19 child marriages were prevented in Pratapgarh in the year 2025. | प्रतापगढ़ में वर्ष 2025 में 19 बाल विवाह रोके गए: 14 बच्चों को बंधुआ मजदूरी से बचाया, 47 बाल श्रम से मुक्त कराए गए – pratapgarh (Rajasthan) News



प्रतापगढ़ में बाल सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में प्रतापगढ़ जिले ने वर्ष 2025 में उल्लेखनीय कार्य किया है। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, श्रम विभाग और बाल संरक्षण इकाइयों के समन्वय से 19 बाल विवाह रोके गए, जबकि 14 बच्चों को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से

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19 बाल विवाह रुकवाए, 14 बच्चों को बंधुआ मजदूरी से बचाया

इन प्रयासों में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और समुदाय के साथ उदयपुर स्थित गायत्री सेवा संस्थान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2025 के दौरान, संस्थान ने जिले में कुल 19 बाल विवाह रुकवाए। इसके अतिरिक्त, 14 बच्चों को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय प्रथाओं से बचाया गया। वहीं, 47 बच्चों को बाल श्रम से छुड़ाकर सुरक्षित किया गया।

स्कूलों में दाखिला दिलवाया

बचाव के बाद, 14 बच्चों को दोबारा विद्यालयों में दाखिला दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित दिशा मिल सकी। गायत्री सेवा संस्थान, राजस्थान में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (JRC) का सहयोगी संगठन है।

देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रोके गए

जेआरसी के 250 से ज्यादा सहयोगी संगठन देश के 451 जिलों में सक्रिय रूप से बाल अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। जेआरसी नेटवर्क द्वारा 1 जनवरी 2025 से अब तक देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रोके गए हैं। साथ ही, 55,146 बच्चों को मानव तस्करी से मुक्त कराया गया, जिनमें 40,830 लड़के और 14,316 लड़कियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 42,217 मानव तस्करी मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।

प्रतापगढ़ जिले के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष

इन उपलब्धियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गायत्री सेवा संस्थान, प्रतापगढ़ के जिला समन्वयक श्री रामचंद्र मेघवाल ने कहा, “बाल सुरक्षा की दिशा में 2025 प्रतापगढ़ जिले के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन, ग्राम पंचायतों, शिक्षकों और समुदाय के सहयोग से बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव संभव हो पाया है।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी बच्चे को मानव तस्करी या बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराना केवल पहला कदम है। असली चुनौती उनके पुनर्वास, शिक्षा और परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की है, ताकि वे दोबारा शोषण का शिकार न बनें।”



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