Dense fog and clouds prevailed in Tonk for the fourth day as well. | टोंक में चौथे-दिन भी घना कोहरा, न्यूनतम तापमान 6 डिग्री: 50 मीटर तक घटी विजिबिलिटी, गलन और हवा से सर्दी बढ़ी – Tonk News


आज भी जिले में सर्दी और कोहरे का असर काफी ज्यादा रहा।

टोंक जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में मंगलवार को लगातार चौथे दिन सुबह से ही घना कोहरा और हल्के बादल छाए रहे।

.

सूर्योदय के समय दृश्यता घटकर करीब 50 मीटर रह गई।

सुबह 11 बजे तक सूर्य के दर्शन नहीं हुए। मध्यम गति की हवा और बढ़ती गलन के कारण सर्दी का असर तेज हो गया, जिससे आमजन और खासतौर पर वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सुबह से छाया रहा घना कोहरा

मंगलवार सुबह सूर्योदय के समय कोहरा इतना घना था कि 50 मीटर दूर तक वाहन साफ दिखाई नहीं दे रहे थे। बाद में कोहरे का असर कुछ कम हुआ, लेकिन पूर्वाह्न 11 बजे तक धूप नहीं निकली। हल्के बादलों और हवा के कारण मौसम ठंडा बना रहा।

हवा और गलन से बढ़ी ठिठुरन

मध्यम गति की हवा चलने और गलन बढ़ने से लोगों को कड़ाके की सर्दी का एहसास हुआ। जरूरी काम से बाहर निकलने वालों को पहले की तुलना में अधिक ऊनी कपड़े पहनने पड़े। सबसे ज्यादा परेशानी वाहन चालकों और रोजाना कामकाज के लिए बाहर जाने वाले लोगों को हुई।

सर्दी से बचने के लिए लोग चौराहों तिराहों पर अलाव तापते नजर आए।

सर्दी से बचने के लिए लोग चौराहों तिराहों पर अलाव तापते नजर आए।

तापमान में और गिरावट

सोमवार की तरह मंगलवार को भी अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान 24 घंटे में एक डिग्री गिरकर 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

ठंड से राहत पाने के लिए लोग चौराहों और तिराहों पर अलाव तापते नजर आए।

इस साल देर से बढ़ी सर्दी

इस बार सर्दी का चक्र बदला हुआ नजर आ रहा है। आमतौर पर नवंबर में ही कड़ाके की सर्दी और घना कोहरा शुरू हो जाता था, लेकिन दिसंबर 2025 में न तो तेज सर्दी पड़ी और न ही लगातार कोहरा छाया।

नए साल की शुरुआत के साथ ही सर्दी और कोहरे का असर लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं।

फसलों के लिए कोहरा लाभकारी, शीतलहर से खतरा

पिछले तीन दिनों से लगातार घना कोहरा छाए रहने से रात के समय ओस पड़ रही है। यह फसलों के लिए लाभकारी मानी जा रही है, क्योंकि ओस और मावठ से प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन मिलती है, जिससे खाद की पूर्ति होती है।

हालांकि, यदि शीतलहर चली तो सब्जियों सहित कम पानी वाली फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहेगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *