The Kalash Yatra started with pomp and show in the 1008 Kundiya Hanuman Mahayagna. | 1008 कुण्डीय हनुमान-महायज्ञ में गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा: देवी-देवताओं के स्वरूप ने खींचा सबका ध्यान, उपमुख्यमंत्री ने माथे पर उठाया कलश – Jaipur News
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य के सान्निध्य में कल से शुरू होगी रामकथा
सीकर रोड स्थित नींदड़ आवासीय योजना में 8 से 16 जनवरी तक जगद्गुरु रामभद्राचार्य के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में 1008 श्री हनुमत महायज्ञ किया जा रहा है। कथा की कलश यात्रा बुधवार को दोपहर 1 बजे कुकर खेड़ा मंडी से निकली। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत
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यात्रा का मुख्य आकर्षण देवी-देवताओं की झांकी रहीं। कलाकार मां काली, हनुमान, जामवंत, राम-लक्ष्मण समेत कई रूपों में नजर आए। यात्रा के दौरान शिवा बारात की झांकी भी शामिल हुई। जिसमें भस्म लगाए कलाकरों ने शिव के गण बनकर नाचते-झूमते कथा स्थल तक पहुंचे।
*कलश यात्रा में ऊंट, हाथी, घोड़े के साथ शाही लवाजमा*
आयोजन समिति से जुड़े अनिल संत ने बताया कि कलश यात्रा में ऊंट, हाथी, घोड़े के शाही लवाजमा के साथ बग्गियों पर देश-विदेश से आए संत महात्मा विराजमान हुए। उनके साथ 11 हजार महिलाएं पीली साड़ी पहनकर गंगे मैया के भजनों पर भक्ति भाव से नृत्य करते हुए नींदड़ आवासीय योजना स्थित कथा स्थल तक पहुंची। *4 किलोमीटर के मार्ग पर 51 स्वागत द्वार* कलश यात्रा संयोजक प्रभु नारायण अग्रवाल ने बताया कि कलश यात्रा के 4 किलोमीटर के मार्ग पर 51 स्वागत द्वार बनाए गए। जहां विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं व्यवसायिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों के द्वारा कलश यात्रियों का जय श्री राम के नारों के साथ पुष्प वर्षा कर जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। पूरे रास्ते स्वागत के साथ अल्पाहार की भी व्यवस्था की गई। जगतगुरु रामभद्राचार्य के सानिध्य में आयोजन यह आयोजन तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य एवं उनके शिष्य रामचंद्र के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में संपन्न होगा। प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से श्री राम कथा का वाचन किया जाएगा। इस दौरान एक करोड़ 51 लाख हनुमान नाम जप के माध्यम से विश्व शांति, मानव कल्याण एवं राष्ट्र उत्थान की कामना की जाएगी। *350×450 मीटर क्षेत्र में बनी है विशाल यज्ञशाला* आयोजन समिति के सदस्य अनिल संत ने बताया कि 350×450 मीटर क्षेत्र में विशाल यज्ञशाला का निर्माण किया गया है, जिसमें 1008 यज्ञकुंड बनकर तैयार हैं। इस महायज्ञ में 1451 वैदिक विद्वान पंडित मंत्रोच्चार के साथ हवन कराएंगे। यह यज्ञ प्रतिदिन सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा, जिसमें एक साथ 1008 यजमान भाग लेंगे। इस मौके पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में यज्ञशाला की परिक्रमा भी करेंगे। *25 हजार लीटर घी, 2 लाख किलों लकड़ी की व्यवस्था* हाथोज धाम के पीठाधीश्वर बालमुकुंद आचार्य महाराज ने बताया कि सनातन औषधियों से गाय के शुद्ध घी के साथ हवन करने से वातावरण शुद्ध होगा, वातावरण में जो रोगाणु है वह नष्ट हो जायेंगे, ऑक्सीजन बढ़ेंगे, आसपास के क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होगी, मानसिक शांति मिलेगी तथा तनाव कम होगा। स्वास्थ्य लाभ (श्वसन संबंधी) होगा। यह हनुमत महायज्ञ शारीरिक एवं मानसिक बाधाएं दूर करने, समृद्धि लाने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो मन, शरीर और पर्यावरण को शुद्ध करता है। हवन से निकलने वाला धुआं हवा में मौजूद रोगाणुओं और विषाणुओं को नष्ट करता है, जिससे वातावरण शुद्ध होता है और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। इसमें इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियाँ और गौघृत श्वसन तंत्र को साफ करते हैं, सूजन कम करते हैं और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। *मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए डलेगी आहुतियां* हवन से निकलने वाली ध्वनि और सुगंध मन को शांत करती है, तनाव और अवसाद कम करती है, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। यह वास्तु दोष और नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और सद्भाव बढ़ता है। यह पूजा को पूर्ण करता है, बाधाओं को दूर करता है, और धन, सफलता व सौभाग्य प्राप्ति में सहायक माना जाता है। हवन सामग्री से निकलने वाला धुआं एंटीसेप्टिक का काम करता है। सुगंधित वाष्प के साथ थोड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड मस्तिष्क उत्तेजक का काम करती है। मंत्रों से निकलने वाली ध्वनि ऊर्जा कान के लिए अच्छी होती है और सकारात्मक कंपन फैलाती है। प्रतिदिन 50 हजार लोगों को मिलेगा सात्विक भोजन* महायज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं, यजमानों एवं संत-महात्माओं के लिए प्रतिदिन लगभग 50 हजार लोगों के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। लकड़ी के चूल्हों पर सात्विक भोजन तैयार किया जाएगा। इसके लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं तथा 111 हलवाई पूरे आयोजन काल में भोजन व्यवस्था संभालेंगे।

