Punjab CM Bhagwant Mann Threat Email: Attack Plan Revealed

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मोहाली के फोर्टिस अस्पताल समेत 15 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के मामले को पुलिस और प्रशानस ने बड़ी गंभीरता से लिया है। क्योंकि, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस समय इसी अस्पताल में भर्ती हैं।

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खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम पर की गई धमकी भरी ईमेल में दिलावर सिंह को शहीद बताया गया। इसमें लिखा है कि जैसे पूर्व CM बेअंत सिंह को बम से उड़ा दिया गया था, ठीक वैसे ही भगवंत मान को भी उड़ा दिया जाएगा। साथ ईमेल में यह भी जिक्र किया गया है कि CM भगवंत मान को जहरीला पदार्थ पोलोनियम दिया गया है, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ी है।

इन सभी दावों को ध्यान में रखकर कुछ एक्सपर्ट्स से बात की गई और पता लगाया गया कि ईमेल में लिखी बातें क्या सच में संभव हैं? और यदि हो सकती हैं तो यह कितनी खतरनाक साबित होंगी? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

धमकी मिलने के बाद फोर्टिस अस्तपाल में सुरक्षा बढ़ा दी गई। स्टाफ को भी जांच के बाद अंदर जाने की अनुमति मिली।

धमकी मिलने के बाद फोर्टिस अस्तपाल में सुरक्षा बढ़ा दी गई। स्टाफ को भी जांच के बाद अंदर जाने की अनुमति मिली।

सबसे पहले दिलावर सिंह के बारे में जानिए, जिसके फॉलोअर्स धमकी देने वाले हैं…

  • पूर्व CM का हत्यारा: दिलावर सिंह को जयसिंहवाला के नाम से भी जाना जाता है। वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या करने वाला आत्मघाती हमलावर यानी सुसाइड बॉम्बर था। उसने चंडीगढ़ स्थित पंजाब एंड हरियाणा सचिवालय के बाहर बेअंत सिंह की कार के पास खुद को बम से उड़ा लिया था।
  • पेशे से पुलिसवाला था: दिलावर सिंह का जन्म 18 अगस्त 1970 को पंजाब के फरीदकोट जिले के पंजगराईं गांव में हुआ था। उसके पिता बाबा हरनेक सिंह पटियाला के पंजाबी विश्वविद्यालय में कार्यरत थे और माता का नाम सुरजीत कौर था, जो गृहिणी थीं। दिलावर सिंह पेशे से पुलिस वाला था। वह पंजाब पुलिस में एक कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात था। ड्यूटी पर बने रहते हुए वह चरमपंथी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़ गया। इसके बाद उसने पूर्व मुख्यमंत्री की हत्या को अंजाम दिया।
  • सुसाइड बॉम्बर बन धमाका किया: 31 अगस्त 1995 को दिलावर सिंह सुसाइड बॉम्बर बनकर पहुंचा। उसने चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा सचिवालय के बाहर बेअंत सिंह की कार के पास खुद को बम से उड़ा लिया था। इस धमाके में मुख्यमंत्री बेअंत सिंह सहित कुल 18 लोगों की मौत हुई थी।
जगतार सिंह हवारा इस समय तिहाड़ जेल मेंबंद है। - फाइल फोटो

जगतार सिंह हवारा इस समय तिहाड़ जेल मेंबंद है। – फाइल फोटो

  • CM पर सिखों के खिलाफ अत्याचार के आरोप थे: बेअंत सिंह के CM कार्यकाल के दौरान पंजाब पुलिस पर बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे थे। आरोप था कि उग्रवाद को खत्म करने के नाम पर हजारों सिख युवाओं को फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया, या वे लापता हो गए। दिलावर सिंह और बलवंत सिंह राजोआणा पंजाब पुलिस में थे। उन्होंने अपने ही विभाग और सरकार द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचारों को करीब से देखा था, जिससे आहत होकर उन्होंने बदला लेने का फैसला किया था।
  • टॉस उछालकर बना था हमले का जिम्मेदार: इस हमले की योजना में बलवंत सिंह राजोआणा और जगतार सिंह हवारा जैसे अन्य लोग भी शामिल थे। खबरों के अनुसार, राजोआणा और दिलावर के बीच टॉस हुआ था कि आत्मघाती हमलावर कौन बनेगा, जिसे दिलावर हार गया और उसने यह जिम्मेदारी ली।
  • अकाल तख्त ने कौमी शहीद बनाया: धमाके के बाद मार्च 2012 में अकाल तख्त ने दिलावर सिंह को कौमी शहीद (राष्ट्र का शहीद) का दर्जा दिया। जबकि, साल 2022 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने अमृतसर के गोल्डल टेंपल परिसर स्थित केंद्रीय सिख संग्रहालय में उसकी तस्वीर भी लगाई।

खालिस्तान नेशनल आर्मी क्या है, जिसकी ओर से ईमेल आई?

खालिस्तान नेशनल आर्मी (KNA) एक अलगाववादी संगठन है जो पंजाब में सक्रिय रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, खालिस्तान कमांडो फोर्स का लीडर परमजीत सिंह पंजवड़ इस ग्रुप के फाउंडिंग मेंबरों में से एक है और संचालन से जुड़ा रहा है। इस ग्रुप को 90 के दशक में बनाया गया था।

यह संगठन भारत में एक स्वतंत्र सिख राष्ट्र खालिस्तान बनाने के उद्देश्य से सशस्त्र संघर्ष का समर्थन करने वाले ग्रुपों में से एक माना जाता है। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञ इसे अक्सर पुराने उग्रवादी गुटों का एक नया नाम या फ्रंट मानते हैं।

भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इस तरह के ग्रुपों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाती है। गृह मंत्रालय की सूची में कई खालिस्तानी गुट (जैसे KCF, KTF, और बब्बर खालसा) पहले से ही प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के रूप में नामित हैं।

दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (SATP) के अनुसार, यह भारत में सक्रिय एक आतंकवादी संगठन है। वर्तमान में इस संगठन के ज्यादातर बड़े नेता कनाडा, यूके और पाकिस्तान से अपनी गतिविधियों को संचालित करने का प्रयास करते हैं। अब यह धमकियां देकर चर्चा में है।

ईमेल में CM को पोलोनियम देने का दावा, जानिए इस जहरीले पदार्थ के बारे में…

धमकी भरी ईमेल में दावा किया गया है कि CM भगवंत मान को पोलोनियम दिया गया है। इससे उनकी तबीयत बिगड़ी है। हालांकि, अभी अस्पताल के डॉक्टरों ने इसकी पुष्टि नहीं की।

फिर भी जब इसे लेकर एक्सपर्ट से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पोलोनियम एक अत्यंत दुर्लभ और अत्यधिक रेडियोएक्टिव तत्व है। यदि कोई व्यक्ति पोलोनियम (विशेषकर पोलोनियम-210) से इन्फेक्टेड हो जाता है, तो इसे रेडिएशन पॉइजनिंग कहा जाता है, जो बहुत गंभीर और कई बार जानलेवा हो सकती है।

लुधियाना में अरोड़ा न्यूरो सेंटर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. गौरव सचदेवा ने बताया है कि यह जहर अंदर जाते ही ब्लड सेल्स और टिशूज को नष्ट करता है। शुरुआती लक्षणों में उल्टी-दस्त जैसी बीमारी होती है, लेकिन बाद में बाल झड़ना शुरू होते हैं और कमजोरी आती है। यह बोन मेरो, लिवर और किडनी पर असर डालता है। ब्लड सेल्स नष्ट होते हैं और इंटरनल ब्लीडिंग शरू हो जाती है।

डॉक्टर बताते हैं पोलोनियम-210 अल्फा कण उत्सर्जित करता है। हालांकि, बाहर से इसे छूने पर खतरा कम होता है, लेकिन किसी तरह यह शरीर के अंदर चला जाए तो गंभीर नुकसान करता है।

क्या CM को जहर देना संभव है, जानिए खाने का प्रॉटोकॉल…

CM को जहर देने का दावा किया गया है, लेकिन क्या यह वाकई संभव है? पंजाब पुलिस के रिटायर्ड कमांडेंट वीके वैद्य बताते हैं कि किसी भी CM का खाना भी कड़ी सिक्योरिटी में होता है। खाने के साथ किसी अनहोनी का संभावना बेहद कम है। उन्होंने बताया –

  • फूड टेस्टिंग: मुख्यमंत्री को परोसे जाने वाले किसी भी भोजन को पहले सुरक्षा टीम या नियुक्त फूड इंस्पेक्टरों द्वारा चखा और जांचा जाता है। भोजन सुरक्षित पाए जाने के बाद ही मुख्यमंत्री को परोसा जाता है।
  • सुरक्षा दल की निगरानी: मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला दल (जैसे राज्य की स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट) किचन से लेकर डाइनिंग टेबल तक की निगरानी करता है। किसी भी बाहरी व्यक्ति का किचन में प्रवेश वर्जित होता है।
  • रसोइया और कर्मचारी की वेरिफिकेशन: मुख्यमंत्री के निवास पर खाना बनाने वाले रसोइये और स्टाफ का विस्तृत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है। वे अक्सर सरकारी कर्मचारी होते हैं, जिन्हें सुरक्षा मानकों का पालन करने की ट्रेनिंग दी जाती है।
  • कच्चे माल की जांच: भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (सब्जी, अनाज, तेल, आदि) की गुणवत्ता की जांच FSSAI के मानकों के अनुसार की जाती है।
  • बाहरी कार्यक्रमों के दौरान क्या प्रॉटोकॉल: यदि मुख्यमंत्री किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या दौरे पर हैं, तो वहां के स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी होती है कि वे परोसे जाने वाले भोजन की शुद्धता सुनिश्चित करें। अक्सर एक मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब भी साथ रहती है।

CM मान को Z+ सिक्टोरिटी, यह भेदना कितना संभव?

भारत में Z+ सिक्योरिटी को सबसे सुरक्षित नागरिक सुरक्षा श्रेणियों में से एक माना जाता है। यह SPG (जो केवल प्रधानमंत्री के लिए है) के बाद सुरक्षा का दूसरा उच्चतम स्तर है। यह एक बुलेटप्रूफ सुरक्षा घेरा है, जिसे भेदना लगभग नामुमकिन माना जाता है।

इस सुरक्षा घेरे में कुल 55 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं। इसमें 10 से अधिक NSG या CRPF/CISF के प्रशिक्षित कमांडो होते हैं। ये कमांडो MP5 सब-मशीन गन और आधुनिक संचार उपकरणों से लैस होते हैं। वे मार्शल आर्ट्स और हैंड-टु-हैंड कॉम्बैट में माहिर होते हैं। सुरक्षा घेरे में बुलेटप्रूफ गाड़ियां, जैमर और पायलट गाड़ियां शामिल होती हैं। सुरक्षाकर्मी 3 शिफ्टों में 24 घंटे साये की तरह व्यक्ति के साथ रहते हैं।

किसे मिलती है Z+ सिक्योरिटी?

यह सुरक्षा खतरे की आशंका के आधार पर दी जाती है। गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियां (IB, RAW) समय-समय पर इसकी समीक्षा करती हैं। यह आमतौर पर गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री को मिलती है। विपक्ष के प्रमुख नेता या पूर्व मुख्यमंत्री (जैसे राहुल गांधी, मायावती) जिन्हें खुफिया रिपोर्टों के आधार पर खतरा बताया गया हो। इन्हें भी यह सिक्योरिटी मिलती है।

यदि किसी आम व्यक्ति की जान को बहुत गंभीर खतरा है, तो सुप्रीम कोर्ट या सरकार के निर्देश पर उसे भी यह सुरक्षा मिल सकती है। मुकेश अंबानी जैसे निजी व्यक्तियों को मिलने वाली Z+ सुरक्षा का खर्च वे स्वयं उठाते हैं, जो लगभग 15-20 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकता है।

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को जान से मारने की धमकी दी गई है। खालिस्तान समर्थक संगठन, खालिस्तान नेशनल आर्मी ने प्रशासन को ईमेल भेजकर धमकी दी कि CM मान को भाई दिलावर सिंह के वारिसों ने पोलोनियम से संक्रमित किया है। अगर वे बच गए तो उनका पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह जैसा हाल करेंगे। (पढ़ें पूरी खबर)

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