Gujarat Mint Farmer Earns 60 Lakh Annually


किसान दिलीप सिंह भाटी के पुदीना की खेती शुरू करने के बाद तिंवरी एरिया में कई और किसानों ने इसकी शुरुआत की है।

पढ़ाई में मन नहीं था, 10वीं बाद गुजरात में 13 साल नौकरी की। हुनर सीखकर वापस गांव लौटा और ऑयल मिल की शुरुआत की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। फैक्ट्री बंद हो गई।

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परिवार ने बहुत सपोर्ट किया। घर में पढ़ाई का माहौल था। लेकिन किताबों से ज्यादा मिट्टी पर भरोसा था। सबकुछ करने के बाद समझ आया कि बिजनेस की बजाय एग्रीकल्चर में रिस्क कम और मुनाफा ज्यादा है।

इसके बाद ट्रेडिशनल खेती की बजाय मसाला फसल पर फोकस किया। आज 150 बीघा में पुदीने की खेती से सालाना 60 लाख रुपए की कमाई हो रही है।

वहीं, दूसरे किसानों को भी प्रेरित किया। आज अलग-अलग किसान 20 हजार से ज्यादा बीघा में पुदीना खेती कर रहे हैं। खुशबू इतनी खास कि दिल्ली, जयपुर और गुजरात से व्यापारी खुद खेत पर पहुंचते हैं। अपने स्तर पर कटिंग करवाकर ट्रांसपोर्ट कर ले जाते हैं।

खेती-किसानी में आज कहानी जोधपुर के किसान दिलीपसिंह भाटी की…

किसान दिलीप सिंह भाटी 15 साल से पुदीने की खेती कर रहे हैं। सालाना 60 लाख रुपए तक कमाई हो रही है।

किसान दिलीप सिंह भाटी 15 साल से पुदीने की खेती कर रहे हैं। सालाना 60 लाख रुपए तक कमाई हो रही है।

बिजनेस करने का मन था, पढ़ाई छोड़ी

तिंवरी क्षेत्र के बालरवा गांव के किसान दिलीपसिंह भाटी (45) बताते हैं- पढ़ाई में शुरू से खास मन नहीं था। साल 1997 में 10वीं पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। बड़े भाई गोपाल सिंह राजस्थान पुलिस में अधिकारी थे।

उनसे खुद का बिजनेस करने की बात कही। उन्होंने एक दोस्त की ऑयल मील में काम सीखने के लिए गुजरात भेज दिया। वहां, साल 1997 से 2010 तक करीब 13 साल तक एक सुपरवाइजर के पद पर नौकरी की।

इस दौरान उन्हें करीब 20 हजार रुपए मासिक सैलरी मिलती थी।

13 साल नौकरी के बाद खेती का मन बनाया

दिलीपसिंह ने बताया-नौकरी करते हुए लंबा समय हो गया था। सैलरी काफी कम थी। साल 2010 में उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद की ऑयल मील लगाने के साथ खेती को ही अपना मुख्य व्यवसाय बनाने का फैसला किया। उस समय उनकी जमीन बंटाई पर दी हुई थी, जिसमें उन्हें बहुत कम हिस्सा मिल पाता था।

किसान दिलीप सिंह 150 बीघा में पुदीने की खेती कर रहे हैं। मजदूरी पर करीब 4 हजार रुपए प्रति बीघा खर्च होता है।

किसान दिलीप सिंह 150 बीघा में पुदीने की खेती कर रहे हैं। मजदूरी पर करीब 4 हजार रुपए प्रति बीघा खर्च होता है।

ऑयल मिल का प्रयोग रहा असफल

नौकरी छोड़ने के बाद पुदीने की खेती शुरू की। साल 2013 में उन्होंने पार्टनरशिप में ऑयल मिल भी शुरू की थी, क्योंकि रिस्क ज्यादा था। लेकिन उससे खास कमाई नहीं हो सकी।

इसके चलते साल 2017 में ऑयल मिल बंद कर दी और इसके बाद पूरी तरह एग्रीकल्चर पर फोकस किया।

20 बीघा से 250 बीघा तक बढ़ाया खेती का दायरा

शुरुआत में उनके पास 20 बीघा पुश्तैनी जमीन थी। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने 30 बीघा जमीन और खरीद ली। इसके अलावा वर्तमान में वे 250 बीघा जमीन लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं। खेती के लिए उनके पास 6 ट्रैक्टर सहित सभी जरूरी आधुनिक कृषि संसाधन मौजूद हैं।

15 साल से पुदीने की खेती, 150 बीघा में उत्पादन

दिलीपसिंह ने बताया-पिछले 15 साल से पुदीने की खेती कर रहे हैं। शुरुआत में 40 बीघा क्षेत्र में पुदीना उगाते थे, लेकिन पिछले तीन वर्षों से उन्होंने इसका रकबा बढ़ाकर 150 बीघा कर दिया है। अब अगेती रोपाई के हिसाब से सालभर पुदीने की कटाई चलती रही है।

किसान दिलीपसिंह ने बताया- बाजार में सूखे और गीले पुदीने की डिमांड हमेशा बनी रहती है।

किसान दिलीपसिंह ने बताया- बाजार में सूखे और गीले पुदीने की डिमांड हमेशा बनी रहती है।

हरी खाद से बढ़ाते हैं जमीन की ताकत

खेती की तैयारी को लेकर दिलीपसिंह बताया- सात प्रक्रिया में जमीन को खेती के लिए तैयार किया जाता है। फसल की समयावधि पूरी होने के बाद सबसे पहले खेत में रोटोवेटर चलाते हैं।

इसके बाद ग्वार और डेचा की बुवाई भी करते हैं। करीब 60 दिन बाद इन्हें रोटोवेटर से जमीन में मिक्स कर देते हैं। इसे हरी खाद या ग्रीन मैन्योर कहा जाता है, जो जमीन को उपजाऊ बनाने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है।

हरी खाद को जमीन में मिलाने के बाद उसे करीब 15 दिन तक ऐसे ही छोड़ दिया जाता है। इसके बाद डिस्क प्लाऊ से खेत की जमीन को पलटा जाता है। फिर प्लेन रोटोवेटर चलाकर जमीन समतल की जाती है।

इसके बाद गोबर की खाद डालकर फिर से रोटोवेटर चलाया जाता है। प्रति बीघा करीब पांच टन देशी खाद यानी गाय का गोबर डालते हैं। अंत में कल्टीवेटर (हल) चलाकर खेत को पूरी तरह रोपाई के लिए तैयार किया जाता है।

15 सितंबर से शुरू होती है रोपाई

दिलीपसिंह बताते हैं कि 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच पुदीने के पौधों की रोपाई की जाती है। एक बीघा में करीब 8 क्विंटल पौधों की जरूरत पड़ती है।

पौधों पर करीब 20 हजार रुपए प्रति बीघा खर्च आता है। करीब 150 बीघा से सालाना करीब 60 लाख रुपए की कमाई हो रही है।

किसान दिलीप ने बताया- सात प्रक्रिया में जमीन को खेती के लिए तैयार किया जाता है।

किसान दिलीप ने बताया- सात प्रक्रिया में जमीन को खेती के लिए तैयार किया जाता है।

सात दिन में दो बार सिंचाई, 45 दिन में पहली कटिंग

जमीन को तैयार करने बाद पौधे लगाए जाते हैं। बाद मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई की जाती है। फसल को सप्ताह में दो बाद सिंचाई की जरूरत होती है।

रोपाई के करीब 45 दिन बाद पहली कटिंग मिल जाती है। इसके बाद हर 30 दिन में कटिंग होती है। एक बार पौधा लगाने के बाद करीब 8 महीने तक 7 कटिंग ली जाती हैं। चार महीने के अंतराल के बाद फिर से नई बुवाई की जाती है।

एक बीघा से करीब 20 क्विंटल हरा पुदीना

उत्पादन को लेकर दिलीपसिंह बताते हैं कि एक बीघा से करीब 20 क्विंटल हरा पुदीना और करीब 3 क्विंटल सूखा पुदीना निकलता है।

हरे पुदीने का बाजार भाव 30 से 50 रुपए प्रति किलो तक रहता है, जबकि सूखे पुदीने का भाव करीब 15 हजार रुपए प्रति क्विंटल मिलता है। यानि 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से भाव मिलता है।

सूखे पुदीने भाव ज्यादा मिलते हैं। क्योंकि 100 किलो हरे पुदीने से 15 किलो सूखा पुदीना तैयार होता है।

सूखे पुदीने की मसाला कंपनियों में डिमांड

दिलीपसिंह बताते हैं- दिसंबर से अप्रैल तक वे सूखा पुदीना सीधे मसाला कंपनियों को बेचते हैं। क्योंकि बाजार में इसकी डिमांड नहीं होती है। सूखा पुदीना नागौर मंडी में भेजा जाता है।

वहीं, अप्रैल से दिसंबर तक हरा पुदीना दिल्ली की आजादपुर मंडी, जयपुर की मुहाना मंडी और गुजरात की अहमदाबाद मंडी में सप्लाई किया जाता है।

रोजाना 5 बीघा में कटिंग

रोजाना करीब पांच बीघा क्षेत्र में पुदीने की कटिंग होती है। कटाई के बाद हरे पुदीने को जालीदार स्टैंड पर जमीन से ऊपर सुखाया जाता है, ताकि वह खराब न हो। सर्दियों में सूखने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है।

अप्रैल से हरे पुदीने की डिमांड बाजार में बढ़ जाती है। ऐसे में पुदीना सुखाने की जरूरत नहीं पड़ी है। व्यापारी खुद खेत पर आते हैं और पुदीना काटकर ले जाते हैं।

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फसल नहीं बिकी तो शुरू किया बिजनेस,सालाना 25 लाख कमाई:15 देशों में एक्सपोर्ट कर रहे किनोवा, 20 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

सरकार से मिले बीज बोझ बन गए। मंडी में व्यापारियों ने फसल खरीदने से मना कर दिया तो जालोर के किसान ने किनोवा का इंटरनेशनल मार्केट खड़ा कर दिया। (पूरी खबर पढ़ें)



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Silver storm… Price reaches Rs 2.86 lakh per kg…


जयपुर3 घंटे पहले

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भोगौलिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच गुरुवार को जयपुर में दो दिन में 16,600 रुपए बढ़कर चांदी 2.86 लाख रुपए प्रति किलो के नए रिकॉ‌र्ड स्तर पर पहुंच गई। इस महीने चांदी हर दिन नया स्तर छू रही है। इसके चलते 15 दिन में दौरान जयपु

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आयकर विभाग:यूपी से मिले इनपुट पर बीकानेर के घी कारोबारी के 3 ठिकानों पर आयकर छापा




गुरुवार सुबह बीकानेर के कारोबारी जगत में उस समय हड़कंप मच गया, जब आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा ने एक घी कारोबारी के तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। कोयला गली स्थित गोदाम, बीछवाल के गोदाम और कारोबारी के रानी बाजार आवास पर सुबह करीब छह से सात बजे के बीच आयकर विभाग की गाड़ियों के पहुंचते ही इलाके में हलचल मच गई। 25 से अधिक अधिकारियों की टीम दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और स्टॉक की गहन जांच में जुट गई, जो देर रात तक चली। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अचानक नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क के खुलासे का हिस्सा थी। उत्तर प्रदेश के एक बड़े कारोबारी के यहां की गई तलाशी के दौरान कई संदिग्ध लेनदेन और कच्चे बिलों के सुराग मिले थे। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर बीकानेर के घी कारोबारी को जांच के दायरे में लाया गया। इसी कारण यूपी से भी आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस कार्रवाई में शामिल हुए। बताया जा रहा है कि घी के थोक व्यापार में नकद लेनदेन और बिना बिल माल की बिक्री का खेल लंबे समय से चल रहा था। आयकर विभाग को ऐसे लेनदेन के डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों की असामान्य गतिविधियां और स्टॉक में अंतर के संकेत मिले थे। इसी आधार पर एक साथ तीनों ठिकानों पर दबिश दी गई ताकि सबूत नष्ट न किए जा सकें। कार्रवाई के दौरान कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और लेखा-बही जब्त कार्रवाई के दौरान गोदामों में रखे घी के स्टॉक का मिलान कागजी रिकॉर्ड से किया गया, वहीं कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और लेखा-बही जब्त करने की जानकारी मिली है। अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की। आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस छापेमारी का उद्देश्य कर चोरी, बेनामी लेनदेन और फर्जी बिलिंग से जुड़े पूरे नेटवर्क को उजागर करना है। प्रारंभिक जांच में बड़ी कर चोरी के संकेत मिले हैं, हालांकि आधिकारिक आंकड़े जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। बीकानेर में यह कार्रवाई आने वाले दिनों में और भी खुलासों का संकेत दे रही है। से भी पूछताछ की। आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस छापेमारी का उद्देश्य कर चोरी, बेनामी लेनदेन और फर्जी बिलिंग से जुड़े पूरे नेटवर्क को उजागर करना है। प्रारंभिक जांच में बड़ी कर चोरी के संकेत मिले हैं, हालांकि आधिकारिक आंकड़े जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। बीकानेर में यह कार्रवाई आने वाले दिनों में और भी खुलासों का संकेत दे रही है।



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राजसमंद में 26 जनवरी को होगा हिन्दू सम्मेलन:घर-घर जाकर दिया जा रहा न्योता, भगवान गणपति को दिया निमंत्रण




राजसमंद शहर की प्रताप बस्ती में 26 जनवरी को हिन्दू सम्मेलन आयोजित होगा। सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजकों ने जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सम्मेलन कार्यालय के शुभारंभ के बाद गुरुवार रात मंशापूर्ण महागणपति मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान गणपति को सम्मेलन का निमंत्रण दिया गया और कार्यक्रम के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना की गई। इस अवसर पर सर्व हिन्दू समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। भगवान गणपति को दिया निमंत्रण, कार्यक्रम की सफलता की कामना मंशापूर्ण महागणपति मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सम्मेलन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने विधिवत आमंत्रण पत्र भेंट कर भगवान गणपति को कार्यक्रम में आमंत्रित किया। मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ सम्मेलन की सफलता के लिए प्रार्थना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। घर-घर जाकर बांटे पीले चावल और निमंत्रण पत्र धार्मिक आयोजन के बाद सम्मेलन के आयोजकों और कार्यकर्ताओं ने शहर में घर-घर जाकर पीले चावल और आमंत्रण पत्र वितरित किए। लोगों से अधिक से अधिक संख्या में सम्मेलन में भाग लेने का आह्वान किया गया। जनसंपर्क अभियान के दौरान स्थानीय लोगों ने आयोजन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और सहयोग का भरोसा दिलाया। भव्य शोभायात्रा के साथ होगी कार्यक्रम की शुरुआत आयोजकों ने बताया कि 26 जनवरी को सनवाड़ स्थित चारभुजा मंदिर से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए महात्मा गांधी राजकीय स्कूल परिसर पहुंचेगी। यहां विराट धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के लोगों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन समिति और कार्यकर्ता रहे मौजूद घर-घर संपर्क अभियान के दौरान सम्मेलन संयोजक लीलेश खत्री, बद्रीलाल माली, कार्यक्रम अध्यक्ष गिरिराज लड्ढा, हिम्मत मेहता, कैलाश पुरोहित, कोषाध्यक्ष नीलकंठ सोनी, नागार्जुन खत्री, रतन साहू, कीर्तन खत्री, हेमेन्द्र सिंह, दीपक रजक, अजीत उपाध्याय, लक्ष्मण सिंह, शशिकांत दीक्षित, सक्षम कोठारी, राजा सिंह, गिर्राज साहू, बसंत प्रजापत, हीरालाल, नितिन महात्मा, प्रहलाद वैष्णव, धर्मवीर सोनी, शांतीलाल, रमेश सुथार, मयूर पालीवाल, गुणसागर मादरेचा, चिन्मय खत्री, हितेन मादरेचा, वरुण प्रजापत, राहुल साहू, राहुल बापडोत सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।



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निरीक्षण करने पहुंचे आयुक्त:घटिया ईंटों से हो रहा था नाली निर्माण, आयुक्त ने रुकवाया काम, सीमेंट व बजरी के सैंपल भी लिए




जवाहर नगर कॉलोनी में कब्रिस्तान के नजदीक बनाई जा रही नाली में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत मिलते ही नगर निगम आयुक्त ने मौके पर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ईंटों की गुणवत्ता संदिग्ध मिलने पर आयुक्त ने तुरंत निर्माण स्थल से ईंटें उठवाकर जांच के लिए अपनी गाड़ी में रखवाईं। साथ ही सीमेंट और बजरी के सैंपल भी मौके से लिए गए। नगर निगम आयुक्त श्रवण कुमार विश्नोई ने बताया कि जवाहर नगर क्षेत्र में नाली निर्माण में घटिया सामग्री लगाए जाने की शिकायत मिली थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए वे अपनी तकनीकी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की जांच की। प्रथमदृष्टया ईंटों की क्वालिटी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, जिसके चलते उन्हें तत्काल जब्त कर लिया गया। साथ ही निर्माण कार्य को रुकवा दिया गया। आयुक्त ने बताया कि मौके पर उपयोग में लाई जा रही ईंटें फ्लाई ऐश की हैं। प्राथमिक जांच में ईंटों की स्ट्रेंथ कमजोर प्रतीत हो रही है। इसी को लेकर ईंटों की विस्तृत स्ट्रेंथ टेस्टिंग कराई जाएगी। इसके साथ ही सीमेंट और बजरी के मिश्रण से जुड़े मिक्सर के भी सैंपल लिए गए हैं। सभी सैंपल क्वालिटी कंट्रोल प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। रिपोर्ट आने के बाद तय किया जाएगा कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप है या नहीं। हैरानी की बात यह है कि इस कार्य के लिए कार्यदेश संख्या 668-672 दिनांक 13 जनवरी को ही जारी किया गया था। काम शुरू होने के महज दो दिन के भीतर ही 15 जनवरी को घटिया सामग्री पकड़े जाने पर निगम ने यह नोटिस थमा दिया है। नगर निगम आयुक्त श्रवण कुमार ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल ईंटों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। लैब से आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि क्ले फ्लाई ऐश ब्रिक की एक पूरी लॉट निम्न गुणवत्ता की थी। निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटें न तो पूरी तरह पकी हुई थीं और न ही गुणवत्ता मानकों पर खरी उतर रही थीं। जांच में ईंटों में नमी की मात्रा भी तय मानक से अधिक पाई गई। इसके अलावा निगम के सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता ने भी मौके पर जाकर जांच की, जिसमें ईंट घटिया क्वालिटी की मिली। इस पर नाली निर्माण कर रही मैसर्स प्रधान कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक को नोटिस जारी कर दिया है। ठेकेदार ने बताया कि नोटिस मिलते ही बनाई गई करीब 50-60 फीट नाली निर्माण को तोड़ दिया गया। इसको फिर से बनाया जाएगा। “जांच में ईंटों के सैंपल फेल होने के बाद ठेकेदार को नोटिस जारी कर सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं। नाली को तोड़कर फिर से बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। सभी ठेकेदारों को निर्देश दिए है कि अगर निर्माण कार्य में घटिया क्वालिटी की सामग्री लगाई तो ब्लैक लिस्ट कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।” -श्रवण कुमार विश्नोई, नगर निगम आयुक्त, भरतपुर



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गीतकार-स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने कहा:उर्दू ने पाक के टुकड़े करवाए, भारत में उर्दू को अपना मानने वाले ही तनाव बनाते हैं




‘उर्दू जुबान ने पाकिस्तान के टुकड़े करवाए। भारत में बसे जो लोग उर्दू को ही अपना मानते हैं, वो तनाव बनाकर रखते हैं। भाषा कभी धर्म या समाज की हो ही नहीं सकती। भाषा रीजन की होती है, रिलीजन की नहीं।’ यह बात गुरुवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के पहले दिन गीतकार जावेद अख्तर ने ‘इंडिया इन उर्दू: उर्दू इन इंडिया’ सेशन में कही। वहीं, ‘जावेद अख्तर: पॉइंट्स ऑफ व्यू’ सेशन में उनके साथ राइटर वरीशा फरासत ने चर्चा की। जावेद ने कहा कि सेक्युलरिज्म का कोई क्रैश कोर्स नहीं होता। सेक्युलरिज्म हमें आसपास के माहौल से मिलता है। मुझे यह सब नाना-नानी से मिला। ऑडियंस से सवाल आया कि उर्दू ज्यादा पुरानी है या संस्कृत। इस पर उन्होंने कहा- संस्कृत पहले आई या उर्दू, ये सवाल ही गलत है। संस्कृत हजारों साल पुरानी है। उर्दू तो कल की बच्ची है। तमिल सबसे पुरानी जिंदा भाषा है। उर्दू इस रेस में शामिल ही नहीं है। उन्होंने कहा अक्सर सोचता हूं कि इस उम्र में मुझे अपनी पोतियों के बारे में बात करनी चाहिए। जब मुझसे मेरी मां के बारे में पूछा जाता है, तो मैं खुद को बचपन में पाता हूं। मैंने 8 साल की उम्र में मां को खो दिया। मां ने मुझे भाषा से खेलना सिखाया। शब्द समझना, उन्हें वाक्य में रखना। ये सब घर के भीतर खेल-खेल में हुआ। बिना भेदभाव के पढ़ना जरूरी… जहां तक युवाओं को सलाह देने की बात है, मैं ज्यादा सलाह देने में विश्वास नहीं करता। दुनिया आपकी है। बस एक बात कहूंगा- लिखने से पहले पढ़ना जरूरी है। बिना भेदभाव पढ़िए। यह मत सोचिए कि इससे मुझे क्या फायदा होगा। पढ़ना अपने आप में लाभ है। कम्युनलिज्म पर मेरी साफ राय है, किसी भी समुदाय को एक रंग में रंगना बुनियादी गलती है। हर शहर, हर देश, हर समुदाय में हर तरह के लोग होते हैं। इतिहास को भी हमेशा संदेह के साथ पढ़िए, क्योंकि सत्ता का पहला उद्देश्य सत्ता बचाना होता है-सच नहीं। मेरे घर में धर्म कभी थोपा नहीं गया मैं ऐसे परिवार में पैदा हुआ, जहां कुछ लोग आस्तिक थे, कुछ नास्तिक और कुछ एग्नोस्टिक (ईश्वर के अस्तित्व के बारे में निश्चित नहीं होते)। धर्म कभी थोपा नहीं गया। मेरी नानी पढ़ी-लिखी नहीं थीं, अपना नाम तक नहीं लिख सकती थीं, लेकिन उनमें जो संवेदनशीलता थी वो काश आज के कई पढ़े-लिखे लोगों में होती। उन्होंने एक बार मेरे नाना को रोका, जब वे मुझे कुरान की आयतें याद करवा रहे थे। उन्होंने साफ कहा, ‘हमें इसे कुछ भी थोपने का हक नहीं है।’ वहीं मेरी धार्मिक शिक्षा समाप्त हो गई।



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एमडीएसयू में बच्चे जांच रहे कॉपियां:बीए प्रथम वर्ष के दूसरे सेमेस्टर के ‘हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ विषय की उत्तर पुस्तिकाओं का मामला, गोपनीयता पर सवाल




एमडीएस यूनिवर्सिटी की परीक्षा व्यवस्था की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्टूडेंट्स की उत्तरपुस्तिकाएं बच्चे ही जांच रहे हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आए एक वीडियो ने यूनिवर्सिटी की मूल्यांकन प्रक्रिया की पोल खोल दी। वीडियो में दो विद्यार्थी बीए प्रथम वर्ष, सेमेस्टर-II के हिस्ट्री ऑफ इंडिया विषय की उत्तरपुस्तिकाएं जांचते दिखाई दिए हैं। इसमें कॉपियों का बंडल भी दिख रहा है। वीडियो में परीक्षा की तारीख, विषय और यूनिवर्सिटी का लोगो नजर आ रहा है। भास्कर ने 12 नवंबर को हुए इस पेपर का मिलान किया तो वीडियो में कॉपी जांच रहे विद्यार्थी जिन प्रश्नों पर चर्चा कर रहे हैं, वही सवाल प्रश्नपत्र में पूछे गए हैं। इधर, विवि प्रशासन ने इस वीडियो की जांच करने की बात कही है। वीडियो में कह रहे…‘बच्चो! ऐसी राइटिंग लिखोगे तो मार्क्स नहीं दूंगी’ वीडियो में बच्चे कॉपी में लिखा एक सवाल पढ़कर सुना रहे हैं, संगम साहित्य के दो महाकाव्यों के नाम लिखिए? यह सवाल प्रश्नपत्र में छठे नंबर पर पूछा गया है। चंद्रगुप्त मौर्य के प्रशासन का वर्णन कीजिए? यह सवाल 14वें नंबर पर प्रश्न पत्र में पूछा गया है। युवती उस पर कमेंट कर सजेशन दे रही है कि पांच सवालों के ही जवाब देने हो तो पांच के ही दीजिए, ज्यादा लिखेंगे तो नंबर नहीं मिलेंगे। राइटिंग को लेकर भी कह रही है कि बच्चो, ऐसी राइटिंग लिखोगे तो मैं मार्क्स बिलकुल भी नहीं दूंगी। प्रश्न-पत्र में वो ही सवाल व टाइम टेबल वीडियो में कॉपी साफ दिख रही। Q. 1 विवि की कॉपियां विद्यार्थी जांच रहे, क्या यह गोपनीयता पर सवाल नहीं? – यह संभव नहीं है। अगर किसी परीक्षक ने ऐसा किया है तो यह गंभीर मामला है। संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। Q. 2 क्या यह परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हैं ? -जो वीडियो दिखाया इसमें कहीं भी यह लोग अंक देते नहीं दिख रहे हैं। Q. 3 कॉपियां इनके पास पहुंचना नियम विरुद्ध नहीं है? -बिलकुल, यह नियम विरुद्ध है। किसी और को तो दूर परीक्षक घर के किसी सदस्य को भी कॉपी नहीं दिखा सकता। जांच कराई जाएगी। एक्सपर्ट -डॉ. जगराम मीणा, पूर्व परीक्षा नियंत्रक, एमडीएसयू संयोजक की अध्यक्षता में परीक्षा विभाग की गोपनीय शाखा में पैनल तैयार होता है। यह कमेटी तय करती है कि कौन पेपर सेट करेंगे और कौन मूल्यांकन। अधिकृत व्यक्ति के अलावा दूसरों से यह काम करवाना नियम विरुद्ध है। कार्रवाई के साथ आजीवन निष्कासित तक किया जा सकता है। एमडीएसयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष महिपाल गोदारा ने इस वीडियो को लेकर वीसी से शिकायत की है। गोदारा का कहना है कि इससे यूनिवर्सिटी की छवि खराब हो रही है। 3.25 लाख बच्चे विवि से संबद्ध जिला    कॉलेज अजमेर   107 भीलवाड़ा  67 नागौर    236 टोंक   121 कुल    531



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लापरवाही का मामला:जयपुर में सबसे ज्यादा नियम तोड़ रहे भरतपुर के युवा, 1564 लाइसेंस निलंबित




कहावत पुरानी है लेकिन सच है, “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी”, लेकिन भरतपुर के लोग के लिए जयपुर की सड़कों पर अब एक नई कहावत लागू हो रही है, “लापरवाही की, तो समझो लाइसेंस गया!” गुलाबी नगरी में पढ़ाई, नौकरी या कारोबार के सिलसिले में रह रहे भरतपुर के निवासियों के लिए परिवहन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। पिछले कुछ महीनों में जयपुर में यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले में सबसे ज्यादा कार्रवाई भरतपुर-डीग जिले के वाहन चालकों पर हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने औसतन 100 से 125 लोग ऐसे पकड़े जा रहे हैं जिनका लाइसेंस भरतपुर में परिवहन कार्यालय में बना है। कार्रवाई का आलम यह है कि केवल दिसंबर माह में ही 315 लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड कर दिए गए, जबकि नवंबर में यह संख्या 177 थी। इनमें अधिकांश बाइक सवार हैं। साल 2024 के शुरुआती 10 महीनों में भी हर महीने करीब बड़ी संख्या में लोग जयपुर पुलिस की सख्ती का शिकार हुए। एमवी एक्ट की धारा 194C, 194D और 184 के तहत अब चालान के साथ-साथ सीधे लाइसेंस निलंबित किए जा रहे है। चाहे वह बाइक पर ””तिगड़ी”” (ट्रिपलिंग) बैठाना हो, बिना हेलमेट के फर्राटा भरना हो या फिर मोबाइल पर बात करते हुए खतरनाक ड्राइविंग करना। जयपुर पुलिस अब किसी भी ””जुगाड़”” या ””पहुंच”” को स्वीकार नहीं कर रही है। 1. भरतपुर जिले के नदबई के गांव अटारी निवासी दीपक कुमार का जयपुर में आठ दिसंबर को चालान कटा। वह बाइक पर जा रहे थे और उनके साथ दो अन्य लोग भी सवार थे। इस पर पुलिस ने धारा 194C के तहत एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया और तीन माह के लिए लाइसेंस सस्पेंड करने के लिए भरतपुर भेज दिया। 2. भरतपुर शहर की सुभाषनगर कॉलोनी निवासी रवि प्रकाश मीना 29 नवंबर को जयपुर में बाइक से जा रहे थे। उनके साथ एक अन्य व्यक्ति पर सवार थे। इसमें पीछे बैठे व्यक्ति ने हेलमेट नहीं लगा रखा था। ट्रैफिक पुलिस ने धारा 194डी के तहत हजार रुपए का जुर्माना बनाते हुए तीन माह के लिए लाइसेंस सस्पेंड की सिफारिश की। 3. रूपवास निवासी शिवराम का जयपुर में पांच दिसंबर को धारा 184ए के तहत चालान काटा। इन पर आरोप था कि यह वाहन चलाते समय हाथ में मोबाइल पकड़कर बात कर रहे थे या मैसेज देख रहे थे। इस पर ट्रैफिक पुलिस ने इनका चालान काटते हुए, लाइसेंस निलंबित के लिए भरतपुर भेजा। 4 . डीग जिले के चुलहरा गांव के निवासी आरिफ का 6 दिसंबर को धारा 184 सी के तहत खतरनाक या गलत दिशा में ड्राइविंग करने पर चालान कटा। इस धारा में रेड लाइट जंप भी आता है। इन पर ट्रैफिक पुलिस ने जुर्माना बनाते हुए लाइसेंस निलंबित करने के लिए भेजा। “जयपुर पुलिस से हमें हर महीने उन चालकों की सूची प्राप्त हो रही है। दिसंबर में यह संख्या 315 पहुंच गई है। एमवी एक्ट की धाराओं के तहत हम इन सभी लाइसेंसों को 3 महीने के लिए निलंबित कर रहे हैं। युवाओं को यह समझना होगा कि लाइसेंस केवल वाहन चलाने का अधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारा उद्देश्य राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि सड़कों पर अनुशासन और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।” -इंदू मीना, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, भरतपुर



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प्राइवेट वेटरनरी कॉलेजों की NOC पर विवाद:वीसीआई ने सीएस को लिखा पत्र, काउंसिल की आपत्ति…विभाग ने मांगे आवेदन




प्रदेश में प्राइवेट वेटरनरी कॉलेजों को एनओसी जारी करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया (वीसीआई) ने राजस्थान में वेटेरनरी कॉलेज नहीं खोलने को लेकर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इस पत्र को दरकिनार कर पशुपालन विभाग अब कॉलेज खोलने जा रहा है। विभाग ने नए कॉलेज खोलने को लेकर पोर्टल पर आवेदन मांग लिए हैं। करीब 26 लोगों ने आवेदन किया है। आवेदनों की जांच की जा रही है, इसके बाद एनओसी जारी की जाएगी। अधिकारियों ने प्रदेश में नए वेटरनरी कॉलेज खोलने की जरूरत को लेकर 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। कमेटी ने 7 फरवरी, 2025 को रिपोर्ट दी। इसमें संसाधनों की पूर्ति करते हुए नए कॉलेज खोलने की अनुशंसा की। वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया को लगी, तो उन्होंने 13 मई, 2025 को प्रदेश में वेटरनरी कॉलेज नहीं खोलने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा। नए कॉलेज खोलने पर क्वालिटी पर पड़ेगा असर मुख्य सचिव को लिखे पत्र में काउंसिल ने राजस्थान में प्राइवेट कॉलेज खोलने को लेकर मना किया था। रिपोर्ट में बताया कि काउंसिल की 29 अप्रैल, 2025 को बैठक हुई। इसमें सामने आया कि राजस्थान में पहले से ही प्राइवेट कॉलेज ज्यादा हैं। इन कॉलेजों में हर साल सीटें खाली रह रही हैं। वहीं, सरकारी कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। पहले शिक्षकों की पूर्ति की जाए। अगर नए कॉलेज खोले जाते हैं, तो पशु चिकित्सा शिक्षा के मानकों में गिरावट आ आती है। वर्तमान में राजस्थान राज्य में सरकारी क्षेत्र के 3 और निजी क्षेत्र के 9 पशु चिकित्सा महाविद्यालय हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 और उसके बाद से राजस्थान राज्य में 2 निजी पशु चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए आशय पत्र (एलओआई) जारी किया है। परिषद ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद राज्य सरकार को सलाह दी जाती है कि वह राज्य में नए पशु चिकित्सा महाविद्यालय खोलने के लिए गैर-अनुमति (NOC) और अनिवार्यता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाए। कमेटी की रिपोर्ट, कॉलेज नहीं खोले, विभाग ने पोर्टल पर मांगे आवेदन विभाग ने 8 सदस्यों की कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने भी प्रदेश में प्राइवेट वेटरनरी कॉलेज नहीं खोले की रिपोर्ट दी। इसके बावजूद पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने 6 महीने पहले पोर्टल पर कॉलेज खोलने के लिए आवेदन मांग लिए। इन दोनों कमेटी में डॉ. विकास शर्मा कॉमन सदस्य है। इसके बावजूद भी दोनों रिपोर्ट में अलग-अलग मत हैं। यह सब होने के बाद विभाग ने पोर्टल पर प्राइवेट कॉलेज खोलने के लिए आवेदन भी मांग लिए। विभाग के इस फैसले से न सिर्फ नीति में विरोधाभास सामने आया है, बल्कि सरकार की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।



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धोद में पैंथर के मूवमेंट की सूचना, टीम पहुंची



सीकर | धोद कस्बे में स्थित अंबेडकर छात्रावास के पास गुरुवार देर शाम पैंथर का मूवमेंट होने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। शाम करीब 7 बजे हॉस्टल के पास स्थित खाली भूखंड में स्थानीय लोगों ने पैंथर दिखाई देने की सूचना वन विभाग को दी। रेंजर अमित देवंदा ने बताया सूचना मिलते ही फॉरेस्टर सुभाष जाखड़ के नेतृत्व में विभाग के कर्मचारियों की टीम को मौके पर भिजवाया गया। टीम ने आसपास के खेतों में देर रात तक पैंथर के पगमार्क लिए। लेकिन पुष्टि नहीं हो पाई।



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