Gujarat Mint Farmer Earns 60 Lakh Annually
किसान दिलीप सिंह भाटी के पुदीना की खेती शुरू करने के बाद तिंवरी एरिया में कई और किसानों ने इसकी शुरुआत की है।
पढ़ाई में मन नहीं था, 10वीं बाद गुजरात में 13 साल नौकरी की। हुनर सीखकर वापस गांव लौटा और ऑयल मिल की शुरुआत की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। फैक्ट्री बंद हो गई।
.
परिवार ने बहुत सपोर्ट किया। घर में पढ़ाई का माहौल था। लेकिन किताबों से ज्यादा मिट्टी पर भरोसा था। सबकुछ करने के बाद समझ आया कि बिजनेस की बजाय एग्रीकल्चर में रिस्क कम और मुनाफा ज्यादा है।
इसके बाद ट्रेडिशनल खेती की बजाय मसाला फसल पर फोकस किया। आज 150 बीघा में पुदीने की खेती से सालाना 60 लाख रुपए की कमाई हो रही है।
वहीं, दूसरे किसानों को भी प्रेरित किया। आज अलग-अलग किसान 20 हजार से ज्यादा बीघा में पुदीना खेती कर रहे हैं। खुशबू इतनी खास कि दिल्ली, जयपुर और गुजरात से व्यापारी खुद खेत पर पहुंचते हैं। अपने स्तर पर कटिंग करवाकर ट्रांसपोर्ट कर ले जाते हैं।
खेती-किसानी में आज कहानी जोधपुर के किसान दिलीपसिंह भाटी की…

किसान दिलीप सिंह भाटी 15 साल से पुदीने की खेती कर रहे हैं। सालाना 60 लाख रुपए तक कमाई हो रही है।
बिजनेस करने का मन था, पढ़ाई छोड़ी
तिंवरी क्षेत्र के बालरवा गांव के किसान दिलीपसिंह भाटी (45) बताते हैं- पढ़ाई में शुरू से खास मन नहीं था। साल 1997 में 10वीं पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। बड़े भाई गोपाल सिंह राजस्थान पुलिस में अधिकारी थे।
उनसे खुद का बिजनेस करने की बात कही। उन्होंने एक दोस्त की ऑयल मील में काम सीखने के लिए गुजरात भेज दिया। वहां, साल 1997 से 2010 तक करीब 13 साल तक एक सुपरवाइजर के पद पर नौकरी की।
इस दौरान उन्हें करीब 20 हजार रुपए मासिक सैलरी मिलती थी।
13 साल नौकरी के बाद खेती का मन बनाया
दिलीपसिंह ने बताया-नौकरी करते हुए लंबा समय हो गया था। सैलरी काफी कम थी। साल 2010 में उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद की ऑयल मील लगाने के साथ खेती को ही अपना मुख्य व्यवसाय बनाने का फैसला किया। उस समय उनकी जमीन बंटाई पर दी हुई थी, जिसमें उन्हें बहुत कम हिस्सा मिल पाता था।

किसान दिलीप सिंह 150 बीघा में पुदीने की खेती कर रहे हैं। मजदूरी पर करीब 4 हजार रुपए प्रति बीघा खर्च होता है।
ऑयल मिल का प्रयोग रहा असफल
नौकरी छोड़ने के बाद पुदीने की खेती शुरू की। साल 2013 में उन्होंने पार्टनरशिप में ऑयल मिल भी शुरू की थी, क्योंकि रिस्क ज्यादा था। लेकिन उससे खास कमाई नहीं हो सकी।
इसके चलते साल 2017 में ऑयल मिल बंद कर दी और इसके बाद पूरी तरह एग्रीकल्चर पर फोकस किया।
20 बीघा से 250 बीघा तक बढ़ाया खेती का दायरा
शुरुआत में उनके पास 20 बीघा पुश्तैनी जमीन थी। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने 30 बीघा जमीन और खरीद ली। इसके अलावा वर्तमान में वे 250 बीघा जमीन लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं। खेती के लिए उनके पास 6 ट्रैक्टर सहित सभी जरूरी आधुनिक कृषि संसाधन मौजूद हैं।
15 साल से पुदीने की खेती, 150 बीघा में उत्पादन
दिलीपसिंह ने बताया-पिछले 15 साल से पुदीने की खेती कर रहे हैं। शुरुआत में 40 बीघा क्षेत्र में पुदीना उगाते थे, लेकिन पिछले तीन वर्षों से उन्होंने इसका रकबा बढ़ाकर 150 बीघा कर दिया है। अब अगेती रोपाई के हिसाब से सालभर पुदीने की कटाई चलती रही है।

किसान दिलीपसिंह ने बताया- बाजार में सूखे और गीले पुदीने की डिमांड हमेशा बनी रहती है।
हरी खाद से बढ़ाते हैं जमीन की ताकत
खेती की तैयारी को लेकर दिलीपसिंह बताया- सात प्रक्रिया में जमीन को खेती के लिए तैयार किया जाता है। फसल की समयावधि पूरी होने के बाद सबसे पहले खेत में रोटोवेटर चलाते हैं।
इसके बाद ग्वार और डेचा की बुवाई भी करते हैं। करीब 60 दिन बाद इन्हें रोटोवेटर से जमीन में मिक्स कर देते हैं। इसे हरी खाद या ग्रीन मैन्योर कहा जाता है, जो जमीन को उपजाऊ बनाने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है।
हरी खाद को जमीन में मिलाने के बाद उसे करीब 15 दिन तक ऐसे ही छोड़ दिया जाता है। इसके बाद डिस्क प्लाऊ से खेत की जमीन को पलटा जाता है। फिर प्लेन रोटोवेटर चलाकर जमीन समतल की जाती है।
इसके बाद गोबर की खाद डालकर फिर से रोटोवेटर चलाया जाता है। प्रति बीघा करीब पांच टन देशी खाद यानी गाय का गोबर डालते हैं। अंत में कल्टीवेटर (हल) चलाकर खेत को पूरी तरह रोपाई के लिए तैयार किया जाता है।
15 सितंबर से शुरू होती है रोपाई
दिलीपसिंह बताते हैं कि 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच पुदीने के पौधों की रोपाई की जाती है। एक बीघा में करीब 8 क्विंटल पौधों की जरूरत पड़ती है।
पौधों पर करीब 20 हजार रुपए प्रति बीघा खर्च आता है। करीब 150 बीघा से सालाना करीब 60 लाख रुपए की कमाई हो रही है।

किसान दिलीप ने बताया- सात प्रक्रिया में जमीन को खेती के लिए तैयार किया जाता है।
सात दिन में दो बार सिंचाई, 45 दिन में पहली कटिंग
जमीन को तैयार करने बाद पौधे लगाए जाते हैं। बाद मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई की जाती है। फसल को सप्ताह में दो बाद सिंचाई की जरूरत होती है।
रोपाई के करीब 45 दिन बाद पहली कटिंग मिल जाती है। इसके बाद हर 30 दिन में कटिंग होती है। एक बार पौधा लगाने के बाद करीब 8 महीने तक 7 कटिंग ली जाती हैं। चार महीने के अंतराल के बाद फिर से नई बुवाई की जाती है।
एक बीघा से करीब 20 क्विंटल हरा पुदीना
उत्पादन को लेकर दिलीपसिंह बताते हैं कि एक बीघा से करीब 20 क्विंटल हरा पुदीना और करीब 3 क्विंटल सूखा पुदीना निकलता है।
हरे पुदीने का बाजार भाव 30 से 50 रुपए प्रति किलो तक रहता है, जबकि सूखे पुदीने का भाव करीब 15 हजार रुपए प्रति क्विंटल मिलता है। यानि 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से भाव मिलता है।
सूखे पुदीने भाव ज्यादा मिलते हैं। क्योंकि 100 किलो हरे पुदीने से 15 किलो सूखा पुदीना तैयार होता है।
सूखे पुदीने की मसाला कंपनियों में डिमांड
दिलीपसिंह बताते हैं- दिसंबर से अप्रैल तक वे सूखा पुदीना सीधे मसाला कंपनियों को बेचते हैं। क्योंकि बाजार में इसकी डिमांड नहीं होती है। सूखा पुदीना नागौर मंडी में भेजा जाता है।
वहीं, अप्रैल से दिसंबर तक हरा पुदीना दिल्ली की आजादपुर मंडी, जयपुर की मुहाना मंडी और गुजरात की अहमदाबाद मंडी में सप्लाई किया जाता है।

रोजाना 5 बीघा में कटिंग
रोजाना करीब पांच बीघा क्षेत्र में पुदीने की कटिंग होती है। कटाई के बाद हरे पुदीने को जालीदार स्टैंड पर जमीन से ऊपर सुखाया जाता है, ताकि वह खराब न हो। सर्दियों में सूखने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है।
अप्रैल से हरे पुदीने की डिमांड बाजार में बढ़ जाती है। ऐसे में पुदीना सुखाने की जरूरत नहीं पड़ी है। व्यापारी खुद खेत पर आते हैं और पुदीना काटकर ले जाते हैं।

—
खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…
फसल नहीं बिकी तो शुरू किया बिजनेस,सालाना 25 लाख कमाई:15 देशों में एक्सपोर्ट कर रहे किनोवा, 20 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

सरकार से मिले बीज बोझ बन गए। मंडी में व्यापारियों ने फसल खरीदने से मना कर दिया तो जालोर के किसान ने किनोवा का इंटरनेशनल मार्केट खड़ा कर दिया। (पूरी खबर पढ़ें)



