LocalCircles survey Eating on food apps expensive online food delivery app zomato swiggy | लोकलसर्किल्स सर्वे का दावा- फूड एप पर खाना महंगा: 55% यूजर्स ने रेस्टोरेंट से ज्यादा दाम चुकाए; सर्वे में 79 हजार जबाव शामिल


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नई दिल्ली/मुंबई1 मिनट पहले

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इस सर्वे में देश के 359 जिलों के 79 हजार से ज्यादा जवाबों को शामिल किया गया। इनमें 61% पुरुष और 39% महिलाएं थीं। - Dainik Bhaskar

इस सर्वे में देश के 359 जिलों के 79 हजार से ज्यादा जवाबों को शामिल किया गया। इनमें 61% पुरुष और 39% महिलाएं थीं।

देशभर में फूड डिलीवरी एप जैसे जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट को लेकर उपभोक्ताओं और डिलीवरी वर्कर्स की नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोकलसर्किल्स के हालिया सर्वे में 55% उपभोक्ताओं ने कहा कि जब वे इन एप से खाना ऑर्डर करते हैं, तो रेस्तरां में जाकर खाने की तुलना में उन्हें ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं।

इसकी वजह एप द्वारा रेस्टोरेंट से लिया जाने वाला 20 से 30% तक की भारी कमीशन बताया गया है। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ता है। इस सर्वे में देश के 359 जिलों के 79 हजार से ज्यादा जवाबों को शामिल किया गया। इनमें 61% पुरुष और 39% महिलाएं थीं।

प्रतिभागियों में 45% टियर 1 शहरों से, 33% टियर 2 शहरों से और 22% टियर 3, 4 और ग्रामीण इलाकों से थे। यह सर्वे लोकलसर्किल्स प्लेटफॉर्म पर किया गया और इसमें शामिल सभी लोग सत्यापित नागरिक थे। सर्वे में भाग लेने के लिए लोकल सर्कल्स पर पंजीकरण जरूरी था।

25 फीसदी ग्राहकों ने कहा कि कभी-कभी बासी या खराब गुणवत्ता वाला खाना मिला

समस्या: 90% से अधिक उपभोक्ताओं ने खाने की क्वालिटी, पैकेजिंग व गुणवत्ता की शिकायत की है।

समाधान: 87 फीसदी ग्राहक चाहते हैं कि ऑनलाइन फू़़ड एप ऑनलाइन और रेस्तरां असली कीमतें दिखाएं।

स्रोत: लोकलसर्किल्स

  • डिलीवरी सर्विस से खाना मंगवाने में सबसे ज्यादा परेशानी किस बात की होती है?16%: अन्य समस्याएं25%: भोजन का तापमान ठीक से बनाए न रखना25%: कभी-कभी बासी खाना मिलना/भोजन की गुणवत्ता खराब27%: असुरक्षित भोजन पैकेजिंग7%: कह नहीं सकते

कुल जवाब: 11,472

  • क्या ऑनलाइन फूड एप को खाने की ऑनलाइन कीमत के साथ-साथ रेस्तरां की असली कीमत भी दिखानी चाहिए?10%: कह नहीं सकते3%: नहीं, जरूरत नहीं है87%: हां, बिल्कुल

कुल जवाब:10,644

2030 तक 12 लाख करोड़ का फूड मार्केट

भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट 2024 में करीब 31.8 अरब डॉलर यानी 2.86 लाख करोड़ रुपए का था। स्मार्टफोन, इंटरनेट और शहरीकरण के बढ़ते इस्तेमाल के चलते यह बाजार 2030 तक 12 लाख करोड़ रु. पहुंच सकता है।

क्विक डिलीवरी एप पर जंक-फूड का ऑप्शन आधे से ज्यादा

भारत के शहरी इलाकों में जंक फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लोकलसर्कल्स के सर्वे के अनुसार, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले पैकेज्ड फूड आइटम्स में आधे से ज्यादा हाई फैट, शुगर, सॉल्ट (HFSS) वाले या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) हैं।

सर्वे में 39% घरों ने बताया कि वे सॉफ्ट ड्रिंक्स, बिस्किट, चिप्स, नूडल्स जैसे आइटम रेगुलर खरीदते हैं, यानी हर 10 में 4 घर से जंक फूड ऑर्डर किया जा रहा है। खास बात ये है कि ऑर्डर करने वालों में बच्चे और यूवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। पूरी खबर पढ़ें…

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घरेलू वेज-नॉनवेज थाली नवंबर में 13% सस्ती हुई: नवंबर-24 के मुकाबले टमाटर 17%, आलू 29% सस्ते, प्याज की कीमत आधे कम हुई

भारत में एक घरेलू वेजिटेरियन थाली की कीमत नवंबर में (सालाना आधार पर) 13.14% घटकर 28.4 रुपए पर आ गई है। पिछले साल नवंबर (2024) में वेज थाली की कीमत 32.7 रुपए थी। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट ‘रोटी राइस रेट’ (RRR) में यह जानकारी सामने आई है। क्रिसिल की RRR रिपोर्ट के मुताबिक, शाकाहारी थाली की कीमत अक्टूबर-2025 के मुकाबले नवंबर में 2% बढ़ी है। अक्टूबर में वेज थाली की कीमत 27.8 रुपए थी। पूरी खबर पढ़ें…

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