450 बेड के सरकारी हॉस्पिटल में आंखों का डॉक्टर नहीं:6 साल से पद खाली पड़ा, बांसवाड़ा से इलाज करवाने उदयपुर जा रहे मरीज
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बांसवाड़ा जिले के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में व्यवस्थाएं चरमरा गई है। भले ही कागजों में 350 बेड का हॉस्पिटल संचालित किया जा रहा हो, लेकिन मरीजों के भारी दबाव को देखते हुए 450 बेड की व्यवस्था की गई है। हॉस्पिटल में पिछले 6 साल से आंखों का डॉक्टर (Ophthalmologist) तक नहीं है, जिससे गरीब मरीजों को निजी हॉस्पिटल्स के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। डॉक्टरों और स्टाफ की भी भारी कमी है, जिसके कारण मरीजों को बांसवाड़ा से इलाज करवाने के लिए उदयपुर जाना पड़ता है। पीएमओ बोले- ऑप्थेलमोलॉजिस्ट के सारे पद खाली
पीएमओ डॉ. दिनेश माहेश्वरी ने बताया- हॉस्पिटल में ऑप्थेलमोलॉजिस्ट (आंखों के डॉक्टर) का एक भी पद भरा हुआ नहीं है। इससे मरीजों को भारी परेशानी होती है, विशेषकर विकलांगता प्रमाण पत्र (Disability Certificates) बनवाने के लिए मरीजों को उदयपुर रेफर करना पड़ता है। उन्होंने बताया- स्टाफ की कमी के कारण भी काम बाधा आती है और चुनौतियां बढ़ जाती हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन वर्तमान उपलब्ध संसाधनों के साथ व्यवस्थाओं को मैनेज करने का प्रयास कर रहा है। खाली पदों को भरने के संबंध में राज्य सरकार को लिखित में कई बार बताया जा चुका है। जैसे ही सरकार द्वारा नई नियुक्तियां या पोस्टिंग की जाएगी, यहां सेवाएं और अधिक सुदृढ़ हो जाएगी। MRI की सुविधा जल्द, मेडिकल कॉलेज शिफ्टिंग की तैयारी
हॉस्पिटल में लंबे समय से MRI मशीन की मांग की जा रही है। पीएमओ का कहना है- सरकार ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में MRI सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके बाद यहां भी जल्द यह सेवा शुरू हो जाएगी। हालांकि बांसवाड़ा मेडिकल कॉलेज (आयुर्विज्ञान कॉलेज) के भवन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके बाद पूरा हॉस्पिटल नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो जाएगा। 144 पद रिक्त, विशेषज्ञों की भारी कमी
हॉस्पिटल में लंबे समय से बड़ी संख्या में पद खाली है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार- गजैटिड (राजपत्रित) पदों में कुल 99 स्वीकृत है, लेकिन इनमें से सिर्फ 55 पद ही भरे हुए हैं। जबकि 44 पद खाली हैं। इसमें चिकित्सा अधिकारियों के 56 में से 35 पद रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा नॉन-गजैटिड पदों में कुल 368 स्वीकृत पदों में से 268 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 100 पद खाली हैं। चिकित्सा अधिकारी के 35, वरिष्ठ विशेषज्ञ के 03, कनिष्ठ विशेषज्ञ के 04, नर्स ग्रेड-2 के 06, लैब टेक्नीशियन के 7 पद खाली हैं। हॉस्पिटल में बेड की संख्या तो बढ़ा दी गई है, लेकिन स्टाफ और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। पीएमओ का कहना है कि 2026 में मेडिकल कॉलेज को नई बिल्डिंग और नई सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद मरीजों को राहत मिल सकेगी।
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