दिन का पारा 28 पर स्थिर, रात का पारा 2 डिग्री गिरा




भास्कर न्यूज | राजसमंद जिले में फरवरी अब अंतिम पड़ाव की ओर है और मौसम का मिजाज भी उसी के अनुरूप बदलता दिखाई दे रहा है। सर्दी की तीक्ष्णता अब कम हो गई है, लेकिन सुबह-शाम की हल्की ठंड अभी भी बरकरार है। दिन के समय धूप की तपिश बढ़ने लगी है, जिससे दोपहर में हल्की गर्मी का अहसास होने लगा है। तापमान में बड़े उतार-चढ़ाव भले नहीं हैं, पर दिन और रात के बीच का अंतर लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। शनिवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 14 डिग्री दर्ज किया गया। रविवार को दिन का तापमान 28 डिग्री पर स्थिर रहा, जबकि रात का पारा 2 डिग्री गिरकर 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दिनभर हवा की रफ्तार सामान्य से कम रही, जिससे धूप का असर ज्यादा महसूस हुआ। आगे कैसा रहेगा मौसम फरवरी के तीसरे सप्ताह में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 15 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। बसंत ऋतु के आगमन के साथ शीतलहर का प्रभाव लगभग समाप्त हो जाएगा। आसमान साफ रहने की उम्मीद है और बारिश के कोई आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।



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पेंशन सत्यापन में राजसमंद प्रदेश में प्रथम, कलेक्टर ने कार्मिकों का किया सम्मान




भास्कर न्यूज |राजसमंद गरीब, बेसहारा एवं जरूरतमंद परिवारों को समय पर उनका अधिकार दिलाने के उद्देश्य से कलेक्टर अरुणकुमार हसीजा द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत शुक्रवार को जिला परिषद सभागार में समीक्षा बैठक हुई। बैठक के बाद सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं एवं पालनहार योजना के सत्यापन कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कार्मिकों का सम्मान किया गया। कलेक्टर ने बताया कि जिले ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं पालनहार योजना सत्यापन में प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो टीमवर्क और प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि हर पात्र नागरिक तक सरकारी सेवाओं की समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। दरअसल, जनवरी माह में जिला प्रशासन ने एक विशेष अभियान चलाते हुए पालनहार योजना, पेंशन सत्यापन एवं एनएफएसए के लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण करने का संकल्प लिया था। कलेक्टर हसीजा ने निर्देश दिए थे कि जिन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका है, उनका पालनहार सत्यापन 28 जनवरी तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। साथ ही वृद्ध, दिव्यांग एवं निराश्रित व्यक्तियों की पेंशन का सत्यापन समयबद्ध रूप से कर लाभ सुनिश्चित किया जाएं। निर्देशानुसार उपखंड अधिकारियों, विकास अधिकारियों एवं संबंधित विभागों ने निरंतर मॉनिटरिंग और समीक्षा के माध्यम से अभियान को गति दी। तहसील स्तर पर प्रगति की नियमित समीक्षा की गई, जिससे सभी लंबित प्रकरणों का समय पर निस्तारण संभव हो सका। इसी सामूहिक प्रयास के परिणामस्वरूप राजसमंद जिला राज्य में प्रथम स्थान पर रहा। कार्यक्रम में एडीएम नरेश बुनकर, जिला परिषद सीईओ बृजमोहन बैरवा सहित विभिन्न उपखंड अधिकारियों, विकास अधिकारियों, शिक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा नगर निकायों के अधिशाषी अधिकारियों को सम्मानित किया गया।



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कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वॉइस असिस्टेंट एप तैयार:अमेरिका में भारतीय प्रवासी इंजीनियर राकेश के निर्देशन में दुनिया का पहला स्मार्ट सहायक बनाया




अमेरिका में भारतीय प्रवासी इंजीनियर व उनकी टीम ने एक ऐसा एप तैयार किया है, जो डॉक्टर को दैनिक कामों में सहयोग करेगा। इसे मोबाइल से आसानी से चला सकेंगे। यह एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वॉइस असिस्टेंट है, जिसे‎ खासतौर पर डॉक्टर्स की सुविधा के लिए डिजाइन किया है। डॉक्टर केवल आवाज से आदेश‎ देंगे और यह असिस्टेंट रोगी का इतिहास, लक्षण और‎ प्रिस्क्रिप्शन लिखकर दे देगा। इसका‎ मुख्य उद्देश्य डॉक्टर्स का समय बचाना, थकान और ऊर्जा की खपत को कम करना, रोगियों के‎ लिए और भी सटीक और तेज निदान उपलब्ध कराने के साथ उपचार प्रक्रिया को सुगम और प्रभावी‎ बनाना है। इस तकनीक का लक्ष्य डॉक्टर्स का सहायक बनाना है, ना कि उनकी जगह लेना। टीम ने इसे AI‎ BONORx : Bhart Online Nidan Oshadhi Prescription यानी वॉइस ड्रिवन एआई असिस्टेंट नाम दिया है। इंजीनियर राकेश कुमार के निर्देशन में नौ सदस्यीय टीम में एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर के‎ प्रोफेसर डॉ. योगेश यादव, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कविता, टोंक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. लोकेंद्र शर्मा, डॉ. राजकुमार, इंजीनियर डॉ. जितेंद्र, डॉ. ‎धनराज, डॉ. गौरव, छात्र आदित्य सिंह का सहयोग रहा।‎ इंजीनियर राकेश कुमार बताते हैं कि तेज रफ्तार मेडिकल दुनिया में यह डॉक्टर्स का सहयोगी बनेगा। नोट्स लिखेगा, मेडिकल रिपोर्ट पढ़ने में मदद देगा इलाज में मदद मिलेगी आगे क्या… भविष्य की दिशा तय करेगा‎
यह तकनीक टेलीमेडिसिन, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और बड़े अस्पतालों में एक अभिन्न हिस्सा बन सकती है।‎ यह केवल बड़े कॉरपोरेट हॉस्पिटल तक सीमित नहीं रहे बल्कि हर डॉक्टर का डिजिटल सहयोगी बन सके।‎ विशेषता – यह बहुभाषी और मरीजों की अत्याधिक संख्या को ध्यान में‎ रखकर डिजाइन किया है। हिंदी, अंग्रेजी, क्षेत्रीय भाषाओं को समझने की क्षमता,‎ डॉक्टर मरीज से बात करते‑करते वॉइस के माध्यम से ही हिस्ट्री, नोट्स और प्रिस्क्रिप्शन‎ जेनरेट कर सकते हैं।‎ हाथ से लिखने या टाइप करने की आवश्यकता को न्यूनतम कर डॉक्यूमेंटेशन बोझ को घटाता‎ है।



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इन्वेस्टिगेशन:पूर्व सैनिकों के नाम पर 300 से ज्यादा फर्जी लोग बैंक, कैश वैन, कोर्ट में संभाल रहे सुरक्षा




उदयपुर के गोगुंदा निवासी चतरा पांचवीं पास हैं। कभी सेना में नौकरी नहीं की, लेकिन पूर्व सैनिकों के पुनर्वास के लिए बनी संस्था रेक्सो में पंजीकृत हैं। चतरा के पास CISF का आईडी कार्ड, पीपीओ नंबर, डिस्चार्ज बुक समेत तमाम कागज हैं। बेमला गांव के इंद्र सिंह किसान हैं। इंद्र को सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त दिखाया गया है। इनके पास भी सभी दस्तावेज हैं। पेंशन कार्ड पर सीआरपीएफ के महानिदेशक की ‘मुहर व हस्ताक्षर’ भी हैं। दरअसल, यह फर्जीवाड़ा भूतपूर्व सैनिक के तौर पर बैंक, कोर्ट व सरकारी दफ्तरों में मिलने वाली सुरक्षा गार्ड की नौकरी के लिए है। भास्कर के पास 150 लोगों के दस्तावेज हैं, जो फर्जी तरीके से भूतपूर्व सैनिक बनाए गए। उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा समेत कई जिलों के 300 लोगों को फर्जी तरीके से भूतपूर्व सैनिक बनाकर रेक्सो में रजिस्ट्रेशन करा दिया गया। इन लोगों ने 10 से 15 साल तक बैंक, डिपो, कोर्ट, रेलवे समेत संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा गार्ड की नौकरी भी कर ली। सबसे बड़ा सवाल है कि फर्जी दस्तावेजों पर रेक्सो में इनका रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ? फर्जीवाड़ा – आईडी कार्ड, पीपीओ नंबर, डिस्चार्ज बुक, पेंशन प्रमाण सहित सभी दस्तावेज फर्जी, दैनिक भास्कर के पास 150 से ज्यादा लोगों के दस्तावेज केस-1: चतरा, गोगुंदा
5वीं पास है, दस्तावेजों में दसवीं दिखाया। सिटी (कांस्टेबल), CISF से रिटायर्ड दिखा 8 साल सरकारी विभाग में नौकरी की। केस-2: इंद्र सिंह, बेमला
किसान है, लेकिन सिटी (कांस्टेबल), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल से सेवानिवृत्त दिखाया। 6 साल से सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहे। केस-3: चंपालाल, डिगली
निरक्षर, पूर्व में मजदूरी का कार्य। इनके पास जवान के फर्जी दस्तावेज, जिनसे 6 साल से लोक कला मंडल में नौकरी कर रहे हैं। 12 साल तक कैश वैन में नौकरी की, बंदूक का लाइसेंस भी पिता के नाम
वाजनी रोड, उदयपुर के रहने वाले माधव सिंह ने फर्जी तरीके से 12 साल तक बैंक की कैश वैन में गार्ड की नौकरी की। इनके पास CISF में हवलदार के फर्जी प्रमाणपत्र हैं। इनके पिता के नाम पर जारी बंदूक लाइसेंस पर ही रेक्सो में गार्ड का रजिस्ट्रेशन है। डिगली के रहने वाले चंपालाल निरक्षर हैं। इन्होंने पूर्व सैनिक बनकर 6 साल तक विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी की। वल्लभनगर के दूल्हे सिंह ने सेना में नौकरी नहीं की, लेकिन इनके पास राजपूत रेजिमेंट-17 के दस्तावेज हैं। 7 साल से बैंक व अन्य जगहों पर नौकरी कर चुके। इन सभी के पास सेना की यूनिट से लेकर PPO नंबर तक सब फर्जी हैं। किसी से भी गलती हो जाती है, जांच कर रहे हैं : एमडी
“हमने कोई गलती की है तो निकाले जाने वाले लोग हमारे खिलाफ रिपोर्ट करें। जिंदगी में किसी से भी गलती हो जाती है, क्या उसे सुधार नहीं सकते? अब जांच कर रहे हैं, जो गलत है, उसको निकाल रहे हैं।”
-हरीश खंगारोत, महाप्रबंधक (सिक्योरिटी), रेक्सो, राजस्थान घोषणा पत्र में लिखा- पूर्व सैनिक आते ही नौकरी छोड़ देंगे… क्या पहले पता था फर्जी है?
इन लोगों से रेक्सो में रजिस्ट्रेशन के समय घोषणा पत्र भरवाया गया, जिसमें साफ लिखा है कि कोई पूर्व सैनिक आते हैं, तो ये लोग अपने आप नौकरी छोड़ देंगे। इससे प्रतीत होता है कि इनके फर्जी कागज बनाने में रेक्सो अधिकारियों की मिलीभगत रही है।



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IMD Weather Update Today rain UP Rajasthan MP chhattisgarh snowfall Uttarakhand himachal jammu Kashmir


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भोपाल/लखनऊ/शिमला/देहरादून8 मिनट पहले

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देश के हिमालयी इलाकों में दो वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हैं। आज से दो दिन हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पहाड़ों पर बारिश-बर्फबारी के आसार हैं।

वहीं राजस्थान, एमपी, पंजाब-चंडीगढ़ में 17-18 फरवरी को हल्की बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से यानी, ग्वालियर-चंबल और सागर के 8 जिलों में अगले दो दिनों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।

वहीं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में दिन का तापमान 30°C पार हो चुका है। राजस्थान के बाड़मेर में शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री पर पहुंच गया। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर में पारा 32.9°C दर्ज किया गया।

उत्तराखंड के मुनस्यारी में पारा गिरकर -25°C तक पहुंच गया, जिससे यह प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान बना। इसके अलावा बद्रीनाथ में -16°C, गंगोत्री में -20°C, हर्षिल में -12°C और हेमकुंड में -11°C, केदारनाथ में -18°C और यमुनोत्री में -13°C तापमान दर्ज किया गया।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में रविवार को भद्रवाह-पठानकोट इंटर-स्टेट रोड पर एवलांच (हिमस्खलन) हो गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि एवलांच शाम करीब 5 बजे शहर से करीब 18 km दूर थांथेरा और गुलदांडा के बीच हुआ।

एवलांच के समय टूरिस्ट को ले जा रही 250 से ज्यादा गाड़ियां उस इलाके से गुजर रही थीं। इसमें लोकल वेंडर्स की कुछ दर्जन गाड़ियां फंस गई हैं। सड़क साफ करने के लिए लोगों और मशीनरी को लगाया गया है। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

अगले 2 दिन मौसम का हाल

17-18 फरवरी- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बर्फबारी की संभावना। वहीं राजस्थान, एमपी समेत पंजाब चंड़ीगढ़ में बारिश के आसार हैं।

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8 दोस्तों ने चाय छोड़ी, बना दिया गायों का अस्पताल:मुफ्त होता है गोवंशों का इलाज, कोरोना के दौर में यह आइडिया शुरू हुआ था




यह एक ऐसी कहानी है, जो एक कप चाय छोड़ने से शुरू होती है और गायों के लिए अस्पताल निर्माण तक पहुंच जाती है। इसे स्थानीय लोग अब जीवंत माता का मंदिर कहते हैं। वह कोरोना महामारी का दौर था। कोटा से करीब 50 किलोमीटर दूर सांगोद के छोटे से कस्बे में आठ दोस्त रोज शाम को चाय की दुकान पर जमा हुआ करते थे। महज 80 रुपए की वह चाय उनकी रोजमर्रा की खुशी थी। जब कोरोना महामारी का दौर खत्म हुआ तब उन्होंने फैसला किया कि हम अपनी चाय छोड़कर उन पैसों से किसी जरूरतमंद की मदद करेंगे। शुरू में लोगों की मदद की। फिर उन्होंने मिलकर पैसे इकट्ठा करने शुरू किए। कोई 10-20 रुपए, कोई 50, कोई 100… किसी दिन और भी ज्यादा। चाय छोड़कर इकट्ठा किया जा रहा पैसा अब हजारों में जुटाया जाने लगा। गायों के लिए आईसीयू और जनरल वार्ड भी बनाए गए हैं
यहां गायों के लिए आईसीयू और जनरल वार्ड भी हैं। जब कोई बीमार या घायल गोवंश यहां लाया जाता है तो पहले उसे आईसीयू में रखते हैं। हालत सुधरती है तब जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। रात के दो बजे भी कोई फोन आता है कि कहीं कोई गाय घायल पड़ी है। बहुत तकलीफ में है तो तुरंत गाड़ी निकल पड़ती है। जब गाय पूरी तरह स्वस्थ हो जाती है, तब उसे नगर पालिका गोशाला में भेजा जाता है।
-सुनील सुमन, इंचार्ज, कृष्ण दरबार गो सेवा संस्थान



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हरियाणवी ओलिंपियन सुमित ने राजस्थानी सोनिका संग रचाई गुपचुप शादी:ऋषिकेश में ₹1 में सगाई, बिना दहेज 7 फेरे लिए; जूते छिपाई में सालियों को दिए डेढ़ लाख




हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले भारतीय हॉकी ओलंपिक मेडलिस्ट सुमित कुमार और राजस्थान की रहने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी सोनिका टांडी ने गुपचुप तरीके से शादी रचा ली है। दोनों करीब आठ साल से एक दूसरे को जानते थे। परिवारों की आपसी सहमति से दोनों ने उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित द ऑर्चिड ऋषिवन रिसोर्ट में सात फेरे लिए। इस शादी में कुछ खास बातें भी रही। पहली ये कि यह शादी पूरी तरह बिना दहेज संपन्न हुई। सुमित ने सगाई में केवल 1 रुपया लिया। दूसरी ये कि बारात के स्वागत के दौरान रिबन कटाई और जूते छिपाई की रस्म निभाई गई। इन रस्मों में सुमित ने अपनी सालियों को करीब डेढ़ लाख रुपए दिए। तीसरी बात ये कि शादी के अगले दिन ही सुमित हरियाणा से दिल्ली और फिर बेंगलुरु पहुंचे, जहां 7 से 12 फरवरी तक कैंप में प्रैक्टिस की। इसके बाद 12 फरवरी की रात को हॉकी लीग की तैयारी के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना हो गए, जहां फरवरी के अंतिम सप्ताह में प्रैक्टिस मैच खेले जाने हैं। इस समारोह में कुल करीब 70 लोग शामिल हुए, जिनमें लड़के पक्ष से 25 और लड़की पक्ष से 45 सदस्य मौजूद रहे। शादी की खबर सामने आने के बाद खेल जगत में हैरानी और खुशी का माहौल है। दोनों को साथी खिलाड़ियों और नाते-रिश्तेदारों ने जीवन की इस नई पारी की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं है। सुमित-सोनिका की दोस्ती, प्रेम और शादी तक की कहानी… 6 फरवरी को विदाई, 7 फरवरी को मैदान में वापसी
5 फरवरी को फेरे लेने के बाद 6 फरवरी की शाम विदाई की रस्म निभाई गई। भाइयों ने पारंपरिक रीति से विदाई की। दुल्हन सोनिका को लेकर सुमित ऋषिकेश से सोनीपत स्थित अपने घर पहुंचे, जहां पारंपरिक गृह प्रवेश की रस्म निभाई गई। 7 फरवरी सुबह 3:00 बजे सुमित की फ्लाइट थी। वे दिल्ली से बेंगलुरु पहुंचे और 7 से 12 फरवरी तक कैंप में प्रैक्टिस की। इसके बाद 12 फरवरी की रात को हॉकी फ्री लीग की तैयारी के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना हो गए, जहां फरवरी के अंतिम सप्ताह में प्रैक्टिस मैच खेले जाने हैं। वहीं दूसरी ओर सोनिका ने दिल्ली में अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली है। बिना दहेज की शादी से दिया सामाजिक संदेश
इस विवाह की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सुमित के परिवार ने दान-दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया। पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि शादी बिना दहेज होगी। साधारण और गरीब परिवार से होने के बावजूद सुमित ने समाज को सकारात्मक संदेश देते हुए दहेज प्रथा के खिलाफ उदाहरण पेश किया। समारोह में सुमित के पिता प्रताप सिंह, भाई जय सिंह व उनका परिवार, भाई अमित और अन्य सदस्य मौजूद रहे। वहीं सोनिका के माता-पिता, भाई और रिश्तेदार भी शामिल हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माहौल उत्साहपूर्ण रहा।
कौन हैं ओलंपिक मेडलिस्ट हॉकी खिलाड़ी, 5 पॉइंट में जानिए… माता-पिता, भाइयों ने मजदूरी कर आगे बढ़ाया
सुमित कुमार सोनीपत जिले के गांव कुराड़ के रहने वाले हैं। उनका जन्म 20 दिसंबर 1996 को हुआ। मजदूर पिता प्रताप सिंह और माता दर्शना देवी के बेटे सुमित ने बचपन में आर्थिक तंगी का सामना किया। परिवार की स्थिति सामान्य नहीं थी, लेकिन माता-पिता और बड़े भाइयों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और आगे बढ़ने का मौका दिया। बड़े भाई जय सिंह और अमित ने खुद मजदूरी कर परिवार की जिम्मेदारी संभाली, ताकि सुमित खेल पर ध्यान दे सकें। 8 साल की उम्र में पहली बार पकड़ी हॉकी स्टिक
सिर्फ आठ साल की उम्र में बड़े भाई अमित सुमित को लेकर गांव के एचके वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की हॉकी अकादमी पहुंच गए। यहां पहली बार उन्होंन हॉकी स्टिक पकड़ी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआती दौर में वे घंटों अकेले मैदान में अभ्यास करते थे और अपने खेल को निखारने में जुटे रहते थे। हॉकी के लिए जूते खरीदने के लिए मजदूरी तक की
एक समय ऐसा था जब सुमित के पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे। जरूरत पड़ने पर उन्होंने खुद भी मजदूरी की। मां के निधन के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मां की याद में उनकी फोटो वाला लॉकेट पहनकर मैदान में उतरते रहे। कठिन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत बनाया। मेहनत के दम पर बनाई राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
कोच नरेश के मार्गदर्शन में उनका खेल तेजी से निखरा। स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बाद गुरुग्राम हॉस्टल के लिए ट्रायल हुआ, जहां उनका चयन हो गया। करीब तीन साल तक उन्होंने वहां प्रशिक्षण लिया। इसके बाद भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के उत्तर क्षेत्रीय केंद्र, बहालगढ़ में चयन हुआ, जहां से उनका राष्ट्रीय स्तर तक का सफर मजबूत हुआ। आज भारतीय हॉकी टीम के भरोसेमंद मिडफील्डर
सुमित कुमार भारतीय पुरुष हॉकी टीम के भरोसेमंद मिडफील्डर हैं। अपनी तेज खेल शैली, मजबूत डिफेंस और बेहतरीन बॉल कंट्रोल के लिए पहचाने जाने वाले सुमित ने जूनियर स्तर से लेकर सीनियर टीम तक लगातार प्रदर्शन के दम पर पहचान बनाई। वे 2016 जूनियर विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे और 2017 सुल्तान अजलन शाह कप में सीनियर टीम के लिए पदार्पण किया। अब जानिए कौन हैं सोनिका टांड़ी, जो सुमित की हमसफर बनीं… राजस्थान के छोटे से गांव गालड़ में जन्म
भारतीय महिला हॉकी टीम की दमदार मिडफील्डर सोनिका टांड़ी का जन्म 20 मार्च 1997 को राजस्थान के चूरू जिले के गालड़ गांव में हुआ। एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली सोनिका ने ग्रामीण परिवेश में ही अपने खेल करियर की शुरुआत की। पिता हरियाणा पुलिस में एसआई रह चुके
बाद में पिता की नौकरी के कारण परिवार हरियाणा के हिसार में आकर रहने लगा। उनके पिता दौलतराम टांडी हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रहे और ट्रैफिक इंचार्ज के पद से सेवानिवृत्त हुए। सोनिका के परिवार में दो बहनें मोनिका और दीपका हैं, जबकि एक छोटा भाई मोहित है। तीनों पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी मां संतोष गृहिणी हैं। 11 साल की उम्र में थामी हॉकी स्टिक
सोनिका ने मात्र 11 वर्ष की उम्र में छठी कक्षा के दौरान हॉकी स्टिक थामी। उस समय वे हिसार के पुलिस पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं। स्कूल टीम की ओर से खेलते हुए उनकी टीम ने साई की टीम को हराया, जिससे उन्हें नई पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने स्टेट और नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। बिना अकादमी के बनी इंटरनेशनल खिलाड़ी
ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली सोनिका ने कभी निजी कोचिंग या अकादमी जॉइन नहीं की। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के अधिकारियों की देखरेख में अभ्यास किया। उनके कोच बलराज सिंह सोढ़ी रहे। लगातार मेहनत और अनुशासन ने उन्हें इंटरनेशनल स्तर तक पहुंचाया। —————– ये खबर भी पढ़ें…. हरियाणवी ओलिंपियन पहलवान शादी के बंधन में बंधे, VIDEO:बहादुरगढ़ में पिता के दोस्त की बेटी संग 7 फेरे लिए; टीके में सिर्फ चांदी का सिक्का लिया झज्जर के रहने वाले ओलिंपियन पहलवान दीपक पूनिया मंगलवार रात शादी के बंधन में बंध गए। बहादुरगढ़ के हिल्टन रिजॉर्ट में उन्होंने अपने पिता के दोस्त की बेटी शिवानी संग सात फेरे लिए। इस दौरान दीपक ने क्रीम कलर की शेरवानी और शिवानी ने डार्क रेड कलर का लहंगा पहना था। दोनों ने ड्रेस एक ही डिजाइनर से तैयार करवाई। (पूरी खबर पढ़ें)



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पंजाबी सिंगर बब्बू मान के शो में हंगामा:लाइव टेलीकास्ट वाला कैमरा गिरा; SP की वॉर्निंग- 5 मिनट में शांत न हुए तो परमिशन कैंसिल




मोहाली में कबड्‌डी टूर्नामेंट में पंजाबी सिंगर बब्बू मान के खुले अखाड़े में भीड़ बेकाबू हो गई। सिंगर मान बार-बार फैंस को समझाते रहे लेकिन वह नहीं रुके। लाइव दिखा रहा कैमरा तक नीचे गिर गया। यह देख पंजाब पुलिस एक्शन में आ गई। मोहाली के SP ने माइक संभाल लिया। उन्होंने दो-टूक कहा कि अगर 5 मिनट में शांत न हुए तो प्रोग्राम बंद करा देंगे। सिंगर, पुलिस और टूर्नामेंट आयोजकों की मिन्नतों के बाद फैंस शांत हुए। मोहाली में ही कबड्‌डी टूर्नामेंट के दौरान कबड्‌डी प्लेयर राणा बलाचौरिया की हत्या के बाद से पुलिस सवालों के घेरे में है। हाईकोर्ट इस मामले में पंजाब के DGP गौरव यादव तक को तलब कर चुका है। जिसमें कड़ी फटकार भी लगाई। सिलसिलेवार ढंग से जानिए, कैसे मचा बवाल शो शुरू होते ही कैमरों को लेकर हूटिंग: मोहाली के गांव बल्लोमाजरा में कबड्‌डी टूर्नामेंट चल रहा था। शनिवार रात यहां बब्बू मान लाइव परफॉर्म कर रहे थे। इस दौरान फैंस ने हूटिंग की कि उन्हें स्टेज साफ नहीं दिख रही है। अभी शो शुरू ही हुआ था। यह जानकर सिंगर बब्बू मान ने फैंस की डिमांड पर लाइव टेलीकास्ट कर रहे कैमरों को सामने से हटवा दिया। उन्होंने कैमरामैन को कहा कि वह साइड से एंगल बनाए। इसके बाद बब्बू मान ने आधे घंटे तक परफॉर्म किया। अचानक फैंस बेकाबू हुए, सिंगर बोले- मुश्किल से परमिशन मिली: इसके बाद अचानक फैंस बेकाबू हो गए। एक-दूसरे से धक्कामुक्की होने लगी। इससे व्यवस्था बिगड़ने लगे। यह देखकर बब्बू मान ने कहा कि बड़ी मुश्किल से परमिशन मिली है। सभी शांति बनाएं रखें लेकिन फैंस नहीं माने। हालात हाथ से निकलते देखकर पुलिस अलर्ट हो गई। बब्बू मान को गाने से रोक दिया गया। SP ने माइक संभाला, चेतावनी दी
मोहाली के SP मनप्रीत सिंह ने माइक संभाल लिया। उन्होंने स्टेज के नीचे से ही फैंस को सीधी चेतावनी दी। SP ने कहा- यह मेरी आखिरी चेतावनी है। अगर 5 मिनट में सब शांत नहीं हुए तो प्रोग्राम की परमिशन तुरंत कैंसिल कर दी जाएगी। लॉ एंड ऑर्डर का मुद्दा आया तो मैं किसी को नहीं बख्शूंगा। मान ने कहा- शांत रहोगे, तभी गाऊंगा
इसके बाद बब्बू मान ने माइक संभालकर पुलिस अधिकारी को पंजाब की शान कहते हुए कहा कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। मान ने कहा कि SP हमारे बेहद खास हैं। उन्होंने मेरी बात मान ली है। अगर आप लोग अगले 20-24 मिनट शांति से रहे तो ही मैं आगे गाऊंगा। पुलिस की चेतावनी और बब्बू मान की अपील का फैंस पर असर पड़ा। वह शांत हो गए। जिसके बाद पुलिस की कड़ी हिदायतों के बाद मान ने प्रोग्राम शुरू किया। इसके बाद बब्बू मान ने गाना शुरू किया। जिसके बाद फैंस भी एंजॉय करते दिखे।



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मेरा काम मेरा सच:कॉस्ट्यूम में लोग शर्मिंदा करते थे, लेकिन मेरे लिए खेल सबकुछ था




मैं रोज 9 घंटे जिम में ट्रेनर का काम करती थी। 5’7 हाइट और 80 किलो वजन के साथ यह सफर आसान नहीं था। इससे पहले मैं घरों में पोछा-बर्तन करती थी। जिम में महिला ट्रेनर होने के कारण कई बार लोगों की मानसिकता का सामना करना पड़ा। कई बार गुंडे-बदमाश तक का सामना करना पड़ा। इन सब परिस्थितियों से मैं गुजरी हूं। पीरियड्स के दौरान भी घंटों फ्लोर पर खड़े रहना पड़ता था। जब मैंने बॉडी बिल्डिंग की प्रैक्टिस शुरू की तो ताने सुनने पड़े। ‘ये तो ट्रांसजेंडर बन गई’, ‘इसे शेविंग किट गिफ्ट कर दो’, ‘पता ही नहीं चलता पुरुष है या महिला।’ यह सब सुनकर बुरा लगता था। बॉडी बिल्डिंग के बाद शरीर में कई बदलाव आते हैं। हार्मोनल बदलाव से आवाज और चाल बदल जाती है, शरीर मर्दाना दिखने लगता है, कंधे चौड़े हो जाते हैं। सप्लीमेंट्स के कारण लड़कियों का ब्रेस्ट पार्ट लगभग खत्म हो जाता है और मसल्स उभरकर दिखते हैं। पीरियड तीन-चार साल तक मिस हो सकते हैं। इन बदलावों ने शुरुआत में मुझे भी परेशान किया। मेरी अगली चुनौती बॉडी बिल्डिंग का कॉस्ट्यूम (बिकनी) था। इस कारण मैंने कई दोस्त खो दिए। जब मैंने प्रतियोगिता में कॉस्ट्यूम पहनकर परफॉर्म किया तो एक मीडियाकर्मी ने कहा कि मैं राजस्थान का नाम खराब कर रही हूं। उस वक्त मुझे अपने कोच की बात याद रही। स्टेज पर तीन मिनट के लिए खड़े हों तो भूल जाएं कि सामने कौन है। भीड़ में परिवार ही क्यों न बैठा हो, यह सिर्फ एक गेम है। जब कॉस्ट्यूम में भारत का झंडा लेकर स्टेज पर खड़ी थी, तब भी खराब कमेंट किए गए। शुरुआत में ऐसे कमेंट तनाव देते थे, लेकिन दर्शकों के प्यार ने हौसला भी दिया। 2022 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में मैंने गोल्ड जीतकर सबकी बोलती बंद कर दी। प्रतियोगिता से एक महीने पहले अनाज पूरी तरह छोड़ना पड़ता है। उबला खाना महंगा भी होता है और इतना बेस्वाद कि कई बार उसे मिक्सर में ब्लेंड कर पीना पड़ता था। अगर एक मील में कुछ अतिरिक्त खा लिया तो तैयारी सात दिन पीछे चली जाती थी। प्रतियोगिता से 15 दिन पहले नमक छोड़ देते हैं और 30 घंटे पहले पानी पीना भी बंद कर देते हैं। दवा लेकर शरीर से पानी निकाला जाता है ताकि मसल्स की विजिबिलिटी बेहतर दिखे। दो दिन में एक संतरा या नींबू की कुछ बूंदों से काम चलाना पड़ता है। परफॉर्मेंस से पहले बड़े हॉल में लड़कियां और लड़के खुले में कॉस्ट्यूम में घंटों अपनी बारी का इंतजार करते हैं। शाइनिंग के लिए लगाई जाने वाली प्रो-टेन क्रीम ठंड को और बढ़ा देती है। स्टेज पर बैक, शोल्डर, बायसेप और ट्राइसेप दिखाने होते हैं। मेडल इस बात पर निर्भर करते हैं कि किसकी मसल्स विजिबिलिटी बेहतर है। महिलाओं में टेस्टोस्टेरॉन नहीं होता, इसलिए उन्हें अच्छा वर्कआउट, सख्त डाइट और सप्लीमेंट्स लेने पड़ते हैं। पुरुषों की तुलना में वे चार गुना मेहनत करती हैं। इस खेल में महिलाओं को लेकर नजरिए में बदलाव की अब भी जरूरत है।
-जैसा पूजा शर्मा को बताया



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काम चोरी, पर प्रभु में आस्था पूरी:बाइक उठाने से पहले ईश्वर को याद किया, फिर लेकर भाग गया




सांगानेर इलाके में गोशाला के सामने से चोरी हुई बाइक के मामले में सीसीटीवी फुटेज ने चौंकाने वाला दृश्य दिखा है। आरोपी वारदात से पहले हाथ में समोसा लेकर मौके पर पहुंचा। आराम से खड़ा होकर समोसा खाया, करीब 4 मिनट तक आसपास खड़ी गाड़ियों और लोगों की गतिविधि देखता रहा। मौका मिलते ही उसने बाइक का लॉक तोड़ा, फिर स्टार्ट किया और फरार होने से पहले एक बार ऊपर देखा- मानो भगवान को याद कर रहा हो। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पहले रैकी की और फिर वारदात को अंजाम दिया। फुटेज में उसकी हर गतिविधि रिकॉर्ड हुई है। फागी निवासी हेनी मधानी ने सांगानेर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। वे गोशाला स्थित शोरूम में सामान खरीदने आए थे। वापस लौटे तो बाइक गायब थी। मधानी एक बैंक के लिए मोबाइल फाइनेंस का काम करते हैं।



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