी टीम उसके पीछे-पीछे। परवेज फार्महाउस के अंदर आया, चारों तरफ नजरें घुमाईं, कुछ देर ठहरा और फिर पीछे की तरफ से बाहर आया। इस बार वो घबराया हुआ था। उसने धीरे से एक हाथ उठाया और उंगली से जमीन की तरफ इशारा किया। इशारा मिलते ही पुलिस ने खुदाई शुरू की। एक घंटे बीते, 2 और फिर 3। कुछ नहीं मिला। पुलिस 15 फुट तक खोद चुकी थी, जून की गर्मी में सभी पसीने से तरबतर थे। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अंबादास पोते भी गड्ढे में उतर आए और टीम को खुदाई करते रहने के लिए कहा। अचानक उनकी नजर एक अटपटी चीज पर पड़ी। जमीन में न जाने कितनी चीजें दफन होती हैं, लेकिन वो नजारा कुछ अलग था। नजदीक आकर गौर किया तो वो उंगली या अंगूठे की हड्डी थी। कुछ देर की खामोशी के बाद हलचल तेज हो गई। अब सभी ने औजार रख दिए और हाथों से मिट्टी हटाना शुरू कर दिया। वो कोई उंगली या अंगूठा नहीं बल्कि पूरा कंकाल था। खुदाई तेज हुई और 3 कंकाल निकले। हड्डियों में मांस का कतरा तक नहीं था, बस कुछ कपड़ों के चीथड़े थे।। किसी कंकाल के गले में चेन थी तो किसी हड्डीनुमा कलाई में कंगन था। उनके नीचे फटे-चीथड़े गद्दे भी थे। जैसे ही उन गद्दों को उठाया गया, पुलिस के सामने 3 और कंकाल थे। एक कंकाल के निचले हिस्से में जींस थीं, जो डिकंपोज नहीं हुई थी। उसमें किलर ब्रांड का लोगो था, मानों वो कंकाल किसी लड़के का हो। पास में एक जानवर का भी कंकाल था। कंकालों की हालत इतनी बदतर थी कि उन्हें थैलियों में भरकर फोरेंसिक एग्जामिनेशन के लिए भेजा गया। परवेज नहीं बैठा, एक-टक खुदाई देखता रहा। जब सारे कंकाल निकले तो उसने इशारे में रुक जाने को कहा। बस इतने ही कंकाल थे। लेकिन वो कंकाल किसके थे। क्या वो लैला खान और परिवार के थे। क्या लैला खान का परिवार हत्याएं कर भाग निकला। इन सभी सवालों के जवाब जानिए कल बुधवार, 21 जनवरी को, बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के लैला खान हत्याकांड के पार्ट-2 में। जमीन खोदकर निकाले गए एक्ट्रेस के परिवार के 6 कंकाल: एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, कातिल तसल्ली होने तक सिर कुचलता रहा (नोटः ये खबर लैला खान की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाने वाले डायरेक्टर राकेश सावंत से बातचीत, केस की जांच कर रहे डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस अंबादास पोते के पुराने इंटरव्यू और दैनिक भास्कर की सीनियर रिपोर्टर वर्षा राय की रिसर्च के आधार पर लिखी गई है। ) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय



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राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड:अध्यापक भर्ती: हिंदी में 88.03 प्रतिशत अंग्रेजी में 90.5 फीसदी रही उपस्थिति




राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से सोमवार को अध्यापक भर्ती लेवल -2 में दो विषयों की परीक्षा आयोजित हुई। पहली पारी में अंग्रेजी और दूसरी में हिंदी विषय की परीक्षा हुई। पूरी जांच पड़ताल के बाद अभ्यर्थियों काे परीक्षा केंद्रों पर एंट्री दी गई। 14 जिलों में हुई परीक्षा में हिंदी विषय में 88.03 % और अंग्रेजी की परीक्षा में 90.5% उपस्थिति रही। हिंदी में सबसे ज्यादा उपस्थिति बाड़मेर में 96.38 प्रतिशत रही। वहीं सबसे कम 81.75% अभ्यर्थी अजमेर में परीक्षा देने अाए। हिंदी में सोमवार काे 14 जिलों में 1,73,291 अभ्यर्थियों में से 1,52,552 उपस्थित रहे, वहीं 20,739 अभ्यर्थी अनुपस्थित थे। अंग्रेजी विषय में सबसे ज्यादा उपस्थिति बांसवाड़ा में 97.02 प्रतिशत रही। अंग्रेजी में 53,082 अभ्यर्थियों में से 48,041 उपस्थित रहे, 5041 अनुपस्थित। आज अंतिम दिन 20 जनवरी काे पहली पारी में संस्कृत शिक्षा लेवल वन की परीक्षा हाेगी और दूसरी पारी में लेवल टू संस्कृत की परीक्षा हाेगी। गौरतलब है कि इस भर्ती में कुल 7759 पद हैं। इसमें लेवल वन में 5636 और लेवल टू में 2123 पद हैं। परीक्षा का आयोजन जयपुर, अजमेर, अलवर, बांसवाडा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, झुंझुनूं, जोधपुर, कोटा, श्रीगंगानगर और उदयपुर जिलों में हाे रहा है।



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सुविवि बना एडवांस्ड टेक्नोलॉजी हब:4.50 करोड़ से 4 हाईटेक लैब्स तैयार, एआई, साइबर सिक्योरिटी जैसे 14 से ज्यादा रोजगारपरक कोर्सेज शुरू किए



प्रदेश की भजनलाल सरकार ने राजस्थान सेंटर ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (आरकेट) के तहत मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर को बड़ी सौगात दी है। विवि को 4.50 करोड़ लागत से तैयार 4 हाईटेक लैब्स मिल गई है। इसके साथ ही सुविवि एडवांस्ड टेक्नोलॉजी हब बन गया है। उद

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सुविवि के विज्ञान भवन के ब्लॉक-ए में चार अत्याधुनिक सूचना एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाएं (इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी लैब्स) स्थापित की हैं। इन प्रयोगशालाओं को परिष्करण विद्यालय (फिनिशिंग स्कूल) की तरह विश्वस्तरीय मापदंडों के आधार पर तैयार किया गया है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सिक्योरिटी, डाटा एनालिसिस, क्लाउड कम्प्यूटिंग, मशीन लर्निंग, ब्लॉक चेन, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी आदि से संबंधित 14 से ज्यादा कोर्स अत्याधुनिक तकनीक के साथ कराए जा रहे हैं।

प्रवेश क्विजाथॉन के माध्यम से, 50 से 100% तक स्कॉलरशिप मिलेगी

76 स्टूडेंट एकसाथ पढ़ सकेंगे

चारों लैब्स में कुल 76 विद्यार्थियों को एकसाथ अलग-अलग तकनीकी कोर्सेज के लिए अत्याधुनिक कम्प्यूटर सिस्टम स्थापित कर मुख्य सर्वर से जोड़ दिए हैं। इसका सीधा फायदा सुविवि के संघटक-संबद्ध कॉलेजों में प्रतिवर्ष पढ़ने वाले औसत 1.50 लाख विद्यार्थियों के साथ-साथ पास आउट लाखों विद्यार्थियों को मिल सकेगा। अभी 16 से 200 घंटे वाले अलग-अलग तकनीकी कोर्सेज 400 से अधिक विद्यार्थियों को कराए गए हैं, इसका सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।

सुविवि के संघटक व संबद्ध 250 से अधिक कॉलेजों में हर साल अध्ययनरत 1.45 से 2 लाख बीएससी, एमसीए, एमएससी, बीटेक, एमटेक, एमबीए, पीजीडीसीए सहित किसी भी संकाय में स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों के साथ-साथ पास आउट लाखों विद्यार्थी सुविवि के इंजीनियरिंग कॉलेज के तहत संचालित आरकेट की इन चार लैब्स में इन कोर्सेज में दाखिला ले सकेंगे। जिन्हें संबंधित कोर्स करने पर सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। प्रवेश क्विजाथॉन के तहत ही दिया जाएगा। क्विजाथॉन के टॉप-20 विद्यार्थियों को 100% स्कॉलरशिप, टॉप 21 से 40 वालों को 75% और इससे नीचे पायदान वालों को 50% स्कॉलरशिप प्रदान करने का प्रावधान है। क्विजाथॉन प्रदेश सरकार के आरकेट द्वारा कराई जाने वाली प्रवेश परीक्षा है।

भास्कर एक्सपर्ट- इंडस्ट्री और विवि के बीच सेतु का काम करेगा आरकेट सुविवि में आरकेट प्रभारी और कंप्यूटर विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश पंवार बताते हैं कि आरकेट का उद्देश्य उच्च शिक्षा और इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों के बीच की खाई को कम करना है। इस मॉडल में फिनिशिंग स्कूल की तर्ज पर विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, इंडस्ट्री पार्टनरशिप, केस स्टडी बेस्ड लर्निंग, ग्लोबली रिकग्नाइज्ड सर्टिफिकेशन शामिल है। मेरिट स्कॉलरशिप से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर मिलेगा। यह न केवल छात्रों की स्किल डेवलपमेंट करता है, बल्कि इंडस्ट्री को भी रेडी-टू-हायर स्किल्ड टैलेंट उपलब्ध कराता है।



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एनाटॉमी विभाग:डाक टिकट संग्रहकर्ता खमेसरा का निधन, आरएनटी को देहदान




अंबावगढ़ निवासी प्रख्यात डाक टिकट संग्रहकर्ता रवि खमेसरा का रविवार को निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप परिजनों ने सोमवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज को देहदान कर श्रद्धांजलि अर्पित की। लच्छीराम हंजाबाई सुखलेचा चैरिटेबल ट्रस्ट के सचिव गौतम सुखलेचा ने बताया कि मोक्ष रथ में अंतिम यात्रा के रूप में पार्थिव देह को आरएनटी मेडिकल कॉलेज लाया गया। सैकड़ों समाजजनों एवं परिजनों की उपस्थिति में एनाटॉमी विभाग में देहदान की प्रक्रिया पूरी की गई। बता दें, रवि खमेसरा मिलनसार, सरल एवं सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे। खमेसरा धार्मिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में पुरस्कृत डाक टिकट संग्रहकर्ता थे। परिवार में पत्नी पुष्पा खमेसरा एवं बेटे प्रशांत खमेसरा सहित अन्य परिजन हैं। देहदान के दौरान राजकुमार चेलावत, अशोक लोढ़ा, शैलेंद्र खमेसरा, गौतम सुखलेचा सहित खमेसरा एवं चेलावत परिवार के सदस्य मौजूद थे। कॉलेज की ओर से डॉ. श्वेता अस्थाना, डॉ. सुनील शर्मा एवं डॉ. सुशांत ने परिवार का आभार व्यक्त किया। कॉलेज को इस वर्ष का तीसरा देहदान
आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार यह इस वर्ष का तीसरा स्वैच्छिक देहदान है। इसके साथ ही आशाधाम से दो देहदान हुए हैं। इससे पहले इसी वर्ष आशुलाल वर्डिया एवं संध्या नाहर का देहदान हो चुका है। सुखलेचा चैरिटेबल ट्रस्ट उदयपुर में अब तक 380 से अधिक देहदान संकल्प पत्र भरवा चुका है। एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि अब तक 176 स्वैच्छिक देहदान हुए हैं, जबकि आशा धाम एवं लावारिस शवों को मिलाकर 225 देहदान मिले हैं।



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ऑपरेशन साइबर मुक्ति:कंबोडिया से चला रहे थे साइबर ठगी गिरोह, मुख्य दलाल पकड़ा




कोटपूतली-बहरोड़ जिला पुलिस ने ऑपरेशन साइबर मुक्ति के तहत साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है। साइबर सेल टीम ने 15 पुलिस थानों की 25 टीमों के साथ संयुक्त कार्रवाई कर नेटवर्क को बेनकाब किया। नेटवर्क में युवकों को विदेश भेजने वाली चाइनीज कंपनियों का मुख्य दलाल सुरेश सैन निवासी रामनगर बानसूर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने बताया कि कंबोडिया से संचालित चाइनीज साइबर गिरोह द्वारा डिजिटल अरेस्ट, फर्जी वेबसाइट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के जरिए भारतीय नागरिकों से हजारों करोड़ रुपए की ठगी की जा रही थी। आरोपी टेलीग्राम, व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम के विज्ञापनों के माध्यम से शेयर मार्केट के नाम पर असली ऐप से मिलते-जुलते फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट बनाते थे। इसके बाद लोगों को व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, कंबोडिया स्थित फर्जी कॉल सेंटरों से आरोपी खुद को सीबीआई, पुलिस, ईडी और कस्टम अधिकारी बताकर भारतीय नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर डराते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गिरोह द्वारा सैकड़ों युवकों को कंबोडिया भेजा गया, जिनमें अकेले बानसूर क्षेत्र से 50 से अधिक युवक शामिल हैं। अब तक 15 संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि 25 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। विदेश भेजे गए युवकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और पुलिस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क व आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही है। पुलिस को सूचना मिली थी कि कोटपूतली-बहरोड़ सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों को साइबर फ्रॉड के लिए कंबोडिया भेजा जा रहा है। इस पर बानसूर कस्बा, रामनगर, गुता, बूचियावास, मौठुका, फतेहपुर, संथालपुर, लेकड़ी, आलमपुर, बाबरिया सहित कई गांवों में दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान 41 लोगों को डिटेन किया गया। पूछताछ में सामने आया कि बानसूर, कोटकासिम और मुंडावर क्षेत्र के कई लोग इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।



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Muslim Youth Apologises Again for Spitting in Golden Temple Sarovar, SGPC Faces Questions| Golden Temple viral Video


अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में कुल्ला करने वाले मुस्लिम युवक ने दोबारा माफी मांगी है। युवक ने फिर यह तर्क दिया कि उसे मर्यादा का पता नहीं था। दूसरी बार माफी की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि पहली माफी के वीडियो में युवक ने जेब में हाथ डाल रखे

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इसलिए अब जारी किए वीडियो में युवक ने हाथ जोड़कर माफी मांगी। हालांकि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की तरफ से युवक के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कराई गई है। इससे पहले जब गुजरात की युवती अर्चना मकवाना ने गोल्डन टेंपल में योग किया था तो तब SGPC ने उस पर केस दर्ज करवा दिया था। इसको लेकर भी सोशल मीडिया पर SGPC के ऊपर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में मुंह में पानी लेकर वहीं थूकता मुस्लिम युवक।

गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में मुंह में पानी लेकर वहीं थूकता मुस्लिम युवक।

गोल्डन टेंपल में युवक के 2 वीडियो सामने आए

1. मुंह में पानी लिया, फिर वहीं थूक दिया​​​​​​ सुब्हान रंगरीज ने इंस्टाग्राम पर अपनी 2 वीडियो शेयर की। एक वीडियो में वह पवित्र सरोवर में नंगे पैर डालकर बैठा है। इस दौरान वह 2-3 बार मुंह में पानी लेता है और एक बार उसी में थूक देता है। इस दौरान वह यह भी दिखाता है कि मेरे सामने ही गोल्डन टेंपल है। यह वीडियो बनाने से साफ है कि उसका मकसद यहां रील बनाना ही था।

2. मैं टोपी में, किसी ने एतराज नहीं जताया, सब भाई-भाई दूसरे वीडियो में वह कहता है कि मैं आज गोल्डन टेंपल, पंजाब आया था। भाई ऐसा हिंदुस्तान चाहिए, यहां पर सबने अपने सिर पर पगड़ी बांध रखी है। सारे अपने पंजाबी भाई हैं। सिर्फ मैंने सिर पर टोपी लगा रखी है, लेकिन किसी ने मुझसे ये नहीं पूछा कि भाई, तुमने टोपी क्यों लगा रखी है। क्योंकि हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई, आपस में हैं भाई-भाई और भाई-भाई ही बनकर रहना चाहिए।

युवक ने रील में खुद को मुस्लिम शेर लिखा हुआ था। इस दौरान वह गोल्डन टेंपल भी दिखाता हुआ नजर आया।

युवक ने रील में खुद को मुस्लिम शेर लिखा हुआ था। इस दौरान वह गोल्डन टेंपल भी दिखाता हुआ नजर आया।

विवाद हुआ तो माफी मांगी, हाथ जेब में डाले हुए थे सरोवर में कुल्ला करने को लेकर विवाद हो गया। SGPC ने भी इस पर एतराज जताया। जिसके बाद सुब्हान रंगरीज ने वीडियो जारी कर माफी मांगी। इसमें उसने कहा- भाइयों, मैं 3 दिन पहले श्री दरबार साहिब गया था। बचपन से मैं वहां जाना चाहता था। मुझे वहां की मर्यादा के बारे में नहीं पता था। मैंने सरोवर के पानी से वजू किया था, धोखे से मेरे मुंह से पानी निकलकर उसमें गिर गया। मैं सारे पंजाबी भाइयों से सॉरी बोलता हूं। मैं वहां आकर भी सॉरी बाेलूंगा। मैं पूरी सिख कम्युनिटी को सॉरी बोलता हूं। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।

दूसरी बार माफी में युवक ने क्या कहा… दिल्ली के रहने वाले सुब्हान रंगरीज ने 17 सेकेंड का वीडियो जारी किया। इसमें उसने कहा- जब मैं दरबार साहिब गया था, तब मुझसे एक बड़ी गलती हो गई। यह गलती भूलवश हुई थी। मुझे वहां की मर्यादा की पूरी जानकारी नहीं थी, नहीं तो मैं ऐसी गलती कभी नहीं करता। आप मुझे अपना बेटा समझकर, अपना भाई समझकर माफ कर दीजिए। इस दौरान उसने एक बार हाथ भी जोड़ा। वीडियो के ऊपर भी उसने सॉरी दिल से लिखा हुआ था।

युवक सुब्हान रंगरीज गोल्डन टेंपल प्लाजा के आगे खड़े होकर बात कर रहा है। इसमें उसने टोपी लगा रखी है, हालांकि गोल्डन टेंपल में टोपी पहनकर नहीं आने दिया जाता। फतेहगढ़ साहिब के शहीदी समागम में तो निहंगों ने टोपियां निकालकर बर्छे पर टांग दी थी।

युवक सुब्हान रंगरीज गोल्डन टेंपल प्लाजा के आगे खड़े होकर बात कर रहा है। इसमें उसने टोपी लगा रखी है, हालांकि गोल्डन टेंपल में टोपी पहनकर नहीं आने दिया जाता। फतेहगढ़ साहिब के शहीदी समागम में तो निहंगों ने टोपियां निकालकर बर्छे पर टांग दी थी।

युवक को दूसरी बार माफी क्यों मांगनी पड़ी युवक का वीडियो वायरल हुआ और विवाद बढ़ा तो युवक ने माफी मांग ली। मगर, सिख समुदाय ने उसके हाव-भाव को लेकर एतराज किया। जिसमें उसके भीतर कहीं भी गलती होने जैसा भाव नहीं दिखा। सिख संगत को एतराज था कि उसके हाव-भाव में कहीं भी धार्मिक भावनाएं आहत करने का पता चलने के बाद भी पश्चाताप जैसा कुछ नहीं दिखा। उसने माफी मांगते वक्त विनम्रता नहीं दिखाई।

कौन है युवक, जिसे 2 बार माफी मांगनी पड़ी सुब्हान रंगरीज दिल्ली का रहने वाला है। वह सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता है। उसने इंस्टाग्राम पर खुद को जिम ट्रेनर बता जिम लवर के नाम से प्रोफाइल बनाई है। इसी इंस्टाग्राम ID पर उसने अपने वीडियो डाले थे। दैनिक भास्कर एप से बात करते हुए रंगरीज ने कहा था कि मेरा कोई भी मकसद नहीं था। मैंने सरोवर में वजू किया था और गलती से पानी सरोवर में गिर गया। उस समय आसपास कोई सेवादार नहीं था। अगर कोई होता तो मुझे रोक देता और मुझे पता चल जाता कि यहां की मर्यादा क्या है।

फॉलोअर्स के आंकड़ों में टाइम के हिसाब से बदलाव आता रहता है।

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लोको ग्राउंड में आकार ले रहा मल्टी स्पोर्ट्स हब:25 हजार वर्गमीटर में 8 लेन का 400 मीटर ट्रैक एंड फील्ड, कबड्डी, वॉलीबॉल मैदान व बास्केटबॉल कोर्ट बनेगा




अजमेर को जल्द ही एक और मल्टी-स्पोर्ट्स ग्राउंड की सौगात मिलने जा रही है। रेलवे के लोको स्पोर्ट्स ग्राउंड को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है, जिससे यहां एथलेटिक्स की प्रतियोगिताओं सहित वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और कबड्डी जैसे राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले खेले जा सकेंगे। भारतीय रेलवे बोर्ड ने इसके लिए 2 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। 25 हजार वर्गमीटर में तैयार हो रहा यह आधुनिक मैदान मार्च 2026 तक बनकर तैयार होगा, जिससे शहर के खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर मंच मिलेगा। मैदान के ग्राउंड लेवल को 5 फीट तक मिट्टी से भरती करके ऊंचा उठाया गया है, जिससे यहां पर पानी भरने की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई है। मैदान में 500 दर्शकों के बैठने के लिए पवेलियन सहित अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है। अभी 1.71 करोड़ रुपए से सिविल वर्क और 26 लाख रुपए से बिजली फिटिंग सहित अन्य फिनिशिंग के कार्य हो रहे हैं। स्थान बचने पर क्रिकेट बॉक्स या अन्य सुविधाएं विकसित करने की योजना है। ग्राउंड को नए सिरे से तैयार कराने का काम मुख्य कारखाना प्रबंधक विकास आनंद, डिप्टी सीएमई मनोज मीणा और लोको ग्राउंड सचिव नागरमल मीणा की देखरेख में हो रहा है।



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हरियाणवी प्लेयर का पंजाब के पूर्व गैंगस्टर को जवाब:कहा- तूने 2 दिन कबड्डी खेली, टीके से खेला होता तो घर की टीम बनाता




पंजाब के पूर्व गैंगस्टर लक्खा सिधाना को हरियाणवी कबड्डी प्लेयर शीलू बल्हारा ने करारा जवाब दिया है। सिधाना की टिप्पणी पर बिफरे शीलू ने कहा कि अगर टीके लगाने से कबड्‌डी खेली जाती तो पिता, ताऊ-दादा को भी टीके लगा देता, किसी की जरूरत नहीं पड़ती, हम घर की टीम बना लेते। टीके से कबड्‌डी नहीं खेली जाती। असल में पिछले दिनों लक्खा सिधाना का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसने दो मशहूर कबड्डी खिलाड़ियों पंजाब के सुल्तान और हरियाणा के शीलू का नाम लेकर कहा कि पंजाब में खिलाड़ी नशे के इंजेक्शन लगाकर कबड्डी खेल रहे हैं, जिससे इन्हें हार्ट अटैक आ रहे हैं। सिधाना ने वीडियो में नशे और बदमाशी से खिलाड़ियों के डरने को लेकर खुलासे किए हैं। रोहतक के बहु अकबरपुर गांव के शीलू पंजाब में काफी फेमस हैं, और विदेशों में भी कबड्‌डी खेलने जाते हैं। पंजाब से शीलू 24 ट्रैक्टर, 50 बाइक और कंबाइन तक जीतकर ला चुके हैं। शीलू मशहूर कैचर हैं और उनकी पकड़ व स्टाइल चर्चा में रहता है। जानिए कौन हैं लक्खा सिधाना और इन्होंने क्या कहा….. अब जानिए शीलू बल्हारा ने लक्खा सिधाना को क्या जवाब दिया.. 3 पॉइंट में समझिए कौन हैं शीलू बल्हारा पिता बोले- शीलू ने नहीं किया कभी नशा
दैनिक भास्कर एप से बातचीत में शीलू बल्हारा के पिता सुरेंद्र बल्हारा ने बताया कि लक्खा सिधाना बकवास कर रहा है, इसलिए उसको जवाब देना जरूरी था। अमेरिका में खेलने के नाम पर भी उसने गलत बयानबाजी की है। शीलू ने जिस इवेंट के लिए पैसे लिए हैं, उसमें खेलकर भी आया है। शीलू को आमतौर पर बाहर खेलकर आने के बाद ही फीस मिलती है। शीलू ने अपने खेल को ईमानदारी से खेला है, उसने कभी जीवन में नशा नहीं किया।



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गुरुग्राम में पड़ोसी से जलन में डिलीवरी बॉय को कुचला:खुद की बिल्डिंग खाली पड़ी, पड़ोस में स्विगी खुला; गली में खड़ी होती थीं बाइकें




गुरुग्राम में डिलीवरी राइडरों को 4 बार स्कॉर्पियो से कुचलने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने BAMS डॉक्टर नवीन यादव को गिरफ्तार किया है। वह दौलताबाद में स्वास्थ्य विभाग के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में तैनात है। जांच में खुलासा हुआ कि उसने काले रंग की स्कॉर्पियो में रौब जमाने के लिए हूटर भी लगवा रखा था। डॉक्टर को इस बात से जलन थी कि पड़ोसी की बिल्डिंग में स्विगी खुल गया था और उन्हें अच्छा किराया मिल रहा था। गली में डिलीवरी बॉयज की बाइकें भी खड़ी रहती थीं। इस घटना का वीडियो सामने आया था, जिसमें दिख रहा है कि डिलीवरी राइडर्स पर चार बार स्कॉर्पियो चढ़ाने की कोशिश हुई। टिंकू पवार गंभीर रूप से जख्मी हुआ है और उसकी छाती, पेट, कमर और पैर में फ्रैक्चर आए हैं। जानिए, शिकायत में क्या और कौन गिरफ्तार हुआ…. प्रारंभिक पूछताछ में हमले की 3 वजह सामने आईं SHO बोले- आरोपी को अरेस्ट किया
सेक्टर-10 थाने के SHO कुलदीप ने बताया कि आरोपी डॉक्टर नवीन यादव को अरेस्ट कर लिया है। उसे हयातपुर गांव से ही पकड़ा है। उसकी काले रंग की स्कॉर्पियो को घर के बाहर से बरामद किया था। उपद्रव करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।



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प्रयोगशाला सहायक संगठन के प्रदेशाध्यक्ष बने सुनील




अलवर| राज्य के चिकित्सा विभाग से जुड़े समस्त प्रयोगशाला सहायकों की बैठक सोमवार को गवर्नमेंट प्रेस कार्यालय जयपुर में हुई। बैठक में प्रदेशभर से आए प्रयोगशाला सहायकों ने सर्वसम्मति से सुनील कुमार तिवारी को राज्य के प्रयोगशाला सहायक संगठन का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। इस दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोविंद नारायण सोनी ने तिवारी को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी। इस अवसर पर संगठन की आगामी रणनीति, कर्मचारियों की लंबित मांगों, पदोन्नति, वेतन विसंगतियों और कार्य परिस्थितियों से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जीतूराम खाती, विकास बेनीवाल, मजीद खान (चूरू), असगर अली (डीडवाना), दीनदयाल स्वामी (टोंक), लोकेश शर्मा (भीलवाड़ा), अभय सिंह राठौड़ (चित्तौड़गढ़), रेवंत सिंह (बाड़मेर), सुशील कुमार (धौलपुर) सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में प्रयोगशाला सहायक मौजूद रहे।



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