लहरों पर लज्जत:फतसागर के बीच टाइटेनिक कैंटीन तैयार, पर्यटक ओपन एयर सीटिंग में ले सकेंगे व्यंजनों का लुत्फ




फतहसागर झील के बीचों-बीच शहर के लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट नेहरू गार्डन में पर्यटकों को जल्द ही एक नया और रोमांचक अनुभव मिलेगा। लंबे समय से बंद पड़ी टाइटेनिक के आकार की कैंटीन को रेनोवेट किया गया है। पहली बार शिप की छत को ओपन-एयर सिटिंग एरिया के रूप में विकसित किया गया है, जो नए कलेवर और आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यटकों को लुभाएगा। इसी माह इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। यूडीए कमिश्नर राहुल जैन के अनुसार पहले पर्यटक केवल अंदर बैठकर ही झील के नजारों का आनंद लेते थे, लेकिन अब पहली बार नाव की छत पर बैठकर खूबसूरत व्यू का मजा ले सकेंगे। साथ ही झील के बीचों-बीच ‘टाइटेनिक पोज’ में फोटो खिंचवाना पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण होगा। सीमित क्षमता के साथ कैंटीन की छत पर प्री-वेडिंग शूट की भी सुविधा मिलेगी। नाव की छत पर ‘ओपन-एयर’ सिटिंग का आनंद यूडीए कमिश्नर राहुल जैन ने बताया कि इस बार कैंटीन के स्वरूप में बड़ा बदलाव किया गया है। अब पर्यटक शिप के अंदर और छत पर ओपन-एयर सिटिंग एरिया में खान-पान का आनंद ले सकेंगे। क्षमता के आधार पर ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा। शिप कैंटीन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि उदयपुर आने वाले लोगों को फतहसागर के बीचों-बीच एक मॉडर्न और लग्जरी अनुभव भी देगी। डायनामिक लेमिनार फाउंटेन, वीडियो जेट फव्वारे लुभा रहे
हाल ही नेहरू गार्डन में नए फव्वारे और लाइटिंग शुरू की गई थी। यहां डायनामिक लेमिनार फाउंटेन, वीडियो जेट, लेजर शो और कई तरह के जेट (पिकॉक, फ्लावर) फव्वारे लगाए गए हैं।



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एडहॉक कमेटी के सदस्यों ने की कन्वीनर से मीटिंग बुलाने की मांग, एजेंडे भी तय ​कर दिए



जयपुर | आरसीए एडहॉक कमेटी के सदस्यों ने कन्वीनर डीडी कुमावत को रविवार को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने आरसीए एडहॉक कमेटी की मीटिंग बुलाने की मांग की। एक तरफ कन्वीनर से मीटिंग बुलाने की बात कर रहे हैं दूसरी ओर एजेंडे भी खुद ही तय कर रहे हैं। इन एजेंडों में हर जिला क्रिकेट संघ को 1-1 लाख रुपए महीने देने, 5 लाख इक्विपमेंट वगैरह की खरीद के लिए देने और हर जिले में एक-एक महिला क्रिकेट कोच लगाना प्रमुख हैं। सारी कमेटियों को फिर से गठित करने को भी एजेंडे में शामिल किया गया है। एक अन्य पत्र में पूछा गया कि बाई सर्कुलेशन कोई AGM/EGM/SGM बुलाई गई है तो वह अवैध है। कन्वीनर को अधिकार नहीं है। न ही ऐसा प्रावधान आरसीए के संविधान में और लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों में है। आरसीए में अब सत्ता संघर्ष तेज हो गया है। अब सिर्फ जिला क्रिकेट संघों को खुश रखने के लिए काम किए जा रहे हैं। क्रिकेट की भलाई और आईपीएल के बारे में कोई नहीं सोच रहा। एक बार आईपीएल बाहर चला गया तो जयपुर में आईपीएल मैचों को क्रिकेटप्रेमी तरसेंगे। सवाल? क्या अब तक सभी काम संविधान के अनुसार हुए सवाल यह भी उठता है कि क्या आरसीए एडहॉक कमेटी ने अब तक जो भी काम किए हैं वे सब लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों और आरसीए संविधान अनुसार हुए हैं। आरसीए संविधान में कहां लिखा है कि ऑब्जर्वेशन कमेटी बनाई जाएगी। 2-2 बार ऑब्जर्वेशन कमेटी बना दी गई।



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आईजीएनपी का निर्माण शुरू:नहर पर हर साल 700 करोड़ का खर्च, मिल रही 15000 करोड़ की कमाई




1922 में बनी गंगनहर की लागत 8 करोड़ थी। आईजीएनपी का निर्माण शुरू हुआ तो बजट एस्टीमेट 6929.38 करोड़ का रखा गया। मगर 500 किलोमीटर नहर के निर्माण के बाद प्रोजेक्ट रोक दिया गया। लागत थी 3000 करोड़ रुपए। मगर इस लागत ने राजस्थान को बदले में जो दिया वह अनमोल है। नहरी पानी ने मरुधरा की सूरत और किस्मत दोनों बदल दी। आज इस नहर पर सालाना राज्य सरकार 500 से 700 करोड़ तक खर्च करती है। इसमें 460 करोड़ तो सिर्फ वेतन आदि का बजट है। जबकि फायदे का आकलन करें तो नहरी पानी से सिंचित क्षेत्र में पैदा होने वाले अनाज की कीमत ही 15000 करोड़ से ज्यादा है। कमाई का आंकलन भी इंदिरा गांधी नहर विभाग ने तमाम इकोनोमिस्ट की एक कमेटी बनाकर करवाया। आईजीएनपी के चीफ इंजीनियर ​विवेक गोयल ने बताया कि आज हम 15 हजार करोड़ से ज्यादा अनाज उत्पादन कर रहे हैं। नहर से आए बदलाव की कहानी यहां जो कुछ भी है वो नहरी पानी से ही है पश्चिमी राजस्थान में जो कुछ भी है वो नहरी पानी आने की वजह से ही है। स्प्रिंकलर सिस्टम अगर और विकसित हो जाए तो कम पानी में उत्पादन और बढ़ सकता है। सिर्फ इंदिरा गांधी नहर से 5000 से 5500 करोड़ रुपए का अन्न प्रति वर्ष हो रहा है।



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रवि नैयर का आरोप- विधायक रफीक खानबौखला गए हैं, मैंने 400 नहीं, 2000 आवेदन किए




भाजपा नेता व आदर्श नगर से विधानसभा में भाजपा के प्रत्याशी रहे रवि नैयर ने कांग्रेस विधायक रफीक खान पर रविवार को जमकर आरोप जड़े। नैयर ने कहा कि रफीक आरोप लगाते समय तो कम से कम अपनी जानकारी दुरुस्त करके बोलें। वे बता रहे थे कि मैंने अपने हस्ताक्षर से 7 नंबर फॉर्म भरकर 400 वोटरों की जांच करने को कहा है। उनकी जानकारी अधूरी है। बता दूं कि मैंने अब 2000 वोटरों की जांच के लिए बीएलए प्रथम होने के नाते अपने हस्ताक्षर कर आवेदन किए हैं। नैयर ने कहा- ये आवेदन इसलिए किए गए, क्योंकि इन लोगों के बारे में सूचना मिली है कि यहां आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के निवासी नहीं हैं। अब निर्वाचन विभाग नियमों के अंतर्गत इनकी जांच करेगा, यदि वे फर्जी होंगे तो नाम कटेंगे, अन्यथा यथावत रहेंगे। ऐसे में रफीक खान के आरोप बेबुनियाद हैं। उनके आरोपों में कोई दम नहीं हैं। नैयर का कहना है आदर्श नगर विस में 46,700 वोटर अवैध थे, जो एसआईआर प्रक्रिया में पहले से ही कट चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या के ये वह वोटर थे, जो बरेली, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, मुजफ्फरपुर सहित कई शहरों के निवासी थे। ये ही चुनाव के दौरान कांग्रेस के लिए कभी जयपुर आकर, कभी उत्तर प्रदेश या बिहार जाकर वोट डालते हैं। फर्जी वोटर कट चुके तो कांग्रेस विधायक को तकलीफ हो रही। नैयर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान रफीक खान ने विधायक और अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन रहते बाहरी अल्पसंख्यकों के नाम अपनी विधानसभा क्षेत्र में जुड़वाए थे। अब उनके नाम कटने के बाद तकलीफ हो रही है और बिना सोचे-समझे बयानबाजी कर रहे हैं। यह इनकी बौखलाहट ही है। नैयर ने कहा कि जब आवेदनों पर हस्ताक्षर मैंने ही किए हैं तो रफीक मीडिया के सामने उनको वेरिफाई कराने, मिलवाने की बात कर अपना मजाक क्यों उड़वा रहे हैं।



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राव इंद्रजीत पर सीधे बयानबाजी क्यों:विश्लेषक मान रहे- जानबूझकर राव नरबीर-अभय को खुली छूट, BJP हाईकमान की मौन स्वीकृति




अहीरवाल की सियासत में एकछत्र राज कर रहे राव इंद्रजीत पर पहली बार सीधे हमले हो रहे हैं। वो भी नाम लेकर। नायब सरकार में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह व पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव खुलकर केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत और प्रदेश में कैबिनेट मंत्री उनकी बेटी आरती राव को सीधे निशाने पर ले रहे हैं। राव इंद्रजीत के लिए “छोटे दिल वाला” और “अहीर समाज के ठेकेदार” जैसे शब्द इस्तेमाल हो रहे हैं। रविवार को राव नरबीर सिंह ने यहां तक कह दिया- “राव इंद्रजीत पर उम्र का तकाजा है। वे पुरानी बातें भूल गए हैं। मेरा तो राजनीतिक जीवन ही राव इंद्रजीत को हरा कर शुरू हुआ है। 26 साल की उम्र में मैंने जाटूसाना जाकर राव इंद्रजीत को उनके गढ़ में हराया था।” असल में अहीर वोटरों के प्रभाव वाली 11-12 विधानसभा सीटों वाले अहीरवाल में BJP नेताओं में मचे घमासान पर पार्टी की चुप्पी हैरान कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस खुली बयानबाजी को पार्टी हाईकमान की मौन स्वीकृति हो सकती है। राव नरबीर और डॉ. अभय सिंह को ‘खुली छूट’ मिली है, तभी तो सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की बयानबाजी के बावजूद किसी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई। सबसे पहले पिछले कुछ दिनों में अहीर नेताओं की बयानबाजी पर नजर डालें मंत्री राव नरबीर 3 बड़े बयान… अभय सिंह यादव के 2 बयान… राव इंद्रजीत के 2 ताजा बयान… आरती राव के 2 अहम बयान… अब समझिए राजनीतिक विश्लेषक इसे किस नजरिए से देख रहे राव इंद्रजीत काे घर बैठाने की तैयारी के संकेत
दक्षिण हरियाणा की राजनीति पर नजर रखने वाले पॉलिटिकल एनालिस्ट नरेश चौहान का कहना है कि ऐसा मान सकते हैं कि भाजपा अब राव इंद्रजीत को “घर बैठाने” के लिए तैयार है। इसलिए उनके धुर विरोधी राव नरबीर को कंट्रोल नहीं किया जा रहा। इसलिए वे बाकायदा नाम लेकर राव इंद्रजीत पर निशाना साध रहे हैं। यह कोई एक दिन का नैरेटिव नहीं, बल्कि पिछले कुछ महीनों से राव इंद्रजीत की हर एक्टिविटी पर पार्टी की नजर है। क्या पार्टी आलाकमान को यह सब पता नहीं चल रहा? मीडिया में लगातार छप रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं। ये सोचने वाली बात है कि अनुशासनहीनता के बावजूद पार्टी चुप्पी क्यों साधे हुए है। ये जुबानी जंग अहीरवाल का बड़ा नेता बनने की होड़
हरियाणा की राजनीति पर द पॉलिटिक्स ऑफ चौधर शीर्षक से किताब लिख चुके वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सतीश त्यागी का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि अहीरवाल की राजनीति में रामपुरा हाउस (राव इंद्रजीत का पैतृक आवास) का बड़ा प्रभाव रहा है। तीन पीढ़ियों से उनकी प्रतिद्वंद्विता राव नरबीर के परिवार से रही है। राव नरबीर पहले भी नाम लेकर राव इंद्रजीत पर निशाना साधते रहे हैं। इस बार खुलकर बोल रहे हैं, नाम ले रहे हैं। अब राव इंद्रजीत भी खुलकर बोल रहे हैं, तो कंट्रोवर्सी बढ़ गई है। यह जुबानी जंग केवल अहीरवाल का बड़ा नेता बनने की होड़ के चलते हो रही है। डॉ. अभय सिंह अपने वजूद के लिए लड़ रहे हैं। उन्हें केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल का खासमखास माना जाता है। राव इंद्रजीत के कंट्रोवर्सी में रहने की 3 बड़ी वजह… अब जानिए चुप रहने वाले राव इंद्रजीत इतने मुखर क्यों हुए… राजनीतिक रिटायरमेंट की आहट और उत्तराधिकार की चिंता
राव इंद्रजीत की उम्र अब 75 वर्ष पार हो चुकी है। पहले वे शांत रहकर प्रभाव बनाए रखते थे, लेकिन अब रिटायरमेंट की आशंका से वे आक्रामक हो गए हैं। वे खुद को अहीरवाल का “राजा” मानते हैं और बेटी आरती राव को अपना उत्तराधिकारी बता चुके हैं। विरोधियों के बड़बोलेपन से नाराज: राव नरबीर और राव अभय सिंह उन्हें आउटडेटेड साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वे नाम लेकर हमला कर रहे हैं। उनके तीखे बयान से उनका प्रभाव बनाए रखने की कोशिश साफ दिखती है। महत्वाकांक्षा का दर्द
पहले वे पार्टी लाइन पर चलते थे, लेकिन 2024 चुनाव जीत के बाद भी मुख्यमंत्री न बन पाने की टीस बढ़ गई। वे दक्षिण हरियाणा को “उचित इनाम” न मिलने की शिकायत करते हैं और अब नाम लेकर सीएम नायब सैनी, पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर या राव नरबीर पर निशाना साधते हैं। वर्चस्व के खेल में डॉ. अभय सिंह भी खिलाड़ी बनना चाह रहे
अहीरवाल की राजनीति में पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव का रोल मुख्य रूप से राव इंद्रजीत सिंह के धुर विरोधी के रूप में सामने आया है। वे पूर्व IAS अधिकारी और नांगल चौधरी से भाजपा विधायक और खट्टर सरकार में मंत्री रह चुके हैं। अब वे राव इंद्रजीत के खिलाफ खुलकर बोलते हैं और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बने हैं।



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नियुक्तियां देने में भाजपा सरकार आगे:2 साल में खुले रोजगार के द्वार, अब तक 1 लाख नियुक्ति, 75 हजार पाइपलाइन में




प्रदेश में दो साल में बेरोजगारों के लिए रोजगार के द्वार खुले हैं। भजनलाल सरकार ने अब तक रोजगार मेलों में 1 लाख पदों पर नियुक्तियां दीं और 75 हजार नियुक्तियां पाइपलाइन में हैं। 2026 में एक लाख पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का कैलेंडर जारी िकया है। इस साल दिसंबर तक नियुक्तियों का आंकड़ा 2.75 लाख पहुंचेगा। पिछली कांग्रेस सरकार ने 5 साल में 2.13 लाख पदों पर नियुक्ति दी। 3 साल में भजनलाल सरकार कांग्रेस के आंकड़े काे पार कर लेगी। दो साल में धरना-प्रदर्शनों की संख्या भी कम रही है। राजस्थान बेरोजगार यूनियन के अध्यक्ष हनुमान किसान व संयोजक रवींद्र चौधरी का कहना है कि लगातार भर्तियों से बेरोजगारों में उत्साह है। फैक्ट फाइल ये नियुक्तियां पाइपलाइन में कई भर्तियां ऐसी है जिनका प्रांरभिक या अंतिम परिणाम जारी हो चुका है। ऐसी भर्तियों के 75 हजार पद हैं। आने वाले दिनों में कभी भी नियुक्ति मिल जाएगी। इन भर्तियों में प्रमुख रूप से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में 53750 पद के अलावा एनएचएम, पटवारी, वीडीओ, वाहन चालक, परिचालक, एलएसए सहित कई प्रमुख भर्तियां शामिल हैं।



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मनु भाकर के ऑस्ट्रेलियन शूटर को बोरियत भगाने के टिप्स:बारीकियां सीखने हरियाणा आए सबसे युवा शूटर; पिता साइंटिस्ट, 9 साल पहले विदेश शिफ्ट




ऑस्ट्रेलिया के सबसे कम उम्र के शूटर सामर्थ्य सांगवान शूटिंग की बारीकियां सीखने इंडिया पहुंचे। वह मार्च में 13 साल के होंगे। सामर्थ्य ने ओलिंपिक की डबल मेडल विजेता मनु भाकर से विशेष तौर पर समय लेकर इंडिया आने का कार्यक्रम बनाया। मनु ने उन्हें प्रैक्टिस के दौरान होने वाली बोरियत टालने के टिप्स दिए। वे झज्जर की झाड़ली स्थित कारगिल शूटिंग रेंज में मनु भाकर के कोच अनिल जाखड़ से भी मिले। भिवानी के शूटिंग कोच प्रदीप बेनीवाल की एकेडमी भी गए। सामर्थ्य ने दोनों ही कोच की शूटिंग रेंज में प्रैक्टिस भी की। सामर्थ्य के पिता प्रवीन सांगवान मूलरूप से चरखी दादरी के पैंतावास गांव के हैं। अब प्रवीन ऑस्ट्रेलिया में जियो साइंटिस्ट हैं। मां सुनैना दलाल टीचर हैं। प्रवीन सांगवान ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी वहीं सुनैना MDU रोहतक में पढ़ी हैं। वे करीब 9 साल पहले ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हो गए थे, तब सामर्थ्य 3 साल के थे। अब पढ़िए सामर्थ्य का परिवार व शूटिंग से जुड़ाव… मनु भाकर से मुलाकात से जुड़े 3 अहम तथ्य… अब जानिये…मनु खुद को फ्रेश रखने के लिए क्या करती हैं
एक इंटरव्यू में मनु भाकर ने बताया था कि वह सॉन्ग सुनकर किसी चीज से अपना ध्यान हटाने की कोशिश करती हैं। वह सभी थॉट्स से खुद से दूर रखती हैं। इसके अलावा मेडिटेशन, डांस करना, डायरी लिखना और नोवल पढ़कर मन को दूसरी चीजों पर लगाती हैं। जिससे कि अधिक ध्यान लग सके। मनु ने बताया कि लंबे टूर्नामेंट्स और ट्रेनिंग सेशंस के दौरान मानसिक थकान होती है। इससे निपटने के लिए वह सॉन्ग सुनने, किताब पढ़ने, दोस्तों से बातचीत करने और छोटे-छोटे ब्रेक लेकर माइंड को रिलैक्स करने पर जोर देती हैं। खेल जितना फोकस मांगता है, उतना ही जरूरी है दिमाग को हल्का रखना।



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Election Commission on Citizenship Verification in SIR


नई दिल्ली2 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले पर सुनवाई होगी। बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता की पहचान और वोट देने के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए थे।

पिछली सुनवाई 13 जनवरी को हुई थी। चुनाव आयोग की ओर से सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है।

उन्होंने साफ किया कि SIR से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। द्विवेदी ने संविधान सभा की बहसों और सरबानंद सोनोवाल केस का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में नागरिकता की जांच जरूरी है।

SIR पर पिछली मुख्य 3 सुनवाई…

6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा-वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना हमारा काम

चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो।

आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। पूरी खबर पढ़ें…

4 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट बोला- BLOs के काम के दबाव को कम करें

सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि वे SIR में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के काम के दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति पर विचार करें।

सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) की उस याचिका पर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि समय पर काम ना कर पाने BLOs के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई न की जाए। पूरी खबर पढ़ें…

26 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग बोला- राजनीतिक पार्टियां डर का माहौल बना रहीं

सुप्रीम कोर्ट में 26 नवंबर को SIR के खिलाफ दायर तमिलनाडु, बंगाल और केरल की याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा- SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा, SC का केंद्र को नोटिस:कहा- छूट संविधान की भावना के खिलाफ हो सकती है, न्यायिक जांच की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) को उनके आधिकारिक कामों के लिए आजीवन कानूनी इम्युनिटी (सुरक्षा) देने वाला प्रावधान संविधान की भावना के खिलाफ हो सकता है। लॉ ट्रेंड के मुताबिक, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग (EC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…



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जयपुर में मोशन एजुकेशन का नया स्टडी सेंटर शुरू




जयपुर | कोटा जैसा कोचिंग अनुभव अब जयपुर में भी मिलेगा। मोशन एजुकेशन ने राजधानी में अपने नए स्टडी सेंटर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर संस्थापक एनवी सर ने कहा कि मोशन का एआई आधारित एजुकेशन सिस्टम छात्रों की परफॉर्मेंस का विश्लेषण कर उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार प्रश्न उपलब्ध कराता है, जिससे तैयारी अधिक प्रभावी हो जाती है। स्थानीय निदेशक हिमांशु सिंह और वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मोशन देशभर में जेईई, नीट, ओलिंपियाड एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराता है और 90 से अधिक सेंटर संचालित कर रहा है। जयपुर में गोपालपुरा बायपास और बनीपार्क क्षेत्र में शुरू किए गए नए कैंपस में अनुभवी फैकल्टी, आधुनिक तकनीक, लाइब्रेरी और अनुशासित माहौल मिलेगा। नीट, जेईई और फाउंडेशन कोर्सेज के लिए एडमिशन प्रक्रिया जारी है।



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दो साल में खुले रोजगार के द्वार, अब तक 1 लाख नियुक्ति, 75 हजार पाइपलाइन में



प्रदेश में दो साल में बेरोजगारों के लिए रोजगार के द्वार खुले हैं। भजनलाल सरकार ने अब तक रोजगार मेलों में 1 लाख पदों पर नियुक्तियां दीं और 75 हजार नियुक्तियां पाइपलाइन में हैं। 2026 में एक लाख पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का कैलेंडर जारी िकया है। इस साल दिसंबर तक नियुक्तियों का आंकड़ा 2.75 लाख पहुंचेगा। पिछली कांग्रेस सरकार ने 5 साल में 2.13 लाख पदों पर नियुक्ति दी। 3 साल में भजनलाल सरकार कांग्रेस के आंकड़े को पार कर लेगी। दो साल में धरना-प्रदर्शनों की संख्या भी कम रही है। राजस्थान बेरोजगार यूनियन के अध्यक्ष हनुमान किसान व संयोजक रवींद्र चौधरी का कहना है कि लगातार भर्तियों से बेरोजगारों में उत्साह है। फैक्ट फाइल }कांग्रेस सरकार ने 5 साल में नियुक्ति दी: 2,13,839 }भाजपा सरकार में दो साल में नियुक्ति: 1,00639 }अभी पाइपलाइन में: 75 हजार पदों पर }2026 में भर्तियां : 1 लाख पदों पर ये नियुक्तियां पाइपलाइन में कई भर्तियां ऐसी है जिनका प्रांरभिक या अंतिम परिणाम जारी हो चुका है। ऐसी भर्तियों के 75 हजार पद हैं। आने वाले दिनों में कभी भी नियुक्ति मिल जाएगी। इन भर्तियों में प्रमुख रूप से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में 53750 पद के अलावा एनएचएम, पटवारी, वीडीओ, वाहन चालक, परिचालक, एलएसए सहित कई प्रमुख भर्तियां शामिल हैं।



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